Commerce: 60 MCQs with Answers
Your Progress
0%Q51. ‘पूँजीगत बजटिंग’ किस प्रकार का वित्तीय निर्णय है ?
Right Answer: निवेश निर्णय
वित्तीय प्रबंध के तीन प्रमुख निर्णय होते हैं — निवेश निर्णय, वित्तपोषण निर्णय तथा लाभांश निर्णय। पूँजीगत बजटिंग निवेश निर्णय के अन्तर्गत आती है, क्योंकि इसमें यह तय किया जाता है कि दीर्घकालीन निधियों को किन स्थायी सम्पत्तियों अथवा परियोजनाओं में लगाया जाए। ऐसे निर्णय अपरिवर्तनीय होते हैं, इनमें बड़ी राशि लगती है और इनका प्रभाव फर्म की भावी लाभप्रदता एवं जोखिम पर दीर्घकाल तक बना रहता है। इसके मूल्यांकन के लिए प्रतिफल अवधि, शुद्ध वर्तमान मूल्य तथा आन्तरिक प्रतिफल दर जैसी तकनीकें प्रयुक्त होती हैं।
Q52. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की कौन-सी धारा केन्द्र सरकार को उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों के विनियमन हेतु केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण स्थापित करने का अधिकार देती है ?
Right Answer: धारा 10
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 10 केन्द्र सरकार को केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना का अधिकार देती है, जिसे संक्षेप में केन्द्रीय प्राधिकरण कहा जाता है। इसका कार्य उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार व्यवहार तथा भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामलों का विनियमन करना है। यह स्वप्रेरणा से जाँच आरम्भ कर सकता है, असुरक्षित वस्तुओं की वापसी का आदेश दे सकता है, भ्रामक विज्ञापन बन्द करा सकता है और जुर्माना लगा सकता है। इसके अन्तर्गत जाँच हेतु एक महानिदेशक की व्यवस्था भी की गई है।
Q53. वह दृष्टिकोण जिससे हम अवलोकन और प्रत्यक्ष अनुभव दोनों के माध्यम से सीख सकते हैं, कहलाता है :
Right Answer: सामाजिक अधिगम सिद्धांत
सामाजिक अधिगम सिद्धांत अल्बर्ट बंडूरा ने प्रतिपादित किया। इसके अनुसार व्यक्ति केवल प्रत्यक्ष अनुभव अर्थात् स्वयं करके ही नहीं सीखता, बल्कि दूसरों को देखकर तथा उनके व्यवहार के परिणामों का प्रेक्षण करके भी सीख लेता है, जिसे प्रतिनिधिक अधिगम कहते हैं। इस प्रक्रिया के चार चरण हैं — ध्यान देना, धारण करना, प्रतिकृति बनाना तथा अभिप्रेरणा। प्रबंधन में इसका उपयोग प्रशिक्षण, प्रतिरूपण एवं संरक्षकत्व कार्यक्रमों में व्यापक रूप से होता है। बंडूरा ने आत्म-प्रभावकारिता की अवधारणा भी दी, जो अपनी क्षमता में विश्वास को दर्शाती है।
Q54. औद्योगिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेरिस सम्मेलन पर हस्ताक्षर किए गए थे :
Right Answer: 20 मार्च, 1883 को
औद्योगिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए पेरिस सम्मेलन पर 20 मार्च 1883 को हस्ताक्षर किए गए और यह बौद्धिक सम्पदा के क्षेत्र की प्रथम प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय संधि है। इसके अन्तर्गत पेटेंट, औद्योगिक अभिकल्प, ट्रेडमार्क, सेवा चिह्न, व्यापार नाम तथा भौगोलिक संकेत आते हैं। इसके दो आधारभूत सिद्धांत हैं — राष्ट्रीय व्यवहार, जिसके अनुसार सदस्य देश विदेशी आवेदकों को अपने नागरिकों जैसा संरक्षण देंगे; तथा प्राथमिकता का अधिकार, जिसके अन्तर्गत एक देश में आवेदन करने के बाद निर्धारित अवधि में अन्य सदस्य देशों में वही तिथि मान्य होती है। इसका प्रशासन विश्व बौद्धिक सम्पदा संगठन करता है।
Q55. निम्नलिखित में से कौन मैक्स वेबर की आदर्श नौकरशाही की विशेषता नहीं है ?
Right Answer: कार्यकाल की स्थिरता
मैक्स वेबर की आदर्श नौकरशाही की प्रमुख विशेषताएँ हैं — कार्य विशेषज्ञता अर्थात् श्रम विभाजन, सत्ता का स्पष्ट संस्तरण, औपचारिक चयन जो तकनीकी योग्यता पर आधारित हो, औपचारिक नियम एवं विनियम, अवैयक्तित्व अर्थात् नियमों का बिना पक्षपात के समान प्रयोग, तथा व्यावसायिक जीवनवृत्त अभिविन्यास। ‘कार्यकाल की स्थिरता’ इस सूची में नहीं आती, क्योंकि वह हेनरी फेयोल के चौदह प्रबंधकीय सिद्धांतों में से एक है, जिसमें कहा गया है कि कर्मचारियों को स्थिर कार्यकाल देने से ही उनकी कार्यकुशलता विकसित होती है।
Q56. निम्नलिखित में से कौन-सा चयन प्रक्रिया का पहला चरण है ?
Right Answer: प्रारंभिक स्क्रीनिंग
चयन एक नकारात्मक प्रक्रिया है, जिसमें क्रमिक बाधाओं से गुजरते हुए अनुपयुक्त अभ्यर्थियों को हटाया जाता है। इसका पहला चरण प्रारंभिक स्क्रीनिंग अर्थात् प्रारंभिक छँटनी है, जिसमें आवेदनों अथवा संक्षिप्त प्रारंभिक साक्षात्कार के आधार पर स्पष्ट रूप से अयोग्य अभ्यर्थियों को आरम्भ में ही अलग कर दिया जाता है। इससे संगठन का समय एवं धन दोनों बचते हैं। इसके बाद पूर्ण आवेदन-पत्र भरवाना, रोजगार परीक्षण, चयन साक्षात्कार, संदर्भ एवं पृष्ठभूमि की जाँच, चिकित्सा परीक्षण तथा अन्ततः नियुक्ति-पत्र देने के चरण आते हैं।
Q57. कौन-सा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धांत आमतौर पर दो कारक मॉडल के रूप में तैयार किया जाता है ?
Right Answer: हेक्शेर-ओहलिन सिद्धांत
हेक्शेर-ओहलिन सिद्धांत को सामान्यतः दो कारक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, क्योंकि इसमें दो देश, दो वस्तुएँ तथा दो उत्पादन साधन — श्रम एवं पूँजी — मान लिए जाते हैं। इसे साधन-प्रचुरता सिद्धांत भी कहा जाता है। इसका मूल तर्क यह है कि प्रत्येक देश उस वस्तु का निर्यात करेगा जिसके उत्पादन में उसके यहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध एवं इसलिए सस्ते साधन का गहन उपयोग होता है, और उस वस्तु का आयात करेगा जिसमें दुर्लभ साधन की गहनता हो। यह रिकार्डो के तुलनात्मक लाभ सिद्धांत का विस्तार है, जो केवल श्रम-उत्पादकता के अन्तर पर आधारित था।
Q58. कम्प्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली के अनुसार, इनमें से कौन-सा नॉन-मास्टर डेटा का उदाहरण नहीं है ?
Right Answer: ब्लड ग्रुप
कम्प्यूटरीकृत लेखांकन प्रणाली में आँकड़ों को दो वर्गों में बाँटा जाता है। मास्टर डेटा वह स्थायी अथवा अर्ध-स्थायी सूचना है जो बार-बार नहीं बदलती और अनेक लेनदेनों में बार-बार प्रयुक्त होती है। नॉन-मास्टर डेटा वह है जो बार-बार बदलता रहता है और प्रत्येक बार नए सिरे से दर्ज करना पड़ता है। आयु, वजन तथा पसंद-नापसंद समय के साथ बदलते रहते हैं, अतः वे नॉन-मास्टर डेटा के उदाहरण हैं। ब्लड ग्रुप जीवनभर अपरिवर्तित रहता है, इसलिए वह मास्टर डेटा है और नॉन-मास्टर डेटा का उदाहरण नहीं है।
Q59. निम्नलिखित में से कौन-सा एक ट्रांजेक्शनल (लेन-देन) नेता का लक्षण नहीं है ?
Right Answer: प्रेरक प्रेरणा
ट्रांजेक्शनल अर्थात् लेन-देन आधारित नेता अनुयायियों को स्पष्ट भूमिका एवं कार्य-अपेक्षाएँ बताकर तथा उनके बदले पुरस्कार देकर लक्ष्य की ओर ले जाता है। उसके प्रमुख लक्षण हैं — आकस्मिक पुरस्कार, सक्रिय एवं निष्क्रिय दोनों रूपों में अपवादों द्वारा प्रबंध, तथा अहस्तक्षेप अर्थात् लेसे-फेयर, जिसमें वह उत्तरदायित्व से बचता है। इसके विपरीत ‘प्रेरक प्रेरणा’ ट्रांसफॉर्मेशनल नेतृत्व का लक्षण है, जिसमें नेता ऊँचा दृष्टिकोण प्रस्तुत कर अनुयायियों को स्वयं से ऊपर उठकर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। आदर्शीकृत प्रभाव एवं बौद्धिक उद्दीपन भी उसी के अंग हैं।
Q60. प्रशिक्षण की प्रभावशीलता निर्धारित करने के लिए एक अलग दृष्टिकोण को कहा जाता है :
Right Answer: ब्रिंकरहॉफ मॉडल
प्रशिक्षण की प्रभावशीलता आँकने का सर्वाधिक प्रचलित प्रतिरूप किर्कपैट्रिक का चार-स्तरीय मॉडल है, जिसमें प्रतिक्रिया, अधिगम, व्यवहार तथा परिणाम का क्रमिक मूल्यांकन होता है। इससे भिन्न एवं वैकल्पिक दृष्टिकोण रॉबर्ट ब्रिंकरहॉफ ने प्रस्तुत किया, जिसे सफल प्रकरण विधि कहा जाता है। इसमें औसत प्रतिभागियों के स्थान पर सर्वाधिक सफल तथा सर्वाधिक असफल प्रकरणों को चुनकर उनका गहन अध्ययन किया जाता है, ताकि यह पता चले कि प्रशिक्षण किन परिस्थितियों में काम करता है और किनमें नहीं। इससे संगठनात्मक बाधाएँ भी उजागर हो जाती हैं।