Mathematics: 200 MCQs with Answers
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Mathematics Quiz — Topic-Wise Practice for Teaching and Government Exams
Mathematics decides more results than most candidates expect. In teacher-eligibility papers it is a full section, and in SSC and DSSSB recruitment it often separates the merit list from the waiting list. This quiz section is built to close that gap.
The questions are organised the way examiners think, not the way textbooks are printed. Each sub-topic — number system, simplification, percentage, ratio and proportion, profit and loss, time and work, speed and distance, average, algebra, geometry, mensuration, data interpretation, and mathematics pedagogy — gets its own set. You can revise one weak area at a time instead of attempting a scattered mixed test and learning nothing from the score.
Every MCQ follows the language and difficulty of the actual papers. Teaching-exam sets stay close to the NCERT syllabus and the pedagogy portion prescribed by the NCF, because that is where CTET, HTET, REET, UPTET and MPTET draw from. Recruitment-exam sets lean towards speed and shortcut-based arithmetic, which is what SSC, DSSSB, BPSC and state commissions reward.
Answers appear immediately after you submit, with a step-by-step solution and, where useful, the shorter method a trained candidate would use under time pressure. Reading why a wrong option was tempting is usually worth more than getting the sum right.
Start with any sub-topic below. Take the same quiz again after a week — the improvement in your accuracy, not just your score, is the number worth watching.
Q171. माना A = {x : x ∈ R, x > 4} और B = {x ∈ R : x < 5} हो, तो A ∩ B = ?
Right Answer: (4, 5)
समुच्चय A में वे सभी वास्तविक संख्याएँ हैं जो चार से कड़ाई से बड़ी हैं, अतः चार स्वयं उसमें सम्मिलित नहीं है और उसे विवृत अन्तराल के रूप में लिखा जाता है। इसी प्रकार समुच्चय B में वे संख्याएँ हैं जो पाँच से कड़ाई से छोटी हैं, अतः पाँच भी सम्मिलित नहीं है। दोनों का सर्वनिष्ठ लेने पर वे संख्याएँ बचेंगी जो चार से बड़ी तथा पाँच से छोटी हों। चूँकि दोनों अन्त्य बिन्दु बाहर हैं, अतः उत्तर विवृत अन्तराल चार से पाँच के रूप में लिखा जाएगा।
Q172. एक ठोस शंकु के रूप में है, जो एक अर्द्धगोले पर स्थापित है। शंकु की त्रिज्या और ऊँचाई क्रमशः 3 मीटर और 4 मीटर हैं। दिये गये ठोस का आयतन ज्ञात कीजिए :
Right Answer: 94.2 मी³
यह ठोस दो भागों से बना है, अतः उसका आयतन शंकु तथा अर्धगोले के आयतनों का योग होगा। शंकु का आयतन एक तिहाई πr²h के सूत्र से एक तिहाई गुणा 3.14 गुणा 9 गुणा 4 अर्थात् लगभग 37.68 घन मीटर आता है। अर्धगोले का आयतन दो तिहाई πr³ के सूत्र से दो तिहाई गुणा 3.14 गुणा 27 अर्थात् लगभग 56.52 घन मीटर प्राप्त होता है। दोनों को जोड़ने पर कुल आयतन लगभग 94.2 घन मीटर हो जाता है, जो दिए गए विकल्पों में दूसरा है।
Q173. यदि α, β समीकरण x² + x + 1 = 0 के मूल हैं, तो α² + β² = ?
Right Answer: –1
द्विघात समीकरण x² जोड़ x जोड़ 1 बराबर शून्य में मूलों का योग ऋण b बटा a अर्थात् ऋण 1 तथा मूलों का गुणनफल c बटा a अर्थात् 1 होता है। अब मूलों के वर्गों का योग निकालने के लिए सर्वसमिका α² जोड़ β² बराबर (α जोड़ β)² घटा 2αβ का उपयोग किया जाता है। इसमें मान रखने पर (ऋण 1)² घटा 2 गुणा 1 अर्थात् 1 घटा 2 प्राप्त होता है, जो ऋण 1 के बराबर है। ध्यातव्य है कि इस समीकरण के मूल सम्मिश्र हैं, फिर भी यह सम्बन्ध लागू होता है।
Q174. यदि f : R → R एक फलन है तथा f ( x ) = [ x ] द्वारा परिभाषित है, जहाँ [ x ] महत्तम पूर्णांक फलन है, तो :
Right Answer: f न एकैकी और न ही आच्छादी है
महत्तम पूर्णांक फलन किसी वास्तविक संख्या से छोटे या बराबर सबसे बड़े पूर्णांक को लौटाता है। यह फलन एकैकी नहीं है, क्योंकि 2.1, 2.5 तथा 2.9 जैसी अनेक भिन्न संख्याओं का प्रतिबिम्ब समान रूप से 2 ही आता है। यह आच्छादी भी नहीं है, क्योंकि इसका परिसर केवल पूर्णांकों का समुच्चय है, जबकि सहप्रान्त सम्पूर्ण वास्तविक संख्याओं का समुच्चय दिया गया है; अतः 2.5 जैसी संख्याएँ किसी का भी प्रतिबिम्ब नहीं बनतीं। इसलिए यह न एकैकी है और न आच्छादी।
Q175. हल कीजिए : (a − b)³ + (b − c)³ + (c − a)³ = ?
Right Answer: 3(a − b)(b − c)(c − a)
बीजगणित की एक प्रसिद्ध सर्वसमिका के अनुसार यदि a जोड़ b जोड़ c बराबर शून्य हो, तो a³ जोड़ b³ जोड़ c³ बराबर 3abc होता है। यहाँ तीनों पदों को क्रमशः (a घटा b), (b घटा c) तथा (c घटा a) मान लेने पर उनका योग शून्य हो जाता है, क्योंकि सभी अक्षर आपस में कट जाते हैं। अतः उपर्युक्त सर्वसमिका सीधे लागू होती है और सम्पूर्ण व्यंजक का मान 3 गुणा (a घटा b) गुणा (b घटा c) गुणा (c घटा a) प्राप्त होता है।
Q176. एक मानक विचलन का संख्यात्मक मान कभी भी नहीं हो सकता है :
Right Answer: ऋणात्मक
मानक विचलन की गणना में सर्वप्रथम प्रत्येक प्रेक्षण तथा माध्य के अन्तर का वर्ग लिया जाता है, फिर उन वर्गों का औसत निकालकर उसका धनात्मक वर्गमूल लिया जाता है। चूँकि किसी भी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं हो सकता और वर्गमूल भी धनात्मक ही लिया जाता है, अतः मानक विचलन का संख्यात्मक मान कभी ऋणात्मक नहीं हो सकता। यदि सभी प्रेक्षण आपस में समान हों तो यह शून्य हो सकता है, किन्तु उससे कम कभी नहीं। यही इसका आधारभूत गुण है।
Q177. यदि एक उर्ध्वाधर मीनार की छाया की लंबाई उसकी ऊँचाई के बराबर हो, तो सूर्य का उन्नयन कोण है :
Right Answer: 45°
माना मीनार की ऊँचाई h है, तब प्रश्नानुसार उसकी छाया की लम्बाई भी h के बराबर है। उन्नयन कोण θ के लिए स्पर्शज्या का मान लम्ब बटा आधार अर्थात् ऊँचाई बटा छाया के बराबर होता है। दोनों समान होने से tan θ बराबर एक प्राप्त होता है। जिस कोण की स्पर्शज्या एक होती है वह 45 अंश है, अतः सूर्य का उन्नयन कोण 45 अंश होगा। यदि छाया ऊँचाई से लम्बी हो तो कोण 45 अंश से कम तथा छोटी हो तो अधिक हो जाता है।
Q178. ज्ञात कीजिए : cos 510° · cos 330° + sin 390° · cos 120° = ?
बड़े कोणों को पहले मानक रूप में लाया जाता है। cos 510 अंश बराबर cos 150 अंश अर्थात् ऋण √3 बटा 2 होता है, तथा cos 330 अंश बराबर √3 बटा 2। इनका गुणनफल ऋण 3 बटा 4 आता है। इसी प्रकार sin 390 अंश बराबर sin 30 अंश अर्थात् आधा तथा cos 120 अंश बराबर ऋण आधा होता है, जिनका गुणनफल ऋण 1 बटा 4 है। दोनों को जोड़ने पर ऋण 3 बटा 4 घटा 1 बटा 4 अर्थात् ऋण 1 प्राप्त होता है। अतः सही उत्तर ऋण एक है।
Q179. समीकरणों 3 x – 5 y = 7 और –6 x + 10 y = 7 के हल हैं :
Right Answer: कोई हल नहीं
दो चरों वाले रैखिक समीकरण निकाय के हल की प्रकृति गुणांकों के अनुपात से तय होती है। यहाँ पहले समीकरण के गुणांक 3, ऋण 5 तथा 7 हैं और दूसरे के ऋण 6, 10 तथा 7। x एवं y के गुणांकों का अनुपात दोनों में ऋण आधा है, किन्तु अचर पदों का अनुपात 7 बटा 7 अर्थात् एक है। चूँकि a₁/a₂ बराबर b₁/b₂ किन्तु c₁/c₂ से भिन्न है, अतः रेखाएँ परस्पर समानान्तर हैं और कहीं नहीं मिलतीं। इसलिए निकाय असंगत है और उसका कोई हल नहीं है।
Q180. यदि 10 संख्याओं का माध्य 96 है और उनमें से एक संख्या 150 है, तो शेष नौ संख्याओं का माध्य क्या होगा ?
Right Answer: 90
दस संख्याओं का माध्य 96 दिया गया है, अतः उन सबका कुल योग 10 गुणा 96 अर्थात् 960 होगा। इनमें से एक संख्या 150 है, जिसे कुल योग में से घटाने पर शेष नौ संख्याओं का योग 960 घटा 150 अर्थात् 810 प्राप्त होता है। अब शेष नौ संख्याओं का माध्य निकालने के लिए इस योग को नौ से भाग दिया जाता है, जिससे 810 बटा 9 अर्थात् 90 उत्तर मिलता है। ध्यातव्य है कि 150 माध्य से काफी बड़ी थी, इसीलिए उसे हटाने पर माध्य 96 से घटकर 90 हो गया।
Frequently Asked Questions
References & Official Sources
Questions and answers are compiled from previous-year papers and official notifications published by the following examination authorities. Always verify the latest syllabus and pattern on the official website.
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