Economy and Banking: 89 MCQs with Answers
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0%Economy and Banking MCQ Questions and Answers in Hindi for Exams
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अर्थव्यवस्था एवं बैंकिंग से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न — भारतीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग तथा अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संगठन।
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Q21. निम्न कथनों को पढ़कर नीचे दिये गये कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :
(i) इसका विकास मोरिस डी० मोरिस ने किया था।
(ii) यह लोगों के भौतिक खुशहाली के स्तर को मापता है।
(iii) इसमें तीन सूचकांकों — जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्युदर तथा प्रति व्यक्ति आय — को शामिल किया गया है।
(iv) इसका निर्माण 1977 के लिए किया गया।
Right Answer: केवल (i), (ii) व (iv) सही हैं
Explanation:
भौतिक जीवन गुणवत्ता सूचकांक का विकास मोरिस डी० मोरिस ने विदेशी विकास परिषद के लिए किया और इसका उद्देश्य लोगों की भौतिक खुशहाली को आय के स्थान पर उपलब्धियों से मापना था। कथन (iii) गलत है, क्योंकि इसके तीन घटक जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्युदर तथा साक्षरता दर हैं — प्रति व्यक्ति आय इसमें जानबूझकर सम्मिलित नहीं की गई। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि यह विशुद्ध रूप से गैर-आय सूचकांक है। तीनों घटकों को शून्य से सौ के पैमाने पर लाकर उनका सरल औसत निकाला जाता है।
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Q22. अकाल के कारण की विवेचना के लिए खाद्यान्न उपलब्धता की कमी (Food Availability Decline − FAD) का सिद्धांत किसने दिया था ?
Right Answer: अमर्त्य सेन
Explanation:
खाद्यान्न उपलब्धता में कमी अर्थात् एफ० ए० डी० वह पारम्परिक व्याख्या है जिसके अनुसार अकाल का कारण किसी क्षेत्र में कुल खाद्यान्न उपलब्धता का घट जाना होता है। अकाल के अर्थशास्त्र को व्यवस्थित रूप देने वाले अमर्त्य सेन ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘पॉवर्टी एण्ड फैमिन्स’ में इसी ढाँचे को केन्द्र में रखकर विश्लेषण किया और आगे चलकर अधिकारिता उपागम प्रस्तुत किया। उन्होंने 1943 के बंगाल के अकाल का उदाहरण देकर दिखाया कि अनाज उपलब्ध होते हुए भी लोग भूख से मरे, क्योंकि उनकी क्रय-शक्ति एवं विनिमय-अधिकारिता समाप्त हो गई थी।
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Q23. यदि पूर्ण रोजगार पर राष्ट्रीय आय 10,000 है, स्फीतिकारक अंतराल 400 है तथा गुणक का मान 5 है, तो राष्ट्रीय आय का साम्य मूल्य होगा :
Right Answer: 12,000
Explanation:
स्फीतिकारक अंतराल वह मात्रा है जितनी वास्तविक समग्र माँग पूर्ण रोजगार स्तर की समग्र माँग से अधिक होती है। इस अतिरिक्त माँग का प्रभाव गुणक के माध्यम से आय पर पड़ता है, इसलिए आय में वृद्धि स्फीतिकारक अंतराल तथा गुणक के गुणनफल के बराबर होती है। यहाँ अंतराल 400 तथा गुणक 5 है, अतः आय में वृद्धि 400 गुणा 5 अर्थात् 2,000 होगी। इसे पूर्ण रोजगार आय 10,000 में जोड़ने पर साम्य आय 12,000 प्राप्त होती है। ध्यातव्य है कि पूर्ण रोजगार के बाद वास्तविक उत्पादन नहीं बढ़ता, केवल कीमतें बढ़ती हैं।
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Q24. निम्न में से कौन - सा राष्ट्रीय आय का भाग नहीं है ?
Right Answer: वृद्धावस्था पेंशन
Explanation:
राष्ट्रीय आय में केवल वही भुगतान गिने जाते हैं जो उत्पादन प्रक्रिया में किसी वास्तविक योगदान के बदले प्राप्त होते हैं। सामाजिक सुरक्षा में नियोक्ता का अंशदान, बोनस तथा ग्रेच्युटी — ये तीनों कर्मचारी के पारिश्रमिक के ही अंग हैं, अतः राष्ट्रीय आय में सम्मिलित किए जाते हैं। इसके विपरीत वृद्धावस्था पेंशन एक हस्तांतरण भुगतान है, जिसमें प्राप्तकर्ता बदले में कोई वस्तु या सेवा नहीं देता। हस्तांतरण भुगतान केवल क्रयशक्ति का पुनर्वितरण करते हैं, नया उत्पादन नहीं जोड़ते, इसलिए उन्हें राष्ट्रीय आय की गणना से बाहर रखा जाता है।
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Q25. निम्न देशों में से किस देश का स्थान 2022 में मानव विकास में सबसे नीचे था ?
Right Answer: भारत
Explanation:
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की मानव विकास रिपोर्ट 2023-24 में 2022 के आँकड़ों के आधार पर भारत का स्थान 193 देशों में 134वाँ रहा और उसका मानव विकास सूचकांक मान 0.644 था। इसकी तुलना में श्रीलंका 78वें, सूरीनाम 98वें तथा भूटान 125वें स्थान पर रहे। अतः दिए गए देशों में भारत का स्थान सबसे नीचे था। भारत को मध्यम मानव विकास श्रेणी में रखा गया है। सूचकांक तीन आयामों — जन्म के समय जीवन प्रत्याशा, शिक्षा के वर्ष तथा प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय — के ज्यामितीय माध्य से निकाला जाता है।
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Q26. निम्न में से कौन - सा कथन सही है ?
Right Answer: गिफिन वस्तु के लिए कीमत में परिवर्तन का आय प्रभाव धनात्मक तथा प्रतिस्थापन्न प्रभाव से अधिक प्रबल होता है।
Explanation:
कीमत प्रभाव प्रतिस्थापन्न प्रभाव तथा आय प्रभाव का योग होता है। प्रतिस्थापन्न प्रभाव सदैव ऋणात्मक रहता है, अर्थात् वस्तु सस्ती होने पर उसकी माँग बढ़ती ही है। सामान्य वस्तु के लिए आय प्रभाव भी ऋणात्मक होता है और दोनों एक ही दिशा में कार्य करते हैं। हीन वस्तु के लिए आय प्रभाव धनात्मक हो जाता है, अर्थात् वह प्रतिस्थापन्न प्रभाव के विरुद्ध कार्य करता है, किन्तु सामान्यतः उससे दुर्बल रहता है। गिफिन वस्तु एक विशिष्ट हीन वस्तु है जिसमें यह धनात्मक आय प्रभाव प्रतिस्थापन्न प्रभाव से भी प्रबल हो जाता है, फलतः माँग वक्र ऊपर की ओर ढालू हो जाता है।
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Q27. निम्न कथनों को पढ़कर नीचे दिये गये कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :
(a) उत्पादन संभावना वक्र को रूपांतरण वक्र भी कहते हैं।
(b) उत्पादन संभावना वक्र के ढाल के निरपेक्ष मान को x की y के लिए रूपांतरण की सीमांत दर (MRTxy) कहते हैं।
(c) रूपांतरण की सीमांत दर MCx/MCy के बराबर होती है।
(d) साधनों की अपूर्ण स्थानापन्नता के कारण उत्पादन संभावना वक्र मूल बिंदु के प्रति उन्नतोदर होता है।
Right Answer: केवल (a), (b) व (c) सही हैं
Explanation:
पहले तीन कथन सही हैं। उत्पादन संभावना वक्र को रूपांतरण वक्र भी कहा जाता है, क्योंकि उस पर चलने का अर्थ है एक वस्तु के उत्पादन को दूसरी में रूपांतरित करना। इसके ढाल का निरपेक्ष मान रूपांतरण की सीमांत दर कहलाता है और यह दोनों वस्तुओं की सीमांत लागतों के अनुपात के बराबर होती है। कथन (d) गलत है, क्योंकि साधनों की अपूर्ण स्थानापन्नता के कारण अवसर लागत बढ़ती जाती है और वक्र मूल बिंदु के प्रति नतोदर अर्थात् बाहर की ओर उभरा हुआ होता है, उन्नतोदर नहीं।
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Q28. यदि मौद्रिक सकल घरेलू उत्पाद 3000 रु० हो तथा सकल घरेलू उत्पाद अपस्फीति कारक 150 हो, तो वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद होगा :
Right Answer: 2000 रु०
Explanation:
वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वह मूल्य है जो आधार वर्ष की कीमतों पर मापा जाता है और इसलिए उसमें कीमत-वृद्धि का प्रभाव सम्मिलित नहीं होता। इसे निकालने का सूत्र है — वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद बराबर मौद्रिक सकल घरेलू उत्पाद को अपस्फीति कारक से भाग देकर सौ से गुणा करना। यहाँ मौद्रिक सकल घरेलू उत्पाद 3000 रुपये तथा अपस्फीति कारक 150 है। अतः 3000 को 150 से भाग देने पर 20 और सौ से गुणा करने पर 2000 रुपये प्राप्त होते हैं। इस प्रकार वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद 2000 रुपये होगा।
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Q29. यदि कॉब डगलस उत्पादन फलन Q = AL α K β हो तथा α + β < 1 हो, तो यह दर्शाता है :
Right Answer: पैमाने के घटते प्रतिफल
Explanation:
कॉब-डगलस उत्पादन फलन में घातांक α तथा β क्रमशः श्रम एवं पूँजी की उत्पादन-लोच बताते हैं और इनका योग पैमाने के प्रतिफल की प्रकृति निर्धारित करता है। यदि दोनों साधनों को एक ही अनुपात में बढ़ाया जाए तो उत्पादन उसी अनुपात की α+β घात से बढ़ता है। जब α+β एक के बराबर हो तो पैमाने के स्थिर प्रतिफल, एक से अधिक हो तो बढ़ते प्रतिफल और एक से कम हो तो पैमाने के घटते प्रतिफल मिलते हैं। प्रश्न में योग एक से कम है, अतः यह पैमाने के घटते प्रतिफल दर्शाता है, जिसमें साधन दुगुने करने पर उत्पादन दुगुने से कम बढ़ता है।
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Q30. संतुलित बजट गुणांक की अवधारणा सबसे पहले किसने दी थी ?
Right Answer: टी० हावेल्मो
Explanation:
संतुलित बजट गुणांक की अवधारणा नॉर्वेजियन अर्थशास्त्री ट्रिग्वे हावेल्मो ने दी, इसीलिए इसे हावेल्मो प्रमेय भी कहा जाता है। इसके अनुसार यदि सरकार अपने व्यय तथा करों दोनों को समान मात्रा में बढ़ाए, जिससे बजट संतुलित बना रहे, तब भी राष्ट्रीय आय उतनी ही मात्रा से बढ़ जाती है और गुणांक का मान ठीक एक होता है। इसका कारण यह है कि सरकारी व्यय का पूरा भाग समग्र माँग में जुड़ता है, जबकि कर का प्रभाव केवल उपभोग पर पड़ता है, क्योंकि करदाता उसका कुछ भाग बचत में से चुकाता है। हावेल्मो को 1989 में नोबेल पुरस्कार मिला।
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Q31. अर्थशास्त्र में प्रगटित अधिमान अवधारणा का प्रयोग किसने और कब किया था ?
Right Answer: सैमुएल्सन, 1938
Explanation:
प्रगटित अधिमान की अवधारणा पॉल ए० सैमुएल्सन ने 1938 में प्रस्तुत की। इसका उद्देश्य उपभोक्ता सिद्धांत को उपयोगिता के अमापनीय एवं आत्मनिष्ठ आधार से मुक्त कर विशुद्ध रूप से देखे जा सकने वाले व्यवहार पर खड़ा करना था। सिद्धांत का मूल तर्क यह है कि यदि उपभोक्ता किन्हीं कीमतों पर बंडल A चुनता है जबकि बंडल B भी उसकी क्रय-शक्ति के भीतर था, तो वह A को B पर प्रगटित अधिमान दे रहा है। इसी से माँग वक्र का ऋणात्मक ढाल तथा प्रतिस्थापन्न एवं आय प्रभाव बिना तटस्थता वक्र खींचे सिद्ध किए जा सकते हैं।
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Q32. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिये गये कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :
सूची-I (लागत वक्र)
(a) कुल स्थिर लागत (TFC)
(b) कुल परिवर्तनशील लागत (TVC)
(c) औसत स्थिर लागत (AFC)
(d) औसत कुल लागत (ATC)
सूची-II (आकृति)
(i) U-आकृति
(ii) क्षैतिज सरल रेखा
(iii) प्रतिलोम S आकृति
(iv) आयताकार अतिपरवलय
Right Answer: (a-ii) (b-iii) (c-iv) (d-i)
Explanation:
कुल स्थिर लागत उत्पादन की मात्रा से स्वतंत्र रहती है, इसलिए उसका वक्र X-अक्ष के समानान्तर क्षैतिज सरल रेखा होता है। कुल परिवर्तनशील लागत आरम्भ में घटती दर से और बाद में बढ़ती दर से बढ़ती है, अतः उसका वक्र प्रतिलोम S आकृति का बनता है। औसत स्थिर लागत में स्थिर लागत क्रमशः अधिक इकाइयों में बँटती जाती है, इसलिए वह निरन्तर घटती है और उसका वक्र आयताकार अतिपरवलय होता है, जो अक्षों को कभी नहीं छूता। औसत कुल लागत पहले घटकर न्यूनतम होती है और फिर बढ़ती है, अतः उसका वक्र U-आकृति का होता है।
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Q33. 2013-14 से 2022-23 के बीच देश में कितने लोग बहुआयामी गरीबी से मुक्त हो गये ?
Right Answer: 24.8 करोड़
Explanation:
नीति आयोग के जनवरी 2024 के चर्चा-पत्र के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच भारत में लगभग 24.82 करोड़ अर्थात् 24.8 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। इसी अवधि में बहुआयामी गरीबी का प्रचलन 29.17 प्रतिशत से घटकर 11.28 प्रतिशत रह गया। राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जीवन-स्तर इन तीन आयामों तथा बारह संकेतकों पर आधारित है, जिनमें पोषण, विद्यालयी उपस्थिति, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत, आवास तथा बैंक खाता सम्मिलित हैं। सर्वाधिक कमी उत्तर प्रदेश, बिहार तथा मध्य प्रदेश में दर्ज की गई।
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Q34. व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र शब्दों का निर्माण किसने किया तथा पहली बार किसने उपयोग में लिया ?
Right Answer: रेग्नर फ्रिश
Explanation:
‘माइक्रोइकोनॉमिक्स’ तथा ‘मैक्रोइकोनॉमिक्स’ शब्दों का निर्माण एवं प्रथम प्रयोग नॉर्वेजियन अर्थशास्त्री रेग्नर फ्रिश ने 1933 में किया। व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत इकाइयों — उपभोक्ता, फर्म तथा उद्योग — के व्यवहार तथा साधन-आवंटन का अध्ययन करता है, जबकि समष्टि अर्थशास्त्र सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के समुच्चयों जैसे राष्ट्रीय आय, रोजगार, सामान्य कीमत स्तर तथा आर्थिक संवृद्धि से सम्बद्ध है। फ्रिश ने ‘इकोनोमेट्रिक्स’ शब्द भी गढ़ा और अर्थमिति के विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें 1969 में यान टिनबर्गन के साथ प्रथम नोबेल पुरस्कार मिला।
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Q35. कीमत में परिवर्तन के प्रति माँग की प्रतिक्रिया को दर्शाने के लिए लोच की अभिव्यंजना का आविष्कार किसने किया था ?
Right Answer: एल्फ्रेड मार्शल
Explanation:
माँग की कीमत लोच की अभिव्यंजना का आविष्कार एल्फ्रेड मार्शल ने किया और उन्होंने इसे अपनी 1890 की कृति ‘प्रिंसिपल्स ऑफ इकोनॉमिक्स’ में विकसित किया। लोच यह मापती है कि कीमत में एक प्रतिशत परिवर्तन होने पर माँगी गई मात्रा में कितने प्रतिशत परिवर्तन होता है, अर्थात् यह माँग की कीमत-संवेदनशीलता का शुद्ध संख्यात्मक माप है। मार्शल ने ही उपभोक्ता की बचत, प्रतिनिधि फर्म तथा अल्पकाल एवं दीर्घकाल जैसी अनेक आधारभूत अवधारणाएँ दीं। लोच का माप इकाई-निरपेक्ष होता है, इसलिए भिन्न वस्तुओं की तुलना सम्भव हो जाती है।
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Q36. निम्न में से कौन - सा कथन सही नहीं है ?
Right Answer: यदि स्थानापन्न वस्तु की कीमत बढ़ जाती है, तो माँग वक्र बायें विवर्तित हो जाता है।
Explanation:
माँग वक्र का विवर्तन कीमत के अतिरिक्त अन्य निर्धारकों में परिवर्तन से होता है। आय बढ़ने पर सामान्य वस्तु का माँग वक्र दायें और हीन वस्तु का बायें विवर्तित होता है। किसी वस्तु के पक्ष में रुचि बदलने पर उसका माँग वक्र दायें खिसक जाता है। चौथा कथन गलत है, क्योंकि स्थानापन्न वस्तु की कीमत बढ़ने पर उपभोक्ता उससे हटकर विचाराधीन वस्तु की ओर मुड़ता है, अतः उसकी माँग बढ़ती है और वक्र दायें विवर्तित होता है, बायें नहीं। स्थानापन्न वस्तुओं की क्रॉस लोच धनात्मक होती है, जबकि पूरक वस्तुओं की ऋणात्मक।
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Q37. किसी देश का व्यापार संतुलन होता है :
Right Answer: वस्तुओं के निर्यात व आयात के मूल्यों का अंतर।
Explanation:
किसी देश का व्यापार संतुलन उसके दृश्य मदों अर्थात् वस्तुओं के निर्यात तथा आयात के मूल्यों का अन्तर होता है। इसमें सेवाओं, निवेश आय अथवा हस्तांतरण भुगतानों को सम्मिलित नहीं किया जाता। निर्यात आयात से अधिक हो तो व्यापार संतुलन अनुकूल तथा कम हो तो प्रतिकूल कहलाता है। इसके विपरीत भुगतान संतुलन एक व्यापक अवधारणा है, जिसमें वस्तुएँ, सेवाएँ, एकपक्षीय हस्तांतरण तथा पूँजी खाते के समस्त लेन-देन सम्मिलित होते हैं। भुगतान संतुलन लेखांकन की दृष्टि से सदैव संतुलित रहता है, जबकि व्यापार संतुलन असंतुलित हो सकता है।
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Q38. भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार मुद्रा पूर्ति की माप का M₄ है :
Right Answer: M₄ = जनता के पास नकदी + माँग जमा + सावधि जमा + पोस्ट ऑफिस के पास कुल जमा (राष्ट्रीय बचत पत्रों को छोड़कर)
Explanation:
भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रा पूर्ति के चार माप प्रस्तुत करता है। M₁ में जनता के पास नकदी, बैंकों की माँग जमा तथा रिजर्व बैंक के पास अन्य जमा आती हैं और यह सर्वाधिक तरल है, इसीलिए इसे संकुचित मुद्रा कहते हैं। M₂ में M₁ के साथ डाकघर की बचत जमा जुड़ती हैं। M₃ में M₁ के साथ बैंकों की सावधि जमा जुड़ती हैं और इसे व्यापक मुद्रा कहा जाता है; मौद्रिक नीति में इसी का सर्वाधिक उपयोग होता है। M₄ सबसे व्यापक माप है, जिसमें M₃ के साथ डाकघर की कुल जमा जोड़ी जाती हैं, किन्तु राष्ट्रीय बचत पत्र छोड़ दिए जाते हैं।
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Q39. संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों ने संधारणीय विकास के लक्ष्यों को कब स्वीकार किया ?
Right Answer: 2015
Explanation:
संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने सितम्बर 2015 में न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में आयोजित शिखर सम्मेलन में ‘संधारणीय विकास हेतु 2030 एजेण्डा’ को सर्वसम्मति से स्वीकार किया, जिसमें सत्रह संधारणीय विकास लक्ष्य तथा एक सौ उनहत्तर उपलक्ष्य सम्मिलित हैं। ये लक्ष्य 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुए और इनकी अवधि 2030 तक है। इन्होंने 2000 में अपनाए गए आठ सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों का स्थान लिया। एजेण्डा का मूल सिद्धांत है कि विकास की प्रक्रिया में कोई भी पीछे न छूटे और आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय तीनों आयामों में सन्तुलन बना रहे।
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Q40. यदि आवश्यक नकद कोष अनुपात R हो, तो साख गुणक का मान होगा : 1 −
Right Answer: 1/R
Explanation:
साख गुणक अथवा मुद्रा गुणक यह बताता है कि प्राथमिक जमा की एक इकाई से बैंकिंग व्यवस्था कुल कितनी साख का सृजन कर सकती है। यदि आवश्यक नकद कोष अनुपात R हो तो प्रत्येक बैंक अपनी जमा का R भाग कोष में रखकर शेष उधार देता है, और यह प्रक्रिया एक गुणोत्तर श्रेणी बनाती है जिसका योग 1/R होता है। अतः साख गुणक का मान 1/R है। उदाहरणार्थ यदि नकद कोष अनुपात 20 प्रतिशत हो तो गुणक 5 होगा और 1,000 रुपये की प्राथमिक जमा से 5,000 रुपये तक की कुल जमा उत्पन्न हो सकेगी। अनुपात बढ़ने पर साख सृजन की क्षमता घट जाती है।
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