Commerce: 60 MCQs with Answers
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0%Q11. एक कंपनी का शुद्ध लाभ मार्जिन 5% है, कुल संपत्ति 90,00,000 रुपये है और संपत्ति पर रिटर्न 9% है। इसका कुल संपत्ति कारोबार अनुपात होगा :
Right Answer: 1.8
संपत्ति पर प्रतिफल, शुद्ध लाभ मार्जिन तथा कुल संपत्ति कारोबार अनुपात के बीच ड्यूपॉन्ट विश्लेषण के अनुसार यह सम्बन्ध होता है — संपत्ति पर प्रतिफल बराबर शुद्ध लाभ मार्जिन गुणा कुल संपत्ति कारोबार अनुपात। प्रश्न में संपत्ति पर प्रतिफल 9 प्रतिशत तथा शुद्ध लाभ मार्जिन 5 प्रतिशत दिया गया है। अतः कुल संपत्ति कारोबार अनुपात 9 को 5 से भाग देने पर 1.8 प्राप्त होता है। इसका अर्थ है कि कंपनी अपनी कुल संपत्तियों के मूल्य का 1.8 गुना विक्रय उत्पन्न कर रही है, जो संपत्तियों के उपयोग की कार्यकुशलता दर्शाता है।
Q12. उद्यम द्वारा अपनी परिचालन गतिविधियों से प्राप्त या प्राप्य राशि है :
Right Answer: राजस्व
राजस्व से तात्पर्य उस सकल राशि से है जो उद्यम अपनी सामान्य परिचालन गतिविधियों से प्राप्त करता है अथवा जिसे प्राप्त करने का उसे अधिकार है। इसमें वस्तुओं की बिक्री, सेवाओं का प्रतिफल तथा ब्याज, स्वामिस्व एवं लाभांश जैसी प्राप्तियाँ सम्मिलित होती हैं। यह सकल अन्तर्वाह है, इसमें से व्यय घटाए नहीं जाते। इसके विपरीत लाभ अथवा मुनाफा तब निकलता है जब राजस्व में से समस्त व्यय घटा दिए जाएँ, और आय एक व्यापक पद है जिसमें राजस्व तथा अन्य लाभ दोनों सम्मिलित रहते हैं।
Q13. चालू वर्ष के लिए प्रस्तावित लाभांश किस शीर्षक के अंतर्गत दर्शाया जाता है ?
Right Answer: आकस्मिक देनदारियाँ
कंपनी अधिनियम 2013 तथा संशोधित लेखांकन मानकों के अनुसार चालू वर्ष के लिए प्रस्तावित लाभांश को तुलन-पत्र में देयता के रूप में नहीं दिखाया जाता, क्योंकि उसकी घोषणा अभी अंशधारियों की वार्षिक आम सभा में होनी शेष रहती है। जब तक अंशधारी उसे स्वीकृत नहीं कर देते, तब तक वह कंपनी का वर्तमान दायित्व नहीं बनता। अतः इसे आकस्मिक देनदारियों के शीर्षक के अन्तर्गत टिप्पणी के रूप में प्रकट किया जाता है। स्वीकृति मिलने पर ही उस वर्ष में इसे देयता के रूप में मान्यता दी जाती है और भुगतान किया जाता है।
Q14. यदि कोई ग्राहक पहले चालान किए गए सामान को वापस कर देता है या ग्राहक को आगे की छूट की अनुमति दी जाती है, तो कौन-सा स्रोत दस्तावेज़ जारी किया जाता है ?
Right Answer: क्रेडिट नोट
क्रेडिट नोट वह स्रोत दस्तावेज है जो विक्रेता अपने ग्राहक के नाम तब जारी करता है जब ग्राहक पहले चालान किया गया माल लौटा देता है, अथवा उसे कोई अतिरिक्त छूट दी जाती है या चालान में अधिक राशि लिख दी गई हो। इससे ग्राहक का खाता उतनी राशि से क्रेडिट अर्थात् कम हो जाता है और यह विक्रय वापसी बही में लिखा जाता है। इसके विपरीत डेबिट नोट क्रेता द्वारा तब बनाया जाता है जब वह माल लौटाता है और आपूर्तिकर्ता का खाता डेबिट करता है। दोनों दस्तावेज माल की वापसी के दो पक्षों को दर्शाते हैं।
Q15. प्रिंस लिमिटेड अपना रोकड़ प्रवाह विवरण तैयार करना चाहता है। इसने 60,000 रुपये के बुक वैल्यू के उपकरण 8,000 रुपये के लाभ पर बेचे। गतिविधियों के तहत इसकी रोकड़ प्रवाह विवरण में रिपोर्ट की जाने वाली राशि है :
Right Answer: 68,000 रुपये
रोकड़ प्रवाह विवरण में सम्पत्ति की बिक्री से प्राप्त वास्तविक नकद राशि निवेश गतिविधियों के अन्तर्गत दिखाई जाती है, न कि उस पर हुआ लाभ। यहाँ उपकरण का पुस्तक मूल्य 60,000 रुपये था और उसे 8,000 रुपये के लाभ पर बेचा गया, अतः वास्तविक विक्रय मूल्य 68,000 रुपये हुआ और यही राशि निवेश गतिविधियों में नकद अन्तर्वाह के रूप में रिपोर्ट होगी। 8,000 रुपये का लाभ तो परिचालन गतिविधियों में शुद्ध लाभ से घटा दिया जाता है, ताकि उसकी दोहरी गणना न हो, क्योंकि वह नकद न होकर केवल लेखांकन लाभ है।
Q16. रमा लिमिटेड ने 10 रु० वाले 40 अंश जब्त किए जिन पर 7 रु० माँगे गए तथा अंशधारी ने 5 रु० चुका दिए थे। इनमें से 30 अंशों को 6 रु० प्रति अंश पर पुनर्निर्गमित कर दिया गया। पूँजी संचय खाते में हस्तांतरित राशि होगी :
Right Answer: 30 रु०
जब्ती के समय 40 अंशों पर अंशधारी द्वारा चुकाई गई राशि प्रति अंश 5 रुपये थी, अतः जब्ती खाते में कुल 200 रुपये गए। इनमें से 30 अंश पुनर्निर्गमित किए गए, अतः उन पर जब्ती राशि 30 गुणा 5 अर्थात् 150 रुपये होगी। पुनर्निर्गमन 6 रुपये प्रति अंश पर हुआ, जबकि अंश 10 रुपये का है, इसलिए प्रति अंश 4 रुपये की छूट दी गई और कुल छूट 30 गुणा 4 अर्थात् 120 रुपये हुई। जब्ती राशि में से यह छूट घटाने पर 150 में से 120 घटाकर 30 रुपये शेष बचते हैं, जिन्हें पूँजी संचय खाते में हस्तांतरित किया जाता है।
Q17. इनमें से कौन-सा ‘प्रावधानों’ के लिए सही नहीं है ?
Right Answer: यह व्यवसाय की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए बनाया जाता है। कुछ कानून के तहत अनिवार्य भी हैं।
प्रावधान चालू लेखा अवधि से सम्बन्धित किसी ज्ञात देयता अथवा व्यय के लिए बनाया जाता है, जिसकी राशि निश्चित रूप से ज्ञात नहीं होती, जैसे संदिग्ध ऋणों का प्रावधान अथवा कर का प्रावधान। यह लाभ के विरुद्ध प्रभार होता है, अतः लाभ हो या हानि, इसे बनाना अनिवार्य है और इससे कर योग्य लाभ घट जाता है। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि व्यवसाय की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए तथा कानून के अन्तर्गत अनिवार्य रूप से जो राशि अलग रखी जाती है वह संचय अर्थात् रिजर्व होती है, जो लाभ का विनियोजन है।
Q18. किसी कम्पनी के समापन की स्थिति में आरक्षित पूँजी किस पूँजी का एक भाग है ?
Right Answer: अभिदत्त पूँजी
आरक्षित पूँजी अभिदत्त पूँजी के उस अयाचित भाग को कहते हैं जिसे कंपनी विशेष प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय ले लेती है कि वह केवल कंपनी के समापन के समय ही माँगा जाएगा। इसका उद्देश्य लेनदारों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करना है, क्योंकि समापन के समय यह राशि उपलब्ध रहती है। एक बार आरक्षित घोषित हो जाने पर इसे न तो सामान्य व्यवसाय में माँगा जा सकता है और न ही इसके विरुद्ध कोई प्रभार सृजित किया जा सकता है। इसे पूँजी संचय अथवा संचय निधि से भिन्न समझना चाहिए, क्योंकि वे लाभ से सृजित होते हैं।
Q19. ............. वित्तीय विवरण तैयार करने में एक मार्गदर्शक के रूप में लेखाकारों द्वारा पालन किए जाने वाले रीति-रिवाज, उपयोग या प्रथाएँ हैं।
Right Answer: लेखांकन प्रथाएँ
लेखांकन प्रथाएँ अर्थात् अकाउंटिंग कन्वेंशंस वे रीति-रिवाज, परिपाटियाँ अथवा व्यवहार हैं जिनका पालन लेखाकार वित्तीय विवरण तैयार करते समय एक मार्गदर्शक के रूप में करते हैं। ये किसी विधि द्वारा निर्धारित नहीं होतीं, बल्कि लम्बे व्यावहारिक अनुभव तथा सामान्य स्वीकृति से विकसित हुई हैं। इनमें रूढ़िवादिता अथवा सतर्कता, पूर्ण प्रकटीकरण, सारता तथा संगतता की प्रथाएँ प्रमुख हैं। इसके विपरीत लेखांकन अवधारणाएँ आधारभूत मान्यताएँ हैं, जैसे चालू व्यवसाय एवं द्वैत पक्ष, तथा लेखांकन मानक अधिकृत संस्थाओं द्वारा जारी अनिवार्य दिशानिर्देश होते हैं।
Q20. उद्योग के औसत की तुलना में किसी संगठन द्वारा प्राप्त .............. सकल लाभ अनुपात, अपेक्षाकृत कम लागत पर उत्पादन करने के सफल प्रयास को इंगित करता है।
Right Answer: उच्च
सकल लाभ अनुपात सकल लाभ तथा शुद्ध विक्रय के बीच का प्रतिशत सम्बन्ध है और यह उत्पादन एवं क्रय की कार्यकुशलता को मापता है। यदि किसी संगठन का यह अनुपात उद्योग के औसत से उच्च हो, तो इसका अर्थ है कि वह अपेक्षाकृत कम लागत पर उत्पादन करने में सफल रहा है, अथवा उसे बेहतर विक्रय मूल्य प्राप्त हो रहा है। इससे उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति मजबूत होती है, क्योंकि संचालन व्यय वहन करने के बाद भी उसके पास पर्याप्त अधिशेष बचता है। निम्न अनुपात ऊँची उत्पादन लागत अथवा अकुशल क्रय नीति का संकेत देता है।