Economy and Banking - Macroeconomics and National Income: 12 MCQs with Answers

Macroeconomics and National Income - Economy and Banking
Economy and Banking - Macroeconomics and National Income

Economy and Banking- Macroeconomics and National Income

राष्ट्रीय आय, उपभोग परिकल्पनाएँ, गुणक, राजकोषीय घाटा, भुगतान संतुलन तथा समष्टि अर्थशास्त्र की अवधारणाओं पर बहुविकल्पीय प्रश्न।

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Q1. मार्शल - लर्नर शर्त के अनुसार मुद्रा के अवमूल्यन से भुगतान संतुलन में सुधार होता है। यदि आयात की माँग की कीमत लोच व निर्यात की माँग की कीमत लोच का निरपेक्ष मान :

Right Answer: एक से अधिक हो


Explanation:

मार्शल-लर्नर शर्त बताती है कि मुद्रा के अवमूल्यन से भुगतान संतुलन में सुधार तभी होगा जब आयात की माँग की कीमत लोच तथा निर्यात की माँग की कीमत लोच के निरपेक्ष मानों का योग एक से अधिक हो। अवमूल्यन से निर्यात विदेशियों के लिए सस्ते और आयात स्वदेश में महँगे हो जाते हैं। यदि माँग पर्याप्त लोचदार है तो निर्यात की मात्रा तथा आयात में कमी इतनी होगी कि व्यापार संतुलन सुधर जाएगा। लोच कम होने पर मूल्य-प्रभाव मात्रा-प्रभाव पर भारी पड़ता है और आरम्भ में घाटा बढ़ता है, जिसे J-वक्र प्रभाव कहते हैं।

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Q2. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिये गये कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :

सूची-I
(a) निरपेक्ष आय परिकल्पना
(b) सापेक्षिक आय परिकल्पना
(c) जीवन चक्र परिकल्पना
(d) स्थायी आय परिकल्पना

सूची-II
(i) फ्रेंको मोदिग्लियानी, आर० ई० ब्रुम्बर्ग तथा ए० एण्डो
(ii) मिल्टन फ्रायडमैन
(iii) आर्थर स्मिथीज तथा जेम्स टॉबिन
(iv) जेम्स ड्यूसेनबरी

Right Answer: (a-iii) (b-iv) (c-i) (d-ii)


Explanation:

कीन्स की निरपेक्ष आय परिकल्पना को अनुभवजन्य आधार पर आगे बढ़ाने तथा उसका बचाव करने का कार्य आर्थर स्मिथीज तथा जेम्स टॉबिन ने किया। सापेक्षिक आय परिकल्पना जेम्स ड्यूसेनबरी की देन है, जिसमें प्रदर्शन प्रभाव तथा रैचेट प्रभाव के माध्यम से बताया गया कि उपभोग व्यक्ति की निरपेक्ष आय पर नहीं, बल्कि दूसरों की तुलना में उसकी सापेक्ष स्थिति पर निर्भर करता है। जीवन चक्र परिकल्पना मोदिग्लियानी, ब्रुम्बर्ग तथा एण्डो ने दी, जिसमें उपभोग सम्पूर्ण जीवनकाल के संसाधनों से जुड़ा है। स्थायी आय परिकल्पना मिल्टन फ्रायडमैन की है।

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Q3. सर्वप्रथम किसने राष्ट्रीय आय में आकलन की तीन विधियों पर जोर दिया ?

Right Answer: साइमन कुजनेट


Explanation:

राष्ट्रीय आय के आकलन की तीन विधियों — उत्पादन अथवा मूल्यवर्धित विधि, आय विधि तथा व्यय विधि — के महत्त्व पर सर्वप्रथम बल देने का श्रेय साइमन कुजनेट को जाता है। उन्होंने 1930 के दशक में अमेरिका के लिए व्यवस्थित राष्ट्रीय आय अनुमान तैयार किए और दिखाया कि तीनों विधियों से गणना करने पर सैद्धान्तिक रूप से एक ही परिणाम आना चाहिए, क्योंकि उत्पादन, आय एवं व्यय एक ही प्रवाह के तीन दृष्टिकोण हैं। इसी कार्य के लिए उन्हें 1971 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला और उन्हें राष्ट्रीय आय लेखांकन का जनक कहा जाता है।

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Q4. निम्न कथनों को पढ़कर नीचे दिये गये कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :

(a) राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ

(b) सकल राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (राजस्व प्राप्तियाँ + गैर-ऋण से सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ)

(c) सकल राजकोषीय घाटा = सकल घरेलू ऋण + भारतीय रिजर्व बैंक से ऋण + विदेशों से ऋण

(d) सकल प्राथमिक घाटा = सकल राजकोषीय घाटा − सकल ब्याज दायित्व

Right Answer: (a), (b), (c) और (d) सही हैं


Explanation:

चारों कथन सही हैं। राजस्व घाटा राजस्व व्यय तथा राजस्व प्राप्तियों का अन्तर है और यह बताता है कि सरकार अपने दैनिक उपभोग-व्यय के लिए भी उधार ले रही है। सकल राजकोषीय घाटा कुल व्यय में से राजस्व प्राप्तियाँ तथा गैर-ऋण सृजित पूँजीगत प्राप्तियाँ घटाकर निकाला जाता है और यह सरकार की कुल उधारी आवश्यकता को दर्शाता है। इसी कारण इसे वित्तपोषण की दृष्टि से घरेलू ऋण, रिजर्व बैंक से ऋण तथा विदेशी ऋण के योग के रूप में भी लिखा जाता है। प्राथमिक घाटा राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान घटाने पर मिलता है।

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Q5. यदि पूर्ण रोजगार पर राष्ट्रीय आय 10,000 है, स्फीतिकारक अंतराल 400 है तथा गुणक का मान 5 है, तो राष्ट्रीय आय का साम्य मूल्य होगा :

Right Answer: 12,000


Explanation:

स्फीतिकारक अंतराल वह मात्रा है जितनी वास्तविक समग्र माँग पूर्ण रोजगार स्तर की समग्र माँग से अधिक होती है। इस अतिरिक्त माँग का प्रभाव गुणक के माध्यम से आय पर पड़ता है, इसलिए आय में वृद्धि स्फीतिकारक अंतराल तथा गुणक के गुणनफल के बराबर होती है। यहाँ अंतराल 400 तथा गुणक 5 है, अतः आय में वृद्धि 400 गुणा 5 अर्थात् 2,000 होगी। इसे पूर्ण रोजगार आय 10,000 में जोड़ने पर साम्य आय 12,000 प्राप्त होती है। ध्यातव्य है कि पूर्ण रोजगार के बाद वास्तविक उत्पादन नहीं बढ़ता, केवल कीमतें बढ़ती हैं।

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Q6. निम्न में से कौन - सा राष्ट्रीय आय का भाग नहीं है ?

Right Answer: वृद्धावस्था पेंशन


Explanation:

राष्ट्रीय आय में केवल वही भुगतान गिने जाते हैं जो उत्पादन प्रक्रिया में किसी वास्तविक योगदान के बदले प्राप्त होते हैं। सामाजिक सुरक्षा में नियोक्ता का अंशदान, बोनस तथा ग्रेच्युटी — ये तीनों कर्मचारी के पारिश्रमिक के ही अंग हैं, अतः राष्ट्रीय आय में सम्मिलित किए जाते हैं। इसके विपरीत वृद्धावस्था पेंशन एक हस्तांतरण भुगतान है, जिसमें प्राप्तकर्ता बदले में कोई वस्तु या सेवा नहीं देता। हस्तांतरण भुगतान केवल क्रयशक्ति का पुनर्वितरण करते हैं, नया उत्पादन नहीं जोड़ते, इसलिए उन्हें राष्ट्रीय आय की गणना से बाहर रखा जाता है।

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Q7. यदि मौद्रिक सकल घरेलू उत्पाद 3000 रु० हो तथा सकल घरेलू उत्पाद अपस्फीति कारक 150 हो, तो वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद होगा :

Right Answer: 2000 रु०


Explanation:

वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वह मूल्य है जो आधार वर्ष की कीमतों पर मापा जाता है और इसलिए उसमें कीमत-वृद्धि का प्रभाव सम्मिलित नहीं होता। इसे निकालने का सूत्र है — वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद बराबर मौद्रिक सकल घरेलू उत्पाद को अपस्फीति कारक से भाग देकर सौ से गुणा करना। यहाँ मौद्रिक सकल घरेलू उत्पाद 3000 रुपये तथा अपस्फीति कारक 150 है। अतः 3000 को 150 से भाग देने पर 20 और सौ से गुणा करने पर 2000 रुपये प्राप्त होते हैं। इस प्रकार वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद 2000 रुपये होगा।

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Q8. संतुलित बजट गुणांक की अवधारणा सबसे पहले किसने दी थी ?

Right Answer: टी० हावेल्मो


Explanation:

संतुलित बजट गुणांक की अवधारणा नॉर्वेजियन अर्थशास्त्री ट्रिग्वे हावेल्मो ने दी, इसीलिए इसे हावेल्मो प्रमेय भी कहा जाता है। इसके अनुसार यदि सरकार अपने व्यय तथा करों दोनों को समान मात्रा में बढ़ाए, जिससे बजट संतुलित बना रहे, तब भी राष्ट्रीय आय उतनी ही मात्रा से बढ़ जाती है और गुणांक का मान ठीक एक होता है। इसका कारण यह है कि सरकारी व्यय का पूरा भाग समग्र माँग में जुड़ता है, जबकि कर का प्रभाव केवल उपभोग पर पड़ता है, क्योंकि करदाता उसका कुछ भाग बचत में से चुकाता है। हावेल्मो को 1989 में नोबेल पुरस्कार मिला।

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Q9. व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र शब्दों का निर्माण किसने किया तथा पहली बार किसने उपयोग में लिया ?

Right Answer: रेग्नर फ्रिश


Explanation:

‘माइक्रोइकोनॉमिक्स’ तथा ‘मैक्रोइकोनॉमिक्स’ शब्दों का निर्माण एवं प्रथम प्रयोग नॉर्वेजियन अर्थशास्त्री रेग्नर फ्रिश ने 1933 में किया। व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत इकाइयों — उपभोक्ता, फर्म तथा उद्योग — के व्यवहार तथा साधन-आवंटन का अध्ययन करता है, जबकि समष्टि अर्थशास्त्र सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के समुच्चयों जैसे राष्ट्रीय आय, रोजगार, सामान्य कीमत स्तर तथा आर्थिक संवृद्धि से सम्बद्ध है। फ्रिश ने ‘इकोनोमेट्रिक्स’ शब्द भी गढ़ा और अर्थमिति के विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें 1969 में यान टिनबर्गन के साथ प्रथम नोबेल पुरस्कार मिला।

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Q10. किसी देश का व्यापार संतुलन होता है :

Right Answer: वस्तुओं के निर्यात व आयात के मूल्यों का अंतर।


Explanation:

किसी देश का व्यापार संतुलन उसके दृश्य मदों अर्थात् वस्तुओं के निर्यात तथा आयात के मूल्यों का अन्तर होता है। इसमें सेवाओं, निवेश आय अथवा हस्तांतरण भुगतानों को सम्मिलित नहीं किया जाता। निर्यात आयात से अधिक हो तो व्यापार संतुलन अनुकूल तथा कम हो तो प्रतिकूल कहलाता है। इसके विपरीत भुगतान संतुलन एक व्यापक अवधारणा है, जिसमें वस्तुएँ, सेवाएँ, एकपक्षीय हस्तांतरण तथा पूँजी खाते के समस्त लेन-देन सम्मिलित होते हैं। भुगतान संतुलन लेखांकन की दृष्टि से सदैव संतुलित रहता है, जबकि व्यापार संतुलन असंतुलित हो सकता है।

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Published: 03 August 2026 | Last Updated: 03 September 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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