Physical Education - Sports Psychology and Motor Learning: 9 MCQs with Answers
Physical Education- Sports Psychology and Motor Learning
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0%Q1. क्रेशमर का ऐथलेटिक प्रकार किस रोग के प्रति संवेदनशील होता है ?
Right Answer: मिर्गी
Explanation:
जर्मन मनोचिकित्सक अर्न्स्ट क्रेशमर ने शारीरिक गठन के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया और उसे मानसिक रोगों से जोड़ा। उनके अनुसार पिकनिक अर्थात् गोल-मटोल शरीर वाले व्यक्ति उन्माद-अवसाद अर्थात् बाइपोलर विकार के प्रति प्रवण होते हैं। एस्थेनिक अथवा लेप्टोसोम अर्थात् दुबले-लम्बे व्यक्ति सिजोफ्रेनिया के प्रति संवेदनशील माने गए। ऐथलेटिक प्रकार, जिनका शरीर पेशीयुक्त, चौड़े कंधों वाला एवं सुगठित होता है, मिर्गी के प्रति संवेदनशील बताए गए। चौथा डिसप्लास्टिक प्रकार असामान्य एवं मिश्रित गठन वाला होता है। शारीरिक शिक्षा में यह वर्गीकरण खेल-चयन तथा खिलाड़ी के स्वभाव को समझने की दृष्टि से पढ़ाया जाता है।
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Q2. ‘‘जब कोई संवहन इकाई संवहन के लिये तैयार होती है, तब उसके लिए संवहन करना संतोषप्रद होता है; तैयार न होने पर संवहन करना असन्तोषप्रद होता है; और तैयार होने पर संवहन न करना भी खिजाने वाला होता है।’’ थॉर्नडाइक ने यह अधिगम के किस नियम के लिए कहा ?
Right Answer: तत्परता का नियम
Explanation:
यह कथन एडवर्ड एल० थॉर्नडाइक के तत्परता के नियम की मूल परिभाषा है। इसके अनुसार अधिगम तभी प्रभावी होता है जब सीखने वाला शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से उसके लिए तैयार हो। तत्पर अवस्था में कार्य करना सन्तोष देता है, अतत्पर अवस्था में कार्य करना विरक्ति उत्पन्न करता है और तत्पर होते हुए भी कार्य न कर पाना खीझ पैदा करता है। शिक्षक के लिए इसका निहितार्थ यह है कि वह पहले रुचि एवं अभिप्रेरणा जगाए। थॉर्नडाइक के अन्य दो मुख्य नियम अभ्यास तथा प्रभाव के हैं।
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Q3. निम्नलिखित में से कौन-सी अधिगम के त्रुटि एवं प्रयास के सिद्धान्त के रूप में नहीं जानी जाती है ?
Right Answer: अनुबन्ध अनुक्रिया सिद्धान्त
Explanation:
थॉर्नडाइक के त्रुटि एवं प्रयास सिद्धान्त को अनेक नामों से जाना जाता है। इसे उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धान्त कहा जाता है, क्योंकि इसमें उद्दीपक तथा अनुक्रिया के बीच सम्बन्ध स्थापित होता है। इसे अधिगम का बन्ध सिद्धान्त भी कहते हैं, क्योंकि यह सम्बन्ध एक तंत्रिकीय बन्ध के रूप में दृढ़ होता जाता है, और इसी कारण इसे संबंधवाद का सिद्धान्त भी कहा जाता है। इसके विपरीत अनुबन्ध अनुक्रिया सिद्धान्त इवान पावलोव के शास्त्रीय अनुबन्धन से सम्बन्धित है, जिसमें प्रयास एवं त्रुटि की कोई भूमिका नहीं होती।
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Q4. शास्त्रीय अनुकूलन में अनुकूलित उद्दीपन के लिए सीखी गई प्रतिक्रिया को कहा जाता है :
Right Answer: अनुबन्ध प्रतिक्रिया
Explanation:
इवान पावलोव के शास्त्रीय अनुबन्धन में चार तत्व होते हैं। भोजन जैसा स्वाभाविक उद्दीपक अननुकूलित उद्दीपक कहलाता है और उसके प्रति स्वतः होने वाली लार-स्रावण जैसी प्रतिक्रिया अननुकूलित प्रतिक्रिया। घण्टी जैसा तटस्थ उद्दीपक बार-बार भोजन के साथ प्रस्तुत किए जाने पर अनुकूलित उद्दीपक बन जाता है। तब केवल घण्टी सुनकर होने वाला लार-स्रावण सीखी हुई प्रतिक्रिया है, जिसे अनुबन्ध अर्थात् अनुकूलित प्रतिक्रिया कहा जाता है। इसी सिद्धांत से विलोपन, स्वतः पुनरागमन, सामान्यीकरण तथा विभेदन जैसी परिघटनाएँ समझी जाती हैं।
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Q5. स्वाद से विमुखता अधिगम के किस सिद्धान्त से जुड़ी हुई है ?
Right Answer: शास्त्रीय अनुबन्धन सिद्धान्त
Explanation:
स्वाद से विमुखता अर्थात् टेस्ट एवर्जन शास्त्रीय अनुबन्धन का ही एक विशिष्ट रूप है, जिसे जॉन गार्सिया ने प्रयोगों द्वारा प्रमाणित किया, इसीलिए इसे गार्सिया प्रभाव भी कहा जाता है। इसमें कोई नया स्वाद तटस्थ उद्दीपक की भूमिका निभाता है और यदि उसे खाने के कई घण्टे बाद भी जी मिचलाने अथवा उल्टी का अनुभव हो जाए, तो व्यक्ति उस स्वाद से स्थायी विरक्ति विकसित कर लेता है। इसकी विशेषता यह है कि यह एक ही बार में सीख लिया जाता है और उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया के बीच लम्बा अन्तराल होते हुए भी बन जाता है, जो जैविक रूप से उत्तरजीविता के लिए उपयोगी है।
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Q6. अन्तःदृष्टि द्वारा अधिगम का सिद्धान्त इस रूप में भी जाना जाता है :
Right Answer: अधिगम का समग्रकृति सिद्धान्त
Explanation:
अन्तःदृष्टि द्वारा अधिगम का सिद्धान्त गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों — वर्दीमर, कोफ्का तथा कोहलर — की देन है और इसे अधिगम का समग्रकृति अर्थात् गेस्टाल्ट सिद्धान्त भी कहा जाता है। ‘गेस्टाल्ट’ जर्मन शब्द है जिसका अर्थ है पूर्ण आकृति या समग्र रूप। इस सिद्धान्त के अनुसार सीखना अंगों के क्रमिक जोड़ से नहीं, बल्कि सम्पूर्ण परिस्थिति के पुनर्गठन तथा उसमें निहित सम्बन्धों की अचानक समझ से होता है। कोहलर ने चिम्पैंजी सुल्तान पर प्रयोग कर इसे प्रमाणित किया। खेलों में रणनीति सीखने में यह सिद्धान्त विशेष उपयोगी है।
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Q7. वह प्रक्रिया जिसके द्वारा किसी व्यवहार का अवलोकन और अनुकरण किया जाता है, है :
Right Answer: प्रतिरूपण
Explanation:
प्रतिरूपण अर्थात् मॉडलिंग वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति किसी अन्य के व्यवहार का अवलोकन कर उसका अनुकरण करता है और इस प्रकार बिना स्वयं प्रयास-त्रुटि किए नया कौशल सीख लेता है। अल्बर्ट बंडूरा ने इसे सामाजिक अधिगम सिद्धांत का केन्द्र बनाया और चार चरण बताए — ध्यान, धारण, प्रतिकृति तथा अभिप्रेरणा। शारीरिक शिक्षा में यह अत्यन्त उपयोगी है, क्योंकि शिक्षक का सही प्रदर्शन ही विद्यार्थी के लिए प्रतिमान बनता है। इसके विपरीत गढ़ना अर्थात् शेपिंग क्रियाप्रसूत अनुबंधन की तकनीक है, जिसमें लक्ष्य-व्यवहार के क्रमिक सन्निकटनों को पुरस्कृत किया जाता है।
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Q8. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए :
सूची A (नेतृत्वशीलता)
(A) प्रजातान्त्रिक नेतृत्व
(B) रूपान्तरण नेतृत्व
(C) लेसेज-फेयर नेतृत्व
(D) दूरदर्शी नेतृत्व
सूची B (विशेषताएँ)
(i) भविष्य व दीर्घकालिक लक्ष्यों पर नजर
(ii) कर्मचारियों को अधिकार देना
(iii) नेता प्रत्येक सदस्य की राय के आधार पर निर्णय लेता है
(iv) संगठन, समूह, स्वयं एवं अन्य में परिवर्तन की पहल करना
Right Answer: A-iii, B-iv, C-ii, D-i
Explanation:
प्रजातान्त्रिक नेतृत्व में नेता समूह के प्रत्येक सदस्य की राय लेकर सामूहिक विचार-विमर्श के आधार पर निर्णय करता है, जिससे सहभागिता एवं मनोबल बढ़ता है। रूपान्तरण नेतृत्व संगठन, समूह, स्वयं तथा अनुयायियों में गहरे परिवर्तन की पहल करता है और सदस्यों को अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर कार्य करने को प्रेरित करता है। लेसेज-फेयर अर्थात् मुक्त नेतृत्व में नेता न्यूनतम हस्तक्षेप करता है और कर्मचारियों को स्वयं निर्णय लेने का अधिकार सौंप देता है। दूरदर्शी नेतृत्व की दृष्टि भविष्य तथा दीर्घकालिक लक्ष्यों पर टिकी रहती है।
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Q9. किसने मनोरंजन के अन्तर्गत करना, बनाना, प्राप्त करना और सीखना सम्मिलित किया ?
Right Answer: हचिन्सन
Explanation:
मनोरंजन की परिभाषा देते हुए हचिन्सन ने उसके अन्तर्गत करना, बनाना, प्राप्त करना तथा सीखना — इन चारों प्रकार की क्रियाओं को सम्मिलित किया। उनके अनुसार मनोरंजन अवकाश के समय स्वेच्छा से की जाने वाली वह सार्थक क्रिया है जो व्यक्ति को तत्काल सन्तुष्टि देती है और साथ ही उसके व्यक्तित्व का विकास भी करती है। ‘करना’ में खेल एवं शारीरिक क्रियाएँ, ‘बनाना’ में शिल्प एवं सृजनात्मक कार्य, ‘प्राप्त करना’ में संग्रह करने जैसे शौक तथा ‘सीखना’ में अध्ययन एवं नई कुशलताएँ अर्जित करना आता है। जी० टी० डब्ल्यू० पैट्रिक ने मनोरंजन का विश्रान्ति सिद्धांत दिया।
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