Geography: 84 MCQs with Answers
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Geography MCQ Questions in Hindi
भूगोल से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न — भारत का भूगोल, विश्व भूगोल, नदियाँ, झीलें एवं राष्ट्रीय उद्यान।
Q31. कोबर के भूसन्नति पर्वत निर्माण सिद्धान्त के सम्बन्ध में सही कथन कौन-से हैं?
कोबर के सिद्धान्त से संबंधित निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
- A. भूसन्नति – क्रेटोजेन
- B. किनारे की पर्वत श्रेणियाँ – रेण्डकेटन
- C. मीडियन मास – अग्रप्रदेश
Right Answer: A और B
जर्मन भूवैज्ञानिक कोबर ने सन् 1921 में भूसन्नति (Geosyncline) संकल्पना के आधार पर पर्वत निर्माण की व्याख्या प्रस्तुत की। उनके अनुसार दो दृढ़ भूखण्डों, जिन्हें क्रेटोजेन कहा जाता है, के मध्य स्थित लंबे उथले सागर में अवसाद संचित होते रहते हैं। जब ये भूखण्ड एक-दूसरे की ओर खिसकते हैं तो अवसाद संपीड़ित होकर वलित हो जाते हैं और किनारों पर दो समानांतर पर्वत श्रेणियाँ बनती हैं, जिन्हें रेण्डकेटन कहते हैं। इनके मध्य का अपेक्षाकृत अविकृत भाग मीडियन मास कहलाता है, जिसे अग्रप्रदेश नहीं कहा जाता।
Q32. 'सॉलिफ्लक्शन' का प्रमुख महत्त्व किस क्षेत्र में है?
Right Answer: शीत (Periglacial) क्षेत्र
सॉलिफ्लक्शन (Solifluction) मृदा प्रवाह की वह धीमी प्रक्रिया है, जिसमें जल से संतृप्त मृदा एवं अपक्षयित पदार्थ मंद ढाल पर भी नीचे की ओर सरकते रहते हैं। यह प्रक्रिया मुख्यतः परिहिमानी अर्थात् शीत (Periglacial) क्षेत्रों में महत्वपूर्ण होती है, जहाँ स्थायी तुषार भूमि (Permafrost) पाई जाती है। ग्रीष्म ऋतु में ऊपरी सक्रिय परत पिघल जाती है, किंतु नीचे की जमी हुई परत जल को रिसने नहीं देती, जिससे संतृप्त ऊपरी परत ढाल पर बहने लगती है। इससे सॉलिफ्लक्शन लोब तथा टैरेस जैसी विशिष्ट स्थलाकृतियाँ विकसित होती हैं।
Q33. निम्नलिखित में से कौन-सा भूगोलवेत्ता एकरूपतावाद (Uniformitarianism) के सिद्धान्त से सम्बन्धित नहीं है?
Right Answer: हम्बोल्ट
एकरूपतावाद (Uniformitarianism) का सिद्धान्त यह मानता है कि 'वर्तमान भूत की कुंजी है', अर्थात् आज पृथ्वी पर कार्यरत भूवैज्ञानिक प्रक्रियाएँ अतीत में भी उसी प्रकार कार्यशील थीं। इसका प्रतिपादन स्कॉटिश भूवैज्ञानिक जेम्स हट्टन ने सन् 1785 में किया था। जॉन प्लेफेयर ने इसे सरल एवं सुबोध भाषा में प्रस्तुत किया तथा चार्ल्स ल्येल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'Principles of Geology' के माध्यम से इसे व्यापक वैज्ञानिक मान्यता दिलाई। अलेक्जेण्डर वॉन हम्बोल्ट आधुनिक भूगोल के जनक माने जाते हैं, किंतु उनका संबंध इस सिद्धान्त से नहीं है।
Q34. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थलाकृति समुद्री लहरों के निक्षेपण से निर्मित होती है?
Right Answer: सबखा
सबखा (Sabkha) तटीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली निक्षेपण जनित स्थलाकृति है। यह प्रायः शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क तटों पर विकसित होने वाला लवणीय समतल मैदान है, जहाँ समुद्री जल के वाष्पीकरण से लवण तथा महीन अवसाद निक्षेपित होते रहते हैं। इसके विपरीत स्टैक, क्लिफ (भृगु) तथा तरंग-घर्षित वेदिका समुद्री तरंगों की अपरदन क्रिया से निर्मित होती हैं — तरंगें तट की चट्टानों को काटकर खड़ी भृगु तथा अवशिष्ट स्तंभ बना देती हैं। अतः दिए गए विकल्पों में केवल सबखा ही निक्षेपण की देन है।
Q35. 'अण्डों की टोकरी स्थलाकृति' किसे कहा जाता है?
Right Answer: ड्रमलिन
ड्रमलिन (Drumlin) हिमानी निक्षेपण से बनने वाली उल्टी नाव अथवा अण्डाकार आकृति की पहाड़ी है, जो हिमानी द्वारा लाए गए गोलाश्म मृत्तिका (Boulder Clay) के जमाव से निर्मित होती है। जब अनेक ड्रमलिन एक साथ समूह में पाए जाते हैं तो दूर से देखने पर वे टोकरी में रखे अण्डों के समान प्रतीत होते हैं, इसीलिए इन्हें "अण्डों की टोकरी स्थलाकृति" (Basket of Eggs Topography) कहा जाता है। सर्क एवं रोश माउटोनी हिमानी अपरदन से तथा एस्कर हिमजल धाराओं के निक्षेपण से बनती है।
Q36. 105° से 145° के मध्य भूकम्पीय छाया क्षेत्र किस तरंग के लिए पाया जाता है?
Right Answer: केवल P तरंगें
भूकम्पीय छाया क्षेत्र वह क्षेत्र है जहाँ भूकम्प मूल से चलने वाली तरंगें भूकम्पलेखी पर दर्ज नहीं होतीं। P-तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं तथा ठोस एवं तरल दोनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, किंतु बाह्य क्रोड में प्रवेश करते समय अपवर्तन के कारण वे 105° से 145° के मध्य के क्षेत्र में नहीं पहुँच पातीं — यही P-तरंगों का छाया क्षेत्र कहलाता है। S-तरंगें अनुप्रस्थ होने के कारण तरल बाह्य क्रोड से गुजर ही नहीं सकतीं, अतः उनका छाया क्षेत्र 105° से आगे का सम्पूर्ण भाग होता है।
Q37. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थलाकृति अपवाहन (Deflation) से निर्मित होती है?
Right Answer: ब्लो-आउट (वात-गर्त)
अपवाहन (Deflation) वायु द्वारा किया जाने वाला वह अपरदन कार्य है, जिसमें ढीली रेत, धूल तथा महीन कण उड़ाकर दूर ले जाए जाते हैं। इस प्रक्रिया से धरातल पर उथले गर्त बन जाते हैं, जिन्हें ब्लो-आउट अथवा वात-गर्त (Deflation Hollow) कहा जाता है। मशरूम चट्टान तथा ड्राइकैन्टर वायु के अपघर्षण (Abrasion) से बनती हैं, जिसमें उड़ते हुए रेतकण चट्टानों को रगड़कर विशिष्ट आकार प्रदान करते हैं। डेमोइसेलेस वर्षा जल के अपरदन से बनने वाले मृदा स्तंभ हैं। अतः केवल ब्लो-आउट ही अपवाहन की देन है।
Q38. कार्स्ट स्थलाकृतियों में निम्नलिखित में से कौन-सी अपरदन से निर्मित नहीं है?
Right Answer: हैलिक्टाइट
कार्स्ट स्थलाकृतियाँ चूना-पत्थर क्षेत्रों में जल की घुलन क्रिया से विकसित होती हैं। लैपीज चूना-पत्थर की सतह पर बनने वाली नुकीली कटकों एवं खाँचों की संरचना है, अन्धी घाटी वह घाटी है जो अचानक समाप्त होकर नदी को भूमिगत कर देती है, तथा हम्स अपरदन के पश्चात् बचे हुए अवशिष्ट टीले हैं — ये सभी घुलन एवं अपरदन की देन हैं। इसके विपरीत हैलिक्टाइट गुफाओं में कैल्शियम कार्बोनेट के निक्षेपण से बनने वाली टेढ़ी-मेढ़ी संरचना है, अतः यह निक्षेपण जनित है।
Q39. निम्नलिखित में से कौन-सा तड़ित-झंझावत असम राज्य को प्रभावित नहीं करता?
Right Answer: चेरी ब्लॉसम
भारत में प्री-मानसून काल के दौरान पूर्वोत्तर एवं पूर्वी भागों में तीव्र तड़ित-झंझावत आते हैं। असम में इन्हें 'बारदोली छीड़ा' कहा जाता है, जबकि असम एवं पश्चिम बंगाल में इन्हीं तूफानों को 'कालबैसाखी' तथा अंग्रेज़ी में 'नार्वेस्टर' (Nor'wester) कहा जाता है। ये तूफान अत्यधिक ताप एवं आर्द्रता के संयोग से उत्पन्न होते हैं और चाय तथा जूट की फसल के लिए लाभदायक सिद्ध होते हैं। इसके विपरीत 'चेरी ब्लॉसम' कर्नाटक एवं केरल में कॉफी की फसल के लिए होने वाली वर्षा है, कोई तड़ित-झंझावत नहीं।
Q40. कोपेन जलवायु वर्गीकरण के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा सुमेलित नहीं है?
कोपेन जलवायु प्रकार एवं क्षेत्र के निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:
- Dfc – अरुणाचल प्रदेश
- ET – उत्तराखण्ड
- E – हिमाचल प्रदेश
- As – कोंकण तट
Right Answer: As – कोंकण तट
कोपेन ने तापमान एवं वर्षा के आधार पर विश्व की जलवायु का वर्गीकरण किया, जिसमें विभिन्न प्रकार अक्षरों द्वारा दर्शाए जाते हैं। कोंकण तट पश्चिमी घाट के पवनाभिमुख ढाल पर स्थित है, जहाँ ग्रीष्मकालीन मानसून से अत्यधिक वर्षा होती है; अतः यहाँ उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु (Am) पाई जाती है, न कि शुष्क ग्रीष्म वाली As जलवायु — यही सुमेल गलत है। अरुणाचल प्रदेश के ऊँचे भागों में Dfc, उत्तराखण्ड के हिमाच्छादित उच्च भागों में ET तथा हिमाचल प्रदेश के ध्रुवीय प्रकार के क्षेत्रों में E जलवायु का उल्लेख किया जाता है।