Sociology - Classical Sociological Thinkers: 13 MCQs with Answers

Classical Sociological Thinkers - Sociology
Sociology - Classical Sociological Thinkers

Sociology- Classical Sociological Thinkers

कार्ल मार्क्स, मैक्स वेबर, एमील दुर्खीम, ऑगस्ट कॉम्टे तथा हरबर्ट स्पेन्सर के सिद्धान्तों पर बहुविकल्पीय प्रश्न।

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Q1. निम्नलिखित में से किन दो पक्षों की चर्चा मैक्स वेबर के द्वारा की गयी है ? जिनके माध्यम से हमारी समझ से सम्बद्ध निर्णय पर्याप्तता के रूप में प्रस्तुत होता है ?

Right Answer: कारण के स्तर पर पर्याप्तता एवं अर्थ के स्तर पर पर्याप्तता

मैक्स वेबर ने सामाजिक क्रिया की व्याख्या को वैज्ञानिक बनाने हेतु दो कसौटियाँ दीं। अर्थ के स्तर पर पर्याप्तता का तात्पर्य है कि क्रिया के अंगों का पारस्परिक सम्बन्ध हमारी प्रचलित अर्थ-व्यवस्था के अनुसार बोधगम्य एवं संगत प्रतीत हो। कारण के स्तर पर पर्याप्तता का तात्पर्य है कि अनुभवजन्य आँकड़ों के आधार पर यह सम्भाव्यता सिद्ध हो कि अमुक घटना के बाद अमुक परिणाम प्रायः होता ही है। वेबर के अनुसार सन्तोषजनक समाजशास्त्रीय व्याख्या वही है जो दोनों कसौटियों पर एक साथ खरी उतरे।

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Q2. डेरिक सायर के अनुसार वर्तमान दिनों का पूँजीवाद छः स्थितियों पर निर्धारित है (प्रीडिकेटेड)। निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति गलत है ?

Right Answer: पारम्परिक संस्कृतियों का आर्थिक जीवन पर प्रभुत्व

डेरिक सायर ने वेबर की व्याख्या के आधार पर आधुनिक पूँजीवाद की छह पूर्वशर्तें बताईं — निजी सम्पत्ति पर आधारित श्रम विभाजन, बाजार की स्वतंत्रता, तार्किक अर्थात् यंत्रीकृत प्रौद्योगिकी, गणना योग्य विधि, स्वतंत्र श्रम तथा आर्थिक जीवन का वाणिज्यीकरण। इन सभी का सार यह है कि आर्थिक व्यवहार परम्परा के स्थान पर तार्किक गणना से संचालित हो। इसलिए पारम्परिक संस्कृतियों का आर्थिक जीवन पर प्रभुत्व पूँजीवाद की शर्त नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी बाधा है, और यही कथन गलत है।

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Q3. मैक्स वेबर के मतानुसार वर्ग के विपरीत प्रस्थिति समूह है :

Right Answer: सामान्यतः समुदाय

मैक्स वेबर ने स्तरीकरण के तीन आयाम बताए — वर्ग, प्रस्थिति तथा दल। उनके अनुसार वर्ग विशुद्ध रूप से आर्थिक आधार पर बनता है और यह बाजार में व्यक्ति की स्थिति तथा जीवन-अवसरों से निर्धारित होता है। वर्ग के सदस्य प्रायः एक-दूसरे को जानते तक नहीं, इसलिए वेबर ने स्पष्ट कहा कि वर्ग समुदाय नहीं होते। इसके विपरीत प्रस्थिति समूह सामाजिक सम्मान अथवा प्रतिष्ठा पर आधारित होते हैं, उनकी एक विशिष्ट जीवन-शैली होती है, वे विवाह एवं सहभोज पर प्रतिबन्ध लगाते हैं और सदस्यों में अपनेपन की चेतना रहती है। इसीलिए वे सामान्यतः समुदाय होते हैं।

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Q4. कार्ल मार्क्स के अनुसार निम्नलिखित में से पूँजीवादी उत्पादन का कौन-सा केन्द्रीय (कार्डिनल) तथ्य नहीं है ?

Right Answer: वर्ग केन्द्रित स्थानीय उत्पादन का विकास

कार्ल मार्क्स ने पूँजीवादी उत्पादन के तीन केन्द्रीय तथ्य बताए। पहला, उत्पादन के साधनों का कुछ ही हाथों में केन्द्रीयकरण, जिससे बहुसंख्यक श्रमिक साधनविहीन होकर केवल श्रमशक्ति बेचने को विवश हो जाते हैं। दूसरा, श्रम का संगठन स्वयं में सामाजिक श्रम बन जाना, अर्थात् उत्पादन सहयोग, श्रम विभाजन तथा मशीन के संयोजन से सामूहिक रूप में होना। तीसरा, विश्व बाजार का निर्माण, जो पूँजीवाद को राष्ट्रीय सीमाओं से परे ले जाता है। वर्ग केन्द्रित स्थानीय उत्पादन का विकास इसमें सम्मिलित नहीं, क्योंकि पूँजीवाद स्थानीय नहीं, विश्वव्यापी प्रवृत्ति रखता है।

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Q5. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से यह किसका वक्तव्य है : ‘समाजशास्त्र अभी भी व्यवस्था-निर्माण एवं दार्शनिक समन्वय के चरण में है, सामाजिक क्षेत्र के एक छोटे से हिस्से पर रोशनी डालने के प्रयास के बजाए यह मेधा युक्त सामान्यताओं को वरीयता देती है’ ?

Right Answer: एमील दुर्खीम

यह कथन एमील दुर्खीम का है, जो उन्होंने ‘द रूल्स ऑफ सोशियोलॉजिकल मेथड’ में समाजशास्त्र की तत्कालीन दशा पर टिप्पणी करते हुए कहा। उनका आशय था कि कॉम्टे तथा स्पेन्सर के बाद भी समाजशास्त्र विशाल दार्शनिक व्यवस्थाएँ गढ़ने में लगा रहा और सम्पूर्ण समाज के बारे में आकर्षक किन्तु अप्रमाणित सामान्यीकरण करता रहा। दुर्खीम चाहते थे कि समाजशास्त्री विशाल सिद्धान्तों के बजाय सीमित एवं स्पष्ट रूप से परिभाषित समस्याओं का अनुभवजन्य अध्ययन करें। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप उन्होंने आत्महत्या जैसे विशिष्ट विषय पर सांख्यिकीय आधार पर शोध किया।

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Q6. कार्ल मार्क्स के किस साहित्य में यह मत (स्टेटमेण्ट) व्यक्त हुआ है, ‘पुराने भौतिकवाद का नज़रिया नागरिकीय समाज है, नये का नज़रिया मानव समाज अथवा सामाजिक मानवता है’ ?

Right Answer: थीसिज ऑन फायरबाख

यह कथन कार्ल मार्क्स की ‘थीसिज ऑन फायरबाख’ की दसवीं थीसिस का है, जिसे उन्होंने 1845 में लिखा और बाद में एंगेल्स ने प्रकाशित किया। ग्यारह संक्षिप्त थीसिस वाली यह रचना फायरबाख के चिन्तनपरक भौतिकवाद की आलोचना करती है। मार्क्स का तर्क है कि पुराना भौतिकवाद समाज को स्वार्थी व्यक्तियों के समुच्चय अर्थात् नागरिकीय समाज के रूप में देखता है, जबकि नया भौतिकवाद मानव समाज अथवा सामाजिक मानवता के दृष्टिकोण से सोचता है। इसी रचना की अन्तिम थीसिस में उनका प्रसिद्ध वाक्य है कि दार्शनिकों ने संसार की व्याख्या ही की है, प्रश्न उसे बदलने का है।

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Q7. निम्नलिखित में से कौन-सी अभिधारणा थॉमस रॉबर्ट माल्थस के जनसंख्या सिद्धान्त का हिस्सा नहीं है ?

Right Answer: लालसा (पैशन) पुनरोत्पादन (रीप्रोडक्शन) की शक्ति नहीं है।

थॉमस रॉबर्ट माल्थस ने 1798 के अपने प्रसिद्ध निबन्ध में जनसंख्या सिद्धान्त दो आधारभूत अभिधारणाओं पर खड़ा किया — पहली, भोजन मानव के अस्तित्व की अनिवार्य शर्त है; और दूसरी, स्त्री-पुरुष के बीच की लालसा आवश्यक है तथा लगभग अपनी वर्तमान अवस्था में बनी रहेगी। उन्होंने यह भी माना कि धरती निर्वाह-सामग्री उत्पन्न करती है, किन्तु उसकी शक्ति सीमित है। इन्हीं से उनका निष्कर्ष निकला कि जनसंख्या गुणोत्तर श्रेणी में और खाद्य उत्पादन समान्तर श्रेणी में बढ़ता है। यह कहना कि लालसा पुनरोत्पादन की शक्ति नहीं है, उनकी अभिधारणा के विपरीत है।

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Q8. एमील दुर्खीम के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता आधुनिक (विकसित, जटिल) समाज से जुड़ी है ?

Right Answer: सहयोगात्मक अन्तःनिर्भरता

एमील दुर्खीम ने ‘द डिवीजन ऑफ लेबर इन सोसायटी’ में एकता के दो प्रकार बताए। सरल एवं परम्परागत समाजों में यांत्रिक एकता होती है, जो समानता, प्रबल सामान्य चेतना, श्रम के सरल विभाजन तथा दमनकारी कानून पर टिकी रहती है। आधुनिक, विकसित एवं जटिल समाजों में सावयवी एकता पाई जाती है, जो श्रम के जटिल विभाजन से उत्पन्न होती है। इसमें लोग एक-दूसरे से भिन्न होते हैं, किन्तु इसी भिन्नता के कारण परस्पर निर्भर रहते हैं और यही सहयोगात्मक अन्तःनिर्भरता समाज को जोड़े रखती है। यहाँ कानून भी दमनकारी नहीं, बल्कि क्षतिपूरक हो जाता है।

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Q9. कार्ल मार्क्स के मत में निम्नलिखित में से कौन-सा वर्ग ‘संक्रमणकालीन’ वर्ग के रूप में भी जाना जाता है ?

Right Answer: पैटि बुर्जुआ

कार्ल मार्क्स ने पूँजीवादी समाज में दो मुख्य वर्ग बताए — उत्पादन के साधनों के स्वामी बुर्जुआ तथा केवल श्रमशक्ति बेचने वाले प्रोलिटेरिएट। इनके बीच पैटि बुर्जुआ अर्थात् लघु बुर्जुआ वर्ग आता है, जिसमें छोटे दुकानदार, कारीगर तथा स्वतंत्र किसान सम्मिलित हैं। यह वर्ग उत्पादन के साधनों का स्वामी भी है और स्वयं श्रम भी करता है, इसीलिए इसे संक्रमणकालीन वर्ग कहा गया। मार्क्स के अनुसार पूँजी के केन्द्रीयकरण एवं प्रतिस्पर्धा के दबाव में यह वर्ग क्रमशः विघटित होकर प्रोलिटेरिएट में मिल जाएगा। दास एवं सर्फ पूर्ववर्ती उत्पादन पद्धतियों के वर्ग हैं।

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Q10. यह किनका मत है, ‘अन्य किसी भी विज्ञान से अधिक, समाजशास्त्र, यह मेरा विश्वास है, ने दार्शनिक प्रश्नों के नवीनीकरण को प्रस्तुत करने में योगदान किया है’ ?

Right Answer: एमील दुर्खीम

यह कथन एमील दुर्खीम का है। उनका विश्वास था कि समाजशास्त्र ने दर्शन के अनेक चिरन्तन प्रश्नों को नए सिरे से उठाने और उन्हें अनुभवजन्य आधार देने में अन्य किसी विज्ञान से अधिक योगदान किया है। नैतिकता, धर्म, ज्ञान की श्रेणियाँ तथा व्यक्ति एवं समाज का सम्बन्ध — ये सभी पहले विशुद्ध दार्शनिक चिन्तन के विषय थे। दुर्खीम ने ‘द एलीमेंट्री फॉर्म्स ऑफ रिलीजियस लाइफ’ में दिखाया कि समय, स्थान एवं कारणता जैसी मूल श्रेणियाँ भी सामाजिक उद्गम रखती हैं। इस प्रकार उन्होंने दर्शन के प्रश्नों को समाजशास्त्रीय अनुसंधान का विषय बना दिया।

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Published: 03 August 2026 | Last Updated: 03 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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