Economy and Banking - Microeconomics: 13 MCQs with Answers
Economy and Banking- Microeconomics
उपभोक्ता व्यवहार, माँग एवं लोच, उत्पादन फलन, लागत वक्र, बाजार संरचना तथा उत्पादन संभावना वक्र पर बहुविकल्पीय प्रश्न।Your Progress
0%Q1. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिये गये कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :
सूची-I
(a) X तटस्थ है
(b) Y तटस्थ है
(c) MRSxy स्थिर है
(d) MRSxy वर्धमान है
सूची-II
(i) मूलबिंदु के प्रति नतोदर तटस्थता वक्र
(ii) ऋणात्मक ढाल का सरल रेखीय तटस्थता वक्र
(iii) क्षैतिज तटस्थता वक्र
(iv) उदग्र तटस्थता वक्र
Right Answer: (a-iii) (b-iv) (c-ii) (d-i)
यदि X तटस्थ वस्तु है तो उपभोक्ता की सन्तुष्टि केवल Y से मिलती है; अतः Y स्थिर रखकर X कितना भी बदला जाए सन्तुष्टि वही रहती है और तटस्थता वक्र क्षैतिज हो जाता है। इसके विपरीत Y तटस्थ होने पर सन्तुष्टि केवल X पर निर्भर करती है और वक्र उदग्र अर्थात् ऊर्ध्वाधर हो जाता है। प्रतिस्थापन की सीमांत दर स्थिर होने का अर्थ है दोनों वस्तुएँ पूर्ण स्थानापन्न हैं, अतः वक्र ऋणात्मक ढाल वाली सरल रेखा बनता है। और प्रतिस्थापन की सीमांत दर बढ़ती जाए तो वक्र मूलबिंदु के प्रति नतोदर हो जाता है।
Q2. उत्पादन की पहली अवस्था कब समाप्त होती है ?
Right Answer: जब परिवर्तनशील साधन की औसत उत्पत्ति अधिकतम हो।
उत्पत्ति के परिवर्तनशील अनुपात के नियम के अन्तर्गत उत्पादन की तीन अवस्थाएँ होती हैं। पहली अवस्था तब समाप्त होती है जब परिवर्तनशील साधन की औसत उत्पत्ति अपने अधिकतम बिन्दु पर पहुँच जाती है, और ठीक उसी बिन्दु पर सीमांत उत्पाद औसत उत्पाद के बराबर होता है। इस अवस्था में स्थिर साधन का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता, इसलिए विवेकशील उत्पादक यहाँ रुकता नहीं। दूसरी अवस्था तब समाप्त होती है जब सीमांत उत्पाद शून्य और कुल उत्पाद अधिकतम हो जाता है; उत्पादन का विवेकपूर्ण क्षेत्र यही दूसरी अवस्था मानी जाती है।
Q3. निम्न में से कौन - सा कथन सही है ?
Right Answer: गिफिन वस्तु के लिए कीमत में परिवर्तन का आय प्रभाव धनात्मक तथा प्रतिस्थापन्न प्रभाव से अधिक प्रबल होता है।
कीमत प्रभाव प्रतिस्थापन्न प्रभाव तथा आय प्रभाव का योग होता है। प्रतिस्थापन्न प्रभाव सदैव ऋणात्मक रहता है, अर्थात् वस्तु सस्ती होने पर उसकी माँग बढ़ती ही है। सामान्य वस्तु के लिए आय प्रभाव भी ऋणात्मक होता है और दोनों एक ही दिशा में कार्य करते हैं। हीन वस्तु के लिए आय प्रभाव धनात्मक हो जाता है, अर्थात् वह प्रतिस्थापन्न प्रभाव के विरुद्ध कार्य करता है, किन्तु सामान्यतः उससे दुर्बल रहता है। गिफिन वस्तु एक विशिष्ट हीन वस्तु है जिसमें यह धनात्मक आय प्रभाव प्रतिस्थापन्न प्रभाव से भी प्रबल हो जाता है, फलतः माँग वक्र ऊपर की ओर ढालू हो जाता है।
Q4. निम्न कथनों को पढ़कर नीचे दिये गये कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :
(a) उत्पादन संभावना वक्र को रूपांतरण वक्र भी कहते हैं।
(b) उत्पादन संभावना वक्र के ढाल के निरपेक्ष मान को x की y के लिए रूपांतरण की सीमांत दर (MRTxy) कहते हैं।
(c) रूपांतरण की सीमांत दर MCx/MCy के बराबर होती है।
(d) साधनों की अपूर्ण स्थानापन्नता के कारण उत्पादन संभावना वक्र मूल बिंदु के प्रति उन्नतोदर होता है।
Right Answer: केवल (a), (b) व (c) सही हैं
पहले तीन कथन सही हैं। उत्पादन संभावना वक्र को रूपांतरण वक्र भी कहा जाता है, क्योंकि उस पर चलने का अर्थ है एक वस्तु के उत्पादन को दूसरी में रूपांतरित करना। इसके ढाल का निरपेक्ष मान रूपांतरण की सीमांत दर कहलाता है और यह दोनों वस्तुओं की सीमांत लागतों के अनुपात के बराबर होती है। कथन (d) गलत है, क्योंकि साधनों की अपूर्ण स्थानापन्नता के कारण अवसर लागत बढ़ती जाती है और वक्र मूल बिंदु के प्रति नतोदर अर्थात् बाहर की ओर उभरा हुआ होता है, उन्नतोदर नहीं।
Q5. यदि कॉब डगलस उत्पादन फलन Q = AL α K β हो तथा α + β < 1 हो, तो यह दर्शाता है :
Right Answer: पैमाने के घटते प्रतिफल
कॉब-डगलस उत्पादन फलन में घातांक α तथा β क्रमशः श्रम एवं पूँजी की उत्पादन-लोच बताते हैं और इनका योग पैमाने के प्रतिफल की प्रकृति निर्धारित करता है। यदि दोनों साधनों को एक ही अनुपात में बढ़ाया जाए तो उत्पादन उसी अनुपात की α+β घात से बढ़ता है। जब α+β एक के बराबर हो तो पैमाने के स्थिर प्रतिफल, एक से अधिक हो तो बढ़ते प्रतिफल और एक से कम हो तो पैमाने के घटते प्रतिफल मिलते हैं। प्रश्न में योग एक से कम है, अतः यह पैमाने के घटते प्रतिफल दर्शाता है, जिसमें साधन दुगुने करने पर उत्पादन दुगुने से कम बढ़ता है।
Q6. अर्थशास्त्र में प्रगटित अधिमान अवधारणा का प्रयोग किसने और कब किया था ?
Right Answer: सैमुएल्सन, 1938
प्रगटित अधिमान की अवधारणा पॉल ए० सैमुएल्सन ने 1938 में प्रस्तुत की। इसका उद्देश्य उपभोक्ता सिद्धांत को उपयोगिता के अमापनीय एवं आत्मनिष्ठ आधार से मुक्त कर विशुद्ध रूप से देखे जा सकने वाले व्यवहार पर खड़ा करना था। सिद्धांत का मूल तर्क यह है कि यदि उपभोक्ता किन्हीं कीमतों पर बंडल A चुनता है जबकि बंडल B भी उसकी क्रय-शक्ति के भीतर था, तो वह A को B पर प्रगटित अधिमान दे रहा है। इसी से माँग वक्र का ऋणात्मक ढाल तथा प्रतिस्थापन्न एवं आय प्रभाव बिना तटस्थता वक्र खींचे सिद्ध किए जा सकते हैं।
Q7. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिये गये कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :
सूची-I (लागत वक्र)
(a) कुल स्थिर लागत (TFC)
(b) कुल परिवर्तनशील लागत (TVC)
(c) औसत स्थिर लागत (AFC)
(d) औसत कुल लागत (ATC)
सूची-II (आकृति)
(i) U-आकृति
(ii) क्षैतिज सरल रेखा
(iii) प्रतिलोम S आकृति
(iv) आयताकार अतिपरवलय
Right Answer: (a-ii) (b-iii) (c-iv) (d-i)
कुल स्थिर लागत उत्पादन की मात्रा से स्वतंत्र रहती है, इसलिए उसका वक्र X-अक्ष के समानान्तर क्षैतिज सरल रेखा होता है। कुल परिवर्तनशील लागत आरम्भ में घटती दर से और बाद में बढ़ती दर से बढ़ती है, अतः उसका वक्र प्रतिलोम S आकृति का बनता है। औसत स्थिर लागत में स्थिर लागत क्रमशः अधिक इकाइयों में बँटती जाती है, इसलिए वह निरन्तर घटती है और उसका वक्र आयताकार अतिपरवलय होता है, जो अक्षों को कभी नहीं छूता। औसत कुल लागत पहले घटकर न्यूनतम होती है और फिर बढ़ती है, अतः उसका वक्र U-आकृति का होता है।
Q8. कीमत में परिवर्तन के प्रति माँग की प्रतिक्रिया को दर्शाने के लिए लोच की अभिव्यंजना का आविष्कार किसने किया था ?
Right Answer: एल्फ्रेड मार्शल
माँग की कीमत लोच की अभिव्यंजना का आविष्कार एल्फ्रेड मार्शल ने किया और उन्होंने इसे अपनी 1890 की कृति ‘प्रिंसिपल्स ऑफ इकोनॉमिक्स’ में विकसित किया। लोच यह मापती है कि कीमत में एक प्रतिशत परिवर्तन होने पर माँगी गई मात्रा में कितने प्रतिशत परिवर्तन होता है, अर्थात् यह माँग की कीमत-संवेदनशीलता का शुद्ध संख्यात्मक माप है। मार्शल ने ही उपभोक्ता की बचत, प्रतिनिधि फर्म तथा अल्पकाल एवं दीर्घकाल जैसी अनेक आधारभूत अवधारणाएँ दीं। लोच का माप इकाई-निरपेक्ष होता है, इसलिए भिन्न वस्तुओं की तुलना सम्भव हो जाती है।
Q9. निम्न में से कौन - सा कथन सही नहीं है ?
Right Answer: यदि स्थानापन्न वस्तु की कीमत बढ़ जाती है, तो माँग वक्र बायें विवर्तित हो जाता है।
माँग वक्र का विवर्तन कीमत के अतिरिक्त अन्य निर्धारकों में परिवर्तन से होता है। आय बढ़ने पर सामान्य वस्तु का माँग वक्र दायें और हीन वस्तु का बायें विवर्तित होता है। किसी वस्तु के पक्ष में रुचि बदलने पर उसका माँग वक्र दायें खिसक जाता है। चौथा कथन गलत है, क्योंकि स्थानापन्न वस्तु की कीमत बढ़ने पर उपभोक्ता उससे हटकर विचाराधीन वस्तु की ओर मुड़ता है, अतः उसकी माँग बढ़ती है और वक्र दायें विवर्तित होता है, बायें नहीं। स्थानापन्न वस्तुओं की क्रॉस लोच धनात्मक होती है, जबकि पूरक वस्तुओं की ऋणात्मक।
Q10. जब MR = 0 हो, तो माँग की कीमत लोच (|e|) का मान होता है :
Right Answer: = 1
सीमांत आगम, औसत आगम तथा माँग की कीमत लोच के बीच सम्बन्ध इस सूत्र से व्यक्त होता है — सीमांत आगम बराबर औसत आगम गुणा एक घटा एक बटा लोच। जब लोच का निरपेक्ष मान ठीक एक हो, तो कोष्ठक का मान शून्य हो जाता है और सीमांत आगम भी शून्य हो जाता है। ठीक इसी बिन्दु पर कुल आगम अधिकतम होता है। जब लोच एक से अधिक हो तो सीमांत आगम धनात्मक रहता है और कीमत घटाने पर कुल आगम बढ़ता है, तथा लोच एक से कम होने पर सीमांत आगम ऋणात्मक हो जाता है और कुल आगम घटने लगता है।