Home Science: 60 MCQs with Answers
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Q31. वृद्धि के लिए यह कथन सत्य है :
Right Answer: यह मात्रात्मक है।
Explanation:
वृद्धि तथा विकास दो भिन्न किन्तु परस्पर सम्बद्ध प्रक्रियाएँ हैं। वृद्धि मात्रात्मक होती है, अर्थात् इसे मापा एवं गिना जा सकता है — जैसे लम्बाई, भार, अस्थियों की संख्या अथवा दाँतों का निकलना। यह शरीर के आकार एवं संरचना में होने वाली भौतिक बढ़ोतरी है और परिपक्वता आने पर एक निश्चित बिन्दु पर रुक जाती है। इसके विपरीत विकास गुणात्मक होता है, आजीवन चलता रहता है और उसमें कार्यक्षमता, कौशल तथा व्यवहार में परिष्कार आता है। वृद्धि विकास का एक अंग है, किन्तु विकास वृद्धि से कहीं अधिक व्यापक अवधारणा है।
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Q32. वयस्क व्यक्तियों में पाया जाने वाला रिकेट्स कहलाता है :
Right Answer: अस्थिमृदुता
Explanation:
विटामिन डी, कैल्शियम अथवा फॉस्फोरस की कमी से अस्थियों का उचित खनिजीकरण नहीं हो पाता। बच्चों में यह स्थिति रिकेट्स अर्थात् सूखा रोग कहलाती है, जिसमें अस्थियाँ मुलायम होकर मुड़ जाती हैं और टाँगें धनुषाकार हो जाती हैं। वयस्कों में यही कमी अस्थिमृदुता अर्थात् ऑस्टियोमैलेशिया कहलाती है, जिसमें अस्थियाँ कमजोर एवं पीड़ादायक हो जाती हैं और हल्की चोट से भी टूट जाती हैं। इसके विपरीत ऑस्टियोपोरोसिस में अस्थि-घनत्व घटता है, गण्डमाला आयोडीन की कमी से होती है तथा मस्कुलर डिसट्रॉफी आनुवंशिक रोग है।
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Q33. भारतीय परिवेश में भोज्य योजना के लिए आई०सी०एम०आर० (राष्ट्रीय स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान परिषद्) ने .......... भोज्य समूहों की सिफारिश की है।
Right Answer: 5 (पाँच)
Explanation:
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने भारतीय परिवेश में भोजन के नियोजन को सरल बनाने के लिए समस्त खाद्य पदार्थों को पाँच भोज्य समूहों में बाँटा है। ये हैं — अनाज एवं मिलेट्स, जो मुख्यतः ऊर्जा देते हैं; दालें एवं फलियाँ, जो प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं; दूध एवं मांस उत्पाद, जो उत्तम कोटि का प्रोटीन एवं कैल्शियम देते हैं; फल एवं सब्जियाँ, जो विटामिन, खनिज तथा रेशा प्रदान करती हैं; तथा वसा एवं शर्करा, जो सान्द्र ऊर्जा देते हैं। संतुलित आहार बनाने के लिए प्रत्येक समूह से उपयुक्त मात्रा में खाद्य पदार्थ चुनना आवश्यक है।
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Q34. ज्यादातर बच्चे कब स्वतंत्र रूप से चलना शुरू कर देते हैं ?
Right Answer: 12-15 माह में
Explanation:
स्थूल गतिक विकास के क्रम में अधिकांश बच्चे लगभग बारह से पन्द्रह माह की आयु में बिना सहारे स्वतंत्र रूप से चलना आरम्भ कर देते हैं। इससे पूर्व वे लगभग छह माह पर सहारे से बैठते हैं, आठ से दस माह पर घुटनों के बल सरकते हैं तथा नौ से बारह माह के बीच फर्नीचर पकड़कर खड़े होते और चलते हैं। आरम्भिक चाल में पैर चौड़े रखकर, हाथ ऊपर उठाकर लड़खड़ाते हुए चलना सामान्य है। विकास का यह क्रम सार्वभौमिक होता है, यद्यपि गति में व्यक्तिगत भिन्नता रहती है, जो पोषण एवं अवसर पर निर्भर करती है।
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Q35. कुपोषण क्या है ?
Right Answer: पोषक तत्वों की कमी या अधिकता
Explanation:
कुपोषण से तात्पर्य केवल भोजन की कमी नहीं है, बल्कि शरीर को मिलने वाले पोषक तत्वों की कमी अथवा अधिकता — दोनों ही असंतुलित अवस्थाओं से है। न्यून पोषण से बच्चों में मरास्मस, क्वाशियोरकर, अवरुद्ध वृद्धि तथा विटामिन एवं खनिज की कमी से होने वाले रोग उत्पन्न होते हैं। दूसरी ओर अति पोषण से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोग जैसी जीवनशैली सम्बन्धी बीमारियाँ जन्म लेती हैं। भारत जैसे देश में दोनों समस्याएँ साथ-साथ पाई जाती हैं, जिसे कुपोषण का दोहरा बोझ कहा जाता है।
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Q36. स्तम्भ-I का स्तम्भ-II से मिलान कर सही कूट चुनिए :
स्तम्भ-I (चिकित्सा स्थिति)
A. उच्च रक्तचाप
B. मधुमेह
C. कब्ज़
D. शल्यचिकित्सा के तुरन्त बाद
स्तम्भ-II (आहार का प्रकार)
(i) उच्च रेशा खाद्य पदार्थ
(ii) निम्न सोडियम आहार
(iii) उच्च प्रोटीन आहार
(iv) निम्न कार्बोहाइड्रेट तथा शक्कर, उच्च रेशा आहार
Right Answer: A-(ii), B-(iv), C-(i), D-(iii)
Explanation:
उच्च रक्तचाप में सोडियम शरीर में जल रोककर रक्त की मात्रा एवं दाब बढ़ाता है, अतः निम्न सोडियम आहार दिया जाता है। मधुमेह में रक्त शर्करा नियंत्रित रखने के लिए कार्बोहाइड्रेट एवं शक्कर घटाकर उच्च रेशा आहार दिया जाता है, क्योंकि रेशा ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा कर देता है। कब्ज में उच्च रेशायुक्त खाद्य पदार्थ मल का आयतन बढ़ाकर तथा जल रोककर आँतों की गति सुधारते हैं। शल्यचिकित्सा के तुरन्त बाद ऊतकों की मरम्मत एवं घाव भरने के लिए उच्च प्रोटीन आहार आवश्यक होता है।
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Q37. वह पौष्टिक पदार्थ जो खाया जाए, पिया जाए अथवा शरीर में ग्रहण किया जाए जिससे जीवन बने, शक्ति मिले, वृद्धि हो उसे कहते हैं :
Right Answer: खाना (खाद्य)
Explanation:
खाद्य अथवा भोजन वह पौष्टिक पदार्थ है जिसे खाया, पिया अथवा किसी अन्य रूप में शरीर में ग्रहण किया जाता है, जिससे जीवन बना रहे, कार्य करने की शक्ति मिले तथा वृद्धि एवं ऊतकों की मरम्मत हो सके। यह ठोस अथवा तरल दोनों रूपों में हो सकता है और इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज तथा जल — ये छह पोषक तत्व निहित रहते हैं। इसके विपरीत पोषण वह समग्र प्रक्रिया है जिसमें भोजन का अन्तर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, परिवहन, उपयोग तथा उत्सर्जन सम्मिलित है, जबकि प्रोटीन एवं विटामिन भोजन के केवल घटक हैं।
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Q38. “वियना अन्तर्राष्ट्रीय कार्ययोजना वृद्धावस्था पर” में दिए गए सुझावों में से ............. नहीं है।
Right Answer: वृद्धाश्रम
Explanation:
वृद्धावस्था पर वियना अन्तर्राष्ट्रीय कार्ययोजना 1982 में ऑस्ट्रिया के वियना नगर में आयोजित वृद्धावस्था सम्बन्धी प्रथम विश्व सभा में स्वीकार की गई थी। इसमें वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य एवं पोषण, आवास एवं पर्यावरण, परिवार, सामाजिक कल्याण एवं सामाजिक सहयोग, आय सुरक्षा एवं रोजगार अर्थात् आर्थिक सहयोग, तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सिफारिशें दी गईं। वृद्धाश्रम की स्थापना इसकी संस्तुतियों में सम्मिलित नहीं है, क्योंकि योजना का बल वृद्धजनों को यथासम्भव अपने परिवार एवं समुदाय के भीतर ही सम्मानपूर्वक रखने पर है।
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Q39. कथन-I : शिशु के लिए माता का दूध उपयुक्त नहीं होगा यदि माता क्षय रोग से ग्रसित हो। कथन-II : उपरोक्त स्थिति में शिशु को भैंस का दूध दिया जा सकता है, क्योंकि यह सबसे उचित होता है। सही विकल्प चुनिए :
Right Answer: कथन I सही है व कथन II गलत है।
Explanation:
सक्रिय क्षय रोग से ग्रसित माता के मामले में संक्रमण फैलने के भय से स्तनपान पर रोक अथवा विशेष सावधानी की सलाह दी जाती है, अतः पहला कथन सही है। दूसरा कथन गलत है, क्योंकि भैंस का दूध शिशु के लिए सर्वाधिक उपयुक्त नहीं होता। उसमें वसा एवं कैसीन प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिससे वह गाढ़ा एवं कठिनाई से पचने वाला हो जाता है और शिशु के अपरिपक्व गुर्दों पर अतिरिक्त भार डालता है। ऐसी स्थिति में उपयुक्त रूप से तनुकृत गाय का दूध अथवा शिशु-सूत्र दिया जाता है।
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Q40. निम्नलिखित में से खाद्य प्रसंस्करण का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
Right Answer: भंडारण की अवधि बढ़ाना
Explanation:
खाद्य प्रसंस्करण का मुख्य उद्देश्य भोज्य पदार्थों की भण्डारण अवधि अर्थात् शेल्फ लाइफ को बढ़ाना है, ताकि वे मौसम बीत जाने के बाद भी उपलब्ध रहें और अपव्यय रुक सके। सुखाना, डिब्बाबन्दी, पाश्चुरीकरण, प्रशीतन, किण्वन तथा परिरक्षक मिलाना — ये सभी सूक्ष्मजीवों की वृद्धि एवं एन्जाइमी क्रिया रोककर यही कार्य करते हैं। इससे खाद्य पदार्थ का दूर-दराज तक परिवहन सम्भव होता है और मूल्य में स्थिरता आती है। रूप, स्वाद अथवा सुविधा में सुधार तथा लागत घटना इसके गौण लाभ अवश्य हैं, किन्तु प्राथमिक उद्देश्य नहीं।
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