Mathematics: 200 MCQs with Answers
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Mathematics Quiz — Topic-Wise Practice for Teaching and Government Exams
Mathematics decides more results than most candidates expect. In teacher-eligibility papers it is a full section, and in SSC and DSSSB recruitment it often separates the merit list from the waiting list. This quiz section is built to close that gap.
The questions are organised the way examiners think, not the way textbooks are printed. Each sub-topic — number system, simplification, percentage, ratio and proportion, profit and loss, time and work, speed and distance, average, algebra, geometry, mensuration, data interpretation, and mathematics pedagogy — gets its own set. You can revise one weak area at a time instead of attempting a scattered mixed test and learning nothing from the score.
Every MCQ follows the language and difficulty of the actual papers. Teaching-exam sets stay close to the NCERT syllabus and the pedagogy portion prescribed by the NCF, because that is where CTET, HTET, REET, UPTET and MPTET draw from. Recruitment-exam sets lean towards speed and shortcut-based arithmetic, which is what SSC, DSSSB, BPSC and state commissions reward.
Answers appear immediately after you submit, with a step-by-step solution and, where useful, the shorter method a trained candidate would use under time pressure. Reading why a wrong option was tempting is usually worth more than getting the sum right.
Start with any sub-topic below. Take the same quiz again after a week — the improvement in your accuracy, not just your score, is the number worth watching.
Q141. 9^(1/3) × 9^(1/9) × 9^(1/27) × …… ∞ का मान है :
Right Answer: 3
दिया गया गुणनफल एक ही आधार 9 की घातों का है, अतः घातांकों को जोड़ा जा सकता है। घातांकों की श्रेणी 1/3 + 1/9 + 1/27 + … एक अनन्त गुणोत्तर श्रेणी है, जिसका प्रथम पद 1/3 तथा सार्व अनुपात भी 1/3 है। अनन्त गुणोत्तर श्रेणी का योग a बटा एक घटा r के सूत्र से निकलता है, अतः योग 1/3 को 2/3 से भाग देने पर 1/2 प्राप्त होता है। इस प्रकार सम्पूर्ण गुणनफल 9 की घात एक बटा दो अर्थात् 9 का वर्गमूल बनता है, जो 3 है।
Q142. यदि f(x) = x¹⁰⁰ + x⁹⁹ + …… + x + 1 हो, तो f′(1) बराबर है :
Right Answer: 5050
दिया गया फलन f(x) = x¹⁰⁰ + x⁹⁹ + … + x + 1 है। प्रत्येक पद का अवकलन करने पर f′(x) = 100x⁹⁹ + 99x⁹⁸ + … + 2x + 1 प्राप्त होता है, क्योंकि अचर पद 1 का अवकलज शून्य होता है। अब x = 1 रखने पर प्रत्येक घात का मान एक हो जाता है, अतः f′(1) = 100 + 99 + 98 + … + 2 + 1 बनता है। यह प्रथम सौ प्राकृत संख्याओं का योग है, जिसका सूत्र n(n+1)/2 है; अतः 100 × 101 बटा 2 अर्थात् 5050 उत्तर प्राप्त होता है।
Q143. सदिश 5î + 3ĵ + 4k̂ और 6î − 8ĵ − k̂ के मध्य का कोण यदि θ है, तो cos θ बराबर होगा :
Right Answer: √2 / (5√101)
दो सदिशों के बीच कोण निकालने के लिए cos θ बराबर उनके अदिश गुणनफल को उनके परिमाणों के गुणनफल से भाग देकर प्राप्त किया जाता है। यहाँ अदिश गुणनफल 5 गुणा 6 जोड़ 3 गुणा ऋण 8 जोड़ 4 गुणा ऋण 1 अर्थात् 30 घटा 24 घटा 4 बराबर 2 है। प्रथम सदिश का परिमाण मूल 25 जोड़ 9 जोड़ 16 अर्थात् मूल 50 तथा द्वितीय का मूल 36 जोड़ 64 जोड़ 1 अर्थात् मूल 101 है। अतः cos θ बराबर 2 बटा 5√2 गुणा √101, जिसे सरल करने पर √2 बटा 5√101 प्राप्त होता है।
Q144. यदि a⃗ = î + ĵ + 2k̂ और b⃗ = 3î + 2ĵ − k̂ हो, तो (a⃗ + 3b⃗)·(2a⃗ − b⃗) = ?
Right Answer: –15
सर्वप्रथम दोनों संयुक्त सदिश ज्ञात किए जाते हैं। a⃗ जोड़ 3b⃗ बराबर î जोड़ ĵ जोड़ 2k̂ जोड़ 9î जोड़ 6ĵ घटा 3k̂ अर्थात् 10î जोड़ 7ĵ घटा k̂ होता है। इसी प्रकार 2a⃗ घटा b⃗ बराबर 2î जोड़ 2ĵ जोड़ 4k̂ घटा 3î घटा 2ĵ जोड़ k̂ अर्थात् ऋण î जोड़ 0ĵ जोड़ 5k̂ बनता है। अब अदिश गुणनफल लेने पर 10 गुणा ऋण 1 जोड़ 7 गुणा 0 जोड़ ऋण 1 गुणा 5 अर्थात् ऋण 10 जोड़ 0 घटा 5 बराबर ऋण 15 प्राप्त होता है।
Q145. ज्ञात कीजिए : ∫ (−1 से 1 तक) dx / (x² + 2x + 5) = ?
Right Answer: π/8
हर को पूर्ण वर्ग में बदलने पर x² जोड़ 2x जोड़ 5 बराबर (x जोड़ 1)² जोड़ 4 प्राप्त होता है। अतः समाकल का रूप ∫ dx बटा ((x+1)² जोड़ 2²) बन जाता है, जिसका मानक समाकलन एक बटा 2 गुणा tan⁻¹((x+1)/2) होता है। अब सीमाएँ रखने पर ऊपरी सीमा x बराबर 1 पर tan⁻¹(1) अर्थात् π/4 तथा निचली सीमा x बराबर ऋण 1 पर tan⁻¹(0) अर्थात् शून्य मिलता है। दोनों का अन्तर लेकर आधे से गुणा करने पर π बटा 8 उत्तर प्राप्त होता है।
Q146. सम्मिश्र संख्या (i − 1) / (cos π/3 + i sin π/3) का मापांक क्या है ?
Right Answer: √2
भागफल के मापांक का नियम यह है कि वह अंश के मापांक को हर के मापांक से भाग देने पर प्राप्त होता है। अंश i घटा 1 अर्थात् ऋण 1 जोड़ i का मापांक मूल एक जोड़ एक अर्थात् √2 है। हर cos π/3 जोड़ i sin π/3 का मापांक मूल cos² जोड़ sin² अर्थात् एक होता है, क्योंकि किसी भी कोण के लिए यह सर्वसमिका सदैव सत्य है। अतः सम्पूर्ण संख्या का मापांक √2 बटा 1 अर्थात् √2 प्राप्त होता है। हर मात्र संख्या को घुमाता है, उसका परिमाण नहीं बदलता।
Q147. यदि बिन्दु (−1, −1, 2), (2, m, 5) और (3, 11, 6) संरेख हैं, तो m का मान क्या है ?
Right Answer: 8
तीन बिन्दु तभी संरेख होते हैं जब उनसे बनने वाले सदिश समानान्तर हों, अर्थात् उनके संगत घटकों का अनुपात समान हो। यहाँ प्रथम एवं द्वितीय बिन्दु से बना सदिश 3î जोड़ (m जोड़ 1)ĵ जोड़ 3k̂ है, तथा प्रथम एवं तृतीय बिन्दु से बना सदिश 4î जोड़ 12ĵ जोड़ 4k̂ है। समानान्तरता के लिए 3 बटा 4 बराबर (m जोड़ 1) बटा 12 बराबर 3 बटा 4 होना चाहिए। मध्य अनुपात से m जोड़ 1 बराबर 9 प्राप्त होता है, अतः m का मान 8 है।
Q148. असमिका |x + 2| ≤ 5 का हल समुच्चय है :
Right Answer: [–7, 3]
मापांक की परिभाषा के अनुसार |x जोड़ 2| ≤ 5 का अर्थ है कि x जोड़ 2 का मान ऋण 5 तथा धन 5 के बीच रहेगा, दोनों सीमाएँ सम्मिलित। अतः असमिका ऋण 5 ≤ x जोड़ 2 ≤ 5 के रूप में लिखी जाती है। अब तीनों पक्षों में से 2 घटाने पर ऋण 7 ≤ x ≤ 3 प्राप्त होता है। चूँकि असमिका में बराबर का चिह्न सम्मिलित है, अतः दोनों अन्त्य बिन्दु हल में आएँगे और हल समुच्चय संवृत अन्तराल के रूप में ऋण 7 से 3 तक लिखा जाएगा।
Q149. फलन f(x) = 7/x, x ∈ R − {0} है :
Right Answer: ह्रासमान
दिए गए फलन का अवकलन करने पर f′(x) बराबर ऋण 7 बटा x² प्राप्त होता है। यहाँ x² सदैव धनात्मक रहता है, क्योंकि x शून्य नहीं है, अतः अवकलज का चिह्न सदैव ऋणात्मक बना रहता है। किसी फलन का अवकलज ऋणात्मक होने का अर्थ है कि वह अपने प्रान्त में ह्रासमान है, अर्थात् x बढ़ने पर f(x) घटता जाता है। यही कारण है कि इसका आलेख समकोणीय अतिपरवलय के रूप में दोनों चतुर्थांशों में नीचे की ओर ढलान रखता है और यह फलन ह्रासमान कहलाता है।
Q150. उस अतिपरवलय का समीकरण क्या है जिसकी नाभिलंब जीवा की लम्बाई 8 है ?
Right Answer: x²/25 − y²/20 = 1
मानक अतिपरवलय x² बटा a² घटा y² बटा b² बराबर एक के लिए नाभिलंब जीवा की लम्बाई 2b² बटा a होती है। अब प्रत्येक विकल्प की जाँच करने पर दूसरे विकल्प में a² बराबर 25 अर्थात् a बराबर 5 तथा b² बराबर 20 मिलता है। इन्हें सूत्र में रखने पर नाभिलंब जीवा 2 गुणा 20 बटा 5 अर्थात् ठीक 8 प्राप्त होती है, जो दी गई शर्त के अनुरूप है। शेष विकल्पों में यह मान क्रमशः भिन्न आता है, और प्रथम विकल्प तो संयुग्मी अतिपरवलय का समीकरण है।
Frequently Asked Questions
References & Official Sources
Questions and answers are compiled from previous-year papers and official notifications published by the following examination authorities. Always verify the latest syllabus and pattern on the official website.
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