Commerce - Financial Accounting: 12 MCQs with Answers

Financial Accounting - Commerce
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Commerce- Financial Accounting

लेखांकन की अवधारणाएँ, जर्नल एवं खाता-बही, बैंक समाधान विवरण, मूल्य ह्रास तथा प्रावधान पर बहुविकल्पीय प्रश्न।

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Q1. आर० एन० कार्टर के अनुसार, ‘‘.......... व्यावसायिक लेनदेन को खाते की पुस्तकों में सही ढंग से दर्ज करने का विज्ञान और कला है जिसके परिणामस्वरूप धन या धन के मूल्य का हस्तांतरण होता है।’’

Right Answer: बही - खाता


Explanation:

आर० एन० कार्टर की यह प्रसिद्ध परिभाषा बही-खाता अर्थात् बुक-कीपिंग की है। उनके अनुसार बही-खाता उन समस्त व्यावसायिक लेनदेनों को खाते की पुस्तकों में सही ढंग से दर्ज करने का विज्ञान एवं कला है जिनके परिणामस्वरूप धन अथवा धन के मूल्य का हस्तांतरण होता है। इसे विज्ञान इसलिए कहा गया क्योंकि यह निश्चित नियमों पर चलता है और कला इसलिए क्योंकि इन नियमों का व्यावहारिक प्रयोग कौशल माँगता है। बही-खाता लेखांकन की केवल प्रथम अवस्था है; उसके आगे वर्गीकरण, सारांशीकरण, विश्लेषण एवं निर्वचन का कार्य लेखांकन करता है।

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Q2. मूल्य ह्रास की डूबती निधि विधि में, मूल्य ह्रास की राशि :

Right Answer: वर्षों तक स्थिर रहती है


Explanation:

मूल्य ह्रास की डूबती निधि विधि में प्रत्येक वर्ष मूल्य ह्रास की राशि समान अर्थात् स्थिर रहती है। इस विधि में प्रतिवर्ष मूल्य ह्रास के बराबर राशि लाभ-हानि खाते में डालकर उतनी ही राशि बाहर प्रतिभूतियों में निवेश कर दी जाती है, ताकि सम्पत्ति का जीवनकाल समाप्त होने पर उसके प्रतिस्थापन हेतु नकद उपलब्ध हो। निवेश पर प्राप्त ब्याज भी पुनः उसी निधि में लगाया जाता है। वार्षिक अंशदान की गणना डूबती निधि सारणी की सहायता से की जाती है। इसका मुख्य लाभ यह है कि प्रतिस्थापन के समय धन की व्यवस्था पहले से ही हो जाती है।

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Q3. दोनों शेष राशियों (कैश बुक और पास बुक के अनुसार बैंक शेष) में अंतर निम्नलिखित में से किस कारण से उत्पन्न नहीं हो सकता है ?

Right Answer: पसंद और नापसंद


Explanation:

रोकड़ बही तथा पासबुक के बैंक शेष में अन्तर मुख्यतः तीन कारणों से उत्पन्न होता है। पहला समय का अन्तर है, जैसे जारी किए गए किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत न हुए चेक अथवा जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक। दूसरा कारण दोनों में से किसी एक पक्ष द्वारा किया गया लेन-देन है, जैसे बैंक शुल्क, ब्याज अथवा सीधे जमा हुई राशि, जिसकी जानकारी दूसरे पक्ष को बाद में मिलती है। तीसरा कारण लिपिकीय त्रुटियाँ हैं। पसंद और नापसंद जैसा कोई व्यक्तिपरक कारण इस अन्तर का आधार नहीं बन सकता।

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Q4. रोकड़ बही के अनुसार शेष 2,40,000 रु०; जारी किए गए किन्तु प्रस्तुत न हुए चेक 1,36,000 रु०; जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक 90,000 रु०; बैंक शुल्क 300 रु०; बैंक द्वारा जमा ब्याज 1,250 रु०। पासबुक के अनुसार शेष होगा :

Right Answer: 2,86,950 रुपये


Explanation:

रोकड़ बही के अनुकूल शेष से आरम्भ कर पासबुक का शेष ज्ञात करने के लिए क्रमिक समायोजन किए जाते हैं। जारी किए गए किन्तु भुगतान हेतु प्रस्तुत न हुए चेक की राशि जोड़ी जाती है, क्योंकि बैंक ने अभी वह घटाई नहीं है। जमा किए गए किन्तु वसूल न हुए चेक घटाए जाते हैं, क्योंकि बैंक ने उन्हें अभी जमा नहीं किया। बैंक शुल्क घटाया तथा बैंक द्वारा जमा किया गया ब्याज जोड़ा जाता है। अतः 2,40,000 में 1,36,000 जोड़कर, 90,000 तथा 300 घटाकर और 1,250 जोड़ने पर 2,86,950 रुपये प्राप्त होते हैं।

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Q5. परिसंपत्ति की मूल लागत 2,50,000 रुपये है। परिसंपत्ति का उपयोगी जीवन 10 वर्ष है और शुद्ध अवशिष्ट मूल्य 50,000 रुपये होने का अनुमान है। हर साल लगाए जाने वाले मूल्य ह्रास की राशि की गणना करें :

Right Answer: 20,000 रु०


Explanation:

सीधी रेखा विधि में मूल्य ह्रास की वार्षिक राशि निकालने के लिए सम्पत्ति की मूल लागत में से उसका अनुमानित शुद्ध अवशिष्ट मूल्य घटाकर शेष को उपयोगी जीवन के वर्षों की संख्या से भाग दिया जाता है। यहाँ मूल लागत 2,50,000 रुपये तथा अवशिष्ट मूल्य 50,000 रुपये है, अतः ह्रास योग्य राशि 2,00,000 रुपये हुई। इसे उपयोगी जीवन 10 वर्ष से भाग देने पर प्रतिवर्ष 20,000 रुपये मूल्य ह्रास प्राप्त होता है। इस विधि की विशेषता यह है कि प्रत्येक वर्ष समान राशि लगाई जाती है और जीवन के अन्त में पुस्तक मूल्य घटकर अवशिष्ट मूल्य रह जाता है।

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Q6. उद्यम द्वारा अपनी परिचालन गतिविधियों से प्राप्त या प्राप्य राशि है :

Right Answer: राजस्व


Explanation:

राजस्व से तात्पर्य उस सकल राशि से है जो उद्यम अपनी सामान्य परिचालन गतिविधियों से प्राप्त करता है अथवा जिसे प्राप्त करने का उसे अधिकार है। इसमें वस्तुओं की बिक्री, सेवाओं का प्रतिफल तथा ब्याज, स्वामिस्व एवं लाभांश जैसी प्राप्तियाँ सम्मिलित होती हैं। यह सकल अन्तर्वाह है, इसमें से व्यय घटाए नहीं जाते। इसके विपरीत लाभ अथवा मुनाफा तब निकलता है जब राजस्व में से समस्त व्यय घटा दिए जाएँ, और आय एक व्यापक पद है जिसमें राजस्व तथा अन्य लाभ दोनों सम्मिलित रहते हैं।

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Q7. यदि कोई ग्राहक पहले चालान किए गए सामान को वापस कर देता है या ग्राहक को आगे की छूट की अनुमति दी जाती है, तो कौन-सा स्रोत दस्तावेज़ जारी किया जाता है ?

Right Answer: क्रेडिट नोट


Explanation:

क्रेडिट नोट वह स्रोत दस्तावेज है जो विक्रेता अपने ग्राहक के नाम तब जारी करता है जब ग्राहक पहले चालान किया गया माल लौटा देता है, अथवा उसे कोई अतिरिक्त छूट दी जाती है या चालान में अधिक राशि लिख दी गई हो। इससे ग्राहक का खाता उतनी राशि से क्रेडिट अर्थात् कम हो जाता है और यह विक्रय वापसी बही में लिखा जाता है। इसके विपरीत डेबिट नोट क्रेता द्वारा तब बनाया जाता है जब वह माल लौटाता है और आपूर्तिकर्ता का खाता डेबिट करता है। दोनों दस्तावेज माल की वापसी के दो पक्षों को दर्शाते हैं।

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Q8. प्रिंस लिमिटेड अपना रोकड़ प्रवाह विवरण तैयार करना चाहता है। इसने 60,000 रुपये के बुक वैल्यू के उपकरण 8,000 रुपये के लाभ पर बेचे। गतिविधियों के तहत इसकी रोकड़ प्रवाह विवरण में रिपोर्ट की जाने वाली राशि है :

Right Answer: 68,000 रुपये


Explanation:

रोकड़ प्रवाह विवरण में सम्पत्ति की बिक्री से प्राप्त वास्तविक नकद राशि निवेश गतिविधियों के अन्तर्गत दिखाई जाती है, न कि उस पर हुआ लाभ। यहाँ उपकरण का पुस्तक मूल्य 60,000 रुपये था और उसे 8,000 रुपये के लाभ पर बेचा गया, अतः वास्तविक विक्रय मूल्य 68,000 रुपये हुआ और यही राशि निवेश गतिविधियों में नकद अन्तर्वाह के रूप में रिपोर्ट होगी। 8,000 रुपये का लाभ तो परिचालन गतिविधियों में शुद्ध लाभ से घटा दिया जाता है, ताकि उसकी दोहरी गणना न हो, क्योंकि वह नकद न होकर केवल लेखांकन लाभ है।

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Q9. इनमें से कौन-सा ‘प्रावधानों’ के लिए सही नहीं है ?

Right Answer: यह व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए बनाया जाता है। कुछ कानून के तहत अनिवार्य भी हैं।


Explanation:

प्रावधान चालू लेखा अवधि से सम्बन्धित किसी ज्ञात देयता अथवा व्यय के लिए बनाया जाता है, जिसकी राशि निश्चित रूप से ज्ञात नहीं होती, जैसे संदिग्ध ऋणों का प्रावधान अथवा कर का प्रावधान। यह लाभ के विरुद्ध प्रभार होता है, अतः लाभ हो या हानि, इसे बनाना अनिवार्य है और इससे कर योग्य लाभ घट जाता है। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि व्यवसाय की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए तथा कानून के अन्तर्गत अनिवार्य रूप से जो राशि अलग रखी जाती है वह संचय अर्थात् रिजर्व होती है, जो लाभ का विनियोजन है।

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Q10. ............. वित्तीय विवरण तैयार करने में एक मार्गदर्शक के रूप में लेखाकारों द्वारा पालन किए जाने वाले रीति-रिवाज, उपयोग या प्रथाएँ हैं।

Right Answer: लेखांकन प्रथाएँ


Explanation:

लेखांकन प्रथाएँ अर्थात् अकाउंटिंग कन्वेंशंस वे रीति-रिवाज, परिपाटियाँ अथवा व्यवहार हैं जिनका पालन लेखाकार वित्तीय विवरण तैयार करते समय एक मार्गदर्शक के रूप में करते हैं। ये किसी विधि द्वारा निर्धारित नहीं होतीं, बल्कि लम्बे व्यावहारिक अनुभव तथा सामान्य स्वीकृति से विकसित हुई हैं। इनमें रूढ़िवादिता अथवा सतर्कता, पूर्ण प्रकटीकरण, सारता तथा संगतता की प्रथाएँ प्रमुख हैं। इसके विपरीत लेखांकन अवधारणाएँ आधारभूत मान्यताएँ हैं, जैसे चालू व्यवसाय एवं द्वैत पक्ष, तथा लेखांकन मानक अधिकृत संस्थाओं द्वारा जारी अनिवार्य दिशानिर्देश होते हैं।

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Published: 03 August 2026 | Last Updated: 19 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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