Commerce: 60 MCQs with Answers

Commerce MCQ Questions
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Commerce Questions And Answers

India Study Institute brings Commerce MCQ Questions and Answers for HTET/KVS/NVS and DSSSB Exams. Attempt Commerce online MCQ Questions practice sets free.

Commerce MCQs on accountancy, business studies, management and marketing। वाणिज्य विषय के महत्त्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं व्याख्या सहित — HTET, CTET, UGC-NET, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी।

Other Exam Papers:

Q1. आर० एन० कार्टर के अनुसार, ‘‘.......... व्यावसायिक लेनदेन को खाते की पुस्तकों में सही ढंग से दर्ज करने का विज्ञान और कला है जिसके परिणामस्वरूप धन या धन के मूल्य का हस्तांतरण होता है।’’

Right Answer: बही - खाता


Explanation:

आर० एन० कार्टर की यह प्रसिद्ध परिभाषा बही-खाता अर्थात् बुक-कीपिंग की है। उनके अनुसार बही-खाता उन समस्त व्यावसायिक लेनदेनों को खाते की पुस्तकों में सही ढंग से दर्ज करने का विज्ञान एवं कला है जिनके परिणामस्वरूप धन अथवा धन के मूल्य का हस्तांतरण होता है। इसे विज्ञान इसलिए कहा गया क्योंकि यह निश्चित नियमों पर चलता है और कला इसलिए क्योंकि इन नियमों का व्यावहारिक प्रयोग कौशल माँगता है। बही-खाता लेखांकन की केवल प्रथम अवस्था है; उसके आगे वर्गीकरण, सारांशीकरण, विश्लेषण एवं निर्वचन का कार्य लेखांकन करता है।

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Q2. मूल्य ह्रास की डूबती निधि विधि में, मूल्य ह्रास की राशि :

Right Answer: वर्षों तक स्थिर रहती है


Explanation:

मूल्य ह्रास की डूबती निधि विधि में प्रत्येक वर्ष मूल्य ह्रास की राशि समान अर्थात् स्थिर रहती है। इस विधि में प्रतिवर्ष मूल्य ह्रास के बराबर राशि लाभ-हानि खाते में डालकर उतनी ही राशि बाहर प्रतिभूतियों में निवेश कर दी जाती है, ताकि सम्पत्ति का जीवनकाल समाप्त होने पर उसके प्रतिस्थापन हेतु नकद उपलब्ध हो। निवेश पर प्राप्त ब्याज भी पुनः उसी निधि में लगाया जाता है। वार्षिक अंशदान की गणना डूबती निधि सारणी की सहायता से की जाती है। इसका मुख्य लाभ यह है कि प्रतिस्थापन के समय धन की व्यवस्था पहले से ही हो जाती है।

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Q3. किस चार्ट का उपयोग डेटा की शृंखला में मौजूद परिवर्तनों या प्रवृत्ति की पहचान करने के लिए किया जाता है ?

Right Answer: रेखा या अंकगणितीय चार्ट


Explanation:

रेखा चार्ट अथवा अंकगणितीय चार्ट का उपयोग किसी शृंखला में समय के साथ होने वाले परिवर्तनों तथा प्रवृत्ति की पहचान के लिए किया जाता है। इसमें क्षैतिज अक्ष पर समय तथा उदग्र अक्ष पर चर का मान अंकित कर बिन्दुओं को क्रमशः रेखा से जोड़ दिया जाता है, जिससे उतार-चढ़ाव एवं दीर्घकालीन दिशा स्पष्ट दिखाई देती है। इसके विपरीत पाई चार्ट किसी समग्र के भागों का अनुपात दर्शाता है, बार ग्राफ विभिन्न वर्गों की तुलना करता है और चित्रलेख आँकड़ों को चित्रों के माध्यम से सरल एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत करता है।

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Q4. दोनों शेष राशियों (कैश बुक और पास बुक के अनुसार बैंक शेष) में अंतर निम्नलिखित में से किस कारण से उत्पन्न नहीं हो सकता है ?

Right Answer: पसंद और नापसंद


Explanation:

रोकड़ बही तथा पासबुक के बैंक शेष में अन्तर मुख्यतः तीन कारणों से उत्पन्न होता है। पहला समय का अन्तर है, जैसे जारी किए गए किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत न हुए चेक अथवा जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक। दूसरा कारण दोनों में से किसी एक पक्ष द्वारा किया गया लेन-देन है, जैसे बैंक शुल्क, ब्याज अथवा सीधे जमा हुई राशि, जिसकी जानकारी दूसरे पक्ष को बाद में मिलती है। तीसरा कारण लिपिकीय त्रुटियाँ हैं। पसंद और नापसंद जैसा कोई व्यक्तिपरक कारण इस अन्तर का आधार नहीं बन सकता।

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Q5. रोकड़ बही के अनुसार शेष 2,40,000 रु०; जारी किए गए किन्तु प्रस्तुत न हुए चेक 1,36,000 रु०; जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक 90,000 रु०; बैंक शुल्क 300 रु०; बैंक द्वारा जमा ब्याज 1,250 रु०। पासबुक के अनुसार शेष होगा :

Right Answer: 2,86,950 रुपये


Explanation:

रोकड़ बही के अनुकूल शेष से आरम्भ कर पासबुक का शेष ज्ञात करने के लिए क्रमिक समायोजन किए जाते हैं। जारी किए गए किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत न हुए चेक की राशि जोड़ी जाती है, क्योंकि बैंक ने अभी वह घटाई नहीं है। जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक घटाए जाते हैं, क्योंकि बैंक ने उन्हें अभी जमा नहीं किया। बैंक शुल्क घटाया तथा बैंक द्वारा जमा किया गया ब्याज जोड़ा जाता है। अतः 2,40,000 में 1,36,000 जोड़कर, 90,000 तथा 300 घटाकर और 1,250 जोड़ने पर 2,86,950 रुपये प्राप्त होते हैं।

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Q6. चालू अनुपात 2.5 : 1, तरल अनुपात 1.25 : 1, स्कंध 21 लाख रु०, तथा बैंक ओवरड्राफ्ट एवं पूर्वदत्त व्यय शून्य हैं। कंपनी के चालू दायित्व ज्ञात कीजिए :

Right Answer: 16,80,000 रु०


Explanation:

चालू अनुपात 2.5 अनुपात 1 है, अतः चालू सम्पत्तियाँ चालू दायित्वों की ढाई गुना हैं। तरल अनुपात 1.25 अनुपात 1 है, अतः तरल सम्पत्तियाँ चालू दायित्वों की सवा गुना हैं। यहाँ पूर्वदत्त व्यय शून्य हैं, इसलिए स्कंध चालू सम्पत्तियों तथा तरल सम्पत्तियों का अन्तर होगा, अर्थात् 2.5 में से 1.25 घटाने पर 1.25 गुना चालू दायित्व। यह मान 21,00,000 रुपये दिया गया है। अतः चालू दायित्व 21,00,000 को 1.25 से भाग देने पर 16,80,000 रुपये प्राप्त होते हैं।

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Q7. ऋणपत्र पर ब्याज को आमतौर पर कंपनी के वित्तीय विवरणों में किस रूप में माना जाता है ?

Right Answer: कंपनी के मुनाफे के खिलाफ शुल्क के रूप में


Explanation:

ऋणपत्र कंपनी के लिए उधार ली गई पूँजी है, अंश पूँजी नहीं। इस पर देय ब्याज एक निश्चित संविदात्मक दायित्व है, जिसका भुगतान कंपनी को लाभ हो या हानि, दोनों ही स्थितियों में करना ही पड़ता है। इसीलिए इसे लाभ के विरुद्ध प्रभार माना जाता है, न कि लाभ का विनियोजन। इसे लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है और यह कर योग्य लाभ को भी घटा देता है, जिससे कंपनी को कर-कवच का लाभ मिलता है। इसके विपरीत अंशों पर दिया जाने वाला लाभांश लाभ का विनियोजन होता है और केवल लाभ होने पर ही दिया जाता है।

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Q8. निम्नलिखित में से किसे जीएसटी से छूट नहीं है ?

Right Answer: अंतरराज्यीय बिक्री


Explanation:

वस्तु एवं सेवा कर एक गंतव्य आधारित उपभोग कर है, जो वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर लगता है। ब्याज को वित्तीय सेवा मानकर सामान्यतः छूट दी गई है, कर्मचारियों द्वारा दावा किया गया यात्रा व्यय आपूर्ति नहीं माना जाता और सरकार को दी जाने वाली अनेक सेवाएँ भी छूट सूची में आती हैं। इसके विपरीत अंतरराज्यीय बिक्री जीएसटी के दायरे में पूरी तरह आती है और उस पर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अर्थात् आईजीएसटी लगाया जाता है, जिसे केन्द्र सरकार वसूलकर उपभोग करने वाले राज्य के साथ बाँटती है।

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Q9. नियोक्ताओं के वित्तीय विवरणों में सेवानिवृत्ति लाभों के लिए लेखांकन किस भारतीय लेखांकन मानक के अंतर्गत आता है ?

Right Answer: AS-15


Explanation:

नियोक्ताओं के वित्तीय विवरणों में कर्मचारी लाभों तथा सेवानिवृत्ति लाभों का लेखांकन भारतीय लेखांकन मानक AS-15 के अन्तर्गत आता है, जिसका शीर्षक ‘कर्मचारी लाभ’ है। यह मानक अल्पकालीन लाभों जैसे वेतन एवं बोनस, सेवा-उपरान्त लाभों जैसे उपदान, पेंशन एवं भविष्य निधि, तथा अन्य दीर्घकालीन लाभों की मान्यता एवं मापन की विधि निर्धारित करता है। इसमें परिभाषित अंशदान योजना तथा परिभाषित लाभ योजना का भेद किया गया है और परिभाषित लाभ योजनाओं के लिए बीमांकिक मूल्यांकन अनिवार्य है। AS-12 सरकारी अनुदान से सम्बद्ध है।

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Q10. परिसंपत्ति की मूल लागत 2,50,000 रुपये है। परिसंपत्ति का उपयोगी जीवन 10 वर्ष है और शुद्ध अवशिष्ट मूल्य 50,000 रुपये होने का अनुमान है। हर साल लगाए जाने वाले मूल्य ह्रास की राशि की गणना करें :

Right Answer: 20,000 रु०


Explanation:

सीधी रेखा विधि में मूल्य ह्रास की वार्षिक राशि निकालने के लिए सम्पत्ति की मूल लागत में से उसका अनुमानित शुद्ध अवशिष्ट मूल्य घटाकर शेष को उपयोगी जीवन के वर्षों की संख्या से भाग दिया जाता है। यहाँ मूल लागत 2,50,000 रुपये तथा अवशिष्ट मूल्य 50,000 रुपये है, अतः ह्रास योग्य राशि 2,00,000 रुपये हुई। इसे उपयोगी जीवन 10 वर्ष से भाग देने पर प्रतिवर्ष 20,000 रुपये मूल्य ह्रास प्राप्त होता है। इस विधि की विशेषता यह है कि प्रत्येक वर्ष समान राशि लगाई जाती है और जीवन के अन्त में पुस्तक मूल्य घटकर अवशिष्ट मूल्य रह जाता है।

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Q11. एक कंपनी का शुद्ध लाभ मार्जिन 5% है, कुल संपत्ति 90,00,000 रुपये है और संपत्ति पर रिटर्न 9% है। इसका कुल संपत्ति कारोबार अनुपात होगा :

Right Answer: 1.8


Explanation:

संपत्ति पर प्रतिफल, शुद्ध लाभ मार्जिन तथा कुल संपत्ति कारोबार अनुपात के बीच ड्यूपॉन्ट विश्लेषण के अनुसार यह सम्बन्ध होता है — संपत्ति पर प्रतिफल बराबर शुद्ध लाभ मार्जिन गुणा कुल संपत्ति कारोबार अनुपात। प्रश्न में संपत्ति पर प्रतिफल 9 प्रतिशत तथा शुद्ध लाभ मार्जिन 5 प्रतिशत दिया गया है। अतः कुल संपत्ति कारोबार अनुपात 9 को 5 से भाग देने पर 1.8 प्राप्त होता है। इसका अर्थ है कि कंपनी अपनी कुल संपत्तियों के मूल्य का 1.8 गुना विक्रय उत्पन्न कर रही है, जो संपत्तियों के उपयोग की कार्यकुशलता दर्शाता है।

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Q12. उद्यम द्वारा अपनी परिचालन गतिविधियों से प्राप्त या प्राप्य राशि है :

Right Answer: राजस्व


Explanation:

राजस्व से तात्पर्य उस सकल राशि से है जो उद्यम अपनी सामान्य परिचालन गतिविधियों से प्राप्त करता है अथवा जिसे प्राप्त करने का उसे अधिकार है। इसमें वस्तुओं की बिक्री, सेवाओं का प्रतिफल तथा ब्याज, स्वामिस्व एवं लाभांश जैसी प्राप्तियाँ सम्मिलित होती हैं। यह सकल अन्तर्वाह है, इसमें से व्यय घटाए नहीं जाते। इसके विपरीत लाभ अथवा मुनाफा तब निकलता है जब राजस्व में से समस्त व्यय घटा दिए जाएँ, और आय एक व्यापक पद है जिसमें राजस्व तथा अन्य लाभ दोनों सम्मिलित रहते हैं।

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Q13. चालू वर्ष के लिए प्रस्तावित लाभांश किस शीर्षक के अंतर्गत दर्शाया जाता है ?

Right Answer: आकस्मिक देनदारियाँ


Explanation:

कंपनी अधिनियम 2013 तथा संशोधित लेखांकन मानकों के अनुसार चालू वर्ष के लिए प्रस्तावित लाभांश को तुलन-पत्र में देयता के रूप में नहीं दिखाया जाता, क्योंकि उसकी घोषणा अभी अंशधारियों की वार्षिक आम सभा में होनी शेष रहती है। जब तक अंशधारी उसे स्वीकृत नहीं कर देते, तब तक वह कंपनी का वर्तमान दायित्व नहीं बनता। अतः इसे आकस्मिक देनदारियों के शीर्षक के अन्तर्गत टिप्पणी के रूप में प्रकट किया जाता है। स्वीकृति मिलने पर ही उस वर्ष में इसे देयता के रूप में मान्यता दी जाती है और भुगतान किया जाता है।

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Q14. यदि कोई ग्राहक पहले चालान किए गए सामान को वापस कर देता है या ग्राहक को आगे की छूट की अनुमति दी जाती है, तो कौन-सा स्रोत दस्तावेज़ जारी किया जाता है ?

Right Answer: क्रेडिट नोट


Explanation:

क्रेडिट नोट वह स्रोत दस्तावेज है जो विक्रेता अपने ग्राहक के नाम तब जारी करता है जब ग्राहक पहले चालान किया गया माल लौटा देता है, अथवा उसे कोई अतिरिक्त छूट दी जाती है या चालान में अधिक राशि लिख दी गई हो। इससे ग्राहक का खाता उतनी राशि से क्रेडिट अर्थात् कम हो जाता है और यह विक्रय वापसी बही में लिखा जाता है। इसके विपरीत डेबिट नोट क्रेता द्वारा तब बनाया जाता है जब वह माल लौटाता है और आपूर्तिकर्ता का खाता डेबिट करता है। दोनों दस्तावेज माल की वापसी के दो पक्षों को दर्शाते हैं।

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Q15. प्रिंस लिमिटेड अपना रोकड़ प्रवाह विवरण तैयार करना चाहता है। इसने 60,000 रुपये के बुक वैल्यू के उपकरण 8,000 रुपये के लाभ पर बेचे। गतिविधियों के तहत इसकी रोकड़ प्रवाह विवरण में रिपोर्ट की जाने वाली राशि है :

Right Answer: 68,000 रुपये


Explanation:

रोकड़ प्रवाह विवरण में सम्पत्ति की बिक्री से प्राप्त वास्तविक नकद राशि निवेश गतिविधियों के अन्तर्गत दिखाई जाती है, न कि उस पर हुआ लाभ। यहाँ उपकरण का पुस्तक मूल्य 60,000 रुपये था और उसे 8,000 रुपये के लाभ पर बेचा गया, अतः वास्तविक विक्रय मूल्य 68,000 रुपये हुआ और यही राशि निवेश गतिविधियों में नकद अन्तर्वाह के रूप में रिपोर्ट होगी। 8,000 रुपये का लाभ तो परिचालन गतिविधियों में शुद्ध लाभ से घटा दिया जाता है, ताकि उसकी दोहरी गणना न हो, क्योंकि वह नकद न होकर केवल लेखांकन लाभ है।

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Q16. रमा लिमिटेड ने 10 रु० वाले 40 अंश जब्त किए जिन पर 7 रु० माँगे गए तथा अंशधारी ने 5 रु० चुका दिए थे। इनमें से 30 अंशों को 6 रु० प्रति अंश पर पुनर्निर्गमित कर दिया गया। पूँजी संचय खाते में हस्तांतरित राशि होगी :

Right Answer: 30 रु०


Explanation:

जब्ती के समय 40 अंशों पर अंशधारी द्वारा चुकाई गई राशि प्रति अंश 5 रुपये थी, अतः जब्ती खाते में कुल 200 रुपये गए। इनमें से 30 अंश पुनर्निर्गमित किए गए, अतः उन पर जब्ती राशि 30 गुणा 5 अर्थात् 150 रुपये होगी। पुनर्निर्गमन 6 रुपये प्रति अंश पर हुआ, जबकि अंश 10 रुपये का है, इसलिए प्रति अंश 4 रुपये की छूट दी गई और कुल छूट 30 गुणा 4 अर्थात् 120 रुपये हुई। जब्ती राशि में से यह छूट घटाने पर 150 में से 120 घटाकर 30 रुपये शेष बचते हैं, जिन्हें पूँजी संचय खाते में हस्तांतरित किया जाता है।

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Q17. इनमें से कौन-सा ‘प्रावधानों’ के लिए सही नहीं है ?

Right Answer: यह व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए बनाया जाता है। कुछ कानून के तहत अनिवार्य भी हैं।


Explanation:

प्रावधान चालू लेखा अवधि से सम्बन्धित किसी ज्ञात देयता अथवा व्यय के लिए बनाया जाता है, जिसकी राशि निश्चित रूप से ज्ञात नहीं होती, जैसे संदिग्ध ऋणों का प्रावधान अथवा कर का प्रावधान। यह लाभ के विरुद्ध प्रभार होता है, अतः लाभ हो या हानि, इसे बनाना अनिवार्य है और इससे कर योग्य लाभ घट जाता है। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि व्यवसाय की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए तथा कानून के अन्तर्गत अनिवार्य रूप से जो राशि अलग रखी जाती है वह संचय अर्थात् रिजर्व होती है, जो लाभ का विनियोजन है।

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Q18. किसी कम्पनी के समापन की स्थिति में आरक्षित पूँजी किस पूँजी का एक भाग है ?

Right Answer: अभिदत्त पूँजी


Explanation:

आरक्षित पूँजी अभिदत्त पूँजी के उस अयाचित भाग को कहते हैं जिसे कंपनी विशेष प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय ले लेती है कि वह केवल कंपनी के समापन के समय ही माँगा जाएगा। इसका उद्देश्य लेनदारों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना है, क्योंकि समापन के समय यह राशि उपलब्ध रहती है। एक बार आरक्षित घोषित हो जाने पर इसे न तो सामान्य व्यवसाय में माँगा जा सकता है और न ही इसके विरुद्ध कोई प्रभार सृजित किया जा सकता है। इसे पूँजी संचय अथवा संचय निधि से भिन्न समझना चाहिए, क्योंकि वे लाभ से सृजित होते हैं।

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Q19. ............. वित्तीय विवरण तैयार करने में एक मार्गदर्शक के रूप में लेखाकारों द्वारा पालन किए जाने वाले रीति-रिवाज, उपयोग या प्रथाएँ हैं।

Right Answer: लेखांकन प्रथाएँ


Explanation:

लेखांकन प्रथाएँ अर्थात् अकाउंटिंग कन्वेंशंस वे रीति-रिवाज, परिपाटियाँ अथवा व्यवहार हैं जिनका पालन लेखाकार वित्तीय विवरण तैयार करते समय एक मार्गदर्शक के रूप में करते हैं। ये किसी विधि द्वारा निर्धारित नहीं होतीं, बल्कि लम्बे व्यावहारिक अनुभव तथा सामान्य स्वीकृति से विकसित हुई हैं। इनमें रूढ़िवादिता अथवा सतर्कता, पूर्ण प्रकटीकरण, सारता तथा संगतता की प्रथाएँ प्रमुख हैं। इसके विपरीत लेखांकन अवधारणाएँ आधारभूत मान्यताएँ हैं, जैसे चालू व्यवसाय एवं द्वैत पक्ष, तथा लेखांकन मानक अधिकृत संस्थाओं द्वारा जारी अनिवार्य दिशानिर्देश होते हैं।

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Q20. उद्योग के औसत की तुलना में किसी संगठन द्वारा प्राप्त .............. सकल लाभ अनुपात, अपेक्षाकृत कम लागत पर उत्पादन करने के सफल प्रयास को इंगित करता है।

Right Answer: उच्च


Explanation:

सकल लाभ अनुपात सकल लाभ तथा शुद्ध विक्रय के बीच का प्रतिशत सम्बन्ध है और यह उत्पादन एवं क्रय की कार्यकुशलता को मापता है। यदि किसी संगठन का यह अनुपात उद्योग के औसत से उच्च हो, तो इसका अर्थ है कि वह अपेक्षाकृत कम लागत पर उत्पादन करने में सफल रहा है, अथवा उसे बेहतर विक्रय मूल्य प्राप्त हो रहा है। इससे उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति मजबूत होती है, क्योंकि संचालन व्यय वहन करने के बाद भी उसके पास पर्याप्त अधिशेष बचता है। निम्न अनुपात ऊँची उत्पादन लागत अथवा अकुशल क्रय नीति का संकेत देता है।

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Q21. निम्नलिखित में से किसे खातों की प्रधान पुस्तक कहा जाता है ?

Right Answer: खाता - बही


Explanation:

खाता-बही अर्थात् लेजर को खातों की प्रधान पुस्तक कहा जाता है, क्योंकि इसी में व्यवसाय के समस्त व्यक्तिगत, वास्तविक एवं नाममात्र खाते वर्गीकृत रूप में रखे जाते हैं। जर्नल तथा सहायक बहियों में लेनदेन कालक्रमानुसार लिखे जाते हैं, किन्तु किसी एक खाते की पूरी स्थिति वहाँ से नहीं मिलती; उसके लिए खतौनी करके खाता-बही में लाना आवश्यक होता है। यहीं से प्रत्येक खाते का शेष निकलता है, तलपट बनता है और अन्ततः अन्तिम खाते तैयार होते हैं। इसी कारण इसे लेखांकन का ‘राजा’ भी कहा जाता है।

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Q22. A, B तथा C का पुराना लाभ-विभाजन अनुपात 3 : 2 : 1 है। D को नया साझेदार बनाया गया। तय हुआ कि C और D के बीच अनुपात वही रहेगा जो A और B के बीच है, तथा A, B और C का सापेक्ष अनुपात अपरिवर्तित रहेगा। नया अनुपात होगा :

Right Answer: 9 : 6 : 3 : 2


Explanation:

A तथा B के बीच का अनुपात 3 अनुपात 2 है, अतः शर्त के अनुसार C तथा D के बीच भी यही अनुपात रहेगा। मान लें C का भाग 3k तथा D का भाग 2k है। अब दूसरी शर्त यह है कि A, B एवं C का पारस्परिक अनुपात 3 अनुपात 2 अनुपात 1 ही बना रहे। चूँकि C का भाग 3k है, अतः उसी अनुपात में A का भाग 9k तथा B का भाग 6k होगा। इस प्रकार चारों साझेदारों का नया लाभ-विभाजन अनुपात 9k अनुपात 6k अनुपात 3k अनुपात 2k अर्थात् 9 : 6 : 3 : 2 प्राप्त होता है।

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Q23. जब चेक का अनादर होता है, तो प्राप्त छूट, दी गई छूट, और प्राप्त छूट या दी गई छूट को रद्द कर किसके माध्यम से दर्ज किया जाता है ?

Right Answer: मुख्य जर्नल


Explanation:

जब कोई प्राप्त चेक बैंक द्वारा अनादरित कर दिया जाता है, तो केवल बैंक खाते को क्रेडिट करना पर्याप्त नहीं होता; उस लेनदेन के समय दी गई अथवा प्राप्त की गई छूट को भी रद्द करना पड़ता है, क्योंकि भुगतान वास्तव में हुआ ही नहीं। छूट की यह उलट प्रविष्टि रोकड़ बही के छूट स्तम्भों में नहीं की जा सकती, क्योंकि वे स्तम्भ केवल जोड़ने का कार्य करते हैं और उनका शेष नहीं निकाला जाता। इसलिए ऐसी समस्त प्रविष्टियाँ मुख्य जर्नल अर्थात् जर्नल प्रॉपर के माध्यम से की जाती हैं, जहाँ ग्राहक का खाता पुनः डेबिट किया जाता है।

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Q24. निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प कंपनी गठन में ज्ञापन-पत्र की भूमिका का सही वर्णन करता है ?

Right Answer: यह कंपनी का चार्टर होता है, जो बाहरी दुनिया के साथ उसके संबंधों और उसकी गतिविधियों के दायरे को परिभाषित करता है।


Explanation:

ज्ञापन-पत्र अर्थात् मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन कंपनी का चार्टर अथवा आधारभूत दस्तावेज है, जो उसके निगमन के समय रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया जाता है। यह बाहरी दुनिया के साथ कंपनी के सम्बन्धों को नियंत्रित करता है और उसकी गतिविधियों का दायरा परिभाषित करता है। इसमें नाम खण्ड, पंजीकृत कार्यालय खण्ड, उद्देश्य खण्ड, दायित्व खण्ड, पूँजी खण्ड तथा अभिदान खण्ड होते हैं। इसके दायरे से बाहर किया गया कार्य ‘अल्ट्रा वायर्स’ अर्थात् शक्ति से परे होकर शून्य माना जाता है। कंपनी के आन्तरिक नियम तो अन्तर्नियम अर्थात् आर्टिकल्स में दिए जाते हैं।

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Q25. A, B तथा C 7 : 5 : 4 के अनुपात में लाभ बाँटते हैं। C की मृत्यु 30 जून 2022 को हुई तथा वर्ष 2021-22 का लाभ 24,000 रु० था। 1 अप्रैल 2022 से 30 जून 2022 तक की अवधि के लिए C के खाते में लाभ का कितना हिस्सा बनेगा ?

Right Answer: 1,500 रुपये


Explanation:

साझेदार की मृत्यु वर्ष के बीच में होने पर उसका लाभ में हिस्सा पिछले वर्ष के लाभ के आधार पर समय के अनुपात में निकाला जाता है। कुल अनुपात 7 जोड़ 5 जोड़ 4 अर्थात् 16 है, जिसमें C का भाग 4 बटा 16 यानी एक-चौथाई है। पिछले वर्ष का लाभ 24,000 रुपये था, अतः पूरे वर्ष के लिए C का हिस्सा 6,000 रुपये बनता है। किन्तु वह केवल 1 अप्रैल से 30 जून तक अर्थात् तीन माह जीवित रहा, जो वर्ष का एक-चौथाई है। इसलिए 6,000 का एक-चौथाई अर्थात् 1,500 रुपये उसके खाते में जमा किए जाएँगे।

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Q26. निम्न में से कौन-सा अनुपात विश्लेषण का उद्देश्य नहीं है ?

Right Answer: प्रभावी निर्देशन


Explanation:

अनुपात विश्लेषण वित्तीय विवरणों की व्याख्या का एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में वर्षों की तुलना कर प्रवृत्ति स्पष्ट करना, विभिन्न मदों में हुए परिवर्तनों को उजागर करना, तथा एक ही उद्योग की फर्मों के बीच अन्तः-फर्म तुलना करना सम्मिलित है। इसके अतिरिक्त यह तरलता, शोधन क्षमता एवं लाभप्रदता का मूल्यांकन भी करता है। ‘प्रभावी निर्देशन’ प्रबंध का एक स्वतंत्र कार्य है, जिसमें नेतृत्व, अभिप्रेरणा एवं पर्यवेक्षण आते हैं; यह अनुपात विश्लेषण का उद्देश्य नहीं है।

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Q27. यदि कोई व्यक्ति किसी कंपनी के पंजीकरण के संबंध में रजिस्ट्रार के पास दाखिल किसी भी दस्तावेज में कोई असत्य या गलत जानकारी प्रस्तुत करता है या कोई महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, जिसके बारे में वह जानता है, तो वह किस धारा के तहत धोखाधड़ी के लिए दंडनीय होगा ?

Right Answer: धारा 447 [ धारा 7(5)]


Explanation:

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 7 कंपनी के निगमन की प्रक्रिया से सम्बन्धित है। इसकी उपधारा 5 यह प्रावधान करती है कि यदि कोई व्यक्ति पंजीकरण के सम्बन्ध में रजिस्ट्रार के पास दाखिल किसी दस्तावेज में जानबूझकर असत्य अथवा गलत विवरण प्रस्तुत करता है या कोई महत्त्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, तो वह धोखाधड़ी के लिए धारा 447 के अन्तर्गत दंडनीय होगा। धारा 447 धोखाधड़ी को परिभाषित करती है और उसके लिए न्यूनतम छह माह से लेकर दस वर्ष तक का कारावास तथा सम्बन्धित राशि के तीन गुना तक जुर्माने का प्रावधान करती है।

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Q28. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प कंप्यूटरीकृत लेखा प्रणाली की प्रमुख विशेषता नहीं है ?

Right Answer: आंतरिक नियंत्रण तंत्र की आवश्यकता को समाप्त करना


Explanation:

कम्प्यूटरीकृत लेखा प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं में लेनदेन की स्वचालित रिकॉर्डिंग एवं वर्गीकरण, वित्तीय आँकड़ों की तत्काल प्रोसेसिंग एवं रिपोर्टिंग, तथा स्कंध प्रबंधन एवं वेतन जैसी अन्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं के साथ एकीकरण सम्मिलित हैं। तीसरा विकल्प गलत है, क्योंकि कम्प्यूटरीकरण आन्तरिक नियंत्रण की आवश्यकता समाप्त नहीं करता, बल्कि उसे और अधिक महत्त्वपूर्ण बना देता है। आँकड़ों की सुरक्षा, प्रवेश-अधिकार, पासवर्ड, ऑडिट ट्रेल तथा नियमित बैकअप जैसे नियंत्रण न हों तो त्रुटि एवं छल-कपट का जोखिम कहीं अधिक बढ़ जाता है।

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Q29. अंतर्राष्ट्रीय लेखांकन मानक- 29 किसके लिए निर्धारित है ?

Right Answer: अत्यधिक मुद्रास्फीति वाली अर्थ- व्यवस्थाओं में वित्तीय रिपोर्टिंग


Explanation:

अंतर्राष्ट्रीय लेखांकन मानक 29 का शीर्षक ‘अत्यधिक मुद्रास्फीति वाली अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय रिपोर्टिंग’ है। यह मानक उन देशों की इकाइयों पर लागू होता है जहाँ मुद्रा की क्रयशक्ति इतनी तेजी से घटती है कि ऐतिहासिक लागत पर आधारित विवरण भ्रामक हो जाते हैं। इसके अनुसार वित्तीय विवरणों को तुलन-पत्र की तिथि पर प्रचलित मापन इकाई के अनुसार पुनर्व्यक्त करना आवश्यक है, जिसके लिए सामान्य मूल्य सूचकांक का उपयोग होता है। तीन वर्षों में संचयी मुद्रास्फीति सौ प्रतिशत के निकट होना इसका प्रमुख संकेतक माना जाता है।

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Q30. कौन-सा अनुपात व्यवसाय में निवेश किए गए कुल निधि (फंड) में मालिकों के निधि (फंड) के अनुपात को दर्शाता है ?

Right Answer: इक्विटी अनुपात


Explanation:

इक्विटी अनुपात, जिसे स्वामित्व अनुपात अथवा प्रोप्राइटरी अनुपात भी कहा जाता है, यह दर्शाता है कि व्यवसाय में निवेश किए गए कुल निधि में स्वामियों के निधि का अनुपात कितना है। इसे स्वामियों के कोष को कुल सम्पत्तियों अथवा कुल निधि से भाग देकर निकाला जाता है। इसका ऊँचा मान यह बताता है कि व्यवसाय बाह्य ऋणों पर कम निर्भर है, अतः उसकी दीर्घकालीन वित्तीय स्थिति सुदृढ़ एवं लेनदारों के लिए सुरक्षित है। इसके विपरीत ऋण-इक्विटी अनुपात बाह्य ऋण तथा स्वामियों के कोष का सम्बन्ध बताता है और उत्तोलन की मात्रा दर्शाता है।

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Q31. साझेदारी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है ?

Right Answer: यह एक विशिष्ट उद्यम तक सीमित है।


Explanation:

भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के अनुसार साझेदारी उन व्यक्तियों का सम्बन्ध है जो किसी ऐसे व्यवसाय के लाभ को बाँटने पर सहमत हों जो सबके द्वारा अथवा सबकी ओर से किसी एक के द्वारा चलाया जा रहा हो। यह फर्म के नाम से संचालित होती है और सामान्यतः एक सतत लाभ चाहने वाला उद्यम होती है, जो किसी एक विशिष्ट उद्यम अथवा एकल सौदे तक सीमित नहीं रहती। अतः यह कहना कि साझेदारी एक विशिष्ट उद्यम तक सीमित है, गलत है। ऐसी सीमित व्यवस्था तो विशेष साझेदारी अथवा संयुक्त उपक्रम की विशेषता होती है।

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Q32. निम्नलिखित में से कौन - सा ‘एकल उपयोग योजना’ नहीं है ?

Right Answer: नीति


Explanation:

योजनाओं को उनके उपयोग की आवृत्ति के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है। एकल उपयोग योजनाएँ किसी एक विशिष्ट उद्देश्य अथवा परिस्थिति के लिए बनाई जाती हैं और उद्देश्य पूरा होते ही समाप्त हो जाती हैं; कार्यक्रम, परियोजना तथा बजट इसी श्रेणी में आते हैं। इसके विपरीत स्थायी योजनाएँ बार-बार आने वाली परिस्थितियों में मार्गदर्शन देती हैं और दीर्घकाल तक प्रयोग में आती रहती हैं। नीति एक स्थायी योजना है, क्योंकि वह निर्णय लेने के लिए सामान्य दिशानिर्देश प्रस्तुत करती है। उद्देश्य, कार्यविधि तथा नियम भी स्थायी योजनाएँ हैं।

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Q33. वह मूल्य - निर्धारण रणनीति जिसमें कम्पनी सभी ग्राहकों से समान मूल्य और भाड़ा वसूलती है, चाहे उनका स्थान कुछ भी हो, कहलाती है :

Right Answer: एकरूप - वितरित मूल्य - निर्धारण


Explanation:

एकरूप-वितरित मूल्य-निर्धारण वह रणनीति है जिसमें कंपनी अपने सभी ग्राहकों से वस्तु का समान मूल्य तथा समान भाड़ा वसूलती है, चाहे वे कहीं भी स्थित हों। इसे ‘डाक टिकट मूल्य-निर्धारण’ भी कहा जाता है, क्योंकि डाक टिकट की दर भी दूरी पर निर्भर नहीं करती। इसका लाभ यह है कि प्रशासन सरल हो जाता है, राष्ट्रव्यापी विज्ञापन में एक ही मूल्य बताया जा सकता है और दूरस्थ ग्राहक भी जुड़े रहते हैं; किन्तु निकट के ग्राहकों को यह कुछ महँगा पड़ता है। इसके विपरीत क्षेत्र मूल्य-निर्धारण में देश को भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में बाँटकर अलग-अलग दरें तय की जाती हैं।

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Q34. कंपनी अधिनियम 2013 की किस धारा के तहत केन्द्र सरकार को किसी कंपनी को अपना नाम सुधारने का निर्देश देने का अधिकार है, यदि अनजाने में उसका नाम किसी मौजूदा कंपनी के नाम से मिलता-जुलता पंजीकृत हो गया हो ?

Right Answer: धारा 16


Explanation:

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 16 केन्द्र सरकार को यह अधिकार देती है कि यदि किसी कंपनी का नाम अनजाने में ऐसा पंजीकृत हो गया हो जो किसी पूर्व-विद्यमान कंपनी के नाम के समान अथवा उससे अत्यधिक मिलता-जुलता हो, तो वह उसे नाम बदलने का निर्देश दे सकती है। कंपनी को निर्देश मिलने के तीन माह के भीतर साधारण प्रस्ताव पारित कर नाम बदलना होता है। इसी प्रकार यदि कोई पंजीकृत ट्रेडमार्क का स्वामी आपत्ति करे तो वह निर्धारित अवधि में केन्द्र सरकार को आवेदन कर सकता है। धारा 13 नाम परिवर्तन की सामान्य प्रक्रिया बताती है।

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Q35. एक बाज़ार-कवरेज रणनीति जिसमें एक फर्म एक या कुछ खंडों के बड़े हिस्से पर ध्यान केंद्रित करती है, उसे कहते हैं :

Right Answer: आला विपणन


Explanation:

आला विपणन अर्थात् निच मार्केटिंग वह बाजार-कवरेज रणनीति है जिसमें फर्म सम्पूर्ण बाजार अथवा अनेक खण्डों के छोटे-छोटे हिस्सों के स्थान पर एक या कुछ ही खण्डों के बड़े हिस्से पर ध्यान केन्द्रित करती है। इसे संकेन्द्रित विपणन भी कहा जाता है। इसका लाभ यह है कि सीमित संसाधनों वाली फर्म भी अपने चुने हुए खण्ड की आवश्यकताओं की गहरी समझ विकसित कर उसमें प्रबल स्थिति बना लेती है। जोखिम यह है कि वह खण्ड सिकुड़ जाए अथवा कोई बड़ी कंपनी उसमें प्रवेश कर ले। अविभेदित विपणन में सम्पूर्ण बाजार को एक समान माना जाता है।

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Q36. प्रेषक द्वारा सूचना में हेरा-फेरी करना ताकि प्राप्तकर्ता को यह अधिक अनुकूल लगे, इसे कहा जाता है :

Right Answer: छनन


Explanation:

छनन अर्थात् फिल्टरिंग संचार की एक प्रमुख बाधा है, जिसमें प्रेषक जानबूझकर सूचना में हेरा-फेरी करता है ताकि वह प्राप्तकर्ता को अधिक अनुकूल एवं स्वीकार्य लगे। संगठनों में यह प्रायः तब होता है जब अधीनस्थ अपने वरिष्ठ को केवल अच्छी खबर बताते हैं और प्रतिकूल तथ्य छिपा या हल्का कर देते हैं। संगठन में जितने अधिक ऊर्ध्वाधर स्तर होंगे, छनन की सम्भावना उतनी ही बढ़ जाती है। इसके विपरीत सूचना अधिभार तब होता है जब सूचना व्यक्ति की प्रसंस्करण क्षमता से अधिक हो जाए, और संचार आशंका संवाद के प्रति अनुचित तनाव एवं भय को कहते हैं।

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Q37. प्रत्याशा सिद्धांत के अनुसार, ‘किसी दिए गए कार्य को करने वाले व्यक्ति द्वारा अनुभव की जाने वाली संभाव्यता प्रयासों की मात्रा ही निष्पादन की ओर ले जाती है’, को कहा जाता है :

Right Answer: प्रयास-प्रदर्शन संबंध


Explanation:

विक्टर व्रूम के प्रत्याशा सिद्धांत के अनुसार अभिप्रेरणा तीन सम्बन्धों पर निर्भर करती है। प्रयास-प्रदर्शन सम्बन्ध वह सम्भाव्यता है जिसे व्यक्ति यह मानते हुए अनुभव करता है कि एक निश्चित मात्रा में प्रयास लगाने से अपेक्षित निष्पादन प्राप्त हो जाएगा। प्रदर्शन-पुरस्कार सम्बन्ध वह विश्वास है कि निर्धारित स्तर पर निष्पादन करने से वांछित पुरस्कार अवश्य मिलेगा। पुरस्कार-व्यक्तिगत लक्ष्य सम्बन्ध यह बताता है कि मिलने वाला पुरस्कार व्यक्ति की अपनी आवश्यकताओं को कितना संतुष्ट करता है। तीनों प्रबल हों तभी अभिप्रेरणा उच्च होती है।

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Q38. एक उद्यमी जो नवाचार पसंद करता है और किसी नई या रचनात्मक चीज पर काम करने का आनंद लेता है, उसे कहा जाता है :

Right Answer: आदर्शवादी


Explanation:

उद्यमियों के व्यक्तित्व-प्रकारों के वर्गीकरण में ‘आदर्शवादी’ वह उद्यमी है जिसे नवाचार पसंद होता है और जो किसी नई अथवा रचनात्मक वस्तु पर कार्य करने में आनन्द अनुभव करता है। ऐसे उद्यमी विचार एवं कल्पना से संचालित होते हैं और प्रायः किसी बड़े उद्देश्य से प्रेरित रहते हैं, यद्यपि नित्य की प्रशासनिक एवं वित्तीय बारीकियों में उनकी रुचि कम होती है। इसके विपरीत ‘ऑप्टिमाइजर’ व्यवस्था सुधारने में, ‘एनालिस्ट’ समस्या के व्यवस्थित विश्लेषण में तथा ‘फायर-बॉल’ अपनी ऊर्जा, उत्साह एवं तीव्र गति से कार्य करने में विश्वास रखता है।

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Q39. किसी उद्योग में अपनी बाज़ार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करने वाले रनर-अप फर्म को कहा जाता है :

Right Answer: मार्केट चैलेंजर


Explanation:

किसी उद्योग में बाजार हिस्सेदारी के आधार पर फर्मों को चार वर्गों में रखा जाता है। मार्केट लीडर सर्वाधिक हिस्सेदारी वाली अग्रणी फर्म होती है। मार्केट चैलेंजर वह रनर-अप फर्म है जो दूसरे या तीसरे स्थान पर होते हुए भी अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत करती है और नेता अथवा अपने समकक्षों पर आक्रामक रूप से आक्रमण करती है। मार्केट फॉलोवर संघर्ष से बचकर नेता का अनुसरण करते हुए अपनी स्थिति बनाए रखती है, तथा मार्केट निचर बाजार के किसी छोटे एवं उपेक्षित खण्ड में विशेषज्ञता प्राप्त कर लेती है।

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Q40. निम्नलिखित में से कौन-सा आंतरिक भर्ती स्रोत नहीं है ?

Right Answer: कार्यकारी खोज फर्म


Explanation:

भर्ती के स्रोत आन्तरिक तथा बाह्य दो प्रकार के होते हैं। आन्तरिक स्रोतों में पदोन्नति, स्थानान्तरण, वर्तमान कर्मचारियों की सिफारिशें तथा कर्मचारी रेफरल सम्मिलित हैं, क्योंकि इनमें रिक्ति संगठन के भीतर से अथवा उसके कर्मचारियों के माध्यम से भरी जाती है। इनसे मनोबल बढ़ता है, लागत घटती है और चयन का जोखिम कम रहता है। कार्यकारी खोज फर्म अर्थात् एग्जीक्यूटिव सर्च फर्म एक बाह्य स्रोत है, जिसे प्रायः ‘हेड हंटर’ कहा जाता है और जो उच्च प्रबंधकीय पदों के लिए बाहर से उपयुक्त प्रतिभा खोजकर लाती है।

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Q41. व्यवसाय खरीदार व्यवहार के मॉडल में ‘उत्पाद एवम्सेवा की पसंद’ निम्न में से किसके अन्तर्गत आता है ?

Right Answer: खरीदारों की प्रतिक्रिया


Explanation:

व्यवसाय क्रेता व्यवहार के प्रतिरूप में विपणन तथा अन्य उद्दीपक क्रय संगठन तक पहुँचते हैं, जहाँ क्रय केन्द्र एवं निर्णय प्रक्रिया उन्हें प्रसंस्कृत करती है, और अन्ततः क्रेता की प्रतिक्रियाएँ प्रकट होती हैं। इन्हीं प्रतिक्रियाओं में उत्पाद एवं सेवा की पसंद, आपूर्तिकर्ता का चुनाव, आदेश की मात्रा, वितरण की शर्तें, सेवा की शर्तें तथा भुगतान की शर्तें सम्मिलित होती हैं। पर्यावरण में आर्थिक, प्रौद्योगिकीय, राजनीतिक एवं प्रतिस्पर्धी शक्तियाँ आती हैं, जो क्रय निर्णय को बाहर से प्रभावित करती हैं।

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Q42. हेनरी फेयोल थे :

Right Answer: फ्रेंच उद्योगपति


Explanation:

हेनरी फेयोल फ्रांसीसी खनन इंजीनियर एवं उद्योगपति थे, जिन्हें आधुनिक प्रबंध सिद्धांत का जनक कहा जाता है। वे कोमैम्बॉल्ट नामक कोयला-इस्पात कंपनी के प्रबंध निदेशक रहे और उन्होंने अपने व्यावहारिक अनुभव के आधार पर 1916 में ‘एडमिनिस्ट्रेशन इंडस्ट्रियल एट जनरल’ नामक कृति लिखी। उन्होंने प्रबंध के चौदह सिद्धांत तथा प्रबंध के पाँच कार्य — नियोजन, संगठन, समादेश, समन्वय एवं नियंत्रण — प्रतिपादित किए। इसके विपरीत एफ० डब्ल्यू० टेलर अमेरिकी थे और वैज्ञानिक प्रबंध के जनक माने जाते हैं, जबकि मैक्स वेबर जर्मन समाजशास्त्री थे।

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Q43. एक नेतृत्व शैली जो नेताओं के स्वयं के हित से परे जाकर और इसके बजाय अनुयायियों को बढ़ने और विकसित करने में मदद करने के अवसरों पर ध्यान केंद्रित करती है, कहलाती है :

Right Answer: सेवक नेतृत्व


Explanation:

सेवक नेतृत्व की अवधारणा रॉबर्ट ग्रीनलीफ ने दी। यह नेतृत्व शैली नेता के अपने हित एवं महत्त्वाकांक्षा से परे जाकर इस बात पर ध्यान केन्द्रित करती है कि अनुयायियों को बढ़ने, विकसित होने तथा अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुँचने के अवसर कैसे दिए जाएँ। ऐसा नेता पहले सेवा करता है और फिर नेतृत्व करता है; वह सुनने, सहानुभूति, संरक्षकत्व एवं समुदाय-निर्माण को प्राथमिकता देता है। इसके विपरीत आकर्षक नेतृत्व नेता के व्यक्तिगत प्रभामंडल पर टिका होता है और परिस्थितिजन्य नेतृत्व अनुयायियों की परिपक्वता के अनुसार शैली बदलने की बात करता है।

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Q44. भारतीय कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले व्यवसाय लोकाचार सिद्धान्त जिसमें एक व्यक्ति को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाता है कि वह संघर्षों और घर्षण से बच सके, इस सिद्धांत को कहा जाता है :

Right Answer: ‘सद्भाव’ का सिद्धांत


Explanation:

भारतीय कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले व्यवसाय लोकाचार में ‘सद्भाव’ का सिद्धांत अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इसके अन्तर्गत व्यक्ति को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाता है कि वह संघर्ष एवं घर्षण की स्थितियों से बचे तथा सहकर्मियों, ग्राहकों एवं समाज के साथ मैत्रीपूर्ण एवं सहयोगपूर्ण सम्बन्ध बनाए रखे। इसका दार्शनिक आधार भारतीय चिन्तन की वह दृष्टि है जो सम्पूर्ण सृष्टि को परस्पर जुड़ा हुआ मानती है, अतः दूसरों के अहित में अपना हित सम्भव नहीं। इससे संगठन में टीम भावना, मनोबल तथा दीर्घकालीन स्थायित्व बढ़ता है।

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Q45. ADDIE मॉडल में, 'A' का अर्थ है :

Right Answer: एनैलाइज़


Explanation:

ADDIE प्रशिक्षण एवं अनुदेशात्मक अभिकल्प का सर्वाधिक प्रचलित प्रतिरूप है और इसके पाँच अक्षर पाँच क्रमिक चरणों को दर्शाते हैं। इसमें ‘A’ का अर्थ है एनैलाइज़ अर्थात् विश्लेषण, जिसमें प्रशिक्षण की आवश्यकता, शिक्षार्थियों की विशेषताएँ तथा अपेक्षित परिणाम निर्धारित किए जाते हैं। इसके बाद डिजाइन में उद्देश्य एवं रणनीति तय होती है, डेवलप में वास्तविक सामग्री बनाई जाती है, इम्प्लीमेंट में प्रशिक्षण दिया जाता है और इवैल्युएट में उसकी प्रभावशीलता आँकी जाती है। मूल्यांकन प्रत्येक चरण के साथ सतत रूप से भी चलता रहता है।

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Q46. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत निम्नलिखित में से कौन ‘उपभोक्ता’ है ?

Right Answer: जो आंशिक रूप से भुगतान किए गए प्रतिफल के लिए किसी सेवा को किराए पर लेता है।


Explanation:

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के अनुसार उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो प्रतिफल देकर कोई वस्तु क्रय करता है अथवा सेवा किराए पर लेता है, और यह प्रतिफल पूर्णतः चुकाया गया, आंशिक रूप से चुकाया गया अथवा चुकाने का वचन दिया गया हो सकता है। अतः आंशिक रूप से भुगतान किए गए प्रतिफल पर सेवा लेने वाला व्यक्ति उपभोक्ता है। इसके विपरीत जो पुनर्विक्रय अथवा किसी वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए क्रय करता है, जो निःशुल्क सेवा लेता है, अथवा जो सेवा के अनुबंध के अन्तर्गत सेवा प्राप्त करता है, वह उपभोक्ता की परिभाषा से बाहर रखा गया है।

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Q47. आमने-सामने की बातचीत किसका उदाहरण है ?

Right Answer: उच्च चैनल समृद्धि


Explanation:

चैनल समृद्धि से तात्पर्य किसी संचार माध्यम की उस क्षमता से है जिससे वह एक ही समय में अनेक संकेत सम्प्रेषित कर सके, तत्काल प्रतिपुष्टि दे सके और व्यक्तिगत स्पर्श बनाए रख सके। आमने-सामने की बातचीत उच्चतम चैनल समृद्धि का उदाहरण है, क्योंकि इसमें शब्दों के साथ-साथ स्वर, हाव-भाव, मुद्रा एवं नेत्र-सम्पर्क भी संदेश पहुँचाते हैं और गलतफहमी तत्क्षण दूर की जा सकती है। इसके विपरीत सामान्य पत्र, परिपत्र अथवा सूचना-पट निम्न समृद्धि वाले माध्यम हैं। जटिल एवं अस्पष्ट संदेशों के लिए समृद्ध माध्यम ही उपयुक्त होते हैं।

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Q48. कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, किसी भी वैध उद्देश्य के लिए सार्वजनिक कंपनी का गठन किया जा सकता है :

Right Answer: 7 या अधिक व्यक्तियों द्वारा


Explanation:

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 3 के अनुसार किसी भी वैध उद्देश्य के लिए सार्वजनिक कंपनी का गठन सात या अधिक व्यक्तियों द्वारा किया जा सकता है, जो ज्ञापन-पत्र पर अपने नाम अभिदान कर पंजीकरण सम्बन्धी अपेक्षाओं का पालन करें। निजी कंपनी के लिए दो या अधिक व्यक्ति पर्याप्त हैं, तथा एक व्यक्ति कंपनी अर्थात् ओपीसी का गठन केवल एक व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है, जो इस अधिनियम की नई विशेषता है। सार्वजनिक कंपनी में सदस्यों की अधिकतम संख्या पर कोई सीमा नहीं है, जबकि निजी कंपनी में यह दो सौ तक सीमित है।

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Q49. वह साक्षात्कार जिसमें उम्मीदवारों से यह वर्णन करने के लिए कहा जाता है कि वे वास्तव में किसी दी गई स्थिति को कैसे सँभालते हैं, कहलाता है :

Right Answer: व्यावहारिक साक्षात्कार


Explanation:

व्यावहारिक साक्षात्कार अर्थात् बिहेवियरल इंटरव्यू वह साक्षात्कार है जिसमें उम्मीदवारों से यह वर्णन करने को कहा जाता है कि वे किसी दी गई परिस्थिति को वास्तव में कैसे सँभालते हैं अथवा अतीत में कैसे सँभाला था। इसका आधार यह मान्यता है कि भूतकालीन व्यवहार भविष्य के व्यवहार का सर्वोत्तम पूर्वानुमान है। इससे उम्मीदवार के वास्तविक कौशल, निर्णय-क्षमता एवं दृष्टिकोण का आकलन रटे-रटाए उत्तरों की अपेक्षा अधिक विश्वसनीय ढंग से हो जाता है। इसके विपरीत तनाव साक्षात्कार में उम्मीदवार को जानबूझकर दबाव में डालकर उसकी संयम-क्षमता परखी जाती है।

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Q50. किसी विशेष विक्रेता द्वारा बिक्री के लिए पेश की जाने वाली सभी उत्पाद शृंखलाओं और वस्तुओं के समूह को कहा जाता है :

Right Answer: उत्पाद मिश्रण


Explanation:

उत्पाद मिश्रण अथवा उत्पाद वर्गीकरण से तात्पर्य उन समस्त उत्पाद शृंखलाओं तथा वस्तुओं के समूह से है जो कोई विशेष विक्रेता क्रेताओं को बिक्री हेतु प्रस्तुत करता है। इसकी चार विमाएँ होती हैं — चौड़ाई, जो उत्पाद शृंखलाओं की संख्या बताती है; लम्बाई, जो कुल वस्तुओं की संख्या दर्शाती है; गहराई, जो प्रत्येक उत्पाद के विभिन्न रूपों को बताती है; तथा संगतता, जो शृंखलाओं के पारस्परिक सम्बन्ध को दर्शाती है। इसके विपरीत विपणन मिश्रण उत्पाद, मूल्य, स्थान एवं संवर्धन इन चार तत्त्वों का संयोजन है।

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Q51. ‘पूँजीगत बजटिंग’ किस प्रकार का वित्तीय निर्णय है ?

Right Answer: निवेश निर्णय


Explanation:

वित्तीय प्रबंध के तीन प्रमुख निर्णय होते हैं — निवेश निर्णय, वित्तपोषण निर्णय तथा लाभांश निर्णय। पूँजीगत बजटिंग निवेश निर्णय के अन्तर्गत आती है, क्योंकि इसमें यह तय किया जाता है कि दीर्घकालीन निधियों को किन स्थायी सम्पत्तियों अथवा परियोजनाओं में लगाया जाए। ऐसे निर्णय अपरिवर्तनीय होते हैं, इनमें बड़ी राशि लगती है और इनका प्रभाव फर्म की भावी लाभप्रदता एवं जोखिम पर दीर्घकाल तक बना रहता है। इसके मूल्यांकन के लिए प्रतिफल अवधि, शुद्ध वर्तमान मूल्य तथा आन्तरिक प्रतिफल दर जैसी तकनीकें प्रयुक्त होती हैं।

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Q52. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की कौन-सी धारा केन्द्र सरकार को उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों के विनियमन हेतु केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण स्थापित करने का अधिकार देती है ?

Right Answer: धारा 10


Explanation:

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 10 केन्द्र सरकार को केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना का अधिकार देती है, जिसे संक्षेप में केन्द्रीय प्राधिकरण कहा जाता है। इसका कार्य उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार व्यवहार तथा भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामलों का विनियमन करना है। यह स्वप्रेरणा से जाँच आरम्भ कर सकता है, असुरक्षित वस्तुओं की वापसी का आदेश दे सकता है, भ्रामक विज्ञापन बन्द करा सकता है और जुर्माना लगा सकता है। इसके अन्तर्गत जाँच हेतु एक महानिदेशक की व्यवस्था भी की गई है।

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Q53. वह दृष्टिकोण जिससे हम अवलोकन और प्रत्यक्ष अनुभव दोनों के माध्यम से सीख सकते हैं, कहलाता है :

Right Answer: सामाजिक अधिगम सिद्धांत


Explanation:

सामाजिक अधिगम सिद्धांत अल्बर्ट बंडूरा ने प्रतिपादित किया। इसके अनुसार व्यक्ति केवल प्रत्यक्ष अनुभव अर्थात् स्वयं करके ही नहीं सीखता, बल्कि दूसरों को देखकर तथा उनके व्यवहार के परिणामों का प्रेक्षण करके भी सीख लेता है, जिसे प्रतिनिधिक अधिगम कहते हैं। इस प्रक्रिया के चार चरण हैं — ध्यान देना, धारण करना, प्रतिकृति बनाना तथा अभिप्रेरणा। प्रबंधन में इसका उपयोग प्रशिक्षण, प्रतिरूपण एवं संरक्षकत्व कार्यक्रमों में व्यापक रूप से होता है। बंडूरा ने आत्म-प्रभावकारिता की अवधारणा भी दी, जो अपनी क्षमता में विश्वास को दर्शाती है।

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Q54. औद्योगिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेरिस सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए गए थे :

Right Answer: 20 मार्च, 1883 को


Explanation:

औद्योगिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेरिस सम्मेलन पर 20 मार्च 1883 को हस्ताक्षर किए गए और यह बौद्धिक सम्पदा के क्षेत्र की प्रथम प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय संधि है। इसके अन्तर्गत पेटेंट, औद्योगिक अभिकल्प, ट्रेडमार्क, सेवा चिह्न, व्यापार नाम तथा भौगोलिक संकेत आते हैं। इसके दो आधारभूत सिद्धांत हैं — राष्ट्रीय व्यवहार, जिसके अनुसार सदस्य देश विदेशी आवेदकों को अपने नागरिकों जैसा संरक्षण देंगे; तथा प्राथमिकता का अधिकार, जिसके अन्तर्गत एक देश में आवेदन करने के बाद निर्धारित अवधि में अन्य सदस्य देशों में वही तिथि मान्य होती है। इसका प्रशासन विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन करता है।

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Q55. निम्नलिखित में से कौन मैक्स वेबर की आदर्श नौकरशाही की विशेषता नहीं है ?

Right Answer: कार्यकाल की स्थिरता


Explanation:

मैक्स वेबर की आदर्श नौकरशाही की प्रमुख विशेषताएँ हैं — कार्य विशेषज्ञता अर्थात् श्रम विभाजन, सत्ता का स्पष्ट संस्तरण, औपचारिक चयन जो तकनीकी योग्यता पर आधारित हो, औपचारिक नियम एवं विनियम, अवैयक्तित्व अर्थात् नियमों का बिना पक्षपात के समान प्रयोग, तथा व्यावसायिक जीवनवृत्त अभिविन्यास। ‘कार्यकाल की स्थिरता’ इस सूची में नहीं आती, क्योंकि वह हेनरी फेयोल के चौदह प्रबंधकीय सिद्धांतों में से एक है, जिसमें कहा गया है कि कर्मचारियों को स्थिर कार्यकाल देने से ही उनकी कार्यकुशलता विकसित होती है।

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Q56. निम्नलिखित में से कौन-सा चयन प्रक्रिया का पहला चरण है ?

Right Answer: प्रारंभिक स्क्रीनिंग


Explanation:

चयन एक नकारात्मक प्रक्रिया है, जिसमें क्रमिक बाधाओं से गुजरते हुए अनुपयुक्त अभ्यर्थियों को हटाया जाता है। इसका पहला चरण प्रारंभिक स्क्रीनिंग अर्थात् प्रारंभिक छँटनी है, जिसमें आवेदनों अथवा संक्षिप्त प्रारंभिक साक्षात्कार के आधार पर स्पष्ट रूप से अयोग्य अभ्यर्थियों को आरम्भ में ही अलग कर दिया जाता है। इससे संगठन का समय एवं धन दोनों बचते हैं। इसके बाद पूर्ण आवेदन-पत्र भरवाना, रोजगार परीक्षण, चयन साक्षात्कार, संदर्भ एवं पृष्ठभूमि की जाँच, चिकित्सा परीक्षण तथा अन्ततः नियुक्ति-पत्र देने के चरण आते हैं।

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Q57. कौन-सा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धांत आमतौर पर दो कारक मॉडल के रूप में तैयार किया जाता है ?

Right Answer: हेक्शेर-ओहलिन सिद्धांत


Explanation:

हेक्शेर-ओहलिन सिद्धांत को सामान्यतः दो कारक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, क्योंकि इसमें दो देश, दो वस्तुएँ तथा दो उत्पादन साधन — श्रम एवं पूँजी — मान लिए जाते हैं। इसे साधन-प्रचुरता सिद्धांत भी कहा जाता है। इसका मूल तर्क यह है कि प्रत्येक देश उस वस्तु का निर्यात करेगा जिसके उत्पादन में उसके यहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध एवं इसलिए सस्ते साधन का गहन उपयोग होता है, और उस वस्तु का आयात करेगा जिसमें दुर्लभ साधन की गहनता हो। यह रिकार्डो के तुलनात्मक लाभ सिद्धांत का विस्तार है, जो केवल श्रम-उत्पादकता के अन्तर पर आधारित था।

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Q58. कम्प्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली के अनुसार, इनमें से कौन-सा नॉन-मास्टर डेटा का उदाहरण नहीं है ?

Right Answer: ब्लड ग्रुप


Explanation:

कम्प्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली में आँकड़ों को दो वर्गों में बाँटा जाता है। मास्टर डेटा वह स्थायी अथवा अर्ध-स्थायी सूचना है जो बार-बार नहीं बदलती और अनेक लेनदेनों में बार-बार प्रयुक्त होती है। नॉन-मास्टर डेटा वह है जो बार-बार बदलता रहता है और प्रत्येक बार नए सिरे से दर्ज करना पड़ता है। आयु, वजन तथा पसंद-नापसंद समय के साथ बदलते रहते हैं, अतः वे नॉन-मास्टर डेटा के उदाहरण हैं। ब्लड ग्रुप जीवनभर अपरिवर्तित रहता है, इसलिए वह मास्टर डेटा है और नॉन-मास्टर डेटा का उदाहरण नहीं है।

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Q59. निम्नलिखित में से कौन-सा एक ट्रांजेक्शनल (लेन-देन) नेता का लक्षण नहीं है ?

Right Answer: प्रेरक प्रेरणा


Explanation:

ट्रांजेक्शनल अर्थात् लेन-देन आधारित नेता अनुयायियों को स्पष्ट भूमिका एवं कार्य-अपेक्षाएँ बताकर तथा उनके बदले पुरस्कार देकर लक्ष्य की ओर ले जाता है। उसके प्रमुख लक्षण हैं — आकस्मिक पुरस्कार, सक्रिय एवं निष्क्रिय दोनों रूपों में अपवादों द्वारा प्रबंध, तथा अहस्तक्षेप अर्थात् लेसे-फेयर, जिसमें वह उत्तरदायित्व से बचता है। इसके विपरीत ‘प्रेरक प्रेरणा’ ट्रांसफॉर्मेशनल नेतृत्व का लक्षण है, जिसमें नेता ऊँचा दृष्टिकोण प्रस्तुत कर अनुयायियों को स्वयं से ऊपर उठकर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। आदर्शीकृत प्रभाव एवं बौद्धिक उद्दीपन भी उसी के अंग हैं।

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Q60. प्रशिक्षण की प्रभावशीलता निर्धारित करने के लिए एक अलग दृष्टिकोण को कहा जाता है :

Right Answer: ब्रिंकरहॉफ मॉडल


Explanation:

प्रशिक्षण की प्रभावशीलता आँकने का सर्वाधिक प्रचलित प्रतिरूप किर्कपैट्रिक का चार-स्तरीय मॉडल है, जिसमें प्रतिक्रिया, अधिगम, व्यवहार तथा परिणाम का क्रमिक मूल्यांकन होता है। इससे भिन्न एवं वैकल्पिक दृष्टिकोण रॉबर्ट ब्रिंकरहॉफ ने प्रस्तुत किया, जिसे सफल प्रकरण विधि कहा जाता है। इसमें औसत प्रतिभागियों के स्थान पर सर्वाधिक सफल तथा सर्वाधिक असफल प्रकरणों को चुनकर उनका गहन अध्ययन किया जाता है, ताकि यह पता चले कि प्रशिक्षण किन परिस्थितियों में काम करता है और किनमें नहीं। इससे संगठनात्मक बाधाएँ भी उजागर हो जाती हैं।

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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

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