Home Science: 60 MCQs with Answers
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Q51. पारिवारिक संरचनाओं के संदर्भ में, एक पूरक एकल परिवार में शामिल है :
Right Answer: माता-पिता, बच्चे और माता-पिता के एक या अधिक अविवाहित, पृथक या विधवा/विधुर रिश्तेदार
Explanation:
परिवार की संरचनाओं के वर्गीकरण में पूरक एकल परिवार वह है जिसमें माता-पिता तथा उनके बच्चों के साथ माता-पिता का एक या अधिक ऐसा रिश्तेदार भी रहता हो जो अविवाहित, पृथक अथवा विधवा या विधुर हो। यह न पूर्णतः एकल परिवार है और न संयुक्त, क्योंकि इसमें केवल एक विवाहित युगल होता है, किन्तु कुछ अतिरिक्त सदस्य जुड़े रहते हैं। इस वर्गीकरण को भारतीय समाजशास्त्री आई० पी० देसाई तथा के० एम० कपाड़िया के अध्ययनों से बल मिला। शुद्ध एकल परिवार में केवल माता-पिता एवं अविवाहित बच्चे होते हैं।
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Q52. वह अवस्था जिसमें तीव्र वृद्धि तथा बदलाव होता है, जब व्यक्ति लैंगिक परिपक्वता प्राप्त करता है, कहलाती है :
Right Answer: किशोरावस्था
Explanation:
किशोरावस्था बाल्यावस्था तथा वयस्कता के बीच की संक्रमण अवस्था है, जो लगभग दस से उन्नीस वर्ष तक चलती है। इसमें तीव्र वृद्धि-प्रवेग होता है, लम्बाई एवं भार में अचानक बढ़ोतरी आती है और व्यक्ति लैंगिक परिपक्वता प्राप्त करता है, जिसे यौवनारम्भ कहते हैं। इसी काल में गौण लैंगिक लक्षण विकसित होते हैं, बालिकाओं में रजोदर्शन एवं बालकों में स्वरभंग होता है। स्टेनली हॉल ने इसे ‘तूफान एवं तनाव’ का काल कहा, क्योंकि इसमें भावनात्मक उतार-चढ़ाव, पहचान की खोज तथा समवयस्क समूह का प्रभाव प्रबल रहता है।
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Q53. लोहे की आवश्यकता किशोर लड़कियों को किशोर लड़कों की तुलना में अधिक होती है, क्योंकि :
Right Answer: मासिक धर्म के दौरान खून की कमी की भरपाई करनी पड़ती है।
Explanation:
किशोरावस्था में दोनों लिंगों को तीव्र वृद्धि तथा रक्त-आयतन बढ़ने के कारण लोहे की अधिक आवश्यकता होती है, किन्तु किशोर लड़कियों की आवश्यकता लड़कों से अधिक रहती है। इसका मुख्य कारण मासिक धर्म है, जिसके दौरान प्रत्येक चक्र में रक्त के साथ लोहे की उल्लेखनीय मात्रा शरीर से निकल जाती है और उसकी भरपाई आहार से करनी पड़ती है। यही कारण है कि किशोरियों में रक्ताल्पता का प्रचलन सर्वाधिक है। इसीलिए सरकार साप्ताहिक आयरन एवं फोलिक अम्ल अनुपूरण कार्यक्रम चलाती है और विटामिन सी युक्त आहार साथ लेने की सलाह दी जाती है।
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Q54. 3 साल की उम्र में बच्चा ............. कर सकता है।
Right Answer: वैकल्पिक पैर का उपयोग कर सीढ़िया चढ़ना।
Explanation:
तीन वर्ष की आयु तक बच्चे का स्थूल गतिक विकास इतना हो जाता है कि वह वैकल्पिक पैर का उपयोग करते हुए सीढ़ियाँ चढ़ सकता है, यद्यपि उतरते समय प्रायः एक ही पैर आगे रखता है। इसी आयु में वह तिपहिया साइकिल चलाना, दोनों पैरों से कूदना, गेंद फेंकना तथा कुछ क्षण एक पैर पर खड़ा रहना सीख जाता है। पंजों के बल चलना तथा बिना सहायता के दोपहिया साइकिल चलाना बाद की अवस्थाओं में आते हैं, और बैक फ्लिप जैसा जटिल कौशल तो प्रशिक्षण के बिना सम्भव ही नहीं। विकास सदैव सिर से पाँव की ओर तथा केन्द्र से परिधि की ओर बढ़ता है।
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Q55. भारतीय मानक ब्यूरो के आई० एस० आई० मार्क के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है ?
Right Answer: आई०एस०आई० मार्क कम लागत की गारन्टी देता है।
Explanation:
आई० एस० आई० मार्क भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा दिया जाने वाला प्रमाणन चिह्न है, जो यह प्रमाणित करता है कि उत्पाद गुणवत्ता एवं सुरक्षा से सम्बन्धित विशिष्ट भारतीय मानकों का अनुपालन करता है। यह भारत में बिकने वाले औद्योगिक उत्पादों के लिए प्रयुक्त होता है और सीमेंट, विद्युत उपकरण, हेलमेट, एलपीजी सिलेंडर तथा पैकेज्ड जल जैसे अनेक उत्पादों पर अनिवार्य है। यह कथन असत्य है कि यह चिह्न कम लागत की गारंटी देता है; यह केवल गुणवत्ता का आश्वासन देता है, मूल्य से इसका कोई सम्बन्ध नहीं। कृषि उत्पादों के लिए एगमार्क तथा खाद्य पदार्थों के लिए एफएसएसएआई चिह्न होता है।
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Q56. भण्डारण अवधि बढ़ाने के लिए भोज्य पदार्थ में से जल को हटाया जाता है, इस प्रक्रिया को .......... कहते हैं।
Right Answer: निर्जलीकरण
Explanation:
निर्जलीकरण वह परिरक्षण विधि है जिसमें भोज्य पदार्थ से जल की मात्रा हटाकर उसकी भण्डारण अवधि बढ़ाई जाती है। सूक्ष्मजीवों की वृद्धि तथा एन्जाइमों की क्रिया के लिए जल अनिवार्य है, अतः जल-सक्रियता घटते ही जीवाणु, यीस्ट एवं फफूँद निष्क्रिय हो जाते हैं। यह सूर्य के प्रकाश में सुखाकर, गरम वायु द्वारा, स्प्रे-ड्रायर अथवा फ्रीज-ड्राइंग से किया जाता है। इससे भार एवं आयतन घटने से परिवहन भी सुगम हो जाता है। पापड़, बड़ी, सूखे मेवे तथा दूध पाउडर इसके उदाहरण हैं। पाश्चुरीकरण ऊष्मा से तथा डिब्बाबन्दी वायुरोधी सीलबन्दी से परिरक्षण करते हैं।
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Q57. जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, खेल शारीरिक रूप से ........... सक्रिय होते जाते हैं।
Right Answer: ज्यादा
Explanation:
जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसकी अस्थियाँ एवं माँसपेशियाँ सुदृढ़ होती जाती हैं, संतुलन एवं समन्वय सुधरता है और सहनशक्ति बढ़ती है; फलस्वरूप उसके खेल शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय होते जाते हैं। शिशु का खेल आरम्भ में इन्द्रिय-गतिक एवं एकाकी होता है, फिर समानान्तर खेल आता है, और आगे चलकर दौड़ना, कूदना, चढ़ना, साइकिल चलाना तथा संगठित सामूहिक खेल प्रधान हो जाते हैं। इनमें नियम, प्रतिस्पर्धा एवं टीम भावना भी जुड़ जाती है। खेल बच्चे के शारीरिक, सामाजिक, भावनात्मक एवं संज्ञानात्मक विकास का प्रमुख साधन है।
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Q58. भाषाई विकास के संदर्भ में एक तीन वर्ष के बालक के लिए विशिष्ट विकासात्मक मील का पत्थर क्या है ?
Right Answer: पूर्ण वाक्य बोलना
Explanation:
भाषाई विकास के क्रम में तीन वर्ष का बालक पूर्ण वाक्य बोलने लगता है। इस आयु तक उसकी शब्द-सम्पदा लगभग नौ सौ से एक हजार शब्दों तक पहुँच जाती है और वह तीन-चार शब्दों के व्याकरणसम्मत वाक्य बनाकर अपनी बात कह पाता है, प्रश्न पूछता है तथा सरल निर्देश समझ लेता है। इससे पूर्व लगभग एक वर्ष की आयु में वह एक शब्द वाले वाक्य बोलता है, जिसे होलोफ्रेज कहते हैं, और दो वर्ष के आसपास दो शब्दों वाले तार-संदेश जैसे वाक्य बनाता है। इस अवस्था में अजनबी भी उसकी अधिकांश बात समझ लेते हैं।
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Q59. ........... स्वास्थ्य देखभाल में रोगियों को बीमारी, चोट, सर्जरी और उचित रिकवरी में मदद करता है।
Right Answer: चिकित्सीय पोषण
Explanation:
चिकित्सीय पोषण अर्थात् मेडिकल न्यूट्रिशन थेरेपी स्वास्थ्य देखभाल का वह अंग है जो रोगियों को बीमारी, चोट अथवा शल्यचिकित्सा से उबरने तथा उचित पुनर्लाभ पाने में सहायता करता है। इसमें रोग की प्रकृति, रोगी की पोषण स्थिति तथा उसकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के आधार पर आहार में परिवर्तन किया जाता है — जैसे मधुमेह में कार्बोहाइड्रेट नियंत्रण, वृक्क रोग में प्रोटीन एवं सोडियम की सीमा, तथा शल्यचिकित्सा के बाद उच्च प्रोटीन एवं ऊर्जा। यह औषधि का पूरक है और अस्पताल में रहने की अवधि तथा जटिलताओं को घटाता है।
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Q60. आपदा विश्लेषण एवं संकट नियंत्रण बिन्दु (एच०ए०सी०सी०पी०) (1971) एक तंत्र है जो ............... कार्य करता है।
Right Answer: खाद्य जनित आपदा की रिस्क को कम करने के लिए।
Explanation:
संकट विश्लेषण एवं संकट नियंत्रण बिन्दु प्रणाली 1971 में सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत हुई और मूलतः इसे अन्तरिक्ष यात्रियों के लिए पूर्णतः सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करने हेतु विकसित किया गया था। यह खाद्य जनित संकटों के जोखिम को कम करने के लिए कार्य करती है। इसमें अन्तिम उत्पाद की जाँच के स्थान पर सम्पूर्ण उत्पादन शृंखला के उन बिन्दुओं की पहचान की जाती है जहाँ जैविक, रासायनिक अथवा भौतिक संकट उत्पन्न हो सकता है, और वहीं निवारक नियंत्रण लगाकर सीमाएँ, अनुवीक्षण एवं सुधारात्मक कार्रवाई निर्धारित की जाती है। इसके सात सिद्धांत विश्वभर में मान्य हैं।
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