Home Science: 60 MCQs with Answers
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0%Q41. संतुलित आहार क्या है ?
Right Answer: आहार जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में हों।
संतुलित आहार वह आहार है जिसमें शरीर के लिए आवश्यक समस्त पोषक तत्व — कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज तथा जल — उचित एवं पर्याप्त मात्रा में तथा सही अनुपात में उपस्थित हों। केवल सभी तत्वों की उपस्थिति पर्याप्त नहीं, उनकी मात्रा भी व्यक्ति की आयु, लिंग, शारीरिक श्रम एवं शारीरिक अवस्था के अनुसार होनी चाहिए। इसमें आपात स्थितियों के लिए थोड़ा अतिरिक्त संचय भी सम्मिलित रहता है। ऐसा आहार सामान्य वृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, रोग-प्रतिरोधक क्षमता तथा दीर्घायु सुनिश्चित करता है और पाँचों भोज्य समूहों से बनता है।
Q42. एकीकृत बाल विकास सेवाओं के अंतर्गत ............ सम्मिलित नहीं है।
Right Answer: वृद्ध
एकीकृत बाल विकास सेवा योजना 2 अक्टूबर 1975 को आरम्भ हुई और यह विश्व के सबसे बड़े बाल विकास कार्यक्रमों में गिनी जाती है। इसके लाभार्थी शून्य से छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ तथा धात्री माताएँ हैं। इसके अन्तर्गत आँगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से छह सेवाएँ दी जाती हैं — पूरक पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, संदर्भ सेवाएँ, अनौपचारिक पूर्व-विद्यालयी शिक्षा तथा पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा। वृद्धजन इस योजना के लाभार्थी नहीं हैं; उनके लिए राष्ट्रीय वयोश्री एवं वृद्धावस्था पेंशन जैसी पृथक योजनाएँ हैं।
Q43. निम्नलिखित कथनों को पढ़कर सही विकल्प चुनिए :
कथन-I : आहार विशेषज्ञ की यह जिम्मेदारी है कि वह रोगी के आर्थिक स्तर के अनुरूप ही पोषण देखभाल योजना बनाए तथा उसे क्रियान्वित करे।
कथन-II : आहार विशेषज्ञ की यह जिम्मेदारी है कि वह रोगी के पोषण स्तर की जाँच करे तथा सुनिश्चित करे कि उसे उचित पोषण देखभाल मिले।
Right Answer: कथन I तथा कथन II दोनों सही हैं।
दोनों कथन सही हैं और आहार विशेषज्ञ के व्यावसायिक दायित्व के अनिवार्य अंग हैं। पोषण देखभाल की प्रक्रिया चार चरणों में चलती है — पोषण मूल्यांकन, पोषण निदान, हस्तक्षेप तथा अनुवीक्षण एवं मूल्यांकन। मूल्यांकन में रोगी की आहार-आदतें, शारीरिक माप, जैव-रासायनिक जाँच एवं नैदानिक लक्षण देखे जाते हैं। साथ ही योजना तभी सफल होती है जब वह रोगी की आर्थिक क्षमता, स्थानीय उपलब्धता, सांस्कृतिक मान्यताओं एवं रुचि के अनुरूप हो; अन्यथा सैद्धान्तिक रूप से उत्तम आहार भी व्यवहार में अपनाया नहीं जाता।
Q44. .............. बीमारी के होने का कारण विटामिन- C है।
Right Answer: स्कर्वी
विटामिन सी अर्थात् एस्कॉर्बिक अम्ल की कमी से स्कर्वी रोग होता है। यह विटामिन कोलेजन नामक संयोजी ऊतक प्रोटीन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है, अतः इसकी कमी से मसूड़ों से रक्तस्राव, दाँतों का ढीला होकर गिरना, त्वचा के नीचे रक्तस्राव, जोड़ों में दर्द, घाव देर से भरना तथा दुर्बलता जैसे लक्षण उभरते हैं। यह जल में घुलनशील विटामिन है, ऊष्मा से शीघ्र नष्ट हो जाता है और शरीर में संचित नहीं रहता। आँवला, अमरूद, नींबू, संतरा तथा हरी मिर्च इसके उत्तम स्रोत हैं। बेरी-बेरी थायमिन तथा रिकेट्स विटामिन डी की कमी से होता है।
Q45. जैम व जैली बनाने की प्रक्रिया में पेक्टिन ................ की भूमिका निभाता है।
Right Answer: गाढ़ा करने वाला एजेंट
पेक्टिन फलों की कोशिका भित्ति में पाया जाने वाला एक जटिल कार्बोहाइड्रेट है, जो जैम एवं जैली बनाने की प्रक्रिया में गाढ़ा करने वाले तथा जेल बनाने वाले एजेंट की भूमिका निभाता है। उपयुक्त मात्रा में शर्करा तथा उचित अम्लता की उपस्थिति में पेक्टिन के अणु एक त्रिविम जाल बनाकर उसमें तरल को बाँध लेते हैं, जिससे उत्पाद जम जाता है। इसके लिए लगभग एक प्रतिशत पेक्टिन, अड़सठ प्रतिशत शर्करा तथा तीन के आसपास पी-एच आदर्श माने जाते हैं। सेब, अमरूद तथा खट्टे फलों के छिलके पेक्टिन से समृद्ध होते हैं।
Q46. कथन-I : बालक के विकास में बुद्धिलब्धि सबसे अधिक महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। कथन-II : बालक के शारीरिक तथा बौद्धिक विकास में लिंग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही विकल्प चुनिए :
Right Answer: कथन I सही नहीं है तथा कथन II सही है।
पहला कथन सही नहीं है, क्योंकि बाल विकास किसी एक कारक से निर्धारित नहीं होता। वंशानुक्रम एवं वातावरण दोनों मिलकर उसे आकार देते हैं, जिनमें पोषण, स्वास्थ्य, परिवार का भावनात्मक वातावरण, सामाजिक-आर्थिक स्थिति तथा शिक्षा के अवसर सम्मिलित हैं; बुद्धिलब्धि इनमें से केवल एक कारक है। दूसरा कथन सही है, क्योंकि लिंग शारीरिक एवं मानसिक विकास के प्रतिमान को प्रभावित करता है — बालिकाओं में किशोरावस्था की वृद्धि-गति पहले आती है और भाषा-विकास प्रायः तीव्र होता है, जबकि बालकों में स्थूल गतिक कौशल पहले विकसित होते हैं।
Q47. बुखार के रोगी को किस प्रकार के आहार की आवश्यकता होती है ?
Right Answer: उच्च कैलोरी, प्रोटीन, तरल पदार्थ तथा निम्न वसा
बुखार में शरीर का उपापचय दर बढ़ जाती है; ताप में प्रत्येक एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि पर ऊर्जा की आवश्यकता लगभग तेरह प्रतिशत बढ़ जाती है। इसीलिए रोगी को उच्च कैलोरी युक्त आहार दिया जाता है। ऊतकों के टूटने की क्षतिपूर्ति तथा प्रतिरक्षा हेतु प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जाती है, और पसीने एवं तीव्र श्वसन से हुई जल-हानि तथा विषाक्त पदार्थों के उत्सर्जन के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ दिए जाते हैं। वसा कम रखी जाती है, क्योंकि बुखार में पाचन-शक्ति दुर्बल हो जाती है और वसा देर से पचती है। भोजन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार देना उपयुक्त रहता है।
Q48. निम्नलिखित में से प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा का एक लाभ नहीं है :
Right Answer: भविष्य में उच्च शैक्षणिक सफलता
प्रारंभिक बचपन देखभाल एवं शिक्षा के सुस्थापित लाभों में उन्नत संज्ञानात्मक विकास, बेहतर सामाजिक कौशल तथा बेहतर भावनात्मक विनियमन सम्मिलित हैं, क्योंकि जीवन के प्रथम छह वर्षों में मस्तिष्क का विकास सर्वाधिक तीव्र गति से होता है और यही काल विद्यालय की तैयारी की नींव रखता है। इसका सीधा उद्देश्य भविष्य में उच्च शैक्षणिक सफलता की गारंटी देना नहीं है, क्योंकि आगे की शैक्षणिक उपलब्धि विद्यालय की गुणवत्ता, पारिवारिक सहयोग तथा अनेक अन्य कारकों पर निर्भर करती है। इसका बल तो सर्वांगीण विकास एवं सीखने की तत्परता पर रहता है।
Q49. खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अन्तर्गत ........... उद्देश्य या भूमिका सम्मिलित नहीं है।
Right Answer: भोज्य पदार्थों के कच्चे माल की, तैयार माल की तथा बेचने की दर निर्धारित करना।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 ने पूर्ववर्ती अनेक कानूनों का स्थान लिया और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की स्थापना की। इसका उद्देश्य भोजन के लिए वैज्ञानिक मानक निर्धारित करना, भोज्य पदार्थों के निर्माण, भण्डारण, वितरण एवं विक्रय को नियमित करना, तथा उत्पादन स्थल एवं उसके आसपास स्वच्छता सुनिश्चित करना है, जिससे लोगों को सुरक्षित भोजन मिल सके। कच्चे माल, तैयार माल अथवा विक्रय की दर निर्धारित करना इसके अन्तर्गत नहीं आता, क्योंकि मूल्य नियंत्रण खाद्य सुरक्षा नहीं, बल्कि आवश्यक वस्तु अधिनियम जैसे भिन्न कानूनों का विषय है।
Q50. निम्नलिखित में से कौन-सा कुपोषण का परिणाम नहीं है ?
Right Answer: ऊर्जा स्तर में वृद्धि
कुपोषण के दुष्परिणाम व्यापक एवं दीर्घकालिक होते हैं। इनमें अवरुद्ध वृद्धि अर्थात् आयु के अनुपात में कम लम्बाई, दुर्बलता, प्रतिरक्षा प्रणाली का कमजोर पड़ना जिससे संक्रमण बार-बार होते हैं, तथा मस्तिष्क के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से बौद्धिक क्षमता में कमी सम्मिलित है। ऊर्जा स्तर में वृद्धि कुपोषण का परिणाम नहीं हो सकती; इसके विपरीत कुपोषित व्यक्ति में सुस्ती, थकान, ध्यान की कमी तथा कार्यक्षमता में गिरावट देखी जाती है। बच्चों में इससे विद्यालयी उपस्थिति एवं निष्पादन भी प्रभावित होता है।