Sociology: 60 MCQs with Answers

Sociology MCQ Questions
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Sociology MCQs on social institutions, social change, thinkers, research methods and Indian society। समाजशास्त्र विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

Q11. निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता पी० वी० यंग के द्वारा रचित सामाजिक अनुसंधान की परिभाषा का हिस्सा नहीं है ?

Right Answer: परम्परागत ज्ञान एवं बोध की अस्वीकृति

पी० वी० यंग के अनुसार सामाजिक अनुसंधान सामाजिक जीवन के अन्वेषण, विश्लेषण तथा अवधारणाकरण की एक व्यवस्थित पद्धति है, जिसका उद्देश्य ज्ञान का विस्तार, संशोधन अथवा सत्यापन करना है। इसमें पूर्व स्वयंसिद्ध मान्यताओं का आलोचनात्मक परीक्षण भी सम्मिलित है, ताकि प्राप्त निष्कर्ष प्रमाणों पर टिके रहें। परन्तु उनकी परिभाषा परम्परागत ज्ञान एवं बोध की पूर्ण अस्वीकृति की बात कहीं नहीं करती; वह तो उसे परीक्षण की वस्तु मानती है, त्याज्य नहीं। अतः परम्परागत ज्ञान की अस्वीकृति उनकी परिभाषा का हिस्सा नहीं है।

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Q12. ‘वास्तुशास्त्र’ में, एम० एस० ए० राव के अनुसार, प्रकार्यों के आधार पर नगरों के प्रकारों के मध्य विभेद बताये गये हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकार एवं सम्बद्ध प्रकार जो नगर से जुड़ा है, गलत है ?

Right Answer: एक ‘द्रोणमुख’ - एक धार्मिक महत्व का नगर।

प्राचीन भारतीय वास्तुशास्त्र तथा कौटिल्य के अर्थशास्त्र में नगरों को उनके प्रकार्य के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। एम० एस० ए० राव ने इसी वर्गीकरण की चर्चा की। पट्टन नदी अथवा समुद्र तट पर स्थित बड़ा व्यापारिक बन्दरगाह नगर था, खेता संचार सुविधाओं वाला छोटा चारदीवारी नगर था और सामान्य नगर किलेबन्द होकर देशीय व्यापार का केन्द्र था। द्रोणमुख वस्तुतः नदी के मुहाने पर बसा वह प्रशासनिक एवं व्यापारिक केन्द्र था जो लगभग चार सौ गाँवों की सेवा करता था, न कि धार्मिक महत्त्व का नगर। अतः यही कथन गलत है।

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Q13. वैश्वीकरण एवं संस्कृति सम्बन्धी विभिन्न भारतीय अध्ययनों में सांस्कृतिक परिवर्तन के पैटर्न्स की विवेचना में प्रयुक्त मुख्य अवधारणात्मक पैराडिग्म में निम्नलिखित में से कौन-सा गलत है ?

Right Answer: साम्राज्यवाद को अस्वीकृत करने हेतु मार्क्सीय विचारधारा

वैश्वीकरण और संस्कृति सम्बन्धी भारतीय अध्ययनों में सांस्कृतिक परिवर्तन की व्याख्या तीन प्रमुख अवधारणात्मक पैराडिग्म से की जाती है। समरूपीयकरण यह मानता है कि वैश्विक शक्तियाँ संस्कृतियों को एक जैसा बना रही हैं। विषमरूपीयकरण एवं हाइब्रिडिटी इसके विपरीत बताते हैं कि सम्पर्क से नई मिश्रित सांस्कृतिक रूपाकृतियाँ जन्म लेती हैं। देशजकरण एवं वैश्विक-स्थानीयकरण दर्शाते हैं कि वैश्विक तत्त्व स्थानीय सन्दर्भ में ढलकर ही स्वीकार किए जाते हैं। साम्राज्यवाद को अस्वीकृत करने वाली मार्क्सीय विचारधारा एक राजनीतिक दृष्टिकोण है, सांस्कृतिक परिवर्तन का पैराडिग्म नहीं।

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Q14. योगेन्द्र सिंह के अनुसार संस्कृति की गत्यात्मकता स्वयं में तीन स्तरों पर अभिव्यक्त होती है जहाँ विभिन्न सिद्धान्त जुड़े हुए हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धान्त गलत है ?

Right Answer: बिना शर्त विश्वासों का सिद्धान्त

योगेन्द्र सिंह के अनुसार संस्कृति की गत्यात्मकता तीन स्तरों पर अभिव्यक्त होती है और प्रत्येक स्तर का अपना सिद्धान्त है। पौराणिक गाथाशास्त्र का सिद्धान्त संस्कृति को प्रतीकों, मिथकों एवं कालातीत आख्यानों के माध्यम से समझता है। इतिहास एवं इतिहासलेखन का सिद्धान्त उसे कालक्रम, घटनाओं तथा परिवर्तन की प्रक्रिया में देखता है। तर्क अथवा लॉजिक का सिद्धान्त सांस्कृतिक रूपों की आन्तरिक संरचना एवं युक्तियुक्तता को उद्घाटित करता है। बिना शर्त विश्वासों का कोई सिद्धान्त उन्होंने नहीं दिया, क्योंकि वह विश्लेषण नहीं बल्कि आस्था का क्षेत्र है।

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Q15. ‘द रिमेम्बर्ड विलेज’ में एम० एन० श्रीनिवास ने रामपुरा गाँव में ‘श्रम के विनिमय’ हेतु प्रयुक्त होने वाले एक शब्द का उल्लेख किया है। निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द इस हेतु सही है ?

Right Answer: मुइ (Muyyi)

एम० एन० श्रीनिवास ने ‘द रिमेम्बर्ड विलेज’ में मैसूर के रामपुरा गाँव का सजीव वर्णन किया है। यह पुस्तक विशेष है, क्योंकि स्टैनफोर्ड में उनके क्षेत्र-नोट्स आग में जल जाने के बाद उन्होंने इसे केवल स्मृति के आधार पर लिखा। इसमें उन्होंने ‘मुइ’ नामक प्रथा का उल्लेख किया, जो किसानों के बीच श्रम के पारस्परिक विनिमय की व्यवस्था थी। इसके अन्तर्गत एक किसान दूसरे के खेत में बिना मजदूरी काम करता और बदले में उसे भी उतना ही श्रम वापस मिलता। यह प्रथा ग्रामीण समाज की पारस्परिकता एवं सहयोग की भावना को दर्शाती है।

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Q16. मैक्स वेबर के मतानुसार वर्ग के विपरीत प्रस्थिति समूह है :

Right Answer: सामान्यतः समुदाय

मैक्स वेबर ने स्तरीकरण के तीन आयाम बताए — वर्ग, प्रस्थिति तथा दल। उनके अनुसार वर्ग विशुद्ध रूप से आर्थिक आधार पर बनता है और यह बाजार में व्यक्ति की स्थिति तथा जीवन-अवसरों से निर्धारित होता है। वर्ग के सदस्य प्रायः एक-दूसरे को जानते तक नहीं, इसलिए वेबर ने स्पष्ट कहा कि वर्ग समुदाय नहीं होते। इसके विपरीत प्रस्थिति समूह सामाजिक सम्मान अथवा प्रतिष्ठा पर आधारित होते हैं, उनकी एक विशिष्ट जीवन-शैली होती है, वे विवाह एवं सहभोज पर प्रतिबन्ध लगाते हैं और सदस्यों में अपनेपन की चेतना रहती है। इसीलिए वे सामान्यतः समुदाय होते हैं।

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Q17. निम्नलिखित में से कौन ‘हॉट, फ्लैट एण्ड क्राउडेड’ पुस्तक के लेखक हैं ?

Right Answer: थॉमस एल० फ्राइडमैन

‘हॉट, फ्लैट एण्ड क्राउडेड’ के लेखक अमेरिकी पत्रकार एवं स्तम्भकार थॉमस एल० फ्राइडमैन हैं। शीर्षक के तीन शब्द विश्व की तीन बड़ी प्रवृत्तियों की ओर संकेत करते हैं — जलवायु परिवर्तन के कारण गर्म होती पृथ्वी, वैश्वीकरण के कारण समतल होती अर्थात् प्रतिस्पर्धा में बराबर होती दुनिया, तथा जनसंख्या वृद्धि के कारण भीड़भाड़ भरा संसार। फ्राइडमैन का तर्क है कि इन तीनों का सामना केवल हरित प्रौद्योगिकी क्रान्ति से ही सम्भव है। इससे पूर्व उनकी चर्चित कृति ‘द वर्ल्ड इज़ फ्लैट’ वैश्वीकरण पर केन्द्रित थी।

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Q18. कार्ल मार्क्स के अनुसार निम्नलिखित में से पूँजीवादी उत्पादन का कौन-सा केन्द्रीय (कार्डिनल) तथ्य नहीं है ?

Right Answer: वर्ग केन्द्रित स्थानीय उत्पादन का विकास

कार्ल मार्क्स ने पूँजीवादी उत्पादन के तीन केन्द्रीय तथ्य बताए। पहला, उत्पादन के साधनों का कुछ ही हाथों में केन्द्रीयकरण, जिससे बहुसंख्यक श्रमिक साधनविहीन होकर केवल श्रमशक्ति बेचने को विवश हो जाते हैं। दूसरा, श्रम का संगठन स्वयं में सामाजिक श्रम बन जाना, अर्थात् उत्पादन सहयोग, श्रम विभाजन तथा मशीन के संयोजन से सामूहिक रूप में होना। तीसरा, विश्व बाजार का निर्माण, जो पूँजीवाद को राष्ट्रीय सीमाओं से परे ले जाता है। वर्ग केन्द्रित स्थानीय उत्पादन का विकास इसमें सम्मिलित नहीं, क्योंकि पूँजीवाद स्थानीय नहीं, विश्वव्यापी प्रवृत्ति रखता है।

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Q19. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से यह किसका वक्तव्य है : ‘समाजशास्त्र अभी भी व्यवस्था-निर्माण एवं दार्शनिक समन्वय के चरण में है, सामाजिक क्षेत्र के एक छोटे से हिस्से पर रोशनी डालने के प्रयास के बजाए यह मेधा युक्त सामान्यताओं को वरीयता देती है’ ?

Right Answer: एमील दुर्खीम

यह कथन एमील दुर्खीम का है, जो उन्होंने ‘द रूल्स ऑफ सोशियोलॉजिकल मेथड’ में समाजशास्त्र की तत्कालीन दशा पर टिप्पणी करते हुए कहा। उनका आशय था कि कॉम्टे तथा स्पेन्सर के बाद भी समाजशास्त्र विशाल दार्शनिक व्यवस्थाएँ गढ़ने में लगा रहा और सम्पूर्ण समाज के बारे में आकर्षक किन्तु अप्रमाणित सामान्यीकरण करता रहा। दुर्खीम चाहते थे कि समाजशास्त्री विशाल सिद्धान्तों के बजाय सीमित एवं स्पष्ट रूप से परिभाषित समस्याओं का अनुभवजन्य अध्ययन करें। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप उन्होंने आत्महत्या जैसे विशिष्ट विषय पर सांख्यिकीय आधार पर शोध किया।

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Q20. एक ऐतिहासिक प्रक्रिया के रूप में जटिल प्रकृति के भारतीय समाज के विकास का विवेचन टी० के० ओमन ने चार आधारभूतीय पक्षों के मिश्रण के अन्तर्गत किया है। निम्नलिखित में से कौन-सा पक्ष ओमन के विचारों का भाग नहीं है ?

Right Answer: आधुनिकीकरण

टी० के० ओमन ने भारतीय समाज की जटिलता को एक ऐतिहासिक प्रक्रिया के रूप में समझाते हुए इसे चार आधारभूत पक्षों का मिश्रण बताया — सामाजिक स्तरीकरण, जो जाति एवं वर्ग के रूप में प्रकट होता है; सांस्कृतिक विषमरूपता, जो भाषा, खानपान एवं रीति-रिवाजों की विविधता में दिखती है; धार्मिक बाहुल्यता, जो अनेक धर्मों एवं सम्प्रदायों के सहअस्तित्व से बनी है; तथा प्रादेशिक विविधता। आधुनिकीकरण इन पक्षों में सम्मिलित नहीं है, क्योंकि वह भारतीय समाज की संरचनात्मक विशेषता नहीं, बल्कि उस पर बाद में क्रियाशील हुई एक परिवर्तन-प्रक्रिया है।

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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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