Sociology: 60 MCQs with Answers
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0%Q1. कैथलीन गफ द्वारा भारत में हुए किसान विद्रोह के वर्गीकरण हेतु प्रयुक्त आधारों में निम्नलिखित में से कौन-सा सम्मिलित नहीं है ?
Right Answer: परम्परागत-चमत्कारिक नेतृत्व
कैथलीन गफ ने भारत के किसान विद्रोहों का अध्ययन कर उन्हें पाँच प्रकारों में बाँटा — पुनर्स्थापनात्मक विद्रोह, धार्मिक आन्दोलन, सामाजिक डकैती, आतंकवादी प्रतिशोध तथा जनसामान्य का सामूहिक विद्रोह। इस वर्गीकरण के लिए उन्होंने तीन आधार अपनाए — विद्रोह के उद्देश्य, उसके पीछे की विचारधारा तथा संगठन की पद्धतियाँ। परम्परागत अथवा चमत्कारिक नेतृत्व को उन्होंने वर्गीकरण का आधार नहीं बनाया, यद्यपि कुछ आन्दोलनों में ऐसा नेतृत्व दिखाई अवश्य देता है। अतः यही विकल्प उनके आधारों में सम्मिलित नहीं है।
Q2. निम्नलिखित में से किन दो पक्षों की चर्चा मैक्स वेबर के द्वारा की गयी है ? जिनके माध्यम से हमारी समझ से सम्बद्ध निर्णय पर्याप्तता के रूप में प्रस्तुत होता है ?
Right Answer: कारण के स्तर पर पर्याप्तता एवं अर्थ के स्तर पर पर्याप्तता
मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया की व्याख्या को वैज्ञानिक बनाने हेतु दो कसौटियाँ दीं। अर्थ के स्तर पर पर्याप्तता का तात्पर्य है कि क्रिया के अंगों का पारस्परिक सम्बन्ध हमारी प्रचलित अर्थ-व्यवस्था के अनुसार बोधगम्य एवं संगत प्रतीत हो। कारण के स्तर पर पर्याप्तता का तात्पर्य है कि अनुभवजन्य आँकड़ों के आधार पर यह सम्भाव्यता सिद्ध हो कि अमुक घटना के बाद अमुक परिणाम प्रायः होता ही है। वेबर के अनुसार सन्तोषजनक समाजशास्त्रीय व्याख्या वही है जो दोनों कसौटियों पर एक साथ खरी उतरे।
Q3. डेरिक सायर के अनुसार वर्तमान दिनों का पूँजीवाद छः स्थितियों पर निर्धारित है (प्रीडिकेटेड)। निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति गलत है ?
Right Answer: पारम्परिक संस्कृतियों का आर्थिक जीवन पर प्रभुत्व
डेरिक सायर ने वेबर की व्याख्या के आधार पर आधुनिक पूँजीवाद की छह पूर्वशर्तें बताईं — निजी सम्पत्ति पर आधारित श्रम विभाजन, बाजार की स्वतंत्रता, तार्किक अर्थात् यंत्रीकृत प्रौद्योगिकी, गणना योग्य विधि, स्वतंत्र श्रम तथा आर्थिक जीवन का वाणिज्यीकरण। इन सभी का सार यह है कि आर्थिक व्यवहार परम्परा के स्थान पर तार्किक गणना से संचालित हो। इसलिए पारम्परिक संस्कृतियों का आर्थिक जीवन पर प्रभुत्व पूँजीवाद की शर्त नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी बाधा है, और यही कथन गलत है।
Q4. समाज का वह प्रकार, जिसमें बाजार विनिमय पर प्रभुत्व स्थापित करते हैं तथा अन्य स्वरूप-पारस्परिकता एवं पुनर्वितरण का बहिष्करण बढ़ता जाता है, कहलाता है :
Right Answer: बाजार समाज
कार्ल पोलानयी ने विनिमय के तीन स्वरूप बताए — पारस्परिकता, पुनर्वितरण तथा बाजार विनिमय। परम्परागत समाजों में पहले दो स्वरूप प्रधान रहते हैं, जहाँ वस्तुओं का आदान-प्रदान नातेदारी, कर्तव्य और सामुदायिक दायित्व से संचालित होता है। जिस समाज में बाजार विनिमय शेष दोनों स्वरूपों को हाशिये पर धकेलकर स्वयं प्रभुत्व स्थापित कर लेता है, उसे बाजार समाज कहा जाता है। इसमें भूमि, श्रम और मुद्रा तक क्रय-विक्रय की वस्तु बन जाते हैं और सामाजिक सम्बन्ध अर्थव्यवस्था में समाहित होने के बजाय अर्थव्यवस्था के अधीन हो जाते हैं।
Q5. ए० आर० देसाई के अनुसार भारतीय राष्ट्रवाद के विकास का पाँचवा चरण निम्नलिखित अवधि से जुड़ा है (सोशल बैकग्राउण्ड ऑफ इण्डियन नेशनलिज्म पुस्तक के आधार पर) :
Right Answer: वर्ष 1934 से 1939 तक
ए० आर० देसाई ने ‘सोशल बैकग्राउंड ऑफ इंडियन नेशनलिज्म’ में भारतीय राष्ट्रवाद के विकास को पाँच चरणों में विभाजित किया। प्रथम चरण 1885 से 1905 तक था, जिसमें आन्दोलन बुद्धिजीवी उच्च वर्ग तक सीमित रहा। द्वितीय चरण 1905 से 1918 तक शिक्षित मध्यम वर्ग के विस्तार का रहा। तृतीय चरण 1918 से 1934 तक गाँधीजी के नेतृत्व में जनआधार के विस्तार का था। पाँचवाँ चरण 1934 से 1939 तक का माना जाता है, जिसमें समाजवादी एवं साम्यवादी समूहों, किसान सभाओं तथा मजदूर संगठनों का उभार राष्ट्रीय आन्दोलन की मुख्य विशेषता बना।
Q6. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से कौन ‘कल्चर, स्पेस ऐण्ड द नेशन-स्टेट’ पुस्तक के लेखक हैं ?
Right Answer: टी० के० ओमन
‘कल्चर, स्पेस ऐण्ड द नेशन-स्टेट : फ्रॉम सेंटीमेंट टु स्ट्रक्चर’ के लेखक प्रसिद्ध भारतीय समाजशास्त्री टी० के० ओमन हैं। इस कृति में उन्होंने राष्ट्र, राज्य, नृजातीयता तथा प्रदेश के पारस्परिक सम्बन्धों का विश्लेषण किया और बताया कि भारत जैसे बहुसांस्कृतिक समाज में राष्ट्र-राज्य की अवधारणा पश्चिमी प्रतिमान से भिन्न रूप लेती है। ओमन ने भावना पर आधारित सामूहिक पहचानों तथा संरचना पर आधारित राजनीतिक इकाइयों के बीच के तनाव को रेखांकित किया। दीपांकर गुप्ता, अर्जुन अप्पादुरइ तथा होमी भाभा की कृतियाँ इससे भिन्न हैं।
Q7. जोखिम समाज (रिस्क सोसायटी) की अवधारणा का विवेचन करते हुए उलरिच बैक ने दो महत्वपूर्ण प्रत्ययों के मध्य अन्तर प्रस्तुत किया है। निम्नलिखित में से कौन-सा अन्तर सही है ?
Right Answer: निर्मित जोखिम एवं प्राकृतिक खतरे
उलरिच बैक ने अपनी कृति ‘रिस्क सोसायटी’ में बताया कि आधुनिक समाज की केन्द्रीय समस्या सम्पदा का वितरण नहीं, बल्कि जोखिमों का वितरण बन गई है। उन्होंने प्राकृतिक खतरों तथा निर्मित जोखिमों में स्पष्ट अन्तर किया। प्राकृतिक खतरे बाढ़, भूकम्प एवं सूखे जैसी घटनाएँ हैं, जो मानव नियंत्रण से बाहर की प्राकृतिक शक्तियों से उत्पन्न होती हैं। इसके विपरीत निर्मित जोखिम मानव के अपने वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीय एवं औद्योगिक विकास की उपज हैं, जैसे परमाणु दुर्घटना, प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन। ये सीमाओं से परे होते हैं और वर्ग एवं राष्ट्र दोनों को पार कर जाते हैं।
Q8. जनगणना वर्ष 1961 एवं 2011 , जो नीचे दिये हुए हैं, में नगरीय जनसंख्या के सही आँकड़े मिलियन में (एक मिलियन अर्थात् 10 लाख) रेखांकित करें :
Right Answer: 78.94 मिलियन (1961) एवं 377.1 मिलियन (2011)
भारत में नगरीकरण की गति स्वतंत्रता के बाद तेजी से बढ़ी है। 1961 की जनगणना के अनुसार देश की नगरीय जनसंख्या लगभग 78.94 मिलियन अर्थात् सात करोड़ नब्बे लाख थी, जो कुल जनसंख्या का लगभग अठारह प्रतिशत बैठती थी। 2011 की जनगणना में यह बढ़कर लगभग 377.1 मिलियन अर्थात् सैंतीस करोड़ सत्तर लाख हो गई, जो कुल जनसंख्या का लगभग इकतीस प्रतिशत है। इस प्रकार पचास वर्षों में नगरीय जनसंख्या लगभग पाँच गुना बढ़ी। 2011 की जनगणना पहली ऐसी जनगणना रही जिसमें नगरीय जनसंख्या की निरपेक्ष वृद्धि ग्रामीण वृद्धि से अधिक रही।
Q9. जी० एस० घूरिये के अनुसार भारत की हिन्दू जनसंख्या में छहः मुख्य भौतिक/शारीरिक (फिजिकल) प्रकार विद्यमान हैं। निम्नलिखित में से कौन-सी भौतिक/शारीरिक प्रकार घूरिये के मत से सम्बद्ध नहीं है ?
Right Answer: द कॉकेशॉयड
जी० एस० घूरिये ने ‘कास्ट एण्ड रेस इन इंडिया’ में भारत की हिन्दू जनसंख्या में छह प्रमुख भौतिक प्रकार बताए — इण्डो-आर्यन, प्री-द्रविड, द्रविड, पश्चिमी ब्रैकीसेफल, मंगोलॉयड तथा मंगोलो-द्रविड। उनका उद्देश्य यह दिखाना था कि जाति-व्यवस्था और प्रजातीय भिन्नता के बीच सम्बन्ध केवल उत्तर भारत में ही स्पष्ट है, सम्पूर्ण देश में नहीं। ‘कॉकेशॉयड’ एक व्यापक विश्वस्तरीय प्रजातीय श्रेणी है, जिसका प्रयोग घूरिये की इस भारतीय सूची में नहीं हुआ। अतः यही विकल्प उनके वर्गीकरण से सम्बद्ध नहीं है।
Q10. निम्नलिखित में से किस अभिकरण ने सतत विकास की अवधारणा को ‘एक ऐसा विकास जो वर्तमान की आवश्यकताओं को, भावी पीढ़ी की उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने की दक्षता से समझौता किये बिना, पूरा करता है’ के रूप में प्रस्तुत किया है ?
Right Answer: ब्रुन्डलैण्ड आयोग
सतत विकास की यह प्रसिद्ध परिभाषा 1987 में प्रकाशित ‘आवर कॉमन फ्यूचर’ नामक रिपोर्ट में दी गई थी। यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण एवं विकास पर विश्व आयोग ने प्रस्तुत की, जिसकी अध्यक्षता नॉर्वे की तत्कालीन प्रधानमंत्री ग्रो हार्लेम ब्रुन्डलैण्ड ने की थी, इसीलिए इसे ब्रुन्डलैण्ड आयोग कहा जाता है। इसके अनुसार सतत विकास वह विकास है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को भावी पीढ़ी की अपनी आवश्यकताएँ पूरी करने की क्षमता से समझौता किए बिना पूरा करे। इसी रिपोर्ट ने पर्यावरण और विकास को परस्पर विरोधी न मानकर एक-दूसरे का पूरक सिद्ध किया।