Physical Education: 60 MCQs with Answers
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0%Q41. एक संतुलित अथवा निरन्तर आन्तरिक अवस्था को बनाये रखने को कहा जाता है :
Right Answer: समस्थिति
समस्थिति अर्थात् होमियोस्टैसिस शरीर की वह क्षमता है जिससे वह बाह्य परिस्थितियों के बदलने पर भी अपने आन्तरिक वातावरण को एक संतुलित एवं अपेक्षाकृत स्थिर अवस्था में बनाए रखता है। इस पद का प्रयोग वाल्टर कैनन ने किया। शरीर का ताप, रक्त का पी-एच, रक्त शर्करा, जल एवं लवण संतुलन तथा रक्तचाप — सभी ऋणात्मक प्रतिपुष्टि तंत्र द्वारा निर्धारित सीमा में रखे जाते हैं। व्यायाम के दौरान ताप बढ़ने पर स्वेदन एवं त्वचीय रक्तवाहिनियों का विस्फारण इसी का उदाहरण है। समस्थिति भंग होना ही रोग की अवस्था है।
Q42. सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम कब प्रारम्भ हुआ था ?
Right Answer: 1985
सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम भारत में 1985 में आरम्भ हुआ। यह 1978 के विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम का ही विस्तारित एवं संशोधित रूप था, जिसका लक्ष्य टीकाकरण को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाना तथा 1990 तक सार्वभौमिक कवरेज प्राप्त करना था। इसके अन्तर्गत आरम्भ में छह जानलेवा रोगों — क्षय, गलघोंटू, कुकुर खाँसी, टिटनेस, पोलियो तथा खसरा — से बचाव के टीके निःशुल्क दिए जाते थे। बाद में हेपेटाइटिस बी, रोटावायरस, न्यूमोकोकल तथा रुबेला के टीके भी जोड़े गए। यह विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों में गिना जाता है।
Q43. आई० ओ० सी० के अध्यक्ष के रूप में पियरे डी कुबर्टिन का कार्यकाल क्या था ?
Right Answer: 1896 – 1925
आधुनिक ओलम्पिक खेलों के जनक बैरन पियरे डी कुबर्टिन अन्तर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति के अध्यक्ष 1896 से 1925 तक रहे। समिति की स्थापना 1894 में पेरिस में हुई थी और उसके प्रथम अध्यक्ष ग्रीस के डेमेट्रियस विकेलास थे, जिनके बाद 1896 के एथेंस ओलम्पिक के उपरान्त कुबर्टिन ने अध्यक्षता सँभाली। उन्होंने ओलम्पिक ध्वज के पाँच वलय, ओलम्पिक शपथ तथा ‘सिटियस, अल्टियस, फोर्टियस’ आदर्श वाक्य को अपनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। 1925 में उनके बाद बेल्जियम के हेनरी डी बैले-लातूर अध्यक्ष बने।
Q44. हमारे 46 गुणसूत्रों में अरबों कार्बनिक आधार जोडे़ होते हैं, वह कितने जीन्स को कूटबद्ध करते हैं ?
Right Answer: 30,000 से अधिक
मनुष्य की प्रत्येक कायिक कोशिका में 23 जोड़े अर्थात् कुल 46 गुणसूत्र होते हैं, जिनमें डी-एन-ए के लगभग तीन अरब क्षार-युग्म निहित रहते हैं। परम्परागत रूप से यह माना जाता रहा है कि ये तीस हजार से अधिक जीन्स को कूटबद्ध करते हैं। मानव जीनोम परियोजना, जो 1990 में आरम्भ होकर 2003 में पूर्ण हुई, ने इस पूरे अनुक्रम का मानचित्रण किया। ध्यातव्य है कि जीनोम का बहुत छोटा भाग ही प्रोटीन-कूटलेखन करता है; शेष नियामक अनुक्रम तथा अकूटलेखी क्षेत्र हैं। जीन्स ही शारीरिक गठन, क्षमता एवं रोग-प्रवृत्ति निर्धारित करते हैं।
Q45. यदि किसी फुटबॉल खिलाड़ी का पैर मजबूती से जम गया हो और शरीर अचानक विपरीत दिशा में घूम जाए, तो इससे किस प्रकार का फ्रेक्चर हो सकता है ?
Right Answer: घुमावदार अस्थिभंग
जब फुटबॉल खिलाड़ी का पैर जमीन अथवा जूते के कारण मजबूती से जम जाए और शरीर अचानक विपरीत दिशा में घूम जाए, तब अस्थि पर मरोड़ बल लगता है और घुमावदार अर्थात् स्पाइरल अस्थिभंग होता है। इसमें भंग रेखा अस्थि के चारों ओर पेचदार रूप में घूमती हुई चलती है। यह प्रायः टिबिया अथवा फीमर जैसी लम्बी अस्थियों में होता है और इसमें आसपास के कोमल ऊतक भी क्षतिग्रस्त होते हैं। इसके विपरीत अनुप्रस्थ अस्थिभंग सीधे प्रहार से होता है, लम्बवत भंग अक्ष के समानान्तर होता है तथा विखण्डित भंग में अस्थि तीन या अधिक टुकड़ों में टूट जाती है।
Q46. अवधिकालीनता के किस काल में प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ी की मनोवैज्ञानिक तैयारी पर विशेष बल दिया जाता है ?
Right Answer: तैयारी काल का द्वितीय चरण
अवधिकालीनता में तैयारी काल के द्वितीय चरण को विशिष्ट तैयारी चरण कहा जाता है। इसमें प्रशिक्षण भार का आयतन घटाकर तीव्रता बढ़ा दी जाती है, प्रतियोगिता-विशिष्ट तकनीक एवं रणनीति पर कार्य होता है और इसी चरण में खिलाड़ी की मनोवैज्ञानिक तैयारी पर विशेष बल दिया जाता है। इसके अन्तर्गत आत्मविश्वास, एकाग्रता, प्रतिस्पर्धा-चिन्ता का प्रबंधन, मानसिक प्रतिमान-निर्माण तथा लक्ष्य-निर्धारण की तकनीकें सिखाई जाती हैं, ताकि खिलाड़ी प्रतियोगिता के दबाव में अपना सर्वश्रेष्ठ दे सके। अभ्यास प्रतियोगिताएँ भी इसी चरण में कराई जाती हैं।
Q47. क्षय रोग की उष्मायन अवधि है :
Right Answer: 4-12 सप्ताह
क्षय रोग माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक जीवाणु से होने वाला संक्रामक रोग है, जो मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है और वायु में फैली बूँदों के माध्यम से संक्रमित व्यक्ति के खाँसने या छींकने से फैलता है। इसकी उष्मायन अवधि सामान्यतः चार से बारह सप्ताह मानी जाती है, अर्थात् संक्रमण के बाद इतने समय में प्राथमिक घाव विकसित होकर ट्यूबरकुलिन परीक्षण धनात्मक हो जाता है। लगातार दो सप्ताह से अधिक खाँसी, सान्ध्य ज्वर, रात्रि में पसीना, भूख न लगना तथा भार घटना इसके प्रमुख लक्षण हैं। बी-सी-जी टीका तथा डॉट्स उपचार इसके नियंत्रण के प्रमुख उपाय हैं।
Q48. महिला ऐथलीटों ने ऐथलेटिक्स में अपना ओलम्पिक पदार्पण कब किया था ?
Right Answer: 1928
महिला ऐथलीटों ने एथलेटिक्स में अपना ओलम्पिक पदार्पण 1928 के एम्स्टर्डम ओलम्पिक में किया। यद्यपि महिलाओं ने 1900 के पेरिस ओलम्पिक से ही टेनिस एवं गोल्फ जैसी स्पर्धाओं में भाग लेना आरम्भ कर दिया था, किन्तु ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धाओं में उन्हें 1928 में ही प्रवेश मिला, जहाँ 100 मीटर, 800 मीटर, 4 गुणा 100 मीटर रिले, ऊँची कूद तथा डिस्कस थ्रो पाँच स्पर्धाएँ रखी गईं। 800 मीटर दौड़ के बाद कुछ धाविकाओं के थककर गिरने की अतिरंजित रिपोर्टों के कारण यह स्पर्धा 1960 तक हटा दी गई थी।
Q49. ए० सी० एल० चोट के पुनर्स्थापन के दौरान निम्नलिखित में से कौन-सा रक्त संचार को सुगम बनाने के लिए आवश्यक होता है ?
Right Answer: विद्युत पेशी उत्प्रेरक
अग्र क्रूसिएट स्नायु अर्थात् ए-सी-एल की चोट के बाद पुनर्वास के आरम्भिक चरण में घुटने को स्थिर रखना पड़ता है, जिससे क्वाड्रिसेप्स पेशी शीघ्र क्षीण होने लगती है और उस क्षेत्र में रक्त संचार घट जाता है। विद्युत पेशी उत्प्रेरक अर्थात् इलेक्ट्रिकल मसल स्टिमुलेटर इसी समस्या का समाधान करता है — यह हल्के विद्युत आवेगों से पेशी में लयबद्ध संकुचन उत्पन्न करता है, जिससे रक्त संचार सुगम होता है, सूजन घटती है और पेशी की क्षीणता रुकती है। पराध्वनि गहरी ऊष्मा देकर ऊतक-मरम्मत में सहायक होती है और आर-आई-सी-ई तात्कालिक प्राथमिक उपचार है।
Q50. कौन-सी दौड़ और चाल स्पर्धाओं में आयोजक खिलाड़ियों को पानी और स्पंज उपलब्ध करा सकते हैं ?
Right Answer: 5000 मीटर अथवा अधिक
विश्व एथलेटिक्स के तकनीकी नियमों के अनुसार ट्रैक की उन सभी दौड़ एवं चाल स्पर्धाओं में, जो 5000 मीटर अथवा उससे अधिक दूरी की हों, आयोजक खिलाड़ियों को पानी तथा स्पंजिंग की सुविधा उपलब्ध करा सकते हैं। इसका उद्देश्य लम्बी दूरी की स्पर्धाओं में, विशेषतः गरम एवं आर्द्र मौसम में, निर्जलीकरण तथा ऊष्माघात से बचाव करना है। सड़क पर होने वाली दौड़ों के लिए नियम और विस्तृत हैं, जहाँ प्रत्येक पाँच किलोमीटर पर जलपान एवं जल-स्पंजिंग केन्द्र अनिवार्य रूप से रखे जाते हैं तथा प्रारम्भ एवं समापन बिन्दु पर भी जल उपलब्ध कराया जाता है।