Sociology - Indian Society and Social Structure: 14 MCQs with Answers
Sociology- Indian Society and Social Structure
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0%Q1. कैथलीन गफ द्वारा भारत में हुए किसान विद्रोह के वर्गीकरण हेतु प्रयुक्त आधारों में निम्नलिखित में से कौन-सा सम्मिलित नहीं है ?
Right Answer: परम्परागत-चमत्कारिक नेतृत्व
Explanation:
कैथलीन गफ ने भारत के किसान विद्रोहों का अध्ययन कर उन्हें पाँच प्रकारों में बाँटा — पुनर्स्थापनात्मक विद्रोह, धार्मिक आन्दोलन, सामाजिक डकैती, आतंकवादी प्रतिशोध तथा जनसामान्य का सामूहिक विद्रोह। इस वर्गीकरण के लिए उन्होंने तीन आधार अपनाए — विद्रोह के उद्देश्य, उसके पीछे की विचारधारा तथा संगठन की पद्धतियाँ। परम्परागत अथवा चमत्कारिक नेतृत्व को उन्होंने वर्गीकरण का आधार नहीं बनाया, यद्यपि कुछ आन्दोलनों में ऐसा नेतृत्व दिखाई अवश्य देता है। अतः यही विकल्प उनके आधारों में सम्मिलित नहीं है।
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Q2. ए० आर० देसाई के अनुसार भारतीय राष्ट्रवाद के विकास का पाँचवा चरण निम्नलिखित अवधि से जुड़ा है (सोशल बैकग्राउण्ड ऑफ इण्डियन नेशनलिज्म पुस्तक के आधार पर) :
Right Answer: वर्ष 1934 से 1939 तक
Explanation:
ए० आर० देसाई ने ‘सोशल बैकग्राउंड ऑफ इंडियन नेशनलिज्म’ में भारतीय राष्ट्रवाद के विकास को पाँच चरणों में विभाजित किया। प्रथम चरण 1885 से 1905 तक था, जिसमें आन्दोलन बुद्धिजीवी उच्च वर्ग तक सीमित रहा। द्वितीय चरण 1905 से 1918 तक शिक्षित मध्यम वर्ग के विस्तार का रहा। तृतीय चरण 1918 से 1934 तक गाँधीजी के नेतृत्व में जनआधार के विस्तार का था। पाँचवाँ चरण 1934 से 1939 तक का माना जाता है, जिसमें समाजवादी एवं साम्यवादी समूहों, किसान सभाओं तथा मजदूर संगठनों का उभार राष्ट्रीय आन्दोलन की मुख्य विशेषता बना।
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Q3. जी० एस० घूरिये के अनुसार भारत की हिन्दू जनसंख्या में छहः मुख्य भौतिक/शारीरिक (फिजिकल) प्रकार विद्यमान हैं। निम्नलिखित में से कौन-सी भौतिक/शारीरिक प्रकार घूरिये के मत से सम्बद्ध नहीं है ?
Right Answer: द कॉकेशॉयड
Explanation:
जी० एस० घूरिये ने ‘कास्ट एण्ड रेस इन इंडिया’ में भारत की हिन्दू जनसंख्या में छह प्रमुख भौतिक प्रकार बताए — इण्डो-आर्यन, प्री-द्रविड, द्रविड, पश्चिमी ब्रैकीसेफल, मंगोलॉयड तथा मंगोलो-द्रविड। उनका उद्देश्य यह दिखाना था कि जाति-व्यवस्था और प्रजातीय भिन्नता के बीच सम्बन्ध केवल उत्तर भारत में ही स्पष्ट है, सम्पूर्ण देश में नहीं। ‘कॉकेशॉयड’ एक व्यापक विश्वस्तरीय प्रजातीय श्रेणी है, जिसका प्रयोग घूरिये की इस भारतीय सूची में नहीं हुआ। अतः यही विकल्प उनके वर्गीकरण से सम्बद्ध नहीं है।
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Q4. ‘वास्तुशास्त्र’ में, एम० एस० ए० राव के अनुसार, प्रकार्यों के आधार पर नगरों के प्रकारों के मध्य विभेद बताये गये हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा प्रकार एवं सम्बद्ध प्रकार जो नगर से जुड़ा है, गलत है ?
Right Answer: एक ‘द्रोणमुख’ - एक धार्मिक महत्व का नगर।
Explanation:
प्राचीन भारतीय वास्तुशास्त्र तथा कौटिल्य के अर्थशास्त्र में नगरों को उनके प्रकार्य के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। एम० एस० ए० राव ने इसी वर्गीकरण की चर्चा की। पट्टन नदी अथवा समुद्र तट पर स्थित बड़ा व्यापारिक बन्दरगाह नगर था, खेता संचार सुविधाओं वाला छोटा चारदीवारी नगर था और सामान्य नगर किलेबन्द होकर देशीय व्यापार का केन्द्र था। द्रोणमुख वस्तुतः नदी के मुहाने पर बसा वह प्रशासनिक एवं व्यापारिक केन्द्र था जो लगभग चार सौ गाँवों की सेवा करता था, न कि धार्मिक महत्त्व का नगर। अतः यही कथन गलत है।
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Q5. ‘द रिमेम्बर्ड विलेज’ में एम० एन० श्रीनिवास ने रामपुरा गाँव में ‘श्रम के विनिमय’ हेतु प्रयुक्त होने वाले एक शब्द का उल्लेख किया है। निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द इस हेतु सही है ?
Right Answer: मुइ (Muyyi)
Explanation:
एम० एन० श्रीनिवास ने ‘द रिमेम्बर्ड विलेज’ में मैसूर के रामपुरा गाँव का सजीव वर्णन किया है। यह पुस्तक विशेष है, क्योंकि स्टैनफोर्ड में उनके क्षेत्र-नोट्स आग में जल जाने के बाद उन्होंने इसे केवल स्मृति के आधार पर लिखा। इसमें उन्होंने ‘मुइ’ नामक प्रथा का उल्लेख किया, जो किसानों के बीच श्रम के पारस्परिक विनिमय की व्यवस्था थी। इसके अन्तर्गत एक किसान दूसरे के खेत में बिना मजदूरी काम करता और बदले में उसे भी उतना ही श्रम वापस मिलता। यह प्रथा ग्रामीण समाज की पारस्परिकता एवं सहयोग की भावना को दर्शाती है।
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Q6. एक ऐतिहासिक प्रक्रिया के रूप में जटिल प्रकृति के भारतीय समाज के विकास का विवेचन टी० के० ओमन ने चार आधारभूतीय पक्षों के मिश्रण के अन्तर्गत किया है। निम्नलिखित में से कौन-सा पक्ष ओमन के विचारों का भाग नहीं है ?
Right Answer: आधुनिकीकरण
Explanation:
टी० के० ओमन ने भारतीय समाज की जटिलता को एक ऐतिहासिक प्रक्रिया के रूप में समझाते हुए इसे चार आधारभूत पक्षों का मिश्रण बताया — सामाजिक स्तरीकरण, जो जाति एवं वर्ग के रूप में प्रकट होता है; सांस्कृतिक विषमरूपता, जो भाषा, खानपान एवं रीति-रिवाजों की विविधता में दिखती है; धार्मिक बाहुल्यता, जो अनेक धर्मों एवं सम्प्रदायों के सहअस्तित्व से बनी है; तथा प्रादेशिक विविधता। आधुनिकीकरण इन पक्षों में सम्मिलित नहीं है, क्योंकि वह भारतीय समाज की संरचनात्मक विशेषता नहीं, बल्कि उस पर बाद में क्रियाशील हुई एक परिवर्तन-प्रक्रिया है।
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Q7. किसानों के सक्रियकरण के संदर्भ में यह किसका मत है — ‘एक गाँव दूसरे गाँव को सूचना देता था और देखते-देखते पूरा गाँव खाली हो जाता, स्त्री-पुरुष एवं बच्चे एकत्रित होकर सभा स्थल की ओर चल पड़ते’ ?
Right Answer: जवाहरलाल नेहरू
Explanation:
यह वर्णन जवाहरलाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा में किया है, जहाँ उन्होंने संयुक्त प्रान्त के अवध क्षेत्र में 1920-21 के किसान आन्दोलन के अपने प्रत्यक्ष अनुभव लिखे हैं। नेहरू ने बताया कि किसानों के पास न कोई औपचारिक संगठन था, न प्रचार-तंत्र, फिर भी सूचना एक गाँव से दूसरे गाँव तक अद्भुत गति से पहुँच जाती थी और हजारों लोग स्वतः सभा-स्थल पर एकत्र हो जाते थे। इस अनुभव ने नेहरू की राजनीतिक चेतना को गहराई से प्रभावित किया और उन्हें भारत की वास्तविक जनशक्ति ग्रामीण किसान में दिखाई देने लगी।
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Q8. यह किसका मत है, ‘भारत में चाहे कोई भी कारण हो या प्रक्रियाएँ, उत्तरदायित्व का सिद्धान्त (डॉक्ट्रीन) अधिकारों की अपेक्षा में अधिक विकसित हुआ है ?
Right Answer: डी० पी० मुकर्जी
Explanation:
डी० पी० मुकर्जी भारतीय समाजशास्त्र की परम्परावादी धारा के प्रमुख विचारक थे और उन्होंने भारतीय समाज को समझने के लिए उसकी अपनी परम्परा को केन्द्र में रखने पर बल दिया। उनका मत था कि भारत में चाहे जो भी कारण या प्रक्रियाएँ रही हों, उत्तरदायित्व अर्थात् कर्तव्य का सिद्धान्त अधिकारों की तुलना में कहीं अधिक विकसित हुआ। भारतीय परम्परा में धर्म की अवधारणा व्यक्ति के कर्तव्यों को परिभाषित करती है, जबकि पाश्चात्य आधुनिकता व्यक्ति के अधिकारों को प्राथमिकता देती है। उन्होंने स्वयं को ‘मार्क्सोलॉजिस्ट’ कहा और परम्परा एवं आधुनिकता के संवाद पर बल दिया।
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Q9. निम्नलिखित मतों (स्टेटमेण्ट्स) में से कौन-सा जाति एवं जनजाति के मुख्य (बेसिक) अन्तर को व्यक्त करता है ?
Right Answer: जाति संस्तरणमूलक है जबकि जनजाति स्वायत्तशासी है।
Explanation:
जाति एवं जनजाति के बीच मूल अन्तर संस्तरण का है। जाति व्यवस्था अनिवार्यतः संस्तरणमूलक है, जिसमें प्रत्येक जाति का स्थान ऊँच-नीच के क्रम में निश्चित रहता है और शुद्धता-अशुद्धता की धारणा उस क्रम को बनाए रखती है। इसके विपरीत जनजाति सामान्यतः स्वायत्तशासी एवं समतामूलक इकाई होती है, जिसका अपना भू-क्षेत्र, अपनी भाषा तथा अपनी पंचायत होती है और वह किसी बृहत्तर संस्तरण का अंग नहीं होती। शेष विकल्प भ्रामक हैं, क्योंकि जनजातीय सदस्यता भी जन्म से ही निर्धारित होती है और जनजातियों के अपने धार्मिक विश्वास भी होते हैं।
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Q10. समाजशास्त्रियों के निम्नलिखित समुच्चयों में से किस समुच्चय ने जातीय गतिशीलता की संरचनात्मक प्रक्रिया के विश्लेषण में ‘संदर्भ समूह’ की अवधारणा प्रयुक्त की है ?
Right Answer: वाई० बी० दामले एवं ओ० एम० लिंच
Explanation:
संदर्भ समूह की अवधारणा मूलतः हरबर्ट हाइमन ने दी और रॉबर्ट मर्टन ने इसे विकसित किया। इसका आशय उस समूह से है जिसके मानकों एवं जीवन-शैली को व्यक्ति अपने मूल्यांकन तथा अनुकरण का आधार बनाता है। भारत में वाई० बी० दामले तथा ओ० एम० लिंच ने इसी अवधारणा का प्रयोग जातीय गतिशीलता की संरचनात्मक प्रक्रिया के विश्लेषण में किया। उन्होंने दिखाया कि निम्न जातियाँ उच्च जातियों को संदर्भ समूह मानकर उनकी रीतियाँ अपनाती हैं और सामाजिक प्रस्थिति ऊँची करने का प्रयास करती हैं। यह प्रक्रिया श्रीनिवास के संस्कृतीकरण से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है।
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