Commerce - Company Law and Consumer Protection: 7 MCQs with Answers
Commerce- Company Law and Consumer Protection
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0%Q1. निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प कंपनी गठन में ज्ञापन-पत्र की भूमिका का सही वर्णन करता है ?
Right Answer: यह कंपनी का चार्टर होता है, जो बाहरी दुनिया के साथ उसके संबंधों और उसकी गतिविधियों के दायरे को परिभाषित करता है।
Explanation:
ज्ञापन-पत्र अर्थात् मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन कंपनी का चार्टर अथवा आधारभूत दस्तावेज है, जो उसके निगमन के समय रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया जाता है। यह बाहरी दुनिया के साथ कंपनी के सम्बन्धों को नियंत्रित करता है और उसकी गतिविधियों का दायरा परिभाषित करता है। इसमें नाम खण्ड, पंजीकृत कार्यालय खण्ड, उद्देश्य खण्ड, दायित्व खण्ड, पूँजी खण्ड तथा अभिदान खण्ड होते हैं। इसके दायरे से बाहर किया गया कार्य ‘अल्ट्रा वायर्स’ अर्थात् शक्ति से परे होकर शून्य माना जाता है। कंपनी के आन्तरिक नियम तो अन्तर्नियम अर्थात् आर्टिकल्स में दिए जाते हैं।
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Q2. यदि कोई व्यक्ति किसी कंपनी के पंजीकरण के संबंध में रजिस्ट्रार के पास दाखिल किसी भी दस्तावेज में कोई असत्य या गलत जानकारी प्रस्तुत करता है या कोई महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, जिसके बारे में वह जानता है, तो वह किस धारा के तहत धोखाधड़ी के लिए दंडनीय होगा ?
Right Answer: धारा 447 [ धारा 7(5)]
Explanation:
कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 7 कंपनी के निगमन की प्रक्रिया से सम्बन्धित है। इसकी उपधारा 5 यह प्रावधान करती है कि यदि कोई व्यक्ति पंजीकरण के सम्बन्ध में रजिस्ट्रार के पास दाखिल किसी दस्तावेज में जानबूझकर असत्य अथवा गलत विवरण प्रस्तुत करता है या कोई महत्त्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, तो वह धोखाधड़ी के लिए धारा 447 के अन्तर्गत दंडनीय होगा। धारा 447 धोखाधड़ी को परिभाषित करती है और उसके लिए न्यूनतम छह माह से लेकर दस वर्ष तक का कारावास तथा सम्बन्धित राशि के तीन गुना तक जुर्माने का प्रावधान करती है।
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Q3. साझेदारी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है ?
Right Answer: यह एक विशिष्ट उद्यम तक सीमित है।
Explanation:
भारतीय साझेदारी अधिनियम 1932 के अनुसार साझेदारी उन व्यक्तियों का सम्बन्ध है जो किसी ऐसे व्यवसाय के लाभ को बाँटने पर सहमत हों जो सबके द्वारा अथवा सबकी ओर से किसी एक के द्वारा चलाया जा रहा हो। यह फर्म के नाम से संचालित होती है और सामान्यतः एक सतत लाभ चाहने वाला उद्यम होती है, जो किसी एक विशिष्ट उद्यम अथवा एकल सौदे तक सीमित नहीं रहती। अतः यह कहना कि साझेदारी एक विशिष्ट उद्यम तक सीमित है, गलत है। ऐसी सीमित व्यवस्था तो विशेष साझेदारी अथवा संयुक्त उपक्रम की विशेषता होती है।
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Q4. कंपनी अधिनियम 2013 की किस धारा के तहत केन्द्र सरकार को किसी कंपनी को अपना नाम सुधारने का निर्देश देने का अधिकार है, यदि अनजाने में उसका नाम किसी मौजूदा कंपनी के नाम से मिलता-जुलता पंजीकृत हो गया हो ?
Right Answer: धारा 16
Explanation:
कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 16 केन्द्र सरकार को यह अधिकार देती है कि यदि किसी कंपनी का नाम अनजाने में ऐसा पंजीकृत हो गया हो जो किसी पूर्व-विद्यमान कंपनी के नाम के समान अथवा उससे अत्यधिक मिलता-जुलता हो, तो वह उसे नाम बदलने का निर्देश दे सकती है। कंपनी को निर्देश मिलने के तीन माह के भीतर साधारण प्रस्ताव पारित कर नाम बदलना होता है। इसी प्रकार यदि कोई पंजीकृत ट्रेडमार्क का स्वामी आपत्ति करे तो वह निर्धारित अवधि में केन्द्र सरकार को आवेदन कर सकता है। धारा 13 नाम परिवर्तन की सामान्य प्रक्रिया बताती है।
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Q5. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत निम्नलिखित में से कौन ‘उपभोक्ता’ है ?
Right Answer: जो आंशिक रूप से भुगतान किए गए प्रतिफल के लिए किसी सेवा को किराए पर लेता है।
Explanation:
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के अनुसार उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो प्रतिफल देकर कोई वस्तु क्रय करता है अथवा सेवा किराए पर लेता है, और यह प्रतिफल पूर्णतः चुकाया गया, आंशिक रूप से चुकाया गया अथवा चुकाने का वचन दिया गया हो सकता है। अतः आंशिक रूप से भुगतान किए गए प्रतिफल पर सेवा लेने वाला व्यक्ति उपभोक्ता है। इसके विपरीत जो पुनर्विक्रय अथवा किसी वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए क्रय करता है, जो निःशुल्क सेवा लेता है, अथवा जो सेवा के अनुबंध के अन्तर्गत सेवा प्राप्त करता है, वह उपभोक्ता की परिभाषा से बाहर रखा गया है।
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Q6. कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, किसी भी वैध उद्देश्य के लिए सार्वजनिक कंपनी का गठन किया जा सकता है :
Right Answer: 7 या अधिक व्यक्तियों द्वारा
Explanation:
कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 3 के अनुसार किसी भी वैध उद्देश्य के लिए सार्वजनिक कंपनी का गठन सात या अधिक व्यक्तियों द्वारा किया जा सकता है, जो ज्ञापन-पत्र पर अपने नाम अभिदान कर पंजीकरण सम्बन्धी अपेक्षाओं का पालन करें। निजी कंपनी के लिए दो या अधिक व्यक्ति पर्याप्त हैं, तथा एक व्यक्ति कंपनी अर्थात् ओपीसी का गठन केवल एक व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है, जो इस अधिनियम की नई विशेषता है। सार्वजनिक कंपनी में सदस्यों की अधिकतम संख्या पर कोई सीमा नहीं है, जबकि निजी कंपनी में यह दो सौ तक सीमित है।
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Q7. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की कौन-सी धारा केन्द्र सरकार को उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों के विनियमन हेतु केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण स्थापित करने का अधिकार देती है ?
Right Answer: धारा 10
Explanation:
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 10 केन्द्र सरकार को केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना का अधिकार देती है, जिसे संक्षेप में केन्द्रीय प्राधिकरण कहा जाता है। इसका कार्य उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार व्यवहार तथा भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामलों का विनियमन करना है। यह स्वप्रेरणा से जाँच आरम्भ कर सकता है, असुरक्षित वस्तुओं की वापसी का आदेश दे सकता है, भ्रामक विज्ञापन बन्द करा सकता है और जुर्माना लगा सकता है। इसके अन्तर्गत जाँच हेतु एक महानिदेशक की व्यवस्था भी की गई है।
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