Sociology: 60 MCQs with Answers

Sociology MCQ Questions with Answers - INDIA STUDY INSTITUTE
Sociology

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Sociology MCQ Questions with Answers

Sociology MCQs on social institutions, social change, thinkers, research methods and Indian society। समाजशास्त्र विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

Other Exam Papers:

Q31. निम्नलिखित मतों (स्टेटमेण्ट्स) में से कौन-सा जाति एवं जनजाति के मुख्य (बेसिक) अन्तर को व्यक्त करता है ?

Right Answer: जाति संस्तरणमूलक है जबकि जनजाति स्वायत्तशासी है।


Explanation:

जाति एवं जनजाति के बीच मूल अन्तर संस्तरण का है। जाति व्यवस्था अनिवार्यतः संस्तरणमूलक है, जिसमें प्रत्येक जाति का स्थान ऊँच-नीच के क्रम में निश्चित रहता है और शुद्धता-अशुद्धता की धारणा उस क्रम को बनाए रखती है। इसके विपरीत जनजाति सामान्यतः स्वायत्तशासी एवं समतामूलक इकाई होती है, जिसका अपना भू-क्षेत्र, अपनी भाषा तथा अपनी पंचायत होती है और वह किसी बृहत्तर संस्तरण का अंग नहीं होती। शेष विकल्प भ्रामक हैं, क्योंकि जनजातीय सदस्यता भी जन्म से ही निर्धारित होती है और जनजातियों के अपने धार्मिक विश्वास भी होते हैं।

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Q32. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से यह किसका मत है, ‘व्यवहार जो संस्थागत अपेक्षाओं, अर्थात्एक सामाजिक व्यवस्था के अन्तर्गत वैधानिक रूप में मान्य एवं साझेदार अपेक्षाओं, का उल्लंघन हो’, विचलन कहलाता है ?

Right Answer: टालकट पारसन्स


Explanation:

टालकट पारसन्स ने विचलन को उस व्यवहार के रूप में परिभाषित किया जो संस्थागत अपेक्षाओं का उल्लंघन करता है, अर्थात् उन अपेक्षाओं का जो किसी सामाजिक व्यवस्था के भीतर वैधानिक रूप से मान्य एवं सदस्यों द्वारा साझा की गई हों। उनके प्रकार्यवादी दृष्टिकोण में सामाजिक व्यवस्था तभी बनी रहती है जब व्यक्ति मूल्यों एवं मानकों को समाजीकरण द्वारा आत्मसात कर लें और भूमिका-अपेक्षाओं के अनुरूप आचरण करें। इस अनुरूपता में आई विफलता ही विचलन है, जिसे सामाजिक नियंत्रण के तंत्र नियंत्रित करते हैं। मर्टन ने इसे लक्ष्य एवं साधन के तनाव से समझाया।

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Q33. निम्नलिखित में से किस समाजशास्त्री ने सामाजिक समूहों के वर्गीकरण हेतु पन्द्रह मानदण्डों (क्राइटेरिया) को प्रस्तावित किया है ?

Right Answer: जॉर्जेज गुरविच


Explanation:

फ्रांसीसी समाजशास्त्री जॉर्जेज गुरविच ने सामाजिक समूहों के वर्गीकरण के लिए पन्द्रह मानदण्ड प्रस्तावित किए, जो समाजशास्त्र में सर्वाधिक विस्तृत वर्गीकरण योजनाओं में गिने जाते हैं। इनमें समूह का आकार, अवधि, कार्य, प्रवेश की सुगमता, चेतना का स्तर, संगठन की मात्रा, संस्तरण, प्रभुत्व का स्वरूप तथा सामाजिक नियंत्रण की पद्धति जैसे आधार सम्मिलित हैं। गुरविच का उद्देश्य यह दिखाना था कि सामाजिक वास्तविकता बहुस्तरीय एवं गतिशील है, इसलिए उसे किसी एक कसौटी से नहीं समझा जा सकता। थियोडोर मिल्स एवं होमन्स ने लघु समूहों पर कार्य किया।

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Q34. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से किन्होंने ‘मिरर्स ऑफ वायलेन्स : कम्युनिटीज, रॉइट्स ऐण्ड सरवायवर्स इन साउथ एशिया’ का सम्पादन किया है ?

Right Answer: वीना दास


Explanation:

‘मिरर्स ऑफ वायलेन्स : कम्युनिटीज, रॉइट्स ऐण्ड सरवायवर्स इन साउथ एशिया’ का सम्पादन प्रसिद्ध भारतीय समाजशास्त्री एवं मानवशास्त्री वीना दास ने किया। 1990 में प्रकाशित यह संग्रह दक्षिण एशिया में साम्प्रदायिक दंगों, सामूहिक हिंसा तथा उससे बचे लोगों के अनुभवों पर केन्द्रित है। इसमें विशेष रूप से 1984 के सिख-विरोधी दंगों का अध्ययन सम्मिलित है। वीना दास ने दिखाया कि हिंसा केवल घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रक्रिया है जो पीड़ितों के दैनिक जीवन, स्मृति एवं सामुदायिक सम्बन्धों में लम्बे समय तक बनी रहती है।

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Q35. निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता समाजशास्त्र के साथ सम्बद्ध है ?

Right Answer: समाजशास्त्र ‘सामाजिक व्यवस्थाओं’ का वैज्ञानिक अध्ययन है।


Explanation:

समाजशास्त्र की सर्वमान्य विशेषता यह है कि वह सामाजिक व्यवस्थाओं, सामाजिक सम्बन्धों एवं सामाजिक संस्थाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है। इसका अर्थ है कि वह व्यवस्थित प्रेक्षण, प्रमाण-संग्रह तथा तार्किक विश्लेषण के माध्यम से निष्कर्ष निकालता है। यह ‘समाज कैसा होना चाहिए’ का नैतिक विवेचन नहीं करता, क्योंकि वह मूल्य-निर्णय दर्शन एवं नीतिशास्त्र का क्षेत्र है। यह सामाजिक कार्य का व्यावसायिक प्रशिक्षण भी नहीं है, यद्यपि सामाजिक कार्य उसकी अन्तर्दृष्टियों का उपयोग करता है। और न ही यह मात्र आँकड़े जुटाने वाला सामाजिक अंकगणित है।

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Q36. समाजशास्त्रियों के निम्नलिखित समुच्चयों में से किस समुच्चय ने जातीय गतिशीलता की संरचनात्मक प्रक्रिया के विश्लेषण में ‘संदर्भ समूह’ की अवधारणा प्रयुक्त की है ?

Right Answer: वाई० बी० दामले एवं ओ० एम० लिंच


Explanation:

संदर्भ समूह की अवधारणा मूलतः हरबर्ट हाइमन ने दी और रॉबर्ट मर्टन ने इसे विकसित किया। इसका आशय उस समूह से है जिसके मानकों एवं जीवन-शैली को व्यक्ति अपने मूल्यांकन तथा अनुकरण का आधार बनाता है। भारत में वाई० बी० दामले तथा ओ० एम० लिंच ने इसी अवधारणा का प्रयोग जातीय गतिशीलता की संरचनात्मक प्रक्रिया के विश्लेषण में किया। उन्होंने दिखाया कि निम्न जातियाँ उच्च जातियों को संदर्भ समूह मानकर उनकी रीतियाँ अपनाती हैं और सामाजिक प्रस्थिति ऊँची करने का प्रयास करती हैं। यह प्रक्रिया श्रीनिवास के संस्कृतीकरण से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है।

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Q37. कार्ल मार्क्स के मत में निम्नलिखित में से कौन-सा वर्ग ‘संक्रमणकालीन’ वर्ग के रूप में भी जाना जाता है ?

Right Answer: पैटि बुर्जुआ


Explanation:

कार्ल मार्क्स ने पूँजीवादी समाज में दो मुख्य वर्ग बताए — उत्पादन के साधनों के स्वामी बुर्जुआ तथा केवल श्रमशक्ति बेचने वाले प्रोलिटेरिएट। इनके बीच पैटि बुर्जुआ अर्थात् लघु बुर्जुआ वर्ग आता है, जिसमें छोटे दुकानदार, कारीगर तथा स्वतंत्र किसान सम्मिलित हैं। यह वर्ग उत्पादन के साधनों का स्वामी भी है और स्वयं श्रम भी करता है, इसीलिए इसे संक्रमणकालीन वर्ग कहा गया। मार्क्स के अनुसार पूँजी के केन्द्रीयकरण एवं प्रतिस्पर्धा के दबाव में यह वर्ग क्रमशः विघटित होकर प्रोलिटेरिएट में मिल जाएगा। दास एवं सर्फ पूर्ववर्ती उत्पादन पद्धतियों के वर्ग हैं।

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Q38. ए० वाल्कर एवं सी० वाल्कर के मतानुसार नागरिकता के नागरिकीय (सिविल), राजनीतिक एवं सामाजिक अधिकारों के नकार अथवा उनकी गैर-प्राप्ति (नॉन- रीयलाइजेशन) की स्थितियों से निर्मित अवधारणा कहलाती है :

Right Answer: सामाजिक बहिष्करण


Explanation:

ए० वाल्कर तथा सी० वाल्कर ने सामाजिक बहिष्करण को नागरिकता के नागरिकीय, राजनीतिक एवं सामाजिक अधिकारों के नकार अथवा उनकी गैर-प्राप्ति की स्थिति के रूप में परिभाषित किया। यह अवधारणा टी० एच० मार्शल की नागरिकता सम्बन्धी त्रिविध रूपरेखा पर आधारित है। सामाजिक बहिष्करण केवल आय की निर्धनता नहीं है, बल्कि एक बहुआयामी एवं प्रक्रियात्मक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति या समूह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास तथा निर्णय-प्रक्रिया में भागीदारी से व्यवस्थित रूप से वंचित रह जाते हैं। भारत में जाति, जनजाति एवं लिंग आधारित बहिष्करण इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

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Q39. वर्ष 1947 में निम्नलिखित में से कौन-से विश्वविद्यालय में भारत में समाजशास्त्र विभाग पठन हेतु नहीं था ?

Right Answer: मद्रास


Explanation:

भारत में समाजशास्त्र के औपचारिक अध्यापन का आरम्भ बीसवीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों में हुआ। कलकत्ता विश्वविद्यालय में 1917 से समाजशास्त्र पढ़ाया जाने लगा, बम्बई विश्वविद्यालय में 1919 में पैट्रिक गिडीज के नेतृत्व में समाजशास्त्र विभाग की स्थापना हुई और लखनऊ विश्वविद्यालय में 1921 में राधाकमल मुखर्जी ने विभाग आरम्भ किया, जहाँ आगे चलकर डी० पी० मुकर्जी एवं डी० एन० मजूमदार भी रहे। मद्रास विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग बहुत बाद में 1959 में स्थापित हुआ, इसलिए 1947 में वहाँ यह विषय पठन हेतु उपलब्ध नहीं था।

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Q40. रेमण्ड विलियम्स ने एक निबन्ध ‘कल्चर इज़ ऑर्डिनरी’ में उन दो पक्षों को प्रस्तुत किया है, जो एक संस्कृति के पास होते हैं। निम्नलिखित में से उन दो पक्षों को रेखांकित करें :

Right Answer: ज्ञात अर्थ एवं दिशायें


Explanation:

रेमण्ड विलियम्स सांस्कृतिक अध्ययन के संस्थापकों में गिने जाते हैं। अपने प्रसिद्ध निबन्ध ‘कल्चर इज़ ऑर्डिनरी’ में उन्होंने संस्कृति को अभिजात वर्ग की विशिष्ट सम्पत्ति मानने की परम्परा को अस्वीकार किया और कहा कि संस्कृति सामान्य जन के दैनिक जीवन में ही निहित है। उनके अनुसार प्रत्येक संस्कृति के दो पक्ष होते हैं — पहला, ज्ञात अर्थ एवं दिशाएँ, जिनमें उसके सदस्य प्रशिक्षित होते हैं और जो परम्परा से प्राप्त होते हैं; तथा दूसरा, नवीन प्रेक्षण एवं अर्थ, जो अनुभव से निरन्तर गढ़े जाते रहते हैं। इस प्रकार संस्कृति परम्परागत भी है और सृजनशील भी।

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Q41. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से किन्होंने ‘डिस्कवरिंग सोशियोलॉजी : स्टडीज इन सोशियोलॉजिकल थ्योरी ऐण्ड मेथड’ का लेखन किया है ?

Right Answer: जॉन रेक्स


Explanation:

‘डिस्कवरिंग सोशियोलॉजी : स्टडीज इन सोशियोलॉजिकल थ्योरी ऐण्ड मेथड’ के लेखक ब्रिटिश समाजशास्त्री जॉन रेक्स हैं। इस कृति में उन्होंने समाजशास्त्रीय सिद्धान्त एवं पद्धति के आधारभूत प्रश्नों की विवेचना की। रेक्स संघर्ष सिद्धान्त के प्रमुख प्रवक्ता माने जाते हैं और उन्होंने पारसन्स के प्रकार्यवादी सन्तुलन-प्रतिमान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि समाज को समझने की कुंजी सहमति नहीं, बल्कि हितों का संघर्ष है। उन्होंने नस्लीय सम्बन्धों तथा नगरीय समाजशास्त्र पर भी महत्त्वपूर्ण कार्य किया, विशेषतः ‘रेस, कम्युनिटी ऐण्ड कॉन्फ्लिक्ट’ में।

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Q42. यह किनका मत है, ‘अन्य किसी भी विज्ञान से अधिक, समाजशास्त्र, यह मेरा विश्वास है, ने दार्शनिक प्रश्नों के नवीनीकरण को प्रस्तुत करने में योगदान किया है’ ?

Right Answer: एमील दुर्खीम


Explanation:

यह कथन एमील दुर्खीम का है। उनका विश्वास था कि समाजशास्त्र ने दर्शन के अनेक चिरन्तन प्रश्नों को नए सिरे से उठाने और उन्हें अनुभवजन्य आधार देने में अन्य किसी विज्ञान से अधिक योगदान किया है। नैतिकता, धर्म, ज्ञान की श्रेणियाँ तथा व्यक्ति एवं समाज का सम्बन्ध — ये सभी पहले विशुद्ध दार्शनिक चिन्तन के विषय थे। दुर्खीम ने ‘द एलीमेंट्री फॉर्म्स ऑफ रिलीजियस लाइफ’ में दिखाया कि समय, स्थान एवं कारणता जैसी मूल श्रेणियाँ भी सामाजिक उद्गम रखती हैं। इस प्रकार उन्होंने दर्शन के प्रश्नों को समाजशास्त्रीय अनुसंधान का विषय बना दिया।

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Q43. रॉबर्ट के० मर्टन के अनुसार ‘भूमिका सम्बन्धों का पूरक (कॉम्प्लीमेंट) जो व्यक्तियों के पास एक विशिष्ट प्रस्थिति की प्राप्ति के आधार के द्वारा पाया जाता है’, कहलाता है :

Right Answer: भूमिका-सेट (रोल - सेट)


Explanation:

रॉबर्ट के० मर्टन ने भूमिका-सेट की अवधारणा दी। इसका अर्थ है भूमिका सम्बन्धों का वह पूरक समुच्चय जो व्यक्ति को किसी एक विशिष्ट सामाजिक प्रस्थिति को धारण करने मात्र से प्राप्त हो जाता है। उदाहरणतः विद्यालय के अध्यापक की एक ही प्रस्थिति उसे विद्यार्थियों, सहकर्मियों, प्रधानाचार्य तथा अभिभावकों के साथ अलग-अलग भूमिका सम्बन्धों में बाँध देती है। इससे भिन्न प्रस्थिति-सेट का अर्थ है वे सभी प्रस्थितियाँ जो एक ही व्यक्ति एक समय में धारण करता है। भूमिका-सेट के भीतर की परस्पर विरोधी अपेक्षाएँ भूमिका-तनाव को जन्म देती हैं।

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Q44. एक व्यापक स्तर के निदर्श के आधार पर जॉर्ज पीटर मर्डाक का दावा है कि परिवार एक सार्वभौमिक सामाजिक संस्था है। व्यापक स्तर का यह निदर्श निर्मित होता है :

Right Answer: दो सौ पचास समाजों से


Explanation:

जॉर्ज पीटर मर्डाक ने 1949 में प्रकाशित अपनी कृति ‘सोशल स्ट्रक्चर’ में विश्व के दो सौ पचास समाजों के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर दावा किया कि परिवार एक सार्वभौमिक सामाजिक संस्था है। उनके निदर्श में आखेटक-संग्राहक समुदायों से लेकर औद्योगिक समाजों तक की विविधता सम्मिलित थी। मर्डाक के अनुसार परिवार चार आधारभूत प्रकार्य पूरे करता है — लैंगिक, आर्थिक, पुनरुत्पादक तथा शैक्षिक। बाद के विद्वानों ने इजरायल के किबुत्ज तथा जमैका एवं नायर समाजों के उदाहरण देकर इस सार्वभौमिकता की आलोचना की, किन्तु मर्डाक का यह अध्ययन आज भी आधारभूत माना जाता है।

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Q45. यह किनका मत है, ‘एक पारिभाषिक शब्द के रूप में सामाजिक संरचना को अन्तःसम्बन्धित संस्थाओं के विशिष्ट क्रम, अभिकरण एवं सामाजिक प्रतिरूप (पैटर्न) साथ ही प्रस्थिति एवं भूमिकाओं जिन्हें प्रत्येक व्यक्ति ने समूह में प्राप्त किया है, के ऊपर लागू किया जाता है’ ?

Right Answer: टालकट पारसन्स


Explanation:

यह परिभाषा टालकट पारसन्स की है, जिसमें सामाजिक संरचना को अन्तःसम्बन्धित संस्थाओं, अभिकरणों एवं सामाजिक प्रतिरूपों के विशिष्ट क्रम तथा समूह में प्रत्येक व्यक्ति द्वारा धारण की गई प्रस्थितियों और भूमिकाओं पर लागू किया गया है। पारसन्स के प्रकार्यवादी चिन्तन में समाज एक व्यवस्था है, जिसकी आधारभूत इकाई भूमिका है और जिसके भाग एक-दूसरे से जुड़कर सन्तुलन बनाए रखते हैं। इसके विपरीत रैडक्लिफ-ब्राउन सामाजिक संरचना को वास्तव में विद्यमान व्यक्तियों के सम्बन्धों का जाल मानते थे, जबकि मर्टन ने मध्यम स्तरीय सिद्धान्तों पर बल दिया।

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Q46. निम्नलिखित सदस्यों में से किन्होंने संविधान सभा में जनजातीय लोगों के लिए ‘आदिवासी’ पारिभाषिक शब्द के प्रयोग पर बल दिया ?

Right Answer: जयपाल सिंह मुण्डा


Explanation:

जयपाल सिंह मुण्डा संविधान सभा में जनजातीय समुदायों के सर्वाधिक मुखर प्रतिनिधि थे। स्वयं मुण्डा समुदाय से आने वाले और ऑक्सफोर्ड से शिक्षित जयपाल सिंह 1928 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रहे। संविधान सभा में उन्होंने ‘जनजाति’ अथवा ‘आदिम जाति’ जैसे शब्दों के स्थान पर ‘आदिवासी’ शब्द के प्रयोग पर बल दिया, क्योंकि इसका अर्थ है मूल निवासी और यह इन समुदायों को गरिमा प्रदान करता है। उन्होंने स्वयं को ‘जंगली’ कहकर सभा को जनजातीय शोषण के इतिहास की याद दिलाई और उनके अधिकारों की पुरजोर वकालत की।

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Q47. निम्नलिखित में से किस समाजशास्त्री का यह कथन है, ‘परिवार सामाजिक एवं सांस्कृतिक पूँजी का, अपने सदस्यों के समाजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा, संग्रह है ?

Right Answer: पियरे बोर्दियो


Explanation:

फ्रांसीसी समाजशास्त्री पियरे बोर्दियो ने पूँजी की अवधारणा को आर्थिक क्षेत्र से बाहर विस्तारित किया और सांस्कृतिक, सामाजिक तथा प्रतीकात्मक पूँजी की बात की। उनके अनुसार परिवार वह मुख्य स्थल है जहाँ समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा सामाजिक एवं सांस्कृतिक पूँजी का संचय एवं हस्तान्तरण होता है। बच्चे को भाषा, अभिरुचि, शिष्टाचार तथा सम्पर्कों का जो भण्डार परिवार से मिलता है, वही उसका ‘हैबिटस’ बनाता है और विद्यालय में उसकी सफलता निर्धारित करता है। इसी से बोर्दियो ने समझाया कि शिक्षा व्यवस्था अवसर की समानता देने के बजाय वर्गीय असमानता का पुनरुत्पादन करती है।

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Q48. निम्नलिखित में से कौन ‘द ग्रेट ट्रान्सफॉर्मेशन : द पॉलिटिकल ऐण्ड इकोनॉमिक ओरिजिन ऑफ ऑवर टाइम’ शीर्षक की पुस्तक के लेखक हैं ?

Right Answer: कार्ल पोलानयी


Explanation:

‘द ग्रेट ट्रान्सफॉर्मेशन : द पॉलिटिकल ऐण्ड इकोनॉमिक ओरिजिन ऑफ आवर टाइम’ के लेखक हंगेरियन-अमेरिकी विचारक कार्ल पोलानयी हैं। 1944 में प्रकाशित इस कृति में उन्होंने दिखाया कि स्वनियमित बाजार कोई प्राकृतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि राज्य के सचेत हस्तक्षेप से गढ़ी गई संस्था है। उन्होंने भूमि, श्रम तथा मुद्रा को ‘काल्पनिक वस्तुएँ’ कहा, क्योंकि इनका उत्पादन बिक्री के लिए नहीं हुआ। पोलानयी का प्रसिद्ध सिद्धान्त ‘द्विगामी गति’ बताता है कि बाजार के विस्तार के विरुद्ध समाज स्वयं को बचाने हेतु प्रतिरोधात्मक आन्दोलन खड़ा करता है।

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Q49. निम्नलिखित में से किस अनुशास्ति (सैंक्शन) को ऑगबर्न एवं निमकॉफ ने सामाजिक नियन्त्रण की प्रक्रिया के विवेचन में अभिव्यक्त नहीं किया है ?

Right Answer: राजनीतिक अनुशास्ति


Explanation:

ऑगबर्न एवं निमकॉफ ने सामाजिक नियन्त्रण की प्रक्रिया की विवेचना करते हुए अनुशास्तियों को तीन वर्गों में रखा। शारीरिक अथवा भौतिक अनुशास्ति में दण्ड, कारावास तथा बल-प्रयोग आते हैं। आर्थिक अनुशास्ति में जुर्माना, बहिष्कार, आजीविका से वंचित करना अथवा पुरस्कार एवं प्रोत्साहन सम्मिलित हैं। सामाजिक-मनोवैज्ञानिक अनुशास्ति में प्रशंसा, उपहास, निन्दा, सम्मान तथा सामाजिक बहिष्कार जैसे अनौपचारिक साधन आते हैं, जो प्रायः सर्वाधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं। राजनीतिक अनुशास्ति को उन्होंने पृथक श्रेणी के रूप में नहीं गिनाया, अतः यही उत्तर है।

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Q50. निम्नलिखित महत्वपूर्ण पुस्तकों में से किस पुस्तक में हम प्रारम्भ के दो पाठ ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ऐन इण्डिविजुअल पास्टाइम’ एवं ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ए फॉर्म ऑफ कॉन्शियसनेस’ शीर्षक से पाते हैं ?

Right Answer: इनविटेशन टू सोशियोलॉजी - पीटर एल० बर्जर


Explanation:

‘इनविटेशन टू सोशियोलॉजी : ए ह्यूमनिस्टिक पर्सपेक्टिव’ के लेखक पीटर एल० बर्जर हैं और यह 1963 में प्रकाशित हुई। इसके आरम्भिक दो अध्याय क्रमशः ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ऐन इण्डिविजुअल पास्टाइम’ तथा ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ए फॉर्म ऑफ कॉन्शियसनेस’ शीर्षक से हैं। बर्जर का प्रसिद्ध कथन है कि समाजशास्त्र का प्रथम ज्ञान यही है कि वस्तुएँ वैसी नहीं होतीं जैसी वे दिखाई देती हैं। उन्होंने समाजशास्त्रीय दृष्टि को एक ऐसी चेतना बताया जो प्रचलित मान्यताओं का पर्दाफाश करती है। थॉमस लकमैन के साथ लिखी उनकी कृति ‘द सोशल कंस्ट्रक्शन ऑफ रियलिटी’ भी अत्यन्त प्रसिद्ध है।

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Q51. घनश्याम शाह एवं अन्य ने ‘अनटचेबिलिटि इन रूरल इण्डिया’ में अस्पृश्यता की प्रघटना में तीन मुख्य पक्षों को सम्मिलित किया है, निम्नलिखित में से कौन-सा पक्ष इसमें उल्लेखित नहीं है ?

Right Answer: वंचन


Explanation:

घनश्याम शाह, हर्ष मंदर, सुखदेव थोरात, सतीश देशपांडे एवं अमिता बाविस्कर द्वारा किए गए इस व्यापक अध्ययन में ग्यारह राज्यों के पाँच सौ पैंसठ गाँवों का सर्वेक्षण हुआ। लेखकों ने अस्पृश्यता की प्रघटना को तीन मुख्य पक्षों में समझाया — बहिष्करण, जिसमें दलितों को मन्दिर, जलस्रोत तथा सार्वजनिक स्थलों से दूर रखा जाता है; अपमान एवं अधीनीकरण, जिसमें उन्हें प्रतिदिन के व्यवहार में हीन दर्शाया जाता है; तथा शोषण, जिसमें उनके श्रम का अनुचित लाभ उठाया जाता है। वंचन को उन्होंने पृथक पक्ष के रूप में नहीं गिनाया, यद्यपि वह इन तीनों का परिणाम है।

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Q52. निम्नलिखित में से कौन वित्तीय पूँजी की विशेषता नहीं है ?

Right Answer: एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों का ह्रास


Explanation:

वित्तीय पूँजी की अवधारणा रुडोल्फ हिल्फर्डिंग ने दी और लेनिन ने साम्राज्यवाद के विश्लेषण में इसे आगे बढ़ाया। इसका अर्थ है बैंक पूँजी तथा औद्योगिक पूँजी का विलय, जिसमें बैंक पूँजी पर नियन्त्रण रखते हैं और उद्योगपति उसे उत्पादन में नियोजित करते हैं। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं — उत्पादन का केन्द्रीयकरण, बड़े एकाधिकारों एवं ट्रस्टों का निर्माण तथा पूँजी का निर्यात। स्पष्ट है कि वित्तीय पूँजी एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों को बढ़ाती है, घटाती नहीं। इसलिए एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों का ह्रास इसकी विशेषता नहीं है।

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Q53. निम्नलिखित में से संयोजन के स्तर (डिग्री ऑफ कम्पोजीशन) के आधार पर समाज के प्रकार में कौन-सा हरबर्ट स्पेन्सर ने नहीं उल्लेखित किया है ?

Right Answer: जटिल समाज


Explanation:

हरबर्ट स्पेन्सर ने उद्विकासीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संयोजन के स्तर अर्थात् संरचनात्मक जटिलता के आधार पर समाजों का वर्गीकरण किया। उनके अनुसार सरल समाज वह है जो किसी अन्य समाज का अंग नहीं और जिसमें नेतृत्व या तो अनुपस्थित रहता है या अस्थायी। मिश्रित समाज कई सरल समाजों के संयोजन से बनता है और उसमें स्थायी नेतृत्व उभरता है। द्वि-मिश्रित समाज कई मिश्रित समाजों के मिलने से बनता है तथा त्रि-मिश्रित समाज आधुनिक राष्ट्र-राज्य जैसी विशाल इकाई है। ‘जटिल समाज’ को उन्होंने इस विशिष्ट श्रेणी-क्रम में नहीं रखा।

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Q54. डेविड हेल्ड के अनुसार ऐसी कुछ अवधारणाएँ एवं मूल्य हैं जिनके द्वारा सभी के हितों के लिए वैश्वीकरण को प्राप्त किया जा सकता है। निम्नलिखित में से कौन-सी अवधारणा एवं मूल्य डेविड हेल्ड के द्वारा नहीं बताया गया है ?

Right Answer: सांस्कृतिक समरूपीयकरण


Explanation:

डेविड हेल्ड वैश्वीकरण के प्रमुख सिद्धान्तकारों में हैं और उन्होंने ‘विश्वजनीन लोकतंत्र’ की अवधारणा प्रस्तुत की। उनका तर्क है कि वैश्वीकरण को सभी के हित में तभी मोड़ा जा सकता है जब वह कुछ आधारभूत मूल्यों पर आधारित हो — कानून का शासन, जो शक्ति को नियमों के अधीन लाए; सामाजिक न्याय, जो लाभ एवं भार का उचित वितरण सुनिश्चित करे; तथा आर्थिक निपुणता, जो संसाधनों का प्रभावी उपयोग करे। इनके साथ वे राजनीतिक समानता एवं लोकतांत्रिक जवाबदेही की बात भी करते हैं। सांस्कृतिक समरूपीयकरण उनका प्रस्तावित मूल्य नहीं, बल्कि वैश्वीकरण की एक आलोच्य प्रवृत्ति है।

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Q55. उद्विकास की सार्वभौमिक प्रक्रिया के रूप में सामाजिक परिवर्तन की अवधारणा का विवेचन करते हुए हरबर्ट स्पेन्सर किस वर्गीकरण का उल्लेख करते हैं ?

Right Answer: सैन्य समाज एवं औद्योगिक समाज


Explanation:

हरबर्ट स्पेन्सर ने सामाजिक परिवर्तन को उद्विकास की सार्वभौमिक प्रक्रिया माना, जिसमें समाज सरल एवं समरूप अवस्था से जटिल एवं विषमरूप अवस्था की ओर बढ़ता है। आन्तरिक नियमन के आधार पर उन्होंने समाज के दो प्रकार बताए। सैन्य समाज में युद्ध एवं प्रतिरक्षा प्रधान रहते हैं, केन्द्रीकृत अनिवार्य सहयोग होता है, व्यक्ति राज्य के अधीन रहता है और अनुशासन कठोर होता है। औद्योगिक समाज में उत्पादन एवं विनिमय प्रधान हो जाते हैं, सहयोग स्वैच्छिक एवं संविदात्मक होता है, व्यक्ति की स्वतंत्रता बढ़ती है और राज्य का कार्यक्षेत्र सीमित रह जाता है।

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Q56. संस्कृति के विषय में स्टुअर्ट हाल के विचारों में निम्नलिखित में से कौन-सा पैराडिमिक बदलाव अभिव्यक्त होता है ?

Right Answer: ‘जीवन जीने के समग्र तरीके’ के रूप में संस्कृति से ‘सिगनिफाइंग प्रैक्टिस’ के रूप में संस्कृति की ओर


Explanation:

स्टुअर्ट हाल ब्रिटिश सांस्कृतिक अध्ययन के प्रमुख स्तम्भ थे और बर्मिंघम के समकालीन सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र से जुड़े रहे। उनके चिन्तन में एक महत्त्वपूर्ण पैराडिमिक बदलाव दिखाई देता है — रेमण्ड विलियम्स की ‘जीवन जीने के समग्र तरीके’ वाली संस्कृति की समझ से आगे बढ़कर संस्कृति को ‘सिगनिफाइंग प्रैक्टिस’ अर्थात् अर्थ-निर्माण की प्रक्रिया के रूप में देखना। हाल के अनुसार अर्थ वस्तुओं में पहले से निहित नहीं होता, बल्कि भाषा, प्रतीक एवं प्रतिनिधित्व की प्रक्रियाओं में गढ़ा जाता है। इसी से उनका ‘एन्कोडिंग-डिकोडिंग’ प्रतिमान विकसित हुआ।

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Q57. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से किन्होंने यह कहा कि धर्म एवं खेल (सहभागी एवं दर्शक) को प्रदर्शन उपभोग के उदाहरणों के रूप में देखा जा सकता है ?

Right Answer: थॉर्स्टिन वेब्लेन


Explanation:

थॉर्स्टिन वेब्लेन ने 1899 में प्रकाशित ‘द थ्योरी ऑफ द लेजर क्लास’ में प्रदर्शन उपभोग की अवधारणा दी। इसका अर्थ है वस्तुओं एवं सेवाओं पर ऐसा व्यय जो आवश्यकता पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के समक्ष अपनी सम्पन्नता एवं सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदर्शित करने के लिए किया जाए। उन्होंने धर्म तथा खेल — दोनों में सहभागी एवं दर्शक के रूप में — को भी प्रदर्शन उपभोग के उदाहरण माना, क्योंकि इनमें लगाया गया समय एवं धन उत्पादक नहीं होता, फिर भी सामाजिक हैसियत का संकेत देता है। उन्होंने ‘प्रदर्शन अवकाश’ की अवधारणा भी दी।

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Q58. डॉ० बी० आर० अम्बेडकर ने अपनी पुस्तक ‘द अनटचेबिल्स’ में ‘पराजित घुमन्तु’ (डिफीटेड नॉमेड्स) एवं ‘बिखरे हुए व्यक्तियों’ (स्ट्रे इन्डिविजुअल्स) जिन्हें संरक्षण एवं आवास की आवश्यकता थी की विवेचना करते हुए एक अवधारणा प्रयुक्त की है, जिसे कहा जाता है :

Right Answer: बिखरा मनुष्य (ब्रोकन मेन)


Explanation:

डॉ० बी० आर० अम्बेडकर ने 1948 में प्रकाशित अपनी कृति ‘द अनटचेबिल्स : हू वेयर दे एण्ड व्हाई दे बिकेम अनटचेबल्स’ में अस्पृश्यता की उत्पत्ति की मौलिक व्याख्या दी। उन्होंने ‘ब्रोकन मेन’ अर्थात् बिखरे मनुष्य की अवधारणा प्रस्तुत की। ये वे पराजित घुमन्तु कबीलों के बिखरे हुए व्यक्ति थे, जिन्होंने अपना समुदाय खो दिया था और जो संरक्षण एवं आवास की तलाश में बसे हुए गाँवों के बाहरी छोर पर रहने लगे। अम्बेडकर के अनुसार इन्हीं लोगों ने बौद्ध धर्म बनाए रखा तथा गोमांस भक्षण नहीं छोड़ा, इसी कारण ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने उन्हें अस्पृश्य घोषित कर दिया।

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Q59. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से किन्होंने ‘प्रक्रिया भूमिका सिद्धान्त’ की रचना की है तथा ‘संरचनात्मक भूमिका सिद्धान्त’ के साथ मत भिन्नता को प्रस्तुत किया है ?

Right Answer: राल्फ एच० टर्नर


Explanation:

राल्फ एच० टर्नर ने प्रक्रिया भूमिका सिद्धान्त की रचना की और इसे संरचनात्मक भूमिका सिद्धान्त से स्पष्ट रूप से अलग बताया। संरचनात्मक दृष्टिकोण, जिसे लिंटन एवं पारसन्स ने विकसित किया, भूमिका को सामाजिक संरचना द्वारा पहले से निर्धारित अपेक्षाओं का निश्चित समुच्चय मानता है, जिसे व्यक्ति केवल निभाता है। इसके विपरीत टर्नर का तर्क है कि भूमिकाएँ पूर्वनिर्धारित नहीं होतीं, बल्कि अन्तःक्रिया के दौरान निरन्तर गढ़ी एवं संशोधित की जाती हैं। इसी को उन्होंने ‘रोल-मेकिंग’ कहा और बताया कि व्यक्ति दूसरों के व्यवहार से भूमिका का अनुमान लगाकर अपनी भूमिका रचता है।

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Q60. समाज विज्ञान में इतिहास महत्वपूर्ण है (मैटर करता है), क्योंकि :

Right Answer: इतिहास सामाजिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है।


Explanation:

समाज विज्ञान में इतिहास इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्येक सामाजिक प्रक्रिया कालक्रम में घटित होती है और उसे उसके ऐतिहासिक सन्दर्भ से काटकर नहीं समझा जा सकता। जाति, वर्ग, नगरीकरण अथवा राष्ट्रवाद जैसी परिघटनाएँ किसी एक क्षण की उपज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक प्रक्रियाओं का परिणाम हैं। सी० राइट मिल्स ने ‘समाजशास्त्रीय कल्पना’ में इसी को रेखांकित करते हुए कहा कि हमें व्यक्तिगत जीवनवृत्त, समाज की संरचना तथा इतिहास — तीनों के सम्बन्ध को एक साथ देखना चाहिए। इतिहास के बिना समाजशास्त्रीय व्याख्या स्थिर एवं अधूरी रह जाती है।

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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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