Physical Education - Sports Training and Periodization: 8 MCQs with Answers
Physical Education- Sports Training and Periodization
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0%Q1. निम्नलिखित में से कौन-से कारक सहनशीलता को निर्धारित करते हैं ?
(i) संधि की शरीर रचनात्मक संरचना
(ii) ऑक्सीजन अवशोषण
(iii) ऊर्जा भंडार
(iv) संधि के अस्थिबंधक
Right Answer: केवल (ii) और (iii) सही हैं।
Explanation:
सहनशीलता किसी क्रिया को थकान के बावजूद लम्बे समय तक जारी रखने की क्षमता है और वह मुख्यतः शरीर की ऊर्जा-आपूर्ति प्रणालियों पर निर्भर करती है। इसे निर्धारित करने वाले प्रमुख कारक हैं — ऑक्सीजन अवशोषण अर्थात् अधिकतम ऑक्सीजन ग्रहण क्षमता, जो हृदय, फेफड़ों एवं रक्त की दक्षता से तय होती है; तथा शरीर में संचित ऊर्जा भंडार, विशेषतः पेशीय ग्लाइकोजन एवं वसा। इनके अतिरिक्त पेशी तन्तुओं की संरचना, गति की तकनीक तथा मानसिक दृढ़ता भी योगदान देती है। संधि की शरीर रचनात्मक संरचना एवं अस्थिबंधक तो लचक को निर्धारित करते हैं, सहनशीलता को नहीं।
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Q2. निम्नलिखित में से कौन-से अवधिकालीनता के तैयारी काल के प्रथम चरण के उद्देश्य हैं ?
(i) पूर्व प्रशिक्षण अवस्था को पुनः प्राप्त करना।
(ii) उन कारकों का विकास करना जिन पर प्रदर्शन प्रत्यक्ष रूप से निर्भर करता है।
(iii) प्रतियोगिता काल के लिए खिलाड़ी को तैयार करना।
(iv) तैयारी और प्रतियोगिता काल के अगले चरण में उच्च प्रशिक्षण भार के लिए खिलाड़ी को तैयार करना।
Right Answer: केवल (i) और (iv) सही हैं।
Explanation:
अवधिकालीनता में तैयारी काल के प्रथम चरण को सामान्य तैयारी चरण कहा जाता है। संक्रमण काल की विश्रामपूर्ण अवधि के बाद खिलाड़ी की कार्यक्षमता गिर चुकी होती है, अतः इस चरण का पहला उद्देश्य पूर्व प्रशिक्षण अवस्था को पुनः प्राप्त करना है। दूसरा उद्देश्य उसके शरीर को इतना सुदृढ़ बनाना है कि वह आगे आने वाले तैयारी एवं प्रतियोगिता काल के उच्च प्रशिक्षण भार को सहन कर सके। इसमें भार का आयतन अधिक तथा तीव्रता कम रखी जाती है और सामान्य व्यायाम प्रधान रहते हैं। प्रदर्शन-विशिष्ट कारकों का विकास द्वितीय चरण में होता है।
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Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा प्रतिक्रियात्मक विधि से विकसित किया जा सकता है ?
Right Answer: अधिकतम शक्ति
Explanation:
प्रतिक्रियात्मक विधि, जिसे प्लायोमेट्रिक विधि भी कहा जाता है, अधिकतम शक्ति के विकास की एक प्रमुख विधि है। इसमें पेशी पहले तीव्र गति से खिंचती है और तत्काल संकुचित होती है, जिससे प्रसार-संकुचन चक्र सक्रिय होकर सामान्य से अधिक बल उत्पन्न करता है। गहराई से कूद, बाधाओं पर उछाल तथा मेडिसिन बॉल फेंक इसके प्रमुख अभ्यास हैं। यह विधि तंत्रिका-पेशीय समन्वय तथा गतिक इकाइयों की भर्ती को बढ़ाती है, इसीलिए यह विशेषतः विस्फोटक शक्ति में सुधार लाती है। इसे केवल प्रशिक्षित खिलाड़ियों पर ही लागू करना चाहिए, अन्यथा चोट का जोखिम रहता है।
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Q4. मूलभूत मीसो चक्र प्राथमिक रूप से किस काल में उपयोग में लिया जाता है ?
Right Answer: तैयारी काल
Explanation:
मीसो चक्र प्रशिक्षण की मध्यम अवधि की इकाई है, जो सामान्यतः तीन से छह सप्ताह तक चलती है और अनेक माइक्रो चक्रों से मिलकर बनती है। मूलभूत अर्थात् बेसिक मीसो चक्र का उपयोग प्राथमिक रूप से तैयारी काल में किया जाता है, क्योंकि इसका उद्देश्य खिलाड़ी की सामान्य एवं विशिष्ट कार्यक्षमता का आधार तैयार करना, गति-योग्यताओं का विकास करना तथा तकनीक को दृढ़ करना है। इसमें प्रशिक्षण भार का आयतन अधिक रखा जाता है। इसके विपरीत प्रतियोगिता काल में प्रतियोगिता एवं तनुकरण मीसो चक्र प्रयुक्त होते हैं।
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Q5. ‘फार्टलेक प्रशिक्षण’ सर्वप्रथम अपनाया गया था :
Right Answer: स्वीडन में
Explanation:
फार्टलेक प्रशिक्षण सर्वप्रथम स्वीडन में अपनाया गया और यह स्वीडी शब्द है जिसका अर्थ है ‘गति का खेल’। इसे 1930 के दशक में स्वीडी कोच गोस्टा होल्मर ने विकसित किया। इसमें खिलाड़ी प्राकृतिक परिवेश — जंगल, पगडंडी, चढ़ाई-उतार — में दौड़ते हुए अपनी गति स्वयं घटाता-बढ़ाता रहता है; कभी तेज दौड़, कभी सामान्य जॉग और कभी चलना। इससे वायवीय एवं अवायवीय दोनों प्रणालियाँ एक साथ विकसित होती हैं और एकरसता भी नहीं आती। यह मुख्यतः सहनशीलता के विकास की विधि है और अन्तराल प्रशिक्षण की तुलना में कम औपचारिक होती है।
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Q6. निम्नलिखित में से शक्ति को निर्धारित करने वाले कौन-से कारक हैं ?
(i) संधि की शरीर रचनात्मक संरचना
(ii) पेशीय क्रॉस सेक्शन
(iii) ऊर्जा आपूर्ति
(iv) संधि के अस्थि बंधक
Right Answer: केवल ii और iii सही हैं।
Explanation:
शक्ति किसी प्रतिरोध पर विजय पाने अथवा उसका सामना करने की पेशीय क्षमता है और इसे निर्धारित करने वाले प्रमुख कारक हैं — पेशीय क्रॉस सेक्शन, अर्थात् पेशी की अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, जो जितना अधिक होगा उत्पन्न बल भी उतना अधिक होगा; तथा ऊर्जा आपूर्ति, विशेषतः पेशी में संचित ए-टी-पी एवं क्रिएटिन फॉस्फेट। इनके साथ पेशी की संरचना अर्थात् श्वेत तन्तुओं का अनुपात, अन्तः-पेशीय एवं अन्तर-पेशीय समन्वय तथा मनोवैज्ञानिक कारक भी योगदान देते हैं। संधि की संरचना एवं अस्थिबंधक तो लचक को प्रभावित करते हैं।
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Q7. अवधिकालीनता के किस काल में प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ी की मनोवैज्ञानिक तैयारी पर विशेष बल दिया जाता है ?
Right Answer: तैयारी काल का द्वितीय चरण
Explanation:
अवधिकालीनता में तैयारी काल के द्वितीय चरण को विशिष्ट तैयारी चरण कहा जाता है। इसमें प्रशिक्षण भार का आयतन घटाकर तीव्रता बढ़ा दी जाती है, प्रतियोगिता-विशिष्ट तकनीक एवं रणनीति पर कार्य होता है और इसी चरण में खिलाड़ी की मनोवैज्ञानिक तैयारी पर विशेष बल दिया जाता है। इसके अन्तर्गत आत्मविश्वास, एकाग्रता, प्रतिस्पर्धा-चिन्ता का प्रबंधन, मानसिक प्रतिमान-निर्माण तथा लक्ष्य-निर्धारण की तकनीकें सिखाई जाती हैं, ताकि खिलाड़ी प्रतियोगिता के दबाव में अपना सर्वश्रेष्ठ दे सके। अभ्यास प्रतियोगिताएँ भी इसी चरण में कराई जाती हैं।
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Q8. गतिविधि अभ्यास तकनीक प्रशिक्षण की किस विधि का एक भाग होता है ?
Right Answer: कार्य विधि
Explanation:
तकनीक प्रशिक्षण की विधियों में गतिविधि अभ्यास कार्य विधि अर्थात् टास्क मेथड का अंग है। इस विधि में शिक्षक तकनीक का संक्षिप्त प्रदर्शन एवं व्याख्या करने के बाद विद्यार्थियों को एक निश्चित कार्य सौंप देता है और वे अपनी गति से उसका बार-बार अभ्यास करते हैं, जबकि शिक्षक घूमकर व्यक्तिगत प्रतिपुष्टि एवं सुधार देता है। इससे प्रत्येक विद्यार्थी को अधिक अभ्यास-समय मिलता है, आत्मनिर्भरता बढ़ती है और व्यक्तिगत भिन्नताओं का ध्यान रखा जा सकता है। इसके विपरीत आदेश विधि में सब कुछ शिक्षक के संकेत पर एक साथ होता है और प्रस्तुतिकरण विधि केवल तकनीक दिखाने तक सीमित रहती है।
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