Economy and Banking: 73 MCQs with Answers
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0%Economy and Banking MCQ Questions in Hindi
अर्थव्यवस्था एवं बैंकिंग से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न — भारतीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग तथा अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संगठन।
Q31. अर्थशास्त्र में प्रगटित अधिमान अवधारणा का प्रयोग किसने और कब किया था ?
Right Answer: सैमुएल्सन, 1938
प्रगटित अधिमान की अवधारणा पॉल ए० सैमुएल्सन ने 1938 में प्रस्तुत की। इसका उद्देश्य उपभोक्ता सिद्धांत को उपयोगिता के अमापनीय एवं आत्मनिष्ठ आधार से मुक्त कर विशुद्ध रूप से देखे जा सकने वाले व्यवहार पर खड़ा करना था। सिद्धांत का मूल तर्क यह है कि यदि उपभोक्ता किन्हीं कीमतों पर बंडल A चुनता है जबकि बंडल B भी उसकी क्रय-शक्ति के भीतर था, तो वह A को B पर प्रगटित अधिमान दे रहा है। इसी से माँग वक्र का ऋणात्मक ढाल तथा प्रतिस्थापन्न एवं आय प्रभाव बिना तटस्थता वक्र खींचे सिद्ध किए जा सकते हैं।
Q32. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिये गये कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :
सूची-I (लागत वक्र)
(a) कुल स्थिर लागत (TFC)
(b) कुल परिवर्तनशील लागत (TVC)
(c) औसत स्थिर लागत (AFC)
(d) औसत कुल लागत (ATC)
सूची-II (आकृति)
(i) U-आकृति
(ii) क्षैतिज सरल रेखा
(iii) प्रतिलोम S आकृति
(iv) आयताकार अतिपरवलय
Right Answer: (a-ii) (b-iii) (c-iv) (d-i)
कुल स्थिर लागत उत्पादन की मात्रा से स्वतंत्र रहती है, इसलिए उसका वक्र X-अक्ष के समानान्तर क्षैतिज सरल रेखा होता है। कुल परिवर्तनशील लागत आरम्भ में घटती दर से और बाद में बढ़ती दर से बढ़ती है, अतः उसका वक्र प्रतिलोम S आकृति का बनता है। औसत स्थिर लागत में स्थिर लागत क्रमशः अधिक इकाइयों में बँटती जाती है, इसलिए वह निरन्तर घटती है और उसका वक्र आयताकार अतिपरवलय होता है, जो अक्षों को कभी नहीं छूता। औसत कुल लागत पहले घटकर न्यूनतम होती है और फिर बढ़ती है, अतः उसका वक्र U-आकृति का होता है।
Q33. 2013-14 से 2022-23 के बीच देश में कितने लोग बहुआयामी गरीबी से मुक्त हो गये ?
Right Answer: 24.8 करोड़
नीति आयोग के जनवरी 2024 के चर्चा-पत्र के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच भारत में लगभग 24.82 करोड़ अर्थात् 24.8 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। इसी अवधि में बहुआयामी गरीबी का प्रचलन 29.17 प्रतिशत से घटकर 11.28 प्रतिशत रह गया। राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जीवन-स्तर इन तीन आयामों तथा बारह संकेतकों पर आधारित है, जिनमें पोषण, विद्यालयी उपस्थिति, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत, आवास तथा बैंक खाता सम्मिलित हैं। सर्वाधिक कमी उत्तर प्रदेश, बिहार तथा मध्य प्रदेश में दर्ज की गई।
Q34. व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र शब्दों का निर्माण किसने किया तथा पहली बार किसने उपयोग में लिया ?
Right Answer: रेग्नर फ्रिश
‘माइक्रोइकोनॉमिक्स’ तथा ‘मैक्रोइकोनॉमिक्स’ शब्दों का निर्माण एवं प्रथम प्रयोग नॉर्वेजियन अर्थशास्त्री रेग्नर फ्रिश ने 1933 में किया। व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत इकाइयों — उपभोक्ता, फर्म तथा उद्योग — के व्यवहार तथा साधन-आवंटन का अध्ययन करता है, जबकि समष्टि अर्थशास्त्र सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के समुच्चयों जैसे राष्ट्रीय आय, रोजगार, सामान्य कीमत स्तर तथा आर्थिक संवृद्धि से सम्बद्ध है। फ्रिश ने ‘इकोनोमेट्रिक्स’ शब्द भी गढ़ा और अर्थमिति के विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें 1969 में यान टिनबर्गन के साथ प्रथम नोबेल पुरस्कार मिला।
Q35. कीमत में परिवर्तन के प्रति माँग की प्रतिक्रिया को दर्शाने के लिए लोच की अभिव्यंजना का आविष्कार किसने किया था ?
Right Answer: एल्फ्रेड मार्शल
माँग की कीमत लोच की अभिव्यंजना का आविष्कार एल्फ्रेड मार्शल ने किया और उन्होंने इसे अपनी 1890 की कृति ‘प्रिंसिपल्स ऑफ इकोनॉमिक्स’ में विकसित किया। लोच यह मापती है कि कीमत में एक प्रतिशत परिवर्तन होने पर माँगी गई मात्रा में कितने प्रतिशत परिवर्तन होता है, अर्थात् यह माँग की कीमत-संवेदनशीलता का शुद्ध संख्यात्मक माप है। मार्शल ने ही उपभोक्ता की बचत, प्रतिनिधि फर्म तथा अल्पकाल एवं दीर्घकाल जैसी अनेक आधारभूत अवधारणाएँ दीं। लोच का माप इकाई-निरपेक्ष होता है, इसलिए भिन्न वस्तुओं की तुलना सम्भव हो जाती है।
Q36. निम्न में से कौन - सा कथन सही नहीं है ?
Right Answer: यदि स्थानापन्न वस्तु की कीमत बढ़ जाती है, तो माँग वक्र बायें विवर्तित हो जाता है।
माँग वक्र का विवर्तन कीमत के अतिरिक्त अन्य निर्धारकों में परिवर्तन से होता है। आय बढ़ने पर सामान्य वस्तु का माँग वक्र दायें और हीन वस्तु का बायें विवर्तित होता है। किसी वस्तु के पक्ष में रुचि बदलने पर उसका माँग वक्र दायें खिसक जाता है। चौथा कथन गलत है, क्योंकि स्थानापन्न वस्तु की कीमत बढ़ने पर उपभोक्ता उससे हटकर विचाराधीन वस्तु की ओर मुड़ता है, अतः उसकी माँग बढ़ती है और वक्र दायें विवर्तित होता है, बायें नहीं। स्थानापन्न वस्तुओं की क्रॉस लोच धनात्मक होती है, जबकि पूरक वस्तुओं की ऋणात्मक।
Q37. किसी देश का व्यापार संतुलन होता है :
Right Answer: वस्तुओं के निर्यात व आयात के मूल्यों का अंतर।
किसी देश का व्यापार संतुलन उसके दृश्य मदों अर्थात् वस्तुओं के निर्यात तथा आयात के मूल्यों का अन्तर होता है। इसमें सेवाओं, निवेश आय अथवा हस्तांतरण भुगतानों को सम्मिलित नहीं किया जाता। निर्यात आयात से अधिक हो तो व्यापार संतुलन अनुकूल तथा कम हो तो प्रतिकूल कहलाता है। इसके विपरीत भुगतान संतुलन एक व्यापक अवधारणा है, जिसमें वस्तुएँ, सेवाएँ, एकपक्षीय हस्तांतरण तथा पूँजी खाते के समस्त लेन-देन सम्मिलित होते हैं। भुगतान संतुलन लेखांकन की दृष्टि से सदैव संतुलित रहता है, जबकि व्यापार संतुलन असंतुलित हो सकता है।
Q38. भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार मुद्रा पूर्ति की माप का M₄ है :
Right Answer: M₄ = जनता के पास नकदी + माँग जमा + सावधि जमा + पोस्ट ऑफिस के पास कुल जमा (राष्ट्रीय बचत पत्रों को छोड़कर)
भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रा पूर्ति के चार माप प्रस्तुत करता है। M₁ में जनता के पास नकदी, बैंकों की माँग जमा तथा रिजर्व बैंक के पास अन्य जमा आती हैं और यह सर्वाधिक तरल है, इसीलिए इसे संकुचित मुद्रा कहते हैं। M₂ में M₁ के साथ डाकघर की बचत जमा जुड़ती हैं। M₃ में M₁ के साथ बैंकों की सावधि जमा जुड़ती हैं और इसे व्यापक मुद्रा कहा जाता है; मौद्रिक नीति में इसी का सर्वाधिक उपयोग होता है। M₄ सबसे व्यापक माप है, जिसमें M₃ के साथ डाकघर की कुल जमा जोड़ी जाती हैं, किन्तु राष्ट्रीय बचत पत्र छोड़ दिए जाते हैं।
Q39. संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों ने संधारणीय विकास के लक्ष्यों को कब स्वीकार किया ?
Right Answer: 2015
संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने सितम्बर 2015 में न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में आयोजित शिखर सम्मेलन में ‘संधारणीय विकास हेतु 2030 एजेण्डा’ को सर्वसम्मति से स्वीकार किया, जिसमें सत्रह संधारणीय विकास लक्ष्य तथा एक सौ उनहत्तर उपलक्ष्य सम्मिलित हैं। ये लक्ष्य 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुए और इनकी अवधि 2030 तक है। इन्होंने 2000 में अपनाए गए आठ सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों का स्थान लिया। एजेण्डा का मूल सिद्धांत है कि विकास की प्रक्रिया में कोई भी पीछे न छूटे और आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय तीनों आयामों में सन्तुलन बना रहे।
Q40. यदि आवश्यक नकद कोष अनुपात R हो, तो साख गुणक का मान होगा : 1 −
Right Answer: 1/R
साख गुणक अथवा मुद्रा गुणक यह बताता है कि प्राथमिक जमा की एक इकाई से बैंकिंग व्यवस्था कुल कितनी साख का सृजन कर सकती है। यदि आवश्यक नकद कोष अनुपात R हो तो प्रत्येक बैंक अपनी जमा का R भाग कोष में रखकर शेष उधार देता है, और यह प्रक्रिया एक गुणोत्तर श्रेणी बनाती है जिसका योग 1/R होता है। अतः साख गुणक का मान 1/R है। उदाहरणार्थ यदि नकद कोष अनुपात 20 प्रतिशत हो तो गुणक 5 होगा और 1,000 रुपये की प्राथमिक जमा से 5,000 रुपये तक की कुल जमा उत्पन्न हो सकेगी। अनुपात बढ़ने पर साख सृजन की क्षमता घट जाती है।