Commerce - Financial Management and International Business: 3 MCQs with Answers

Financial Management and International Business - Commerce
Commerce - Financial Management and International Business

Commerce- Financial Management and International Business

पूँजीगत बजटिंग, वित्तीय निर्णय, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धांत तथा बौद्धिक सम्पदा पर बहुविकल्पीय प्रश्न।

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Q1. ‘पूँजीगत बजटिंग’ किस प्रकार का वित्तीय निर्णय है ?

Right Answer: निवेश निर्णय

वित्तीय प्रबंध के तीन प्रमुख निर्णय होते हैं — निवेश निर्णय, वित्तपोषण निर्णय तथा लाभांश निर्णय। पूँजीगत बजटिंग निवेश निर्णय के अन्तर्गत आती है, क्योंकि इसमें यह तय किया जाता है कि दीर्घकालीन निधियों को किन स्थायी सम्पत्तियों अथवा परियोजनाओं में लगाया जाए। ऐसे निर्णय अपरिवर्तनीय होते हैं, इनमें बड़ी राशि लगती है और इनका प्रभाव फर्म की भावी लाभप्रदता एवं जोखिम पर दीर्घकाल तक बना रहता है। इसके मूल्यांकन के लिए प्रतिफल अवधि, शुद्ध वर्तमान मूल्य तथा आन्तरिक प्रतिफल दर जैसी तकनीकें प्रयुक्त होती हैं।

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Q2. औद्योगिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेरिस सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए गए थे :

Right Answer: 20 मार्च, 1883 को

औद्योगिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेरिस सम्मेलन पर 20 मार्च 1883 को हस्ताक्षर किए गए और यह बौद्धिक सम्पदा के क्षेत्र की प्रथम प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय संधि है। इसके अन्तर्गत पेटेंट, औद्योगिक अभिकल्प, ट्रेडमार्क, सेवा चिह्न, व्यापार नाम तथा भौगोलिक संकेत आते हैं। इसके दो आधारभूत सिद्धांत हैं — राष्ट्रीय व्यवहार, जिसके अनुसार सदस्य देश विदेशी आवेदकों को अपने नागरिकों जैसा संरक्षण देंगे; तथा प्राथमिकता का अधिकार, जिसके अन्तर्गत एक देश में आवेदन करने के बाद निर्धारित अवधि में अन्य सदस्य देशों में वही तिथि मान्य होती है। इसका प्रशासन विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन करता है।

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Q3. कौन-सा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धांत आमतौर पर दो कारक मॉडल के रूप में तैयार किया जाता है ?

Right Answer: हेक्शेर-ओहलिन सिद्धांत

हेक्शेर-ओहलिन सिद्धांत को सामान्यतः दो कारक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, क्योंकि इसमें दो देश, दो वस्तुएँ तथा दो उत्पादन साधन — श्रम एवं पूँजी — मान लिए जाते हैं। इसे साधन-प्रचुरता सिद्धांत भी कहा जाता है। इसका मूल तर्क यह है कि प्रत्येक देश उस वस्तु का निर्यात करेगा जिसके उत्पादन में उसके यहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध एवं इसलिए सस्ते साधन का गहन उपयोग होता है, और उस वस्तु का आयात करेगा जिसमें दुर्लभ साधन की गहनता हो। यह रिकार्डो के तुलनात्मक लाभ सिद्धांत का विस्तार है, जो केवल श्रम-उत्पादकता के अन्तर पर आधारित था।

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Published: 03 August 2026 | Last Updated: 03 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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