Physical Education: 60 MCQs with Answers
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0%Physical Education MCQ Questions and Answers
India Study Institute provides Physical Education MCQ Questions and Answers for RSMSSB / HTET/BPSC/Bihar STET/BSEB/ JSSC TGT & PGT and HP TGT Arts / DSSSB. Physical Education MCQs on anatomy, physiology, sports training, yoga and sports psychology। शारीरिक शिक्षा विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।
These questions are useful for the following state competitive exams.
| State Name | Name of Exam / Post | Conducting Board / Education Department |
| Rajasthan | PTI (Physical Training Instructor) Grade II & Grade III Exam | Rajasthan Staff Selection Board (RSMSSB) / Rajasthan Public Service Commission (RPSC) |
| Punjab | Punjab PTI (Physical Training Instructor) Exam / Master Cadre Physical Education Exam | Education Recruitment Directorate (ERD), Department of School Education, Punjab / PSSSB |
| Haryana | HTET (Physical Education) / HSSC TGT & PGT Physical Education / PTI Exam | Haryana Staff Selection Commission (HSSC) / Board of School Education Haryana (BSEH) |
| Delhi | DSSSB Physical Education Teacher (PET) Exam (TGT / PGT level) | Delhi Subordinate Services Selection Board (DSSSB) |
| Uttar Pradesh | UP TGT / PGT Physical Education Exam / UP LT Grade Teacher (Physical Education) | Uttar Pradesh Secondary Education Service Selection Board (UPSESSB) / UPPSC |
| Madhya Pradesh | MP TET Varg 2 & Varg 3 (Physical Education / Khel Shikshak) | Madhya Pradesh Employees Selection Board (MPESB) / MP Vyapam |
| Himachal Pradesh | HP DPE (Director of Physical Education) / HP PTI Exam / HP TGT Arts & Physical Education Exam | Himachal Pradesh Public Service Commission (HPPSC) / Department of School Education HP |
| Uttarakhand | UKSSSC LT Grade Teacher Exam (Physical Education) / Lecturer (Physical Education | Uttarakhand Subordinate Service Selection Commission (UKSSSC) / UKPSC |
| Bihar | BPSC TRE (Physical Education) / Bihar STET (Physical Education & Health Instructor) | Bihar Public Service Commission (BPSC) / Bihar School Examination Board (BSEB) |
| Jharkhand | JSSC TGT & PGT Physical Education Teacher Exam | Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) |
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Q1. निम्नलिखित में से कौन-से कारक सहनशीलता को निर्धारित करते हैं ?
(i) संधि की शरीर रचनात्मक संरचना
(ii) ऑक्सीजन अवशोषण
(iii) ऊर्जा भंडार
(iv) संधि के अस्थिबंधक
Right Answer: केवल (ii) और (iii) सही हैं।
Explanation:
सहनशीलता किसी क्रिया को थकान के बावजूद लम्बे समय तक जारी रखने की क्षमता है और वह मुख्यतः शरीर की ऊर्जा-आपूर्ति प्रणालियों पर निर्भर करती है। इसे निर्धारित करने वाले प्रमुख कारक हैं — ऑक्सीजन अवशोषण अर्थात् अधिकतम ऑक्सीजन ग्रहण क्षमता, जो हृदय, फेफड़ों एवं रक्त की दक्षता से तय होती है; तथा शरीर में संचित ऊर्जा भंडार, विशेषतः पेशीय ग्लाइकोजन एवं वसा। इनके अतिरिक्त पेशी तन्तुओं की संरचना, गति की तकनीक तथा मानसिक दृढ़ता भी योगदान देती है। संधि की शरीर रचनात्मक संरचना एवं अस्थिबंधक तो लचक को निर्धारित करते हैं, सहनशीलता को नहीं।
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Q2. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राणायाम धातु के विकार को हटाता है ?
Right Answer: उज्जयी प्राणायाम
Explanation:
हठयोग प्रदीपिका में उज्जयी प्राणायाम का वर्णन करते हुए कहा गया है कि यह गले के कफ को दूर करता है, जठराग्नि को प्रदीप्त करता है तथा नाड़ी, जलोदर और धातुगत दोषों का नाश करता है। इसमें कण्ठ को हल्का संकुचित कर धीमी, गहरी एवं ध्वनियुक्त श्वास ली जाती है, जिससे समुद्र की लहरों जैसी हल्की आवाज उत्पन्न होती है। यह रक्तचाप एवं तनाव को नियंत्रित करता है और अनिद्रा में लाभकारी है। इसके विपरीत भस्त्रिका त्रिदोष का शमन करता है, कपालभाति शुद्धिकरण षट्कर्म है तथा मूर्छा प्राणायाम मन को शान्त कर मूर्छा जैसी अवस्था देता है।
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Q3. क्रेशमर का ऐथलेटिक प्रकार किस रोग के प्रति संवेदनशील होता है ?
Right Answer: मिर्गी
Explanation:
जर्मन मनोचिकित्सक अर्न्स्ट क्रेशमर ने शारीरिक गठन के आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया और उसे मानसिक रोगों से जोड़ा। उनके अनुसार पिकनिक अर्थात् गोल-मटोल शरीर वाले व्यक्ति उन्माद-अवसाद अर्थात् बाइपोलर विकार के प्रति प्रवण होते हैं। एस्थेनिक अथवा लेप्टोसोम अर्थात् दुबले-लम्बे व्यक्ति सिजोफ्रेनिया के प्रति संवेदनशील माने गए। ऐथलेटिक प्रकार, जिनका शरीर पेशीयुक्त, चौड़े कंधों वाला एवं सुगठित होता है, मिर्गी के प्रति संवेदनशील बताए गए। चौथा डिसप्लास्टिक प्रकार असामान्य एवं मिश्रित गठन वाला होता है। शारीरिक शिक्षा में यह वर्गीकरण खेल-चयन तथा खिलाड़ी के स्वभाव को समझने की दृष्टि से पढ़ाया जाता है।
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Q4. 1984 में निम्नलिखित में कौन-सा निकाय स्थापित हुआ था ?
Right Answer: साई, नई दिल्ली
Explanation:
भारतीय खेल प्राधिकरण अर्थात् साई की स्थापना 1984 में नई दिल्ली में हुई। इसका गठन 1982 के नौवें एशियाई खेलों के लिए बनाए गए आधारभूत ढाँचे के इष्टतम उपयोग तथा देश में खेल प्रतिभा के व्यवस्थित विकास हेतु किया गया। यह युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की शीर्ष संस्था है और खेलो इंडिया, राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज, विशेष क्षेत्र खेल तथा एसटीसी जैसी योजनाएँ चलाती है। लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय ग्वालियर 1957 में तथा राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला 1961 में स्थापित हुआ।
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Q5. ‘‘जब कोई संवहन इकाई संवहन के लिये तैयार होती है, तब उसके लिए संवहन करना संतोषप्रद होता है; तैयार न होने पर संवहन करना असन्तोषप्रद होता है; और तैयार होने पर संवहन न करना भी खिजाने वाला होता है।’’ थॉर्नडाइक ने यह अधिगम के किस नियम के लिए कहा ?
Right Answer: तत्परता का नियम
Explanation:
यह कथन एडवर्ड एल० थॉर्नडाइक के तत्परता के नियम की मूल परिभाषा है। इसके अनुसार अधिगम तभी प्रभावी होता है जब सीखने वाला शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से उसके लिए तैयार हो। तत्पर अवस्था में कार्य करना सन्तोष देता है, अतत्पर अवस्था में कार्य करना विरक्ति उत्पन्न करता है और तत्पर होते हुए भी कार्य न कर पाना खीझ पैदा करता है। शिक्षक के लिए इसका निहितार्थ यह है कि वह पहले रुचि एवं अभिप्रेरणा जगाए। थॉर्नडाइक के अन्य दो मुख्य नियम अभ्यास तथा प्रभाव के हैं।
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Q6. निम्नलिखित में से कौन-सी मांसपेशियाँ टिबिया का आन्तरिक घूर्णन करती हैं ?
Right Answer: सेमीमेम्ब्रेनोसस और सेमिटेन्डिनोसस
Explanation:
घुटने के मुड़े होने की अवस्था में टिबिया का आन्तरिक घूर्णन मुख्यतः सेमीमेम्ब्रेनोसस तथा सेमिटेन्डिनोसस पेशियाँ करती हैं, जो हैमस्ट्रिंग समूह की भीतरी अर्थात् मध्यवर्ती पेशियाँ हैं और टिबिया के मध्य भाग पर जुड़ती हैं। पॉपलिटियस पेशी भी इसमें सहायक होती है और घुटने को ‘अनलॉक’ करती है। इसके विपरीत बाइसेप्स फिमोरिस हैमस्ट्रिंग की बाह्य पेशी है और वह टिबिया का बाह्य घूर्णन करती है। रेक्टस फिमोरिस तथा वास्टस लेटेरलिस क्वाड्रिसेप्स समूह की पेशियाँ हैं जो घुटने का विस्तार करती हैं।
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Q7. वैदिक काल की अवधि क्या थी ?
Right Answer: 2000-1000 ई०पू०
Explanation:
शारीरिक शिक्षा के इतिहास में वैदिक काल की अवधि सामान्यतः 2000 ईसा पूर्व से 1000 ईसा पूर्व तक मानी जाती है। इस युग में शारीरिक क्रियाएँ धार्मिक एवं दैनिक जीवन का अभिन्न अंग थीं। रथदौड़, धनुर्विद्या, मल्लयुद्ध, तैराकी, अश्वारोहण तथा नृत्य प्रमुख गतिविधियाँ थीं और इनका उद्देश्य शरीर को सुदृढ़ बनाकर युद्ध एवं यज्ञ-कर्म के लिए तैयार करना था। गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में शिष्य आचार्य के साथ रहकर व्यायाम एवं आसन का अभ्यास करता था। ब्रह्मचर्य, संयमित आहार तथा दिनचर्या पर विशेष बल दिया जाता था।
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Q8. निम्नलिखित में से कौन-से अवधिकालीनता के तैयारी काल के प्रथम चरण के उद्देश्य हैं ?
(i) पूर्व प्रशिक्षण अवस्था को पुनः प्राप्त करना।
(ii) उन कारकों का विकास करना जिन पर प्रदर्शन प्रत्यक्ष रूप से निर्भर करता है।
(iii) प्रतियोगिता काल के लिए खिलाड़ी को तैयार करना।
(iv) तैयारी और प्रतियोगिता काल के अगले चरण में उच्च प्रशिक्षण भार के लिए खिलाड़ी को तैयार करना।
Right Answer: केवल (i) और (iv) सही हैं।
Explanation:
अवधिकालीनता में तैयारी काल के प्रथम चरण को सामान्य तैयारी चरण कहा जाता है। संक्रमण काल की विश्रामपूर्ण अवधि के बाद खिलाड़ी की कार्यक्षमता गिर चुकी होती है, अतः इस चरण का पहला उद्देश्य पूर्व प्रशिक्षण अवस्था को पुनः प्राप्त करना है। दूसरा उद्देश्य उसके शरीर को इतना सुदृढ़ बनाना है कि वह आगे आने वाले तैयारी एवं प्रतियोगिता काल के उच्च प्रशिक्षण भार को सहन कर सके। इसमें भार का आयतन अधिक तथा तीव्रता कम रखी जाती है और सामान्य व्यायाम प्रधान रहते हैं। प्रदर्शन-विशिष्ट कारकों का विकास द्वितीय चरण में होता है।
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Q9. निम्नलिखित में से कौन-सी अधिगम के त्रुटि एवं प्रयास के सिद्धान्त के रूप में नहीं जानी जाती है ?
Right Answer: अनुबन्ध अनुक्रिया सिद्धान्त
Explanation:
थॉर्नडाइक के त्रुटि एवं प्रयास सिद्धान्त को अनेक नामों से जाना जाता है। इसे उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धान्त कहा जाता है, क्योंकि इसमें उद्दीपक तथा अनुक्रिया के बीच सम्बन्ध स्थापित होता है। इसे अधिगम का बन्ध सिद्धान्त भी कहते हैं, क्योंकि यह सम्बन्ध एक तंत्रिकीय बन्ध के रूप में दृढ़ होता जाता है, और इसी कारण इसे संबंधवाद का सिद्धान्त भी कहा जाता है। इसके विपरीत अनुबन्ध अनुक्रिया सिद्धान्त इवान पावलोव के शास्त्रीय अनुबन्धन से सम्बन्धित है, जिसमें प्रयास एवं त्रुटि की कोई भूमिका नहीं होती।
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Q10. खेलों में जीवन पर्यन्त उपलब्धि के लिए ‘ध्यानचंद पुरस्कार’ कब प्रारम्भ किया गया ?
Right Answer: 2002
Explanation:
ध्यानचंद पुरस्कार खेलों में जीवनपर्यन्त उपलब्धि के लिए दिया जाने वाला भारत का सर्वोच्च सम्मान है और इसकी शुरुआत 2002 में हुई। यह उन खिलाड़ियों को दिया जाता है जिन्होंने अपने खेल-जीवन में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और सक्रिय खेल-जीवन से सेवानिवृत्त होने के बाद भी खेलों के संवर्धन में योगदान देते रहे। इसमें प्रतिमा, प्रमाणपत्र तथा नकद राशि दी जाती है। इसका नाम हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर है, जिनके जन्मदिवस 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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