Sociology - Indian Society and Social Structure: 14 MCQs with Answers
Sociology- Indian Society and Social Structure
Your Progress
0%Q11. वर्ष 1947 में निम्नलिखित में से कौन-से विश्वविद्यालय में भारत में समाजशास्त्र विभाग पठन हेतु नहीं था ?
Right Answer: मद्रास
Explanation:
भारत में समाजशास्त्र के औपचारिक अध्यापन का आरम्भ बीसवीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों में हुआ। कलकत्ता विश्वविद्यालय में 1917 से समाजशास्त्र पढ़ाया जाने लगा, बम्बई विश्वविद्यालय में 1919 में पैट्रिक गिडीज के नेतृत्व में समाजशास्त्र विभाग की स्थापना हुई और लखनऊ विश्वविद्यालय में 1921 में राधाकमल मुखर्जी ने विभाग आरम्भ किया, जहाँ आगे चलकर डी० पी० मुकर्जी एवं डी० एन० मजूमदार भी रहे। मद्रास विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग बहुत बाद में 1959 में स्थापित हुआ, इसलिए 1947 में वहाँ यह विषय पठन हेतु उपलब्ध नहीं था।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q12. निम्नलिखित सदस्यों में से किन्होंने संविधान सभा में जनजातीय लोगों के लिए ‘आदिवासी’ पारिभाषिक शब्द के प्रयोग पर बल दिया ?
Right Answer: जयपाल सिंह मुण्डा
Explanation:
जयपाल सिंह मुण्डा संविधान सभा में जनजातीय समुदायों के सर्वाधिक मुखर प्रतिनिधि थे। स्वयं मुण्डा समुदाय से आने वाले और ऑक्सफोर्ड से शिक्षित जयपाल सिंह 1928 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रहे। संविधान सभा में उन्होंने ‘जनजाति’ अथवा ‘आदिम जाति’ जैसे शब्दों के स्थान पर ‘आदिवासी’ शब्द के प्रयोग पर बल दिया, क्योंकि इसका अर्थ है मूल निवासी और यह इन समुदायों को गरिमा प्रदान करता है। उन्होंने स्वयं को ‘जंगली’ कहकर सभा को जनजातीय शोषण के इतिहास की याद दिलाई और उनके अधिकारों की पुरजोर वकालत की।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q13. घनश्याम शाह एवं अन्य ने ‘अनटचेबिलिटि इन रूरल इण्डिया’ में अस्पृश्यता की प्रघटना में तीन मुख्य पक्षों को सम्मिलित किया है, निम्नलिखित में से कौन-सा पक्ष इसमें उल्लेखित नहीं है ?
Right Answer: वंचन
Explanation:
घनश्याम शाह, हर्ष मंदर, सुखदेव थोरात, सतीश देशपांडे एवं अमिता बाविस्कर द्वारा किए गए इस व्यापक अध्ययन में ग्यारह राज्यों के पाँच सौ पैंसठ गाँवों का सर्वेक्षण हुआ। लेखकों ने अस्पृश्यता की प्रघटना को तीन मुख्य पक्षों में समझाया — बहिष्करण, जिसमें दलितों को मन्दिर, जलस्रोत तथा सार्वजनिक स्थलों से दूर रखा जाता है; अपमान एवं अधीनीकरण, जिसमें उन्हें प्रतिदिन के व्यवहार में हीन दर्शाया जाता है; तथा शोषण, जिसमें उनके श्रम का अनुचित लाभ उठाया जाता है। वंचन को उन्होंने पृथक पक्ष के रूप में नहीं गिनाया, यद्यपि वह इन तीनों का परिणाम है।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
Q14. डॉ० बी० आर० अम्बेडकर ने अपनी पुस्तक ‘द अनटचेबिल्स’ में ‘पराजित घुमन्तु’ (डिफीटेड नॉमेड्स) एवं ‘बिखरे हुए व्यक्तियों’ (स्ट्रे इन्डिविजुअल्स) जिन्हें संरक्षण एवं आवास की आवश्यकता थी की विवेचना करते हुए एक अवधारणा प्रयुक्त की है, जिसे कहा जाता है :
Right Answer: बिखरा मनुष्य (ब्रोकन मेन)
Explanation:
डॉ० बी० आर० अम्बेडकर ने 1948 में प्रकाशित अपनी कृति ‘द अनटचेबिल्स : हू वेयर दे एण्ड व्हाई दे बिकेम अनटचेबल्स’ में अस्पृश्यता की उत्पत्ति की मौलिक व्याख्या दी। उन्होंने ‘ब्रोकन मेन’ अर्थात् बिखरे मनुष्य की अवधारणा प्रस्तुत की। ये वे पराजित घुमन्तु कबीलों के बिखरे हुए व्यक्ति थे, जिन्होंने अपना समुदाय खो दिया था और जो संरक्षण एवं आवास की तलाश में बसे हुए गाँवों के बाहरी छोर पर रहने लगे। अम्बेडकर के अनुसार इन्हीं लोगों ने बौद्ध धर्म बनाए रखा तथा गोमांस भक्षण नहीं छोड़ा, इसी कारण ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने उन्हें अस्पृश्य घोषित कर दिया।
No suggestions yet — be the first.
Your email will not be published. Suggestions are reviewed before appearing.
0 Comments
Be the first to comment.
Leave a comment
Your email will not be published. Comments are reviewed before appearing.