Home Science - Food and Nutrition: 18 MCQs with Answers
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पोषक तत्व, संतुलित आहार, कुपोषण, आहार चिकित्सा, खाद्य प्रसंस्करण एवं खाद्य सुरक्षा पर बहुविकल्पीय प्रश्न।Your Progress
0%Q1. वयस्क व्यक्तियों में पाया जाने वाला रिकेट्स कहलाता है :
Right Answer: अस्थिमृदुता
विटामिन डी, कैल्शियम अथवा फॉस्फोरस की कमी से अस्थियों का उचित खनिजीकरण नहीं हो पाता। बच्चों में यह स्थिति रिकेट्स अर्थात् सूखा रोग कहलाती है, जिसमें अस्थियाँ मुलायम होकर मुड़ जाती हैं और टाँगें धनुषाकार हो जाती हैं। वयस्कों में यही कमी अस्थिमृदुता अर्थात् ऑस्टियोमैलेशिया कहलाती है, जिसमें अस्थियाँ कमजोर एवं पीड़ादायक हो जाती हैं और हल्की चोट से भी टूट जाती हैं। इसके विपरीत ऑस्टियोपोरोसिस में अस्थि-घनत्व घटता है, गण्डमाला आयोडीन की कमी से होती है तथा मस्कुलर डिसट्रॉफी आनुवंशिक रोग है।
Q2. भारतीय परिवेश में भोज्य योजना के लिए आई०सी०एम०आर० (राष्ट्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान परिषद्) ने .......... भोज्य समूहों की सिफारिश की है।
Right Answer: 5 (पाँच)
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने भारतीय परिवेश में भोजन के नियोजन को सरल बनाने के लिए समस्त खाद्य पदार्थों को पाँच भोज्य समूहों में बाँटा है। ये हैं — अनाज एवं मिलेट्स, जो मुख्यतः ऊर्जा देते हैं; दालें एवं फलियाँ, जो प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं; दूध एवं मांस उत्पाद, जो उत्तम कोटि का प्रोटीन एवं कैल्शियम देते हैं; फल एवं सब्जियाँ, जो विटामिन, खनिज तथा रेशा प्रदान करती हैं; तथा वसा एवं शर्करा, जो सान्द्र ऊर्जा देते हैं। संतुलित आहार बनाने के लिए प्रत्येक समूह से उपयुक्त मात्रा में खाद्य पदार्थ चुनना आवश्यक है।
Q3. कुपोषण क्या है ?
Right Answer: पोषक तत्वों की कमी या अधिकता
कुपोषण से तात्पर्य केवल भोजन की कमी नहीं है, बल्कि शरीर को मिलने वाले पोषक तत्वों की कमी अथवा अधिकता — दोनों ही असंतुलित अवस्थाओं से है। न्यून पोषण से बच्चों में मरास्मस, क्वाशियोरकर, अवरुद्ध वृद्धि तथा विटामिन एवं खनिज की कमी से होने वाले रोग उत्पन्न होते हैं। दूसरी ओर अति पोषण से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोग जैसी जीवनशैली सम्बन्धी बीमारियाँ जन्म लेती हैं। भारत जैसे देश में दोनों समस्याएँ साथ-साथ पाई जाती हैं, जिसे कुपोषण का दोहरा बोझ कहा जाता है।
Q4. स्तम्भ-I का स्तम्भ-II से मिलान कर सही कूट चुनिए :
स्तम्भ-I (चिकित्सा स्थिति)
A. उच्च रक्तचाप
B. मधुमेह
C. कब्ज़
D. शल्यचिकित्सा के तुरन्त बाद
स्तम्भ-II (आहार का प्रकार)
(i) उच्च रेशा खाद्य पदार्थ
(ii) निम्न सोडियम आहार
(iii) उच्च प्रोटीन आहार
(iv) निम्न कार्बोहाइड्रेट तथा शक्कर, उच्च रेशा आहार
Right Answer: A-(ii), B-(iv), C-(i), D-(iii)
उच्च रक्तचाप में सोडियम शरीर में जल रोककर रक्त की मात्रा एवं दाब बढ़ाता है, अतः निम्न सोडियम आहार दिया जाता है। मधुमेह में रक्त शर्करा नियंत्रित रखने के लिए कार्बोहाइड्रेट एवं शक्कर घटाकर उच्च रेशा आहार दिया जाता है, क्योंकि रेशा ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा कर देता है। कब्ज में उच्च रेशायुक्त खाद्य पदार्थ मल का आयतन बढ़ाकर तथा जल रोककर आँतों की गति सुधारते हैं। शल्यचिकित्सा के तुरन्त बाद ऊतकों की मरम्मत एवं घाव भरने के लिए उच्च प्रोटीन आहार आवश्यक होता है।
Q5. वह पौष्टिक पदार्थ जो खाया जाए, पिया जाए अथवा शरीर में ग्रहण किया जाए जिससे जीवन बने, शक्ति मिले, वृद्धि हो उसे कहते हैं :
Right Answer: खाना (खाद्य)
खाद्य अथवा भोजन वह पौष्टिक पदार्थ है जिसे खाया, पिया अथवा किसी अन्य रूप में शरीर में ग्रहण किया जाता है, जिससे जीवन बना रहे, कार्य करने की शक्ति मिले तथा वृद्धि एवं ऊतकों की मरम्मत हो सके। यह ठोस अथवा तरल दोनों रूपों में हो सकता है और इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज तथा जल — ये छह पोषक तत्व निहित रहते हैं। इसके विपरीत पोषण वह समग्र प्रक्रिया है जिसमें भोजन का अन्तर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, परिवहन, उपयोग तथा उत्सर्जन सम्मिलित है, जबकि प्रोटीन एवं विटामिन भोजन के केवल घटक हैं।
Q6. कथन-I : शिशु के लिए माता का दूध उपयुक्त नहीं होगा यदि माता क्षय रोग से ग्रसित हो। कथन-II : उपरोक्त स्थिति में शिशु को भैंस का दूध दिया जा सकता है, क्योंकि यह सबसे उचित होता है। सही विकल्प चुनिए :
Right Answer: कथन I सही है व कथन II गलत है।
सक्रिय क्षय रोग से ग्रसित माता के मामले में संक्रमण फैलने के भय से स्तनपान पर रोक अथवा विशेष सावधानी की सलाह दी जाती है, अतः पहला कथन सही है। दूसरा कथन गलत है, क्योंकि भैंस का दूध शिशु के लिए सर्वाधिक उपयुक्त नहीं होता। उसमें वसा एवं कैसीन प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे वह गाढ़ा एवं कठिनाई से पचने वाला हो जाता है और शिशु के अपरिपक्व गुर्दों पर अतिरिक्त भार डालता है। ऐसी स्थिति में उपयुक्त रूप से तनुकृत गाय का दूध अथवा शिशु-सूत्र दिया जाता है।
Q7. निम्नलिखित में से खाद्य प्रसंस्करण का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
Right Answer: भंडारण की अवधि बढ़ाना
खाद्य प्रसंस्करण का मुख्य उद्देश्य भोज्य पदार्थों की भण्डारण अवधि अर्थात् शेल्फ लाइफ को बढ़ाना है, ताकि वे मौसम बीत जाने के बाद भी उपलब्ध रहें और अपव्यय रुक सके। सुखाना, डिब्बाबन्दी, पाश्चुरीकरण, प्रशीतन, किण्वन तथा परिरक्षक मिलाना — ये सभी सूक्ष्मजीवों की वृद्धि एवं एन्जाइमी क्रिया रोककर यही कार्य करते हैं। इससे खाद्य पदार्थ का दूर-दराज तक परिवहन सम्भव होता है और मूल्य में स्थिरता आती है। रूप, स्वाद अथवा सुविधा में सुधार तथा लागत घटना इसके गौण लाभ अवश्य हैं, किन्तु प्राथमिक उद्देश्य नहीं।
Q8. संतुलित आहार क्या है ?
Right Answer: आहार जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में हों।
संतुलित आहार वह आहार है जिसमें शरीर के लिए आवश्यक समस्त पोषक तत्व — कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज तथा जल — उचित एवं पर्याप्त मात्रा में तथा सही अनुपात में उपस्थित हों। केवल सभी तत्वों की उपस्थिति पर्याप्त नहीं, उनकी मात्रा भी व्यक्ति की आयु, लिंग, शारीरिक श्रम एवं शारीरिक अवस्था के अनुसार होनी चाहिए। इसमें आपात स्थितियों के लिए थोड़ा अतिरिक्त संचय भी सम्मिलित रहता है। ऐसा आहार सामान्य वृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, रोग-प्रतिरोधक क्षमता तथा दीर्घायु सुनिश्चित करता है और पाँचों भोज्य समूहों से बनता है।
Q9. निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
कथन-I : आहार विशेषज्ञ की यह जिम्मेदारी है कि वह रोगी के आर्थिक स्तर के अनुरूप ही पोषण देखभाल योजना बनाए तथा उसे क्रियान्वित करे।
कथन-II : आहार विशेषज्ञ की यह जिम्मेदारी है कि वह रोगी के पोषण स्तर की जाँच करे तथा सुनिश्चित करे कि उसे उचित पोषण देखभाल मिले।
Right Answer: कथन I तथा कथन II दोनों सही हैं।
दोनों कथन सही हैं और आहार विशेषज्ञ के व्यावसायिक दायित्व के अनिवार्य अंग हैं। पोषण देखभाल की प्रक्रिया चार चरणों में चलती है — पोषण मूल्यांकन, पोषण निदान, हस्तक्षेप तथा अनुवीक्षण एवं मूल्यांकन। मूल्यांकन में रोगी की आहार-आदतें, शारीरिक माप, जैव-रासायनिक जाँच एवं नैदानिक लक्षण देखे जाते हैं। साथ ही योजना तभी सफल होती है जब वह रोगी की आर्थिक क्षमता, स्थानीय उपलब्धता, सांस्कृतिक मान्यताओं एवं रुचि के अनुरूप हो; अन्यथा सैद्धान्तिक रूप से उत्तम आहार भी व्यवहार में अपनाया नहीं जाता।
Q10. .............. बीमारी के होने का कारण विटामिन- C है।
Right Answer: स्कर्वी
विटामिन सी अर्थात् एस्कॉर्बिक अम्ल की कमी से स्कर्वी रोग होता है। यह विटामिन कोलेजन नामक संयोजी ऊतक प्रोटीन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है, अतः इसकी कमी से मसूड़ों से रक्तस्राव, दाँतों का ढीला होकर गिरना, त्वचा के नीचे रक्तस्राव, जोड़ों में दर्द, घाव देर से भरना तथा दुर्बलता जैसे लक्षण उभरते हैं। यह जल में घुलनशील विटामिन है, ऊष्मा से शीघ्र नष्ट हो जाता है और शरीर में संचित नहीं रहता। आँवला, अमरूद, नींबू, संतरा तथा हरी मिर्च इसके उत्तम स्रोत हैं। बेरी-बेरी थायमिन तथा रिकेट्स विटामिन डी की कमी से होता है।