Home Science: 60 MCQs with Answers
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0%Q1. आतिथ्य प्रबंधन का मुख्य केन्द्र है :
Right Answer: ग्राहक संतुष्टि तथा अनुभव
आतिथ्य प्रबंधन का मुख्य केन्द्र ग्राहक की संतुष्टि तथा उसका समग्र अनुभव होता है। होटल, रेस्तराँ, पर्यटन एवं आयोजन प्रबंधन जैसे समस्त आतिथ्य उद्योग सेवा-प्रधान हैं, जहाँ उत्पाद मूर्त वस्तु नहीं बल्कि अनुभव होता है। अतिथि के आगमन से लेकर प्रस्थान तक प्रत्येक सम्पर्क-बिन्दु पर स्वच्छता, शिष्टाचार, तत्परता एवं वैयक्तिक ध्यान ही उसकी संतुष्टि निर्धारित करते हैं। संतुष्ट अतिथि पुनः लौटता है और दूसरों को भी भेजता है। विपणन, मानव संसाधन प्रबंधन तथा आर्थिक लाभ महत्त्वपूर्ण अवश्य हैं, किन्तु वे सब इसी केन्द्रीय उद्देश्य के साधन मात्र हैं।
Q2. उस वस्त्र का नाम बताइए जोकि एक कीड़े के कोकून से प्राप्त रेशे से निर्मित हो :
Right Answer: रेशमी
रेशम एकमात्र प्राकृतिक तन्तु है जो सतत लम्बे रेशे के रूप में मिलता है और इसे रेशम के कीट बॉम्बिक्स मोराई के कोकून से प्राप्त किया जाता है। इल्ली शहतूत की पत्तियाँ खाकर अपने चारों ओर लार-ग्रंथियों से निकले प्रोटीन धागे का कोकून बुनती है, जिसे उबालकर सावधानीपूर्वक उधेड़ लिया जाता है; इस प्रक्रिया को रीलिंग कहते हैं। रेशम प्रोटीन तन्तु है, इसमें चमक, कोमलता एवं उत्तम आवरण-क्षमता होती है और इसे वस्त्रों की रानी कहा जाता है। ऊन भेड़ के बालों से, सूती कपास से तथा रेयॉन सेलुलोज से बनने वाला पुनर्जनित तन्तु है।
Q3. निगमित संचार का प्रारंभिक लक्ष्य क्या है ?
Right Answer: व्यापारिक संगठन की छवि बढ़ाना
निगमित संचार अर्थात् कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन का प्रारम्भिक लक्ष्य व्यापारिक संगठन की छवि को सुदृढ़ एवं सकारात्मक बनाना है। इसके अन्तर्गत आन्तरिक संचार, जनसम्पर्क, मीडिया सम्बन्ध, संकट-कालीन संचार तथा हितधारकों के साथ संवाद आते हैं। संगठन अपने कर्मचारियों, ग्राहकों, निवेशकों, सरकार तथा समाज के समक्ष एक सुसंगत एवं विश्वसनीय पहचान प्रस्तुत करना चाहता है, क्योंकि प्रतिष्ठा ही उसकी सबसे बड़ी अमूर्त सम्पत्ति है। उत्पाद की गुणवत्ता सुधारना, धन जुटाना अथवा नए उत्पाद विकसित करना अन्य विभागों के कार्य हैं।
Q4. विकास पत्रकारिता का प्रारंभिक केन्द्र क्या है ?
Right Answer: उन मुद्दों की रिर्पोंटिंग करना जो समाज के विकास में बाधक हैं तथा उनका समाधान भी प्रेक्षित करना।
विकास पत्रकारिता का प्रारम्भिक केन्द्र उन मुद्दों की रिपोर्टिंग करना है जो समाज के विकास में बाधक बनते हैं, तथा उनके सम्भावित समाधान भी प्रस्तुत करना है। यह केवल सरकारी उपलब्धियाँ गिनाने अथवा प्रसिद्ध व्यक्तियों की खबरें देने से भिन्न है। इसमें निर्धनता, कुपोषण, निरक्षरता, स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, पेयजल तथा ग्रामीण बेरोजगारी जैसे विषयों को गहराई से उठाया जाता है और सामान्य जन की आवाज मुख्यधारा तक पहुँचाई जाती है। यह जनसंचार को सामाजिक परिवर्तन का साधन बनाती है, इसीलिए इसे जनहित पत्रकारिता भी कहा जाता है।
Q5. रक्त का धब्बा छुड़ाने के लिए निम्नलिखित में से ............. की सिफारिश नहीं की जाती है।
Right Answer: गरम पानी
रक्त एक प्रोटीनयुक्त धब्बा है, इसलिए इसे छुड़ाने के लिए गरम पानी की सिफारिश कभी नहीं की जाती। ऊष्मा से प्रोटीन स्कन्दित होकर तन्तुओं में स्थायी रूप से जम जाता है और फिर धब्बा लगभग अमिट हो जाता है। सही विधि यह है कि धब्बे को तुरन्त ठण्डे पानी में भिगोया जाए, आवश्यकता हो तो नमकीन ठण्डे पानी का प्रयोग किया जाए और शेष रह गए निशान पर तनु अमोनिया अथवा हाइड्रोजन पेरोक्साइड लगाया जाए। सामान्य नियम यह है कि प्रोटीनयुक्त धब्बों — रक्त, दूध, अण्डा — पर सदैव ठण्डा पानी ही प्रयोग करना चाहिए।
Q6. गृह प्रबंध में पारिवारिक संसाधनों का उत्तम उपयोग इस प्रकार से करते हैं कि :
Right Answer: पूर्व निर्धारित लक्ष्य तथा मूल्य प्राप्त होते हैं।
गृह प्रबंध वह प्रक्रिया है जिसमें परिवार अपने सीमित संसाधनों — समय, शक्ति, धन, ज्ञान, कौशल तथा भौतिक सुविधाओं — का इस प्रकार नियोजन, संगठन, नियंत्रण एवं मूल्यांकन करता है कि उसके पूर्व निर्धारित लक्ष्य तथा मूल्य प्राप्त हो सकें। यहाँ ध्यातव्य है कि प्रत्येक परिवार के लक्ष्य एवं मूल्य भिन्न होते हैं, अतः संसाधनों के उत्तम उपयोग का अर्थ केवल धन बचाना अथवा सम्पन्न हो जाना नहीं है। किसी परिवार का लक्ष्य शिक्षा हो सकता है, किसी का स्वास्थ्य और किसी का सामाजिक प्रतिष्ठा। संतुष्टि ही इसकी अन्तिम कसौटी है।
Q7. मास मीडिया के लिए जिस टर्म का उपयोग होता है, वह है :
Right Answer: छाता
जनसंचार माध्यमों के लिए ‘छाता’ अर्थात् अम्ब्रेला टर्म का प्रयोग किया जाता है। इसका आशय यह है कि मास मीडिया कोई एक माध्यम नहीं, बल्कि एक व्यापक श्रेणी है जिसके नीचे मुद्रित माध्यम जैसे समाचार-पत्र एवं पत्रिकाएँ, श्रव्य माध्यम जैसे रेडियो, दृश्य-श्रव्य माध्यम जैसे टेलीविजन एवं सिनेमा, तथा नवीन डिजिटल एवं सामाजिक माध्यम सभी एक साथ आ जाते हैं। इन सबकी साझी विशेषता यह है कि ये एक ही समय में विशाल, अनाम एवं विषम जनसमूह तक संदेश पहुँचाते हैं। इसीलिए इन्हें एक ही छत्र-शब्द के अन्तर्गत रखा जाता है।
Q8. समय का सही तरीके से प्रबंधन कैसे करेंगे ?
Right Answer: तात्कालिकता तथा महत्व के अनुसार कार्य को सूचीबद्ध करें।
समय एक ऐसा संसाधन है जिसे न संचित किया जा सकता है, न बढ़ाया जा सकता है और न ही लौटाया जा सकता है, इसलिए उसका नियोजित उपयोग ही एकमात्र उपाय है। सही विधि यह है कि समस्त कार्यों को उनकी तात्कालिकता तथा महत्त्व के अनुसार सूचीबद्ध कर प्राथमिकता दी जाए, जिसे आइजनहावर मैट्रिक्स भी कहा जाता है। इससे महत्त्वपूर्ण किन्तु अ-तात्कालिक कार्य उपेक्षित नहीं रहते। मनमर्जी से कार्य करना, केवल ‘पहले आओ पहले पाओ’ का पालन करना अथवा एक साथ अनेक कार्य करना — तीनों ही कार्यकुशलता घटाते हैं और थकान बढ़ाते हैं।
Q9. वस्त्र की धुलाई के निम्नलिखित चरणों को सही क्रम में सूचीबद्ध कीजिए :
A. पानी से कपड़ों को खंगालना
B. कपड़े सुखाना
C. रंग तथा कपड़े के अनुसार कपड़े छाँटना
D. पानी में डिटर्जेन्ट डालना तथा उसमें कपड़े भिगोना
Right Answer: C, D, A, B
वस्त्रों की धुलाई एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है और उसका सही क्रम इस प्रकार है। सबसे पहले कपड़ों को रंग, तन्तु तथा गन्दगी के स्तर के अनुसार छाँटा जाता है, ताकि रंग एक-दूसरे पर न चढ़े और नाजुक वस्त्र सुरक्षित रहें। इसके बाद उपयुक्त ताप के पानी में डिटर्जेंट घोलकर कपड़ों को भिगोया जाता है, जिससे मैल ढीला होकर निकल जाए। फिर उन्हें स्वच्छ पानी में तब तक खंगाला जाता है जब तक साबुन का अंश पूरी तरह न निकल जाए, क्योंकि शेष रह गया क्षार तन्तुओं को हानि पहुँचाता है। अन्त में कपड़ों को छाया अथवा धूप में सुखाया जाता है।
Q10. महिला उद्यमी के लिए ............. प्रमुख प्रेरक है।
Right Answer: अपने खुद के मालिक होने का अवसर
महिला उद्यमियों के अध्ययनों में सर्वाधिक प्रबल प्रेरक तत्त्व स्वयं का मालिक होने का अवसर पाया गया है, अर्थात् स्वतंत्र निर्णय लेने, अपनी शर्तों पर कार्य करने तथा अपनी क्षमता सिद्ध करने की आकांक्षा। इसके साथ आर्थिक स्वावलम्बन, पारिवारिक दायित्वों के अनुरूप कार्य-समय की लचीलापन तथा सामाजिक पहचान की इच्छा भी जुड़ी रहती है। कम जोखिम लेने की प्रवृत्ति अथवा रोजगार सुरक्षा की चाह तो उद्यमिता की मूल भावना के ही विपरीत है, क्योंकि उद्यमिता का सार ही जोखिम उठाकर नवाचार करना है।