Home Science - Textiles and Clothing: 10 MCQs with Answers
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0%Q1. उस वस्त्र का नाम बताइए जोकि एक कीड़े के कोकून से प्राप्त रेशे से निर्मित हो :
Right Answer: रेशमी
Explanation:
रेशम एकमात्र प्राकृतिक तन्तु है जो सतत लम्बे रेशे के रूप में मिलता है और इसे रेशम के कीट बॉम्बिक्स मोराई के कोकून से प्राप्त किया जाता है। इल्ली शहतूत की पत्तियाँ खाकर अपने चारों ओर लार-ग्रंथियों से निकले प्रोटीन धागे का कोकून बुनती है, जिसे उबालकर सावधानीपूर्वक उधेड़ लिया जाता है; इस प्रक्रिया को रीलिंग कहते हैं। रेशम प्रोटीन तन्तु है, इसमें चमक, कोमलता एवं उत्तम आवरण-क्षमता होती है और इसे वस्त्रों की रानी कहा जाता है। ऊन भेड़ के बालों से, सूती कपास से तथा रेयॉन सेलुलोज से बनने वाला पुनर्जनित तन्तु है।
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Q2. रक्त का धब्बा छुड़ाने के लिए निम्नलिखित में से ............. की सिफारिश नहीं की जाती है।
Right Answer: गरम पानी
Explanation:
रक्त एक प्रोटीनयुक्त धब्बा है, इसलिए इसे छुड़ाने के लिए गरम पानी की सिफारिश कभी नहीं की जाती। ऊष्मा से प्रोटीन स्कन्दित होकर तन्तुओं में स्थायी रूप से जम जाता है और फिर धब्बा लगभग अमिट हो जाता है। सही विधि यह है कि धब्बे को तुरन्त ठण्डे पानी में भिगोया जाए, आवश्यकता हो तो नमकीन ठण्डे पानी का प्रयोग किया जाए और शेष रह गए निशान पर तनु अमोनिया अथवा हाइड्रोजन पेरोक्साइड लगाया जाए। सामान्य नियम यह है कि प्रोटीनयुक्त धब्बों — रक्त, दूध, अण्डा — पर सदैव ठण्डा पानी ही प्रयोग करना चाहिए।
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Q3. वस्त्र की धुलाई के निम्नलिखित चरणों को सही क्रम में सूचीबद्ध कीजिए :
A. पानी से कपड़ों को खंगालना
B. कपड़े सुखाना
C. रंग तथा कपड़े के अनुसार कपड़े छाँटना
D. पानी में डिटर्जेन्ट डालना तथा उसमें कपड़े भिगोना
Right Answer: C, D, A, B
Explanation:
वस्त्रों की धुलाई एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है और उसका सही क्रम इस प्रकार है। सबसे पहले कपड़ों को रंग, तन्तु तथा गन्दगी के स्तर के अनुसार छाँटा जाता है, ताकि रंग एक-दूसरे पर न चढ़े और नाजुक वस्त्र सुरक्षित रहें। इसके बाद उपयुक्त ताप के पानी में डिटर्जेंट घोलकर कपड़ों को भिगोया जाता है, जिससे मैल ढीला होकर निकल जाए। फिर उन्हें स्वच्छ पानी में तब तक खंगाला जाता है जब तक साबुन का अंश पूरी तरह न निकल जाए, क्योंकि शेष रह गया क्षार तन्तुओं को हानि पहुँचाता है। अन्त में कपड़ों को छाया अथवा धूप में सुखाया जाता है।
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Q4. कांथा कार्य की कढ़ाई भारत के ............. राज्य की प्रसिद्ध है।
Right Answer: बंगाल
Explanation:
कांथा कढ़ाई भारत के पश्चिम बंगाल राज्य तथा बांग्लादेश की प्रसिद्ध लोक-कला है। परम्परागत रूप से ग्रामीण महिलाएँ पुरानी धोतियों एवं साड़ियों की कई परतें एक साथ रखकर उन्हें साधारण रनिंग टाँके से सिल देती थीं, जिससे मुलायम चादर अथवा गुदड़ी बन जाती थी। इसी सादे टाँके से पशु-पक्षी, फूल-पत्ती, लोककथाओं के दृश्य तथा दैनिक जीवन के चित्र उकेरे जाते हैं। यह पुनर्चक्रण एवं सौन्दर्यबोध का सुन्दर संगम है। इसी प्रकार फुलकारी पंजाब की, चिकनकारी लखनऊ की तथा कशीदा कश्मीर की प्रसिद्ध कढ़ाई है।
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Q5. निम्नलिखित में से संश्लेषित रेशों की यह विशेषता है :
Right Answer: मुड़ते-सिकुड़ते नहीं हैं
Explanation:
संश्लेषित रेशे पेट्रोरसायनों से बहुलकीकरण द्वारा बनाए जाते हैं, जैसे पॉलिएस्टर, नायलॉन एवं एक्रेलिक। इनकी सबसे प्रमुख व्यावहारिक विशेषता यह है कि ये सरलता से मुड़ते-सिकुड़ते नहीं, अर्थात् इनमें सिलवट कम पड़ती है और वस्त्र प्रायः बिना इस्तरी के भी सुडौल बना रहता है। इसी कारण इन्हें ‘धोकर पहनो’ वस्त्र कहा जाता है। ये जल का अवशोषण बहुत कम करते हैं, इसलिए शीघ्र सूखते हैं किन्तु गर्मी में असुविधाजनक लगते हैं। ये जैव-अपघटनीय भी नहीं होते, जिससे पर्यावरणीय समस्या उत्पन्न होती है।
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Q6. ................. एक प्राकृतिक रेशा है।
Right Answer: सूती
Explanation:
तन्तुओं को उनके स्रोत के आधार पर प्राकृतिक तथा मानव-निर्मित वर्गों में बाँटा जाता है। सूती अर्थात् कपास एक प्राकृतिक तन्तु है, जो कपास के पौधे के बीजकोष में लगे रोओं से प्राप्त होता है और रासायनिक रूप से सेलुलोज है। यह जल का उत्तम अवशोषण करता है, त्वचा को साँस लेने देता है और इसीलिए गरम जलवायु के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है। इसके विपरीत पॉलिएस्टर, एक्रेलिक तथा टेरीन तीनों पेट्रोरसायनों से बने संश्लेषित तन्तु हैं। प्राकृतिक तन्तुओं में सूती एवं लिनन वानस्पतिक तथा ऊन एवं रेशम जान्तव मूल के हैं।
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Q7. वस्त्रों का एक प्रारम्भिक कार्य है :
Right Answer: वातावरणीय कारकों से शरीर का बचाव
Explanation:
वस्त्रों का प्रारम्भिक एवं सर्वाधिक मौलिक कार्य वातावरणीय कारकों से शरीर की रक्षा करना है। वस्त्र शीत, ताप, वर्षा, तेज धूप, धूल, कीट-दंश तथा चोट से शरीर को बचाते हैं और शरीर के ताप को संतुलित बनाए रखने में सहायता करते हैं। यही कारण है कि आदिम मानव ने भी सर्वप्रथम पत्तों, छालों एवं पशु-चर्म का प्रयोग आरम्भ किया। इसके पश्चात् वस्त्रों के गौण कार्य विकसित हुए, जैसे लज्जा-निवारण, सुशोभन, वैयक्तिक अभिव्यक्ति तथा सामाजिक स्तर, व्यवसाय एवं सांस्कृतिक पहचान का प्रदर्शन।
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Q8. वह विधि जिसके द्वारा रेशों से धागे का निर्माण किया जाता है, कहलाता है :
Right Answer: कताई
Explanation:
वह विधि जिसके द्वारा छोटे-छोटे रेशों को खींचकर, बल देकर एक लम्बे सतत धागे में परिवर्तित किया जाता है, कताई अर्थात् स्पिनिंग कहलाती है। इसमें रेशों को समानान्तर व्यवस्थित कर उन्हें ऐंठन दी जाती है, जिससे वे परस्पर जुड़कर मजबूत सूत बना लेते हैं; ऐंठन जितनी अधिक होगी, सूत उतना ही मजबूत किन्तु कठोर होगा। इसके लिए तकली, चरखा तथा आधुनिक कताई मशीनों का प्रयोग होता है। इसके बाद बुनाई में इन धागों को ताना-बाना के रूप में परस्पर गूँथकर कपड़ा बनाया जाता है, तथा ब्लीचिंग एवं रंगाई परिष्करण की प्रक्रियाएँ हैं।
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Q9. वस्त्र की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निम्नलिखित में से कौन-से वस्त्रों को हाथ से धोना चाहिए बजाए मशीन से धोने के ?
Right Answer: रेशमी व ऊनी
Explanation:
रेशम तथा ऊन दोनों प्रोटीन तन्तु हैं और अत्यन्त नाजुक होते हैं, इसलिए इनकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इन्हें मशीन के स्थान पर हाथ से धोना चाहिए। मशीन की तीव्र घर्षणकारी गति एवं ऐंठन से ऊन के शल्क आपस में उलझ जाते हैं और वस्त्र सिकुड़कर सख्त हो जाता है, जिसे फेल्टिंग कहते हैं; रेशम की चमक भी घर्षण से नष्ट हो जाती है। इन्हें गुनगुने अथवा ठण्डे पानी में हल्के तटस्थ साबुन से धीरे-धीरे दबाकर धोना चाहिए, निचोड़ना नहीं चाहिए और छाया में समतल फैलाकर सुखाना चाहिए।
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Q10. वृद्ध व्यक्ति के वस्त्रों के लिए .............. सबसे उपयुक्त विशेषता है।
Right Answer: पहनने में थोड़े ढीले, साँस लेने योग्य तथा हल्के
Explanation:
वृद्ध व्यक्तियों के वस्त्र चुनते समय सुविधा, सुरक्षा एवं स्वावलम्बन को प्राथमिकता दी जाती है। उनके लिए थोड़े ढीले, साँस लेने योग्य तथा हल्के वस्त्र सर्वाधिक उपयुक्त होते हैं, क्योंकि ढीले वस्त्र पहनने-उतारने में सरल रहते हैं और रक्त-संचार बाधित नहीं करते; सूती जैसे साँस लेने योग्य तन्तु त्वचा को स्वस्थ रखते हैं और हल्के वस्त्र थकान नहीं बढ़ाते। पीछे बटन वाले वस्त्र स्वयं पहनना कठिन बना देते हैं, भारी वस्त्र थकाते हैं और अत्यधिक फैशनप्रधान वस्त्र प्रायः असुविधाजनक होते हैं। सामने की ओर बड़े बटन अथवा वेल्क्रो सर्वोत्तम रहते हैं।
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