Sociology - Classical Sociological Thinkers: 13 MCQs with Answers

Classical Sociological Thinkers - Sociology
Sociology - Classical Sociological Thinkers

Sociology- Classical Sociological Thinkers

कार्ल मार्क्स, मैक्स वेबर, एमील दुर्खीम, ऑगस्ट कॉम्टे तथा हरबर्ट स्पेन्सर के सिद्धान्तों पर बहुविकल्पीय प्रश्न।

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Q11. निम्नलिखित में से कौन वित्तीय पूँजी की विशेषता नहीं है ?

Right Answer: एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों का ह्रास

वित्तीय पूँजी की अवधारणा रुडोल्फ हिल्फर्डिंग ने दी और लेनिन ने साम्राज्यवाद के विश्लेषण में इसे आगे बढ़ाया। इसका अर्थ है बैंक पूँजी तथा औद्योगिक पूँजी का विलय, जिसमें बैंक पूँजी पर नियन्त्रण रखते हैं और उद्योगपति उसे उत्पादन में नियोजित करते हैं। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं — उत्पादन का केन्द्रीयकरण, बड़े एकाधिकारों एवं ट्रस्टों का निर्माण तथा पूँजी का निर्यात। स्पष्ट है कि वित्तीय पूँजी एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों को बढ़ाती है, घटाती नहीं। इसलिए एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों का ह्रास इसकी विशेषता नहीं है।

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Q12. निम्नलिखित में से संयोजन के स्तर (डिग्री ऑफ कम्पोजीशन) के आधार पर समाज के प्रकार में कौन-सा हरबर्ट स्पेन्सर ने नहीं उल्लेखित किया है ?

Right Answer: जटिल समाज

हरबर्ट स्पेन्सर ने उद्विकासीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संयोजन के स्तर अर्थात् संरचनात्मक जटिलता के आधार पर समाजों का वर्गीकरण किया। उनके अनुसार सरल समाज वह है जो किसी अन्य समाज का अंग नहीं और जिसमें नेतृत्व या तो अनुपस्थित रहता है या अस्थायी। मिश्रित समाज कई सरल समाजों के संयोजन से बनता है और उसमें स्थायी नेतृत्व उभरता है। द्वि-मिश्रित समाज कई मिश्रित समाजों के मिलने से बनता है तथा त्रि-मिश्रित समाज आधुनिक राष्ट्र-राज्य जैसी विशाल इकाई है। ‘जटिल समाज’ को उन्होंने इस विशिष्ट श्रेणी-क्रम में नहीं रखा।

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Q13. उद्विकास की सार्वभौमिक प्रक्रिया के रूप में सामाजिक परिवर्तन की अवधारणा का विवेचन करते हुए हरबर्ट स्पेन्सर किस वर्गीकरण का उल्लेख करते हैं ?

Right Answer: सैन्य समाज एवं औद्योगिक समाज

हरबर्ट स्पेन्सर ने सामाजिक परिवर्तन को उद्विकास की सार्वभौमिक प्रक्रिया माना, जिसमें समाज सरल एवं समरूप अवस्था से जटिल एवं विषमरूप अवस्था की ओर बढ़ता है। आन्तरिक नियमन के आधार पर उन्होंने समाज के दो प्रकार बताए। सैन्य समाज में युद्ध एवं प्रतिरक्षा प्रधान रहते हैं, केन्द्रीकृत अनिवार्य सहयोग होता है, व्यक्ति राज्य के अधीन रहता है और अनुशासन कठोर होता है। औद्योगिक समाज में उत्पादन एवं विनिमय प्रधान हो जाते हैं, सहयोग स्वैच्छिक एवं संविदात्मक होता है, व्यक्ति की स्वतंत्रता बढ़ती है और राज्य का कार्यक्षेत्र सीमित रह जाता है।

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Published: 03 August 2026 | Last Updated: 03 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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