Sociology - Books and Authors in Sociology: 8 MCQs with Answers
Sociology- Books and Authors in Sociology
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0%Q1. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से कौन ‘कल्चर, स्पेस ऐण्ड द नेशन-स्टेट’ पुस्तक के लेखक हैं ?
Right Answer: टी० के० ओमन
Explanation:
‘कल्चर, स्पेस ऐण्ड द नेशन-स्टेट : फ्रॉम सेंटीमेंट टु स्ट्रक्चर’ के लेखक प्रसिद्ध भारतीय समाजशास्त्री टी० के० ओमन हैं। इस कृति में उन्होंने राष्ट्र, राज्य, नृजातीयता तथा प्रदेश के पारस्परिक सम्बन्धों का विश्लेषण किया और बताया कि भारत जैसे बहुसांस्कृतिक समाज में राष्ट्र-राज्य की अवधारणा पश्चिमी प्रतिमान से भिन्न रूप लेती है। ओमन ने भावना पर आधारित सामूहिक पहचानों तथा संरचना पर आधारित राजनीतिक इकाइयों के बीच के तनाव को रेखांकित किया। दीपांकर गुप्ता, अर्जुन अप्पादुरइ तथा होमी भाभा की कृतियाँ इससे भिन्न हैं।
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Q2. निम्नलिखित में से कौन ‘हॉट, फ्लैट एण्ड क्राउडेड’ पुस्तक के लेखक हैं ?
Right Answer: थॉमस एल० फ्राइडमैन
Explanation:
‘हॉट, फ्लैट एण्ड क्राउडेड’ के लेखक अमेरिकी पत्रकार एवं स्तम्भकार थॉमस एल० फ्राइडमैन हैं। शीर्षक के तीन शब्द विश्व की तीन बड़ी प्रवृत्तियों की ओर संकेत करते हैं — जलवायु परिवर्तन के कारण गर्म होती पृथ्वी, वैश्वीकरण के कारण समतल होती अर्थात् प्रतिस्पर्धा में बराबर होती दुनिया, तथा जनसंख्या वृद्धि के कारण भीड़भाड़ भरा संसार। फ्राइडमैन का तर्क है कि इन तीनों का सामना केवल हरित प्रौद्योगिकी क्रान्ति से ही सम्भव है। इससे पूर्व उनकी चर्चित कृति ‘द वर्ल्ड इज़ फ्लैट’ वैश्वीकरण पर केन्द्रित थी।
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Q3. निम्नलिखित विद्वानों में से किन्होंने पहली बार ‘इकोफैमिनिज्म की अवधारणा को प्रयुक्त किया ?
Right Answer: फ्रैनकॉइज डी’इयुबोनि
Explanation:
‘इकोफेमिनिज्म’ शब्द का प्रथम प्रयोग फ्रांसीसी लेखिका फ्रैनकॉइज डी’इयुबोनि ने 1974 में अपनी कृति ‘ल फेमिनिज्म ऊ ला मोर’ अर्थात् ‘नारीवाद या मृत्यु’ में किया। इस विचारधारा का मूल तर्क यह है कि स्त्रियों का शोषण और प्रकृति का दोहन एक ही पितृसत्तात्मक तथा प्रभुत्ववादी मानसिकता की दो अभिव्यक्तियाँ हैं, अतः दोनों की मुक्ति भी साथ-साथ ही सम्भव है। भारत में वन्दना शिवा ने इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया और चिपको आन्दोलन को इसका उदाहरण बताया, जहाँ ग्रामीण महिलाओं ने वनों की रक्षा हेतु अग्रणी भूमिका निभाई।
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Q4. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से किन्होंने ‘मिरर्स ऑफ वायलेन्स : कम्युनिटीज, रॉइट्स ऐण्ड सरवायवर्स इन साउथ एशिया’ का सम्पादन किया है ?
Right Answer: वीना दास
Explanation:
‘मिरर्स ऑफ वायलेन्स : कम्युनिटीज, रॉइट्स ऐण्ड सरवायवर्स इन साउथ एशिया’ का सम्पादन प्रसिद्ध भारतीय समाजशास्त्री एवं मानवशास्त्री वीना दास ने किया। 1990 में प्रकाशित यह संग्रह दक्षिण एशिया में साम्प्रदायिक दंगों, सामूहिक हिंसा तथा उससे बचे लोगों के अनुभवों पर केन्द्रित है। इसमें विशेष रूप से 1984 के सिख-विरोधी दंगों का अध्ययन सम्मिलित है। वीना दास ने दिखाया कि हिंसा केवल घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रक्रिया है जो पीड़ितों के दैनिक जीवन, स्मृति एवं सामुदायिक सम्बन्धों में लम्बे समय तक बनी रहती है।
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Q5. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से किन्होंने ‘डिस्कवरिंग सोशियोलॉजी : स्टडीज इन सोशियोलॉजिकल थ्योरी ऐण्ड मेथड’ का लेखन किया है ?
Right Answer: जॉन रेक्स
Explanation:
‘डिस्कवरिंग सोशियोलॉजी : स्टडीज इन सोशियोलॉजिकल थ्योरी ऐण्ड मेथड’ के लेखक ब्रिटिश समाजशास्त्री जॉन रेक्स हैं। इस कृति में उन्होंने समाजशास्त्रीय सिद्धान्त एवं पद्धति के आधारभूत प्रश्नों की विवेचना की। रेक्स संघर्ष सिद्धान्त के प्रमुख प्रवक्ता माने जाते हैं और उन्होंने पारसन्स के प्रकार्यवादी सन्तुलन-प्रतिमान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि समाज को समझने की कुंजी सहमति नहीं, बल्कि हितों का संघर्ष है। उन्होंने नस्लीय सम्बन्धों तथा नगरीय समाजशास्त्र पर भी महत्त्वपूर्ण कार्य किया, विशेषतः ‘रेस, कम्युनिटी ऐण्ड कॉन्फ्लिक्ट’ में।
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Q6. एक व्यापक स्तर के निदर्श के आधार पर जॉर्ज पीटर मर्डाक का दावा है कि परिवार एक सार्वभौमिक सामाजिक संस्था है। व्यापक स्तर का यह निदर्श निर्मित होता है :
Right Answer: दो सौ पचास समाजों से
Explanation:
जॉर्ज पीटर मर्डाक ने 1949 में प्रकाशित अपनी कृति ‘सोशल स्ट्रक्चर’ में विश्व के दो सौ पचास समाजों के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर दावा किया कि परिवार एक सार्वभौमिक सामाजिक संस्था है। उनके निदर्श में आखेटक-संग्राहक समुदायों से लेकर औद्योगिक समाजों तक की विविधता सम्मिलित थी। मर्डाक के अनुसार परिवार चार आधारभूत प्रकार्य पूरे करता है — लैंगिक, आर्थिक, पुनरुत्पादक तथा शैक्षिक। बाद के विद्वानों ने इजरायल के किबुत्ज तथा जमैका एवं नायर समाजों के उदाहरण देकर इस सार्वभौमिकता की आलोचना की, किन्तु मर्डाक का यह अध्ययन आज भी आधारभूत माना जाता है।
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Q7. निम्नलिखित में से कौन ‘द ग्रेट ट्रान्सफॉर्मेशन : द पॉलिटिकल ऐण्ड इकोनॉमिक ओरिजिन ऑफ ऑवर टाइम’ शीर्षक की पुस्तक के लेखक हैं ?
Right Answer: कार्ल पोलानयी
Explanation:
‘द ग्रेट ट्रान्सफॉर्मेशन : द पॉलिटिकल ऐण्ड इकोनॉमिक ओरिजिन ऑफ आवर टाइम’ के लेखक हंगेरियन-अमेरिकी विचारक कार्ल पोलानयी हैं। 1944 में प्रकाशित इस कृति में उन्होंने दिखाया कि स्वनियमित बाजार कोई प्राकृतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि राज्य के सचेत हस्तक्षेप से गढ़ी गई संस्था है। उन्होंने भूमि, श्रम तथा मुद्रा को ‘काल्पनिक वस्तुएँ’ कहा, क्योंकि इनका उत्पादन बिक्री के लिए नहीं हुआ। पोलानयी का प्रसिद्ध सिद्धान्त ‘द्विगामी गति’ बताता है कि बाजार के विस्तार के विरुद्ध समाज स्वयं को बचाने हेतु प्रतिरोधात्मक आन्दोलन खड़ा करता है।
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Q8. निम्नलिखित महत्वपूर्ण पुस्तकों में से किस पुस्तक में हम प्रारम्भ के दो पाठ ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ऐन इण्डिविजुअल पास्टाइम’ एवं ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ए फॉर्म ऑफ कॉन्शियसनेस’ शीर्षक से पाते हैं ?
Right Answer: इनविटेशन टू सोशियोलॉजी - पीटर एल० बर्जर
Explanation:
‘इनविटेशन टू सोशियोलॉजी : ए ह्यूमनिस्टिक पर्सपेक्टिव’ के लेखक पीटर एल० बर्जर हैं और यह 1963 में प्रकाशित हुई। इसके आरम्भिक दो अध्याय क्रमशः ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ऐन इण्डिविजुअल पास्टाइम’ तथा ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ए फॉर्म ऑफ कॉन्शियसनेस’ शीर्षक से हैं। बर्जर का प्रसिद्ध कथन है कि समाजशास्त्र का प्रथम ज्ञान यही है कि वस्तुएँ वैसी नहीं होतीं जैसी वे दिखाई देती हैं। उन्होंने समाजशास्त्रीय दृष्टि को एक ऐसी चेतना बताया जो प्रचलित मान्यताओं का पर्दाफाश करती है। थॉमस लकमैन के साथ लिखी उनकी कृति ‘द सोशल कंस्ट्रक्शन ऑफ रियलिटी’ भी अत्यन्त प्रसिद्ध है।
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