Geography - Geomorphology: 17 MCQs with Answers

Geomorphology - Geography
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भू-आकृति विज्ञान से संबंधित प्रश्न — स्थलरूप, प्लेट विवर्तनिकी, अपरदन एवं निक्षेपण प्रक्रियाएँ तथा पृथ्वी की आंतरिक संरचना।

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Q1. भारत की अधिकांश अध्यारोपित तथा पुनर्युवित नदियाँ कहाँ पाई जाती हैं?

Right Answer: प्रायद्वीपीय भारत


Explanation:

अध्यारोपित (Superimposed) नदी वह होती है जो अपनी मूल ऊपरी सतह पर अपवाह प्रतिरूप विकसित करने के पश्चात् अपरदन द्वारा नीचे की भिन्न संरचना पर आरोपित हो जाती है। पुनर्युवित (Rejuvenated) नदियाँ भूमि के उत्थान अथवा आधार तल में परिवर्तन के कारण पुनः तीव्र अपरदन करने लगती हैं। भारत का प्रायद्वीपीय भाग एक प्राचीन एवं दृढ़ भूखण्ड है, जहाँ बार-बार उत्थान तथा दीर्घकालीन अपरदन हुआ है। इसी कारण चंबल, दामोदर एवं सुवर्णरेखा जैसी अनेक प्रायद्वीपीय नदियाँ अध्यारोपित तथा पुनर्युवित प्रवाह के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
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Q2. हेयरपिन वलन (Hairpin Fold) कहाँ पाए जाते हैं?

Right Answer: हिमालय


Explanation:

हेयरपिन वलन (Hairpin Fold) अत्यंत तीव्र संपीड़न से बनने वाला वलन है, जिसमें शैल परतें बालों की पिन के समान अत्यधिक मुड़ जाती हैं तथा वलन की दोनों भुजाएँ लगभग समानांतर हो जाती हैं। हिमालय एक युवा वलित पर्वत है, जिसका निर्माण भारतीय एवं यूरेशियन प्लेटों के टकराव से हुआ। इस टकराव से उत्पन्न प्रबल संपीड़नात्मक बलों के कारण हिमालय की शैल परतों में इस प्रकार के जटिल एवं तीव्र वलन विकसित हुए। पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट तथा विन्ध्यन श्रेणी प्राचीन एवं अपेक्षाकृत स्थिर संरचनाएँ हैं।
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Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा सुमेलित नहीं है? (प्लेट – महासागर)

निम्नलिखित प्लेट एवं महासागर के सुमेलों पर विचार कीजिए:

  • जुआन डी फुका – उत्तरी अटलाण्टिक महासागर
  • कोकोस प्लेट – पूर्वी प्रशान्त महासागर
  • कैरोलिन प्लेट – पश्चिमी प्रशान्त महासागर
  • स्कोशिया प्लेट – दक्षिणी अटलाण्टिक महासागर

Right Answer: जुआन डी फुका – उत्तरी अटलाण्टिक महासागर


Explanation:

प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त के अनुसार पृथ्वी का स्थलमण्डल अनेक बड़ी एवं छोटी प्लेटों में विभाजित है। जुआन डी फुका एक लघु प्लेट है, जो उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट के समीप उत्तरी प्रशान्त महासागर में स्थित है, न कि उत्तरी अटलाण्टिक महासागर में — अतः यही सुमेल गलत है। कोकोस प्लेट मध्य अमेरिका के निकट पूर्वी प्रशान्त महासागर में, कैरोलिन प्लेट पश्चिमी प्रशान्त महासागर में तथा स्कोशिया प्लेट दक्षिण अमेरिका एवं अंटार्कटिका के बीच दक्षिणी अटलाण्टिक महासागर में स्थित है।
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Q4. कोबर के भूसन्नति पर्वत निर्माण सिद्धान्त के सम्बन्ध में सही कथन कौन-से हैं?

कोबर के सिद्धान्त से संबंधित निम्नलिखित सुमेलों पर विचार कीजिए:

  • A. भूसन्नति – क्रेटोजेन
  • B. किनारे की पर्वत श्रेणियाँ – रेण्डकेटन
  • C. मीडियन मास – अग्रप्रदेश

Right Answer: A और B


Explanation:

जर्मन भूवैज्ञानिक कोबर ने सन् 1921 में भूसन्नति (Geosyncline) संकल्पना के आधार पर पर्वत निर्माण की व्याख्या प्रस्तुत की। उनके अनुसार दो दृढ़ भूखण्डों, जिन्हें क्रेटोजेन कहा जाता है, के मध्य स्थित लंबे उथले सागर में अवसाद संचित होते रहते हैं। जब ये भूखण्ड एक-दूसरे की ओर खिसकते हैं तो अवसाद संपीड़ित होकर वलित हो जाते हैं और किनारों पर दो समानांतर पर्वत श्रेणियाँ बनती हैं, जिन्हें रेण्डकेटन कहते हैं। इनके मध्य का अपेक्षाकृत अविकृत भाग मीडियन मास कहलाता है, जिसे अग्रप्रदेश नहीं कहा जाता।
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Q5. 'सॉलिफ्लक्शन' का प्रमुख महत्त्व किस क्षेत्र में है?

Right Answer: शीत (Periglacial) क्षेत्र


Explanation:

सॉलिफ्लक्शन (Solifluction) मृदा प्रवाह की वह धीमी प्रक्रिया है, जिसमें जल से संतृप्त मृदा एवं अपक्षयित पदार्थ मंद ढाल पर भी नीचे की ओर सरकते रहते हैं। यह प्रक्रिया मुख्यतः परिहिमानी अर्थात् शीत (Periglacial) क्षेत्रों में महत्वपूर्ण होती है, जहाँ स्थायी तुषार भूमि (Permafrost) पाई जाती है। ग्रीष्म ऋतु में ऊपरी सक्रिय परत पिघल जाती है, किंतु नीचे की जमी हुई परत जल को रिसने नहीं देती, जिससे संतृप्त ऊपरी परत ढाल पर बहने लगती है। इससे सॉलिफ्लक्शन लोब तथा टैरेस जैसी विशिष्ट स्थलाकृतियाँ विकसित होती हैं।
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Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा भूगोलवेत्ता एकरूपतावाद (Uniformitarianism) के सिद्धान्त से सम्बन्धित नहीं है?

Right Answer: हम्बोल्ट


Explanation:

एकरूपतावाद (Uniformitarianism) का सिद्धान्त यह मानता है कि 'वर्तमान भूत की कुंजी है', अर्थात् आज पृथ्वी पर कार्यरत भूवैज्ञानिक प्रक्रियाएँ अतीत में भी उसी प्रकार कार्यशील थीं। इसका प्रतिपादन स्कॉटिश भूवैज्ञानिक जेम्स हट्टन ने सन् 1785 में किया था। जॉन प्लेफेयर ने इसे सरल एवं सुबोध भाषा में प्रस्तुत किया तथा चार्ल्स ल्येल ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'Principles of Geology' के माध्यम से इसे व्यापक वैज्ञानिक मान्यता दिलाई। अलेक्जेण्डर वॉन हम्बोल्ट आधुनिक भूगोल के जनक माने जाते हैं, किंतु उनका संबंध इस सिद्धान्त से नहीं है।
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Q7. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थलाकृति समुद्री लहरों के निक्षेपण से निर्मित होती है?

Right Answer: सबखा


Explanation:

सबखा (Sabkha) तटीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली निक्षेपण जनित स्थलाकृति है। यह प्रायः शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क तटों पर विकसित होने वाला लवणीय समतल मैदान है, जहाँ समुद्री जल के वाष्पीकरण से लवण तथा महीन अवसाद निक्षेपित होते रहते हैं। इसके विपरीत स्टैक, क्लिफ (भृगु) तथा तरंग-घर्षित वेदिका समुद्री तरंगों की अपरदन क्रिया से निर्मित होती हैं — तरंगें तट की चट्टानों को काटकर खड़ी भृगु तथा अवशिष्ट स्तंभ बना देती हैं। अतः दिए गए विकल्पों में केवल सबखा ही निक्षेपण की देन है।
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Q8. 'अण्डों की टोकरी स्थलाकृति' किसे कहा जाता है?

Right Answer: ड्रमलिन


Explanation:

ड्रमलिन (Drumlin) हिमानी निक्षेपण से बनने वाली उल्टी नाव अथवा अण्डाकार आकृति की पहाड़ी है, जो हिमानी द्वारा लाए गए गोलाश्म मृत्तिका (Boulder Clay) के जमाव से निर्मित होती है। जब अनेक ड्रमलिन एक साथ समूह में पाए जाते हैं तो दूर से देखने पर वे टोकरी में रखे अण्डों के समान प्रतीत होते हैं, इसीलिए इन्हें "अण्डों की टोकरी स्थलाकृति" (Basket of Eggs Topography) कहा जाता है। सर्क एवं रोश माउटोनी हिमानी अपरदन से तथा एस्कर हिमजल धाराओं के निक्षेपण से बनती है।
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Q9. 105° से 145° के मध्य भूकम्पीय छाया क्षेत्र किस तरंग के लिए पाया जाता है?

Right Answer: केवल P तरंगें


Explanation:

भूकम्पीय छाया क्षेत्र वह क्षेत्र है जहाँ भूकम्प मूल से चलने वाली तरंगें भूकम्पलेखी पर दर्ज नहीं होतीं। P-तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं तथा ठोस एवं तरल दोनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, किंतु बाह्य क्रोड में प्रवेश करते समय अपवर्तन के कारण वे 105° से 145° के मध्य के क्षेत्र में नहीं पहुँच पातीं — यही P-तरंगों का छाया क्षेत्र कहलाता है। S-तरंगें अनुप्रस्थ होने के कारण तरल बाह्य क्रोड से गुजर ही नहीं सकतीं, अतः उनका छाया क्षेत्र 105° से आगे का सम्पूर्ण भाग होता है।
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Q10. निम्नलिखित में से कौन-सी स्थलाकृति अपवाहन (Deflation) से निर्मित होती है?

Right Answer: ब्लो-आउट (वात-गर्त)


Explanation:

अपवाहन (Deflation) वायु द्वारा किया जाने वाला वह अपरदन कार्य है, जिसमें ढीली रेत, धूल तथा महीन कण उड़ाकर दूर ले जाए जाते हैं। इस प्रक्रिया से धरातल पर उथले गर्त बन जाते हैं, जिन्हें ब्लो-आउट अथवा वात-गर्त (Deflation Hollow) कहा जाता है। मशरूम चट्टान तथा ड्राइकैन्टर वायु के अपघर्षण (Abrasion) से बनती हैं, जिसमें उड़ते हुए रेतकण चट्टानों को रगड़कर विशिष्ट आकार प्रदान करते हैं। डेमोइसेलेस वर्षा जल के अपरदन से बनने वाले मृदा स्तंभ हैं। अतः केवल ब्लो-आउट ही अपवाहन की देन है।
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Q11. कार्स्ट स्थलाकृतियों में निम्नलिखित में से कौन-सी अपरदन से निर्मित नहीं है?

Right Answer: हैलिक्टाइट


Explanation:

कार्स्ट स्थलाकृतियाँ चूना-पत्थर क्षेत्रों में जल की घुलन क्रिया से विकसित होती हैं। लैपीज चूना-पत्थर की सतह पर बनने वाली नुकीली कटकों एवं खाँचों की संरचना है, अन्धी घाटी वह घाटी है जो अचानक समाप्त होकर नदी को भूमिगत कर देती है, तथा हम्स अपरदन के पश्चात् बचे हुए अवशिष्ट टीले हैं — ये सभी घुलन एवं अपरदन की देन हैं। इसके विपरीत हैलिक्टाइट गुफाओं में कैल्शियम कार्बोनेट के निक्षेपण से बनने वाली टेढ़ी-मेढ़ी संरचना है, अतः यह निक्षेपण जनित है।
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Q12. हिमनदीय भू-आकृतियों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और सही विकल्प चुनिए।

कथन 1: लटकती घाटियाँ प्रायः ऊँचे स्थानों पर मुख्य हिमनदीय घाटियों में खुलती हुई पाई जाती हैं।

कथन 2: ऐसी लटकती घाटियों के स्पर प्रायः त्रिकोणीय फलकों में विभाजित हो जाते हैं।

Right Answer: कथन 1 और कथन 2 दोनों सही हैं


Explanation:

हिमनद अपने विशाल भार और अपरदन शक्ति के कारण मुख्य घाटी को सहायक घाटियों की तुलना में कहीं अधिक गहरा काट देते हैं। परिणामस्वरूप सहायक घाटियाँ मुख्य घाटी के तल से काफी ऊँचाई पर खुलती हैं और इन्हें लटकती घाटियाँ कहा जाता है; इन्हीं से प्रायः सुंदर जलप्रपात गिरते हैं। हिमनद घाटी के किनारों पर आगे बढ़े हुए स्पर को भी काट देता है, जिससे उनके सिरे त्रिकोणीय फलकों में बदल जाते हैं, जिन्हें कटे हुए स्पर कहते हैं। अतः दोनों कथन सही हैं।
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Q13. निम्नलिखित में से किस प्रकार के भूस्खलन में फिसलने वाली सामग्री का पीछे की ओर घूमना शामिल होता है?

Right Answer: स्लम्प


Explanation:

स्लम्प एक विशेष प्रकार का भूस्खलन है जिसमें मिट्टी या शिथिल शैल का समूह एक अवतल अर्थात चम्मच जैसी वक्र सतह पर फिसलता है। इस वक्र सतह के कारण फिसलने वाला पिंड नीचे खिसकने के साथ-साथ पीछे की ओर घूम जाता है, जिससे उसका ऊपरी भाग ढाल की विपरीत दिशा में झुक जाता है। यही पश्चगामी घूर्णन स्लम्प की पहचान है। इसके विपरीत रॉकस्लाइड में सामग्री समतल सतह पर सरकती है, जबकि रॉक फॉल तथा डेब्रिस फॉल में पदार्थ स्वतंत्र रूप से गिरता है। अतः सही उत्तर स्लम्प है।
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Q14. किस प्रकार की भूवैज्ञानिक संरचना में गॉर्ज सबसे अधिक विकसित होते हैं?

Right Answer: कठोर चट्टानें


Explanation:

गॉर्ज अर्थात महाखड्ड एक गहरी और संकरी घाटी होती है, जिसकी दीवारें लगभग खड़ी होती हैं। ऐसी आकृति तब बनती है जब नदी कठोर चट्टानों वाले क्षेत्र में तेज़ी से नीचे की ओर कटाव करती है। कठोर चट्टानें पार्श्व कटाव का प्रतिरोध करती हैं, इसलिए घाटी चौड़ी नहीं हो पाती और केवल गहराई बढ़ती जाती है। नरम तलछट में किनारे शीघ्र ढह जाते हैं और चौड़ी घाटी बन जाती है। भारत में भागीरथी तथा सिंधु नदी के महाखड्ड इसके उदाहरण हैं। अतः सही उत्तर कठोर चट्टानें हैं।
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Q15. सही सुमेलित गुफा विशेषता और उसके गठन का चयन करें:

Right Answer: स्टैलेग्माइट - गुफा की छत से टपकते पानी से निर्मित


Explanation:

चूना-पत्थर की गुफाओं (Karst Caves) में बनने वाली संरचनाओं में स्टैलेक्टाइट (Stalactite) गुफा की छत से नीचे की ओर लटकती हुई संरचना है, जो छत से टपकते खनिज-युक्त पानी के वाष्पीकरण से बनती है, न कि तल से ऊपर बढ़ने वाली। इसके विपरीत स्टैलेग्माइट (Stalagmite) गुफा के तल पर छत से टपकते पानी के जमाव से नीचे से ऊपर की ओर बढ़ती है, इसलिए यह सुमेल सही है। स्तंभ (Pillar/Column) तब बनता है जब स्टैलेक्टाइट और स्टैलेग्माइट आपस में जुड़ जाते हैं, न कि केवल छत से लटकता है। इसलिए सही सुमेलित युग्म 'स्टैलेग्माइट - गुफा की छत से टपकते पानी से निर्मित' है, अतः विकल्प 2 सही है।
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Q16. प्राकृतिक तटबंध (Natural Levees) सामान्यतः निम्नलिखित में से किस वातावरण से जुड़े होते हैं?

Right Answer: बड़ी नदियों के बाढ़ के मैदान


Explanation:

प्राकृतिक तटबंध वे प्राकृतिक ऊँचे किनारे होते हैं जो बड़ी नदियों के बाढ़ के मैदानों में बार-बार बाढ़ आने के कारण बनते हैं। जब नदी में बाढ़ आती है तो जल अपने साथ लाई गई गाद और तलछट को नदी तट के निकट जमा करता है, जिससे समय के साथ ऊँचे प्राकृतिक तटबंध बन जाते हैं। यह प्रक्रिया शुष्क रेगिस्तान, हिमनद घाटियों या तटीय लैगूनों में सामान्यतः नहीं होती, क्योंकि इन क्षेत्रों में नदी की बाढ़ की प्रक्रिया प्रधान भूआकृतिक कारक नहीं है। अतः सही उत्तर विकल्प 2, बड़ी नदियों के बाढ़ के मैदान है।
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Q17. रेगिस्तानी क्षेत्रों में वायु-अपरदित भू-आकृतियों की विशेषताएँ क्या हैं?

1. पतले आधार और चौड़ी ऊपरी परत वाली मशरूम के आकार की चट्टानों का निर्माण
2. मेज की सतह जैसी सपाट शीर्ष वाली अवशिष्ट पहाड़ियों का विकास
3. पृथक आधार-स्तंभों के रूप में खड़े चट्टानी अवशेषों का उद्भव

Right Answer: 1, 2 और 3 सभी सही हैं


Explanation:

रेगिस्तानी क्षेत्रों में वायु अपरदन (Wind Erosion) कई विशिष्ट भू-आकृतियों का निर्माण करता है। मशरूम के आकार की चट्टानें (Mushroom Rocks) तब बनती हैं जब निचला भाग रेत के कणों की अधिक घर्षण क्रिया के कारण तेजी से क्षरित होता है, जिससे पतला आधार और चौड़ा शीर्ष बनता है। मेज के समान सपाट शीर्ष वाली पहाड़ियाँ (Mesas) और पृथक स्तंभाकार अवशेष (Buttes/Pedestal Rocks) भी वायु अपरदन की विशिष्ट उपज हैं। तीनों ही घटनाएँ रेगिस्तानी वायु-अपरदन प्रक्रिया की वास्तविक और सुपरिचित विशेषताएँ हैं। अतः सही उत्तर विकल्प 4, तीनों सही हैं।
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Published: 29 July 2026 | Last Updated: 19 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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