History: 201 MCQs with Answers
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इतिहास से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न — प्राचीन, मध्यकालीन, आधुनिक भारत तथा विश्व इतिहास।
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Q161. निम्नलिखित में से किस शासक के ग्रामीण प्रशासन का विवरण उत्तरमेरूर अभिलेख में मिलता है ?
Right Answer: परान्तक प्रथम
Explanation:
उत्तरमेरूर अभिलेख चोल शासक परान्तक प्रथम के काल का है और यह तमिलनाडु के काँचीपुरम जिले में स्थित वैकुण्ठ पेरुमाल मन्दिर की दीवारों पर उत्कीर्ण है। यह चोलकालीन ग्रामीण स्वशासन का सर्वाधिक विस्तृत साक्ष्य प्रस्तुत करता है। इसमें ‘सभा’ नामक ग्राम-संस्था के निर्माण की विधि, वार्ड अर्थात् ‘कुडुम्बु’ के आधार पर सदस्यों के चयन, ‘कुडवोलै’ अर्थात् घड़े में से पर्ची निकालकर चुनाव करने की प्रणाली, सदस्यों की योग्यताएँ तथा अयोग्यताएँ और विभिन्न समितियों के कार्य विस्तार से वर्णित हैं।
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Q162. निम्नलिखित युग्मों में से कौन - सा युग्म सही सुमेलित नहीं है ? महाजनपद राजधानी
Right Answer: चेदि - काम्पिल्य
Explanation:
बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय में ईसा पूर्व छठी शताब्दी के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है। इनमें शूरसेन की राजधानी मथुरा, पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र तथा काम्पिल्य और अंग की राजधानी चम्पा थी। चेदि महाजनपद की राजधानी शुक्तिमती अथवा सोत्थिवती थी, जो वर्तमान बुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्थित मानी जाती है। काम्पिल्य वस्तुतः दक्षिण पांचाल की राजधानी थी, चेदि की नहीं। अतः चेदि को काम्पिल्य से जोड़ना गलत है और यही असंगत युग्म है। महाभारत में चेदि नरेश शिशुपाल का उल्लेख मिलता है, जो श्रीकृष्ण का प्रतिद्वन्द्वी था। इन सोलह महाजनपदों में मगध, कोसल, वत्स तथा अवन्ति सर्वाधिक शक्तिशाली सिद्ध हुए।
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Q163. निम्न में से कहाँ शेख हुसैनी गैसुदराज ने खानक़ाह स्थापित की थी ?
Right Answer: गुलबर्गा
Explanation:
शेख सैयद मुहम्मद हुसैनी गैसुदराज चिश्ती सिलसिले के प्रसिद्ध सूफी सन्त थे और शेख नसीरुद्दीन चिराग-ए-दिल्ली के शिष्य थे। तैमूर के आक्रमण के बाद दिल्ली छोड़कर वे दक्षिण भारत आए और बहमनी सुल्तान फिरोजशाह बहमनी के काल में गुलबर्गा में बस गए, जहाँ उन्होंने अपनी खानकाह स्थापित की। इससे दक्षिण भारत में चिश्ती परम्परा का विस्तार हुआ। वे विपुल लेखन के लिए भी जाने जाते हैं और उन्हें दक्खिनी उर्दू गद्य के आरम्भिक लेखकों में गिना जाता है। गुलबर्गा स्थित उनकी दरगाह आज भी प्रमुख तीर्थस्थल है।
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Q164. मध्यपाषाणकालीन स्थल ‘सराय नाहर राय’ स्थित है :
Right Answer: उत्तर प्रदेश में
Explanation:
सराय नाहर राय उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित एक महत्त्वपूर्ण मध्यपाषाणकालीन स्थल है, जिसका उत्खनन जी० आर० शर्मा ने करवाया। यहाँ से लघु पाषाण उपकरण अर्थात् माइक्रोलिथ, मानव कंकाल, पशु-अस्थियाँ तथा अग्निकुण्ड प्राप्त हुए हैं। यहाँ मिली सामूहिक शवाधान की व्यवस्था तथा एक कंकाल की पसली में धँसा हुआ अस्थि-बाणाग्र इस काल में हिंसक संघर्ष का प्रमाण देता है। इसी क्षेत्र के महदहा तथा दमदमा भी प्रसिद्ध मध्यपाषाणकालीन स्थल हैं। राजस्थान का बागोर तथा मध्य प्रदेश का भीमबेटका भी इसी काल से जुड़े हैं।
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Q165. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए :
A. शुंग वंश
B. मौर्य वंश
C. सातवाहन वंश
D. हर्यक वंश
Right Answer: D, B, A, C
Explanation:
इन चारों राजवंशों का सही कालक्रम इस प्रकार है। हर्यक वंश मगध का प्राचीनतम प्रमुख राजवंश था, जिसकी स्थापना बिम्बिसार ने ईसा पूर्व छठी शताब्दी में की और अजातशत्रु इसका प्रतापी शासक रहा। मौर्य वंश की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 ईसा पूर्व में की और अशोक के काल में यह अपने चरम पर पहुँचा। शुंग वंश की नींव 185 ईसा पूर्व में पुष्यमित्र शुंग ने अन्तिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या करके रखी। सातवाहन वंश दक्षिण भारत में लगभग प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व से उभरा, जिसका महान शासक गौतमीपुत्र सातकर्णी था।
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Q166. निम्नलिखित में से कौन - सा यजुर्वेद का ब्राह्मण ग्रन्थ है ?
Right Answer: शतपथ
Explanation:
प्रत्येक वेद के साथ ब्राह्मण ग्रन्थ जुड़े हैं, जो यज्ञों की विधि तथा उनके अर्थ की व्याख्या करते हैं। शतपथ ब्राह्मण यजुर्वेद, विशेषकर शुक्ल यजुर्वेद, से सम्बद्ध है और यह सभी ब्राह्मण ग्रन्थों में सबसे विस्तृत एवं महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इसमें सौ अध्याय होने के कारण ही इसका नाम शतपथ पड़ा। इसी में मनु एवं प्रलय की प्रसिद्ध कथा तथा विदेह माधव के पूर्व की ओर प्रसार का वर्णन मिलता है। ऐतरेय एवं कौषीतकि ऋग्वेद से, गोपथ अथर्ववेद से तथा पंचविंश एवं जैमिनीय सामवेद से जुड़े ब्राह्मण ग्रन्थ हैं।
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Q167. निम्नलिखित में से किस सल्तनत शासक ने राजस्व का वार्षिक अनुमान करवाया था ?
Right Answer: फिरोजशाह तुगलक
Explanation:
सल्तनतकालीन शासकों में फिरोजशाह तुगलक ने राजस्व का वार्षिक अनुमान करवाया। उसने ख्वाजा हिसामुद्दीन को यह कार्य सौंपा, जिसने छह वर्ष तक सर्वेक्षण कर साम्राज्य की वार्षिक आय लगभग छह करोड़ पचहत्तर लाख टंका आँकी। यह अनुमान एक बार निश्चित होने के बाद स्थायी मान लिया गया और प्रतिवर्ष नई पैमाइश नहीं की गई, जिससे कृषकों को स्थिरता मिली। फिरोज ने अनेक अनुचित कर हटाए तथा केवल शरीयत-सम्मत चार कर रखे, सिंचाई हेतु नहरें बनवाईं और उन पर हक्क-ए-शर्ब नामक कर लगाया। अलाउद्दीन खलजी ने भूमि की वास्तविक पैमाइश पर आधारित व्यवस्था चलाई थी।
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Q168. ‘एम्फोरा’ का सम्बन्ध था :
Right Answer: मृदभांड से
Explanation:
एम्फोरा एक विशिष्ट प्रकार का मृद्भाण्ड है, जिसकी पहचान लम्बी संकरी गर्दन, अण्डाकार शरीर तथा दोनों ओर लगे दो हत्थों से होती है। भूमध्यसागरीय क्षेत्र में इसका उपयोग शराब, जैतून का तेल तथा अन्य तरल पदार्थों के भण्डारण एवं समुद्री परिवहन के लिए किया जाता था। भारत में तमिलनाडु के अरिकामेडु से रोमन एम्फोरा के अनेक टुकड़े मिले हैं, जो संगमकाल में भारत तथा रोमन साम्राज्य के बीच सक्रिय व्यापारिक सम्बन्धों का ठोस पुरातात्त्विक प्रमाण हैं। ऐसे ही अवशेष कोल्हापुर तथा नेवासा से भी प्राप्त हुए हैं।
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Q169. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए :
A. फर्रुखसियर
B. बहादुर शाह प्रथम
C. जहाँदर शाह
D. मुहम्मद शाह
Right Answer: B, C, A, D
Explanation:
औरंगजेब की मृत्यु 1707 में हुई, जिसके बाद उत्तरकालीन मुगलों का दौर आरम्भ होता है। बहादुर शाह प्रथम 1707 से 1712 तक शासक रहा, जिसे इतिहासकार खफी खाँ ने ‘शाह-ए-बेखबर’ कहा। उसके बाद जहाँदर शाह 1712 से 1713 तक रहा, जो जुल्फिकार खाँ की सहायता से गद्दी पर बैठा। फिर फर्रुखसियर 1713 से 1719 तक शासक रहा, जिसे सैयद बन्धुओं ने बैठाया और अन्ततः उन्होंने ही उसकी हत्या कर दी; उसी ने 1717 में अंग्रेजों को प्रसिद्ध फरमान दिया। इसके बाद मुहम्मद शाह ‘रंगीला’ 1719 से 1748 तक शासन करता रहा, जिसके काल में नादिरशाह का आक्रमण हुआ।
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Q170. महात्मा बुद्ध की सुल्तानगंज की प्रसिद्ध मूर्ति निम्न में से किससे निर्मित थी ?
Right Answer: ताम्र से
Explanation:
सुल्तानगंज की प्रसिद्ध बुद्ध प्रतिमा बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज से 1861 में रेल-निर्माण के दौरान प्राप्त हुई। यह ताम्र अर्थात् ताँबे से निर्मित है, लगभग सवा दो मीटर ऊँची तथा पाँच सौ किलोग्राम से अधिक भारी है और गुप्तकालीन धातु-ढलाई कला का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है। प्रतिमा में बुद्ध खड़ी मुद्रा में अभय मुद्रा प्रदर्शित करते हैं और उनका पारदर्शी प्रतीत होता चीवर सारनाथ शैली की विशेषता दर्शाता है। यह मूर्ति वर्तमान में इंग्लैण्ड के बर्मिंघम संग्रहालय एवं कला दीर्घा में रखी है।
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Q171. निम्नांकित अधिकारियों में से कौन - सा अधिकारी अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियन्त्रण नीति से सम्बन्धित नहीं है ?
Right Answer: मुस्तौफी - ए - मुमालिक
Explanation:
अलाउद्दीन खलजी की बाजार नियन्त्रण नीति सल्तनतकालीन आर्थिक प्रशासन की सर्वाधिक चर्चित व्यवस्था थी। इसके संचालन हेतु दीवान-ए-रियासत नामक विभाग बना, जिसका प्रमुख अधिकारी मलिक याकूब था। शहना-ए-मण्डी बाजार का अधीक्षक होता था और मूल्य-नियंत्रण लागू करवाता था, जबकि बरीद-ए-मण्डी तथा मुनहियान गुप्तचर के रूप में बाजार की दैनिक सूचनाएँ सीधे सुल्तान तक पहुँचाते थे। मुस्तौफी-ए-मुमालिक साम्राज्य का महालेखा परीक्षक था, जिसका सम्बन्ध वित्तीय लेखा-परीक्षण से था, बाजार नियन्त्रण से नहीं। अलाउद्दीन ने अनाज, वस्त्र, दास तथा घोड़ों तक के मूल्य निश्चित किए और इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कम वेतन पर विशाल स्थायी सेना रखना था, जैसा जियाउद्दीन बरनी ने लिखा है।
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Q172. निम्नांकित शासकों में से किस शासक ने बृहदीश्वर मन्दिर का निर्माण करवाया ?
Right Answer: राजराज प्रथम
Explanation:
तंजावुर का बृहदीश्वर मन्दिर चोल शासक राजराज प्रथम ने 1010 ईस्वी में पूर्ण करवाया और इसीलिए इसे राजराजेश्वर मन्दिर भी कहा जाता है। यह द्रविड़ स्थापत्य शैली का चरमोत्कर्ष माना जाता है। इसका विमान लगभग साठ मीटर ऊँचा है और शिखर पर रखा एकाश्म कलश कई टन भारी है। मन्दिर में विशाल नन्दी प्रतिमा तथा चोलकालीन भित्तिचित्र भी हैं। इसे यूनेस्को ने ‘महान चोल मन्दिर’ के अन्तर्गत विश्व धरोहर घोषित किया है। राजेन्द्र प्रथम ने आगे चलकर गंगईकोण्डचोलपुरम में इसी शैली का मन्दिर बनवाया।
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Q173. निम्नांकित गुरुओं में से ‘‘खालसा पंथ’’ के संस्थापक कौन थे ?
Right Answer: गुरु गोविन्द सिंह
Explanation:
खालसा पंथ की स्थापना सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह ने 1699 की बैसाखी के दिन आनन्दपुर साहिब में की। उन्होंने एकत्रित संगत में से पाँच व्यक्तियों को ‘पंज प्यारे’ के रूप में चुना और उन्हें खाण्डे-बाटे का अमृत छकाया। खालसा के सदस्यों के लिए पाँच ककार — केश, कंघा, कड़ा, कच्छा तथा कृपाण — धारण करना अनिवार्य किया गया और पुरुषों के नाम के साथ ‘सिंह’ तथा स्त्रियों के नाम के साथ ‘कौर’ जोड़ा गया। इससे सिख समुदाय एक संगठित सैन्य-धार्मिक शक्ति में बदल गया, जो मुगल उत्पीड़न का प्रतिरोध कर सका।
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Q174. निम्न में से किस अभिलेख से स्थापित होता है कि हर्ष ने वल्लभी शासक ध्रुवसेन II को परास्त किया था ?
Right Answer: नवसारी ताम्रपत्र अभिलेख
Explanation:
वल्लभी के मैत्रक शासक ध्रुवसेन द्वितीय को हर्षवर्धन ने पराजित किया था, इसका प्रमाण नवसारी ताम्रपत्र अभिलेख से मिलता है। बाद में हर्ष ने अपनी पुत्री का विवाह ध्रुवसेन द्वितीय से करके उसे अपना मित्र एवं सामन्त बना लिया, जिससे पश्चिमी सीमा सुरक्षित हो गई। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी वल्लभी की समृद्धि तथा हर्ष से उसके सम्बन्ध का उल्लेख किया है। ऐहोल अभिलेख चालुक्य पुलकेशिन द्वितीय द्वारा हर्ष की पराजय का वर्णन करता है, जबकि बांसखेड़ा तथा मधुबन ताम्रपत्र स्वयं हर्ष के जारी किए गए भूमिदान-अभिलेख हैं।
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Q175. निम्न में से किस स्थल से 'R-37' कब्रिस्तान मिला था ?
Right Answer: हड़प्पा
Explanation:
हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल हड़प्पा से ‘कब्रिस्तान आर-37’ नामक शवाधान क्षेत्र प्राप्त हुआ है, जो परिपक्व हड़प्पा काल का है। यहाँ शवों को सामान्यतः उत्तर-दक्षिण दिशा में सिर उत्तर की ओर रखकर पूर्ण समाधि दी जाती थी और उनके साथ मृद्भाण्ड, आभूषण तथा दैनिक उपयोग की वस्तुएँ रखी जाती थीं, जो परलोक सम्बन्धी विश्वास का संकेत देती हैं। इसी स्थल से ‘कब्रिस्तान एच’ भी मिला है, जो उत्तर हड़प्पा काल का है और जहाँ अस्थियों को कलश में रखने की भिन्न परम्परा दिखाई देती है। हड़प्पा का उत्खनन 1921 में दयाराम साहनी ने करवाया।
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Q176. मध्यकालीन भारत में बयाना किस उत्पादन के लिए प्रसिद्ध था ?
Right Answer: नील
Explanation:
मध्यकालीन भारत में आगरा के निकट स्थित बयाना उत्तम कोटि के नील उत्पादन के लिए विख्यात था। बयाना का नील अपनी गहरी रंगत के कारण गुजरात के सरखेज के नील से भी श्रेष्ठ माना जाता था और यूरोपीय व्यापारी उसके लिए ऊँची कीमत देने को तैयार रहते थे। अंग्रेज तथा डच ईस्ट इण्डिया कम्पनियों ने सत्रहवीं शताब्दी में यहाँ नियमित क्रय-केन्द्र स्थापित किए। जहाँगीर के काल में नील के व्यापार पर एकाधिकार देने के प्रयास भी हुए। यूरोप के वस्त्र उद्योग में इसकी भारी माँग थी और यह भारत के प्रमुख निर्यातों में गिना जाता था।
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Q177. दन्तिदुर्ग ने किस चालुक्य नरेश को पराजित किया और महाराष्ट्र में राष्ट्रकूट शासन की शुरूआत हुई ?
Right Answer: कीर्तिवर्मन द्वितीय
Explanation:
राष्ट्रकूट वंश की वास्तविक स्थापना दन्तिदुर्ग ने की, जिसने लगभग 753 ईस्वी में बादामी के चालुक्य नरेश कीर्तिवर्मन द्वितीय को पराजित कर महाराष्ट्र में राष्ट्रकूट सत्ता स्थापित की। इससे पूर्व राष्ट्रकूट चालुक्यों के सामन्त थे। दन्तिदुर्ग ने उज्जैन में हिरण्यगर्भ महादान का अनुष्ठान किया और ‘महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की। उसके उत्तराधिकारी कृष्ण प्रथम ने एलोरा का विश्वप्रसिद्ध कैलाश मन्दिर एक ही चट्टान को काटकर बनवाया। आगे चलकर राष्ट्रकूट कन्नौज के त्रिपक्षीय संघर्ष में प्रतिहारों तथा पालों के प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी बने।
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Q178. निम्न में से किसने अवन्ति की विजय की थी ?
Right Answer: शिशुनाग
Explanation:
मगध साम्राज्य के विस्तार में अवन्ति की विजय एक निर्णायक घटना थी। हर्यक वंश के पतन के बाद शिशुनाग ने मगध की सत्ता सँभाली और उसने अवन्ति के प्रद्योत वंश का अन्त कर उसे मगध में मिला लिया। इससे मगध तथा अवन्ति का लम्बा संघर्ष सदा के लिए समाप्त हो गया और मगध उत्तर भारत की सर्वप्रमुख शक्ति बन गया। शिशुनाग ने कुछ समय के लिए राजधानी राजगृह से हटाकर वैशाली भी की। उसके पुत्र कालाशोक के शासनकाल में वैशाली में द्वितीय बौद्ध संगीति हुई। बिम्बिसार तथा अजातशत्रु ने अंग एवं वज्जि संघ पर विजय पाई थी।
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Q179. किस प्रतिहार शासक के शासनकाल में प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘‘कुवलयमाला’’ की रचना की गई ?
Right Answer: वत्सराज
Explanation:
‘कुवलयमाला’ नामक प्राकृत चम्पू-कथा की रचना जैन आचार्य उद्योतन सूरि ने 778 ईस्वी में की। ग्रन्थ की प्रशस्ति के अनुसार इसकी रचना राजस्थान के जालोर में गुर्जर-प्रतिहार शासक वत्सराज के शासनकाल में पूर्ण हुई। यह कृति तत्कालीन समाज, व्यापार, नगर-जीवन तथा भाषाओं के अध्ययन के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्रोत है, क्योंकि इसमें अठारह देशी भाषाओं तथा विभिन्न प्रदेशों के लोगों की बोलियों के नमूने दिए गए हैं। वत्सराज कन्नौज के त्रिपक्षीय संघर्ष में सम्मिलित प्रमुख प्रतिहार शासक था, जिसे राष्ट्रकूट ध्रुव ने पराजित किया।
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Q180. विजयनगर साम्राज्य के शासक कृष्णदेव राय निम्नांकित में से किस वंश से सम्बन्धित थे ?
Right Answer: तुलुव वंश
Explanation:
विजयनगर साम्राज्य पर क्रमशः चार वंशों ने शासन किया — संगम, सलुव, तुलुव तथा अरविदु। कृष्णदेव राय तुलुव वंश के थे और 1509 से 1529 तक शासन करते हुए उन्होंने साम्राज्य को चरम उत्कर्ष पर पहुँचाया। उन्होंने उड़ीसा के गजपति तथा बीजापुर के शासकों को पराजित किया और रायचूर दोआब पर अधिकार किया। वे स्वयं विद्वान थे और उन्होंने तेलुगु में ‘आमुक्तमाल्यद’ की रचना की; उनके दरबार में ‘अष्टदिग्गज’ नामक आठ तेलुगु कवि रहते थे। पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस तथा बारबोसा ने उनके शासन का विस्तृत विवरण दिया है।
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