Commerce: 60 MCQs with Answers
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0%Q1. आर० एन० कार्टर के अनुसार, ‘‘.......... व्यावसायिक लेनदेन को खाते की पुस्तकों में सही ढंग से दर्ज करने का विज्ञान और कला है जिसके परिणामस्वरूप धन या धन के मूल्य का हस्तांतरण होता है।’’
Right Answer: बही - खाता
आर० एन० कार्टर की यह प्रसिद्ध परिभाषा बही-खाता अर्थात् बुक-कीपिंग की है। उनके अनुसार बही-खाता उन समस्त व्यावसायिक लेनदेनों को खाते की पुस्तकों में सही ढंग से दर्ज करने का विज्ञान एवं कला है जिनके परिणामस्वरूप धन अथवा धन के मूल्य का हस्तांतरण होता है। इसे विज्ञान इसलिए कहा गया क्योंकि यह निश्चित नियमों पर चलता है और कला इसलिए क्योंकि इन नियमों का व्यावहारिक प्रयोग कौशल माँगता है। बही-खाता लेखांकन की केवल प्रथम अवस्था है; उसके आगे वर्गीकरण, सारांशीकरण, विश्लेषण एवं निर्वचन का कार्य लेखांकन करता है।
Q2. मूल्य ह्रास की डूबती निधि विधि में, मूल्य ह्रास की राशि :
Right Answer: वर्षों तक स्थिर रहती है
मूल्य ह्रास की डूबती निधि विधि में प्रत्येक वर्ष मूल्य ह्रास की राशि समान अर्थात् स्थिर रहती है। इस विधि में प्रतिवर्ष मूल्य ह्रास के बराबर राशि लाभ-हानि खाते में डालकर उतनी ही राशि बाहर प्रतिभूतियों में निवेश कर दी जाती है, ताकि सम्पत्ति का जीवनकाल समाप्त होने पर उसके प्रतिस्थापन हेतु नकद उपलब्ध हो। निवेश पर प्राप्त ब्याज भी पुनः उसी निधि में लगाया जाता है। वार्षिक अंशदान की गणना डूबती निधि सारणी की सहायता से की जाती है। इसका मुख्य लाभ यह है कि प्रतिस्थापन के समय धन की व्यवस्था पहले से ही हो जाती है।
Q3. किस चार्ट का उपयोग डेटा की शृंखला में मौजूद परिवर्तनों या प्रवृत्ति की पहचान करने के लिए किया जाता है ?
Right Answer: रेखा या अंकगणितीय चार्ट
रेखा चार्ट अथवा अंकगणितीय चार्ट का उपयोग किसी शृंखला में समय के साथ होने वाले परिवर्तनों तथा प्रवृत्ति की पहचान के लिए किया जाता है। इसमें क्षैतिज अक्ष पर समय तथा उदग्र अक्ष पर चर का मान अंकित कर बिन्दुओं को क्रमशः रेखा से जोड़ दिया जाता है, जिससे उतार-चढ़ाव एवं दीर्घकालीन दिशा स्पष्ट दिखाई देती है। इसके विपरीत पाई चार्ट किसी समग्र के भागों का अनुपात दर्शाता है, बार ग्राफ विभिन्न वर्गों की तुलना करता है और चित्रलेख आँकड़ों को चित्रों के माध्यम से सरल एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत करता है।
Q4. दोनों शेष राशियों (कैश बुक और पास बुक के अनुसार बैंक शेष) में अंतर निम्नलिखित में से किस कारण से उत्पन्न नहीं हो सकता है ?
Right Answer: पसंद और नापसंद
रोकड़ बही तथा पासबुक के बैंक शेष में अन्तर मुख्यतः तीन कारणों से उत्पन्न होता है। पहला समय का अन्तर है, जैसे जारी किए गए किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत न हुए चेक अथवा जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक। दूसरा कारण दोनों में से किसी एक पक्ष द्वारा किया गया लेन-देन है, जैसे बैंक शुल्क, ब्याज अथवा सीधे जमा हुई राशि, जिसकी जानकारी दूसरे पक्ष को बाद में मिलती है। तीसरा कारण लिपिकीय त्रुटियाँ हैं। पसंद और नापसंद जैसा कोई व्यक्तिपरक कारण इस अन्तर का आधार नहीं बन सकता।
Q5. रोकड़ बही के अनुसार शेष 2,40,000 रु०; जारी किए गए किन्तु प्रस्तुत न हुए चेक 1,36,000 रु०; जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक 90,000 रु०; बैंक शुल्क 300 रु०; बैंक द्वारा जमा ब्याज 1,250 रु०। पासबुक के अनुसार शेष होगा :
Right Answer: 2,86,950 रुपये
रोकड़ बही के अनुकूल शेष से आरम्भ कर पासबुक का शेष ज्ञात करने के लिए क्रमिक समायोजन किए जाते हैं। जारी किए गए किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत न हुए चेक की राशि जोड़ी जाती है, क्योंकि बैंक ने अभी वह घटाई नहीं है। जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक घटाए जाते हैं, क्योंकि बैंक ने उन्हें अभी जमा नहीं किया। बैंक शुल्क घटाया तथा बैंक द्वारा जमा किया गया ब्याज जोड़ा जाता है। अतः 2,40,000 में 1,36,000 जोड़कर, 90,000 तथा 300 घटाकर और 1,250 जोड़ने पर 2,86,950 रुपये प्राप्त होते हैं।
Q6. चालू अनुपात 2.5 : 1, तरल अनुपात 1.25 : 1, स्कंध 21 लाख रु०, तथा बैंक ओवरड्राफ्ट एवं पूर्वदत्त व्यय शून्य हैं। कंपनी के चालू दायित्व ज्ञात कीजिए :
Right Answer: 16,80,000 रु०
चालू अनुपात 2.5 अनुपात 1 है, अतः चालू सम्पत्तियाँ चालू दायित्वों की ढाई गुना हैं। तरल अनुपात 1.25 अनुपात 1 है, अतः तरल सम्पत्तियाँ चालू दायित्वों की सवा गुना हैं। यहाँ पूर्वदत्त व्यय शून्य हैं, इसलिए स्कंध चालू सम्पत्तियों तथा तरल सम्पत्तियों का अन्तर होगा, अर्थात् 2.5 में से 1.25 घटाने पर 1.25 गुना चालू दायित्व। यह मान 21,00,000 रुपये दिया गया है। अतः चालू दायित्व 21,00,000 को 1.25 से भाग देने पर 16,80,000 रुपये प्राप्त होते हैं।
Q7. ऋणपत्र पर ब्याज को आमतौर पर कंपनी के वित्तीय विवरणों में किस रूप में माना जाता है ?
Right Answer: कंपनी के मुनाफे के खिलाफ शुल्क के रूप में
ऋणपत्र कंपनी के लिए उधार ली गई पूँजी है, अंश पूँजी नहीं। इस पर देय ब्याज एक निश्चित संविदात्मक दायित्व है, जिसका भुगतान कंपनी को लाभ हो या हानि, दोनों ही स्थितियों में करना ही पड़ता है। इसीलिए इसे लाभ के विरुद्ध प्रभार माना जाता है, न कि लाभ का विनियोजन। इसे लाभ-हानि खाते के डेबिट पक्ष में दिखाया जाता है और यह कर योग्य लाभ को भी घटा देता है, जिससे कंपनी को कर-कवच का लाभ मिलता है। इसके विपरीत अंशों पर दिया जाने वाला लाभांश लाभ का विनियोजन होता है और केवल लाभ होने पर ही दिया जाता है।
Q8. निम्नलिखित में से किसे जीएसटी से छूट नहीं है ?
Right Answer: अंतरराज्यीय बिक्री
वस्तु एवं सेवा कर एक गंतव्य आधारित उपभोग कर है, जो वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर लगता है। ब्याज को वित्तीय सेवा मानकर सामान्यतः छूट दी गई है, कर्मचारियों द्वारा दावा किया गया यात्रा व्यय आपूर्ति नहीं माना जाता और सरकार को दी जाने वाली अनेक सेवाएँ भी छूट सूची में आती हैं। इसके विपरीत अंतरराज्यीय बिक्री जीएसटी के दायरे में पूरी तरह आती है और उस पर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अर्थात् आईजीएसटी लगाया जाता है, जिसे केन्द्र सरकार वसूलकर उपभोग करने वाले राज्य के साथ बाँटती है।
Q9. नियोक्ताओं के वित्तीय विवरणों में सेवानिवृत्ति लाभों के लिए लेखांकन किस भारतीय लेखांकन मानक के अंतर्गत आता है ?
Right Answer: AS-15
नियोक्ताओं के वित्तीय विवरणों में कर्मचारी लाभों तथा सेवानिवृत्ति लाभों का लेखांकन भारतीय लेखांकन मानक AS-15 के अन्तर्गत आता है, जिसका शीर्षक ‘कर्मचारी लाभ’ है। यह मानक अल्पकालीन लाभों जैसे वेतन एवं बोनस, सेवा-उपरान्त लाभों जैसे उपदान, पेंशन एवं भविष्य निधि, तथा अन्य दीर्घकालीन लाभों की मान्यता एवं मापन की विधि निर्धारित करता है। इसमें परिभाषित अंशदान योजना तथा परिभाषित लाभ योजना का भेद किया गया है और परिभाषित लाभ योजनाओं के लिए बीमांकिक मूल्यांकन अनिवार्य है। AS-12 सरकारी अनुदान से सम्बद्ध है।
Q10. परिसंपत्ति की मूल लागत 2,50,000 रुपये है। परिसंपत्ति का उपयोगी जीवन 10 वर्ष है और शुद्ध अवशिष्ट मूल्य 50,000 रुपये होने का अनुमान है। हर साल लगाए जाने वाले मूल्य ह्रास की राशि की गणना करें :
Right Answer: 20,000 रु०
सीधी रेखा विधि में मूल्य ह्रास की वार्षिक राशि निकालने के लिए सम्पत्ति की मूल लागत में से उसका अनुमानित शुद्ध अवशिष्ट मूल्य घटाकर शेष को उपयोगी जीवन के वर्षों की संख्या से भाग दिया जाता है। यहाँ मूल लागत 2,50,000 रुपये तथा अवशिष्ट मूल्य 50,000 रुपये है, अतः ह्रास योग्य राशि 2,00,000 रुपये हुई। इसे उपयोगी जीवन 10 वर्ष से भाग देने पर प्रतिवर्ष 20,000 रुपये मूल्य ह्रास प्राप्त होता है। इस विधि की विशेषता यह है कि प्रत्येक वर्ष समान राशि लगाई जाती है और जीवन के अन्त में पुस्तक मूल्य घटकर अवशिष्ट मूल्य रह जाता है।