Sociology - Modern Sociological Theory: 6 MCQs with Answers
Sociology- Modern Sociological Theory
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0%Q1. योगेन्द्र सिंह के अनुसार संस्कृति की गत्यात्मकता स्वयं में तीन स्तरों पर अभिव्यक्त होती है जहाँ विभिन्न सिद्धान्त जुड़े हुए हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धान्त गलत है ?
Right Answer: बिना शर्त विश्वासों का सिद्धान्त
Explanation:
योगेन्द्र सिंह के अनुसार संस्कृति की गत्यात्मकता तीन स्तरों पर अभिव्यक्त होती है और प्रत्येक स्तर का अपना सिद्धान्त है। पौराणिक गाथाशास्त्र का सिद्धान्त संस्कृति को प्रतीकों, मिथकों एवं कालातीत आख्यानों के माध्यम से समझता है। इतिहास एवं इतिहासलेखन का सिद्धान्त उसे कालक्रम, घटनाओं तथा परिवर्तन की प्रक्रिया में देखता है। तर्क अथवा लॉजिक का सिद्धान्त सांस्कृतिक रूपों की आन्तरिक संरचना एवं युक्तियुक्तता को उद्घाटित करता है। बिना शर्त विश्वासों का कोई सिद्धान्त उन्होंने नहीं दिया, क्योंकि वह विश्लेषण नहीं बल्कि आस्था का क्षेत्र है।
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Q2. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से यह किसका मत है, ‘व्यवहार जो संस्थागत अपेक्षाओं, अर्थात्एक सामाजिक व्यवस्था के अन्तर्गत वैधानिक रूप में मान्य एवं साझेदार अपेक्षाओं, का उल्लंघन हो’, विचलन कहलाता है ?
Right Answer: टालकट पारसन्स
Explanation:
टालकट पारसन्स ने विचलन को उस व्यवहार के रूप में परिभाषित किया जो संस्थागत अपेक्षाओं का उल्लंघन करता है, अर्थात् उन अपेक्षाओं का जो किसी सामाजिक व्यवस्था के भीतर वैधानिक रूप से मान्य एवं सदस्यों द्वारा साझा की गई हों। उनके प्रकार्यवादी दृष्टिकोण में सामाजिक व्यवस्था तभी बनी रहती है जब व्यक्ति मूल्यों एवं मानकों को समाजीकरण द्वारा आत्मसात कर लें और भूमिका-अपेक्षाओं के अनुरूप आचरण करें। इस अनुरूपता में आई विफलता ही विचलन है, जिसे सामाजिक नियंत्रण के तंत्र नियंत्रित करते हैं। मर्टन ने इसे लक्ष्य एवं साधन के तनाव से समझाया।
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Q3. रेमण्ड विलियम्स ने एक निबन्ध ‘कल्चर इज़ ऑर्डिनरी’ में उन दो पक्षों को प्रस्तुत किया है, जो एक संस्कृति के पास होते हैं। निम्नलिखित में से उन दो पक्षों को रेखांकित करें :
Right Answer: ज्ञात अर्थ एवं दिशायें
Explanation:
रेमण्ड विलियम्स सांस्कृतिक अध्ययन के संस्थापकों में गिने जाते हैं। अपने प्रसिद्ध निबन्ध ‘कल्चर इज़ ऑर्डिनरी’ में उन्होंने संस्कृति को अभिजात वर्ग की विशिष्ट सम्पत्ति मानने की परम्परा को अस्वीकार किया और कहा कि संस्कृति सामान्य जन के दैनिक जीवन में ही निहित है। उनके अनुसार प्रत्येक संस्कृति के दो पक्ष होते हैं — पहला, ज्ञात अर्थ एवं दिशाएँ, जिनमें उसके सदस्य प्रशिक्षित होते हैं और जो परम्परा से प्राप्त होते हैं; तथा दूसरा, नवीन प्रेक्षण एवं अर्थ, जो अनुभव से निरन्तर गढ़े जाते रहते हैं। इस प्रकार संस्कृति परम्परागत भी है और सृजनशील भी।
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Q4. निम्नलिखित में से किस समाजशास्त्री का यह कथन है, ‘परिवार सामाजिक एवं सांस्कृतिक पूँजी का, अपने सदस्यों के समाजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा, संग्रह है ?
Right Answer: पियरे बोर्दियो
Explanation:
फ्रांसीसी समाजशास्त्री पियरे बोर्दियो ने पूँजी की अवधारणा को आर्थिक क्षेत्र से बाहर विस्तारित किया और सांस्कृतिक, सामाजिक तथा प्रतीकात्मक पूँजी की बात की। उनके अनुसार परिवार वह मुख्य स्थल है जहाँ समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा सामाजिक एवं सांस्कृतिक पूँजी का संचय एवं हस्तान्तरण होता है। बच्चे को भाषा, अभिरुचि, शिष्टाचार तथा सम्पर्कों का जो भण्डार परिवार से मिलता है, वही उसका ‘हैबिटस’ बनाता है और विद्यालय में उसकी सफलता निर्धारित करता है। इसी से बोर्दियो ने समझाया कि शिक्षा व्यवस्था अवसर की समानता देने के बजाय वर्गीय असमानता का पुनरुत्पादन करती है।
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Q5. संस्कृति के विषय में स्टुअर्ट हाल के विचारों में निम्नलिखित में से कौन-सा पैराडिमिक बदलाव अभिव्यक्त होता है ?
Right Answer: ‘जीवन जीने के समग्र तरीके’ के रूप में संस्कृति से ‘सिगनिफाइंग प्रैक्टिस’ के रूप में संस्कृति की ओर
Explanation:
स्टुअर्ट हाल ब्रिटिश सांस्कृतिक अध्ययन के प्रमुख स्तम्भ थे और बर्मिंघम के समकालीन सांस्कृतिक अध्ययन केन्द्र से जुड़े रहे। उनके चिन्तन में एक महत्त्वपूर्ण पैराडिमिक बदलाव दिखाई देता है — रेमण्ड विलियम्स की ‘जीवन जीने के समग्र तरीके’ वाली संस्कृति की समझ से आगे बढ़कर संस्कृति को ‘सिगनिफाइंग प्रैक्टिस’ अर्थात् अर्थ-निर्माण की प्रक्रिया के रूप में देखना। हाल के अनुसार अर्थ वस्तुओं में पहले से निहित नहीं होता, बल्कि भाषा, प्रतीक एवं प्रतिनिधित्व की प्रक्रियाओं में गढ़ा जाता है। इसी से उनका ‘एन्कोडिंग-डिकोडिंग’ प्रतिमान विकसित हुआ।
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Q6. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से किन्होंने ‘प्रक्रिया भूमिका सिद्धान्त’ की रचना की है तथा ‘संरचनात्मक भूमिका सिद्धान्त’ के साथ मत भिन्नता को प्रस्तुत किया है ?
Right Answer: राल्फ एच० टर्नर
Explanation:
राल्फ एच० टर्नर ने प्रक्रिया भूमिका सिद्धान्त की रचना की और इसे संरचनात्मक भूमिका सिद्धान्त से स्पष्ट रूप से अलग बताया। संरचनात्मक दृष्टिकोण, जिसे लिंटन एवं पारसन्स ने विकसित किया, भूमिका को सामाजिक संरचना द्वारा पहले से निर्धारित अपेक्षाओं का निश्चित समुच्चय मानता है, जिसे व्यक्ति केवल निभाता है। इसके विपरीत टर्नर का तर्क है कि भूमिकाएँ पूर्वनिर्धारित नहीं होतीं, बल्कि अन्तःक्रिया के दौरान निरन्तर गढ़ी एवं संशोधित की जाती हैं। इसी को उन्होंने ‘रोल-मेकिंग’ कहा और बताया कि व्यक्ति दूसरों के व्यवहार से भूमिका का अनुमान लगाकर अपनी भूमिका रचता है।
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