Geography - Geographical Thought: 3 MCQs with Answers
Geography - Geographical Thought
Geography- Geographical Thought
भौगोलिक चिंतन से संबंधित प्रश्न — प्रमुख भूगोलवेत्ता, उनकी विचारधाराएँ एवं मानव भूगोल की परिभाषाएँ।
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Q1. किस भूगोलवेत्ता ने गुरुत्वाकर्षण शक्ति को "बुद्धिमान शक्ति" तथा सौर्य ताप को "मूर्ख शक्ति" कहा?
Right Answer: ब्रून्ज
Explanation:
फ्रांसीसी भूगोलवेत्ता जीन ब्रून्ज (Jean Brunhes) संभववाद विचारधारा के प्रमुख समर्थकों में से थे तथा वे विडाल डी ला ब्लाश के शिष्य माने जाते हैं। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कृति 'Human Geography' में पृथ्वी पर कार्यरत शक्तियों की व्याख्या करते हुए गुरुत्वाकर्षण शक्ति को "बुद्धिमान शक्ति" कहा, क्योंकि यह निश्चित नियमों के अनुसार व्यवस्थित रूप से कार्य करती है। इसके विपरीत उन्होंने सौर्य ताप को "मूर्ख शक्ति" कहा, क्योंकि इसका वितरण एवं प्रभाव अनियमित तथा असमान रहता है। उन्होंने मानव भूगोल का व्यवस्थित वर्गीकरण भी प्रस्तुत किया।
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Q2. "मानव भूगोल मनुष्य का जीवविज्ञान है।" यह कथन किसका है?
Right Answer: एच. जे. फ्ल्यूर
Explanation:
ब्रिटिश भूगोलवेत्ता एच. जे. फ्ल्यूर (H. J. Fleure) ने मानव भूगोल को "मनुष्य का जीवविज्ञान" (Biology of Man) कहा। उनका मत था कि मानव भूगोल में मनुष्य का अध्ययन एक जैविक प्राणी के रूप में उसके पर्यावरण के संदर्भ में किया जाना चाहिए। उन्होंने मानव प्रजातियों, उनके प्रसार तथा पर्यावरण के साथ उनके अनुकूलन पर विशेष बल दिया और विश्व को मानवीय दृष्टि से विभिन्न प्रदेशों में विभाजित किया, जैसे प्रयास के प्रदेश, कठिनाई के प्रदेश तथा अधिक उत्पादन के प्रदेश। यह परिभाषा मानव भूगोल की जैविक संकल्पना को दर्शाती है।
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Q3. मानव भूगोल को मानव समाज तथा धरातल के बीच सम्बन्धों का संश्लेषित अध्ययन किसने कहा?
Right Answer: ब्लाश
Explanation:
विडाल डी ला ब्लाश फ्रांसीसी भूगोल के प्रवर्तक तथा संभववाद विचारधारा के जनक माने जाते हैं। उन्होंने मानव भूगोल को मानव समाज एवं धरातल के बीच पारस्परिक संबंधों का संश्लेषित अध्ययन बताया। उनका मत था कि प्रकृति मनुष्य को अनेक संभावनाएँ प्रदान करती है और मनुष्य अपनी बुद्धि, संस्कृति एवं तकनीक के आधार पर उनमें से चयन करता है — इसलिए वह पर्यावरण का दास नहीं, बल्कि एक सक्रिय भागीदार है। उन्होंने 'जीवन शैली' (Genre de Vie) की संकल्पना भी प्रस्तुत की, जो मानव भूगोल का केन्द्रीय विचार बनी।
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