Commerce: 60 MCQs with Answers
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0%Q21. निम्नलिखित में से किसे खातों की प्रधान पुस्तक कहा जाता है ?
Right Answer: खाता - बही
खाता-बही अर्थात् लेजर को खातों की प्रधान पुस्तक कहा जाता है, क्योंकि इसी में व्यवसाय के समस्त व्यक्तिगत, वास्तविक एवं नाममात्र खाते वर्गीकृत रूप में रखे जाते हैं। जर्नल तथा सहायक बहियों में लेनदेन कालक्रमानुसार लिखे जाते हैं, किन्तु किसी एक खाते की पूरी स्थिति वहाँ से नहीं मिलती; उसके लिए खतौनी करके खाता-बही में लाना आवश्यक होता है। यहीं से प्रत्येक खाते का शेष निकलता है, तलपट बनता है और अन्ततः अन्तिम खाते तैयार होते हैं। इसी कारण इसे लेखांकन का ‘राजा’ भी कहा जाता है।
Q22. A, B तथा C का पुराना लाभ-विभाजन अनुपात 3 : 2 : 1 है। D को नया साझेदार बनाया गया। तय हुआ कि C और D के बीच अनुपात वही रहेगा जो A और B के बीच है, तथा A, B और C का सापेक्ष अनुपात अपरिवर्तित रहेगा। नया अनुपात होगा :
Right Answer: 9 : 6 : 3 : 2
A तथा B के बीच का अनुपात 3 अनुपात 2 है, अतः शर्त के अनुसार C तथा D के बीच भी यही अनुपात रहेगा। मान लें C का भाग 3k तथा D का भाग 2k है। अब दूसरी शर्त यह है कि A, B एवं C का पारस्परिक अनुपात 3 अनुपात 2 अनुपात 1 ही बना रहे। चूँकि C का भाग 3k है, अतः उसी अनुपात में A का भाग 9k तथा B का भाग 6k होगा। इस प्रकार चारों साझेदारों का नया लाभ-विभाजन अनुपात 9k अनुपात 6k अनुपात 3k अनुपात 2k अर्थात् 9 : 6 : 3 : 2 प्राप्त होता है।
Q23. जब चेक का अनादर होता है, तो प्राप्त छूट, दी गई छूट, और प्राप्त छूट या दी गई छूट को रद्द कर किसके माध्यम से दर्ज किया जाता है ?
Right Answer: मुख्य जर्नल
जब कोई प्राप्त चेक बैंक द्वारा अनादरित कर दिया जाता है, तो केवल बैंक खाते को क्रेडिट करना पर्याप्त नहीं होता; उस लेनदेन के समय दी गई अथवा प्राप्त की गई छूट को भी रद्द करना पड़ता है, क्योंकि भुगतान वास्तव में हुआ ही नहीं। छूट की यह उलट प्रविष्टि रोकड़ बही के छूट स्तम्भों में नहीं की जा सकती, क्योंकि वे स्तम्भ केवल जोड़ने का कार्य करते हैं और उनका शेष नहीं निकाला जाता। इसलिए ऐसी समस्त प्रविष्टियाँ मुख्य जर्नल अर्थात् जर्नल प्रॉपर के माध्यम से की जाती हैं, जहाँ ग्राहक का खाता पुनः डेबिट किया जाता है।
Q24. निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प कंपनी गठन में ज्ञापन-पत्र की भूमिका का सही वर्णन करता है ?
Right Answer: यह कंपनी का चार्टर होता है, जो बाहरी दुनिया के साथ उसके संबंधों और उसकी गतिविधियों के दायरे को परिभाषित करता है।
ज्ञापन-पत्र अर्थात् मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन कंपनी का चार्टर अथवा आधारभूत दस्तावेज है, जो उसके निगमन के समय रजिस्ट्रार के पास दाखिल किया जाता है। यह बाहरी दुनिया के साथ कंपनी के सम्बन्धों को नियंत्रित करता है और उसकी गतिविधियों का दायरा परिभाषित करता है। इसमें नाम खण्ड, पंजीकृत कार्यालय खण्ड, उद्देश्य खण्ड, दायित्व खण्ड, पूँजी खण्ड तथा अभिदान खण्ड होते हैं। इसके दायरे से बाहर किया गया कार्य ‘अल्ट्रा वायर्स’ अर्थात् शक्ति से परे होकर शून्य माना जाता है। कंपनी के आन्तरिक नियम तो अन्तर्नियम अर्थात् आर्टिकल्स में दिए जाते हैं।
Q25. A, B तथा C 7 : 5 : 4 के अनुपात में लाभ बाँटते हैं। C की मृत्यु 30 जून 2022 को हुई तथा वर्ष 2021-22 का लाभ 24,000 रु० था। 1 अप्रैल 2022 से 30 जून 2022 तक की अवधि के लिए C के खाते में लाभ का कितना हिस्सा बनेगा ?
Right Answer: 1,500 रुपये
साझेदार की मृत्यु वर्ष के बीच में होने पर उसका लाभ में हिस्सा पिछले वर्ष के लाभ के आधार पर समय के अनुपात में निकाला जाता है। कुल अनुपात 7 जोड़ 5 जोड़ 4 अर्थात् 16 है, जिसमें C का भाग 4 बटा 16 यानी एक-चौथाई है। पिछले वर्ष का लाभ 24,000 रुपये था, अतः पूरे वर्ष के लिए C का हिस्सा 6,000 रुपये बनता है। किन्तु वह केवल 1 अप्रैल से 30 जून तक अर्थात् तीन माह जीवित रहा, जो वर्ष का एक-चौथाई है। इसलिए 6,000 का एक-चौथाई अर्थात् 1,500 रुपये उसके खाते में जमा किए जाएँगे।
Q26. निम्न में से कौन-सा अनुपात विश्लेषण का उद्देश्य नहीं है ?
Right Answer: प्रभावी निर्देशन
अनुपात विश्लेषण वित्तीय विवरणों की व्याख्या का एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है। इसके प्रमुख उद्देश्यों में वर्षों की तुलना कर प्रवृत्ति स्पष्ट करना, विभिन्न मदों में हुए परिवर्तनों को उजागर करना, तथा एक ही उद्योग की फर्मों के बीच अन्तः-फर्म तुलना करना सम्मिलित है। इसके अतिरिक्त यह तरलता, शोधन क्षमता एवं लाभप्रदता का मूल्यांकन भी करता है। ‘प्रभावी निर्देशन’ प्रबंध का एक स्वतंत्र कार्य है, जिसमें नेतृत्व, अभिप्रेरणा एवं पर्यवेक्षण आते हैं; यह अनुपात विश्लेषण का उद्देश्य नहीं है।
Q27. यदि कोई व्यक्ति किसी कंपनी के पंजीकरण के संबंध में रजिस्ट्रार के पास दाखिल किसी भी दस्तावेज में कोई असत्य या गलत जानकारी प्रस्तुत करता है या कोई महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, जिसके बारे में वह जानता है, तो वह किस धारा के तहत धोखाधड़ी के लिए दंडनीय होगा ?
Right Answer: धारा 447 [ धारा 7(5)]
कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 7 कंपनी के निगमन की प्रक्रिया से सम्बन्धित है। इसकी उपधारा 5 यह प्रावधान करती है कि यदि कोई व्यक्ति पंजीकरण के सम्बन्ध में रजिस्ट्रार के पास दाखिल किसी दस्तावेज में जानबूझकर असत्य अथवा गलत विवरण प्रस्तुत करता है या कोई महत्त्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, तो वह धोखाधड़ी के लिए धारा 447 के अन्तर्गत दंडनीय होगा। धारा 447 धोखाधड़ी को परिभाषित करती है और उसके लिए न्यूनतम छह माह से लेकर दस वर्ष तक का कारावास तथा सम्बन्धित राशि के तीन गुना तक जुर्माने का प्रावधान करती है।
Q28. निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प कंप्यूटरीकृत लेखा प्रणाली की प्रमुख विशेषता नहीं है ?
Right Answer: आंतरिक नियंत्रण तंत्र की आवश्यकता को समाप्त करना
कम्प्यूटरीकृत लेखा प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं में लेनदेन की स्वचालित रिकॉर्डिंग एवं वर्गीकरण, वित्तीय आँकड़ों की तत्काल प्रोसेसिंग एवं रिपोर्टिंग, तथा स्कंध प्रबंधन एवं वेतन जैसी अन्य व्यावसायिक प्रक्रियाओं के साथ एकीकरण सम्मिलित हैं। तीसरा विकल्प गलत है, क्योंकि कम्प्यूटरीकरण आन्तरिक नियंत्रण की आवश्यकता समाप्त नहीं करता, बल्कि उसे और अधिक महत्त्वपूर्ण बना देता है। आँकड़ों की सुरक्षा, प्रवेश-अधिकार, पासवर्ड, ऑडिट ट्रेल तथा नियमित बैकअप जैसे नियंत्रण न हों तो त्रुटि एवं छल-कपट का जोखिम कहीं अधिक बढ़ जाता है।
Q29. अंतर्राष्ट्रीय लेखांकन मानक- 29 किसके लिए निर्धारित है ?
Right Answer: अत्यधिक मुद्रास्फीति वाली अर्थ- व्यवस्थाओं में वित्तीय रिपोर्टिंग
अंतर्राष्ट्रीय लेखांकन मानक 29 का शीर्षक ‘अत्यधिक मुद्रास्फीति वाली अर्थव्यवस्थाओं में वित्तीय रिपोर्टिंग’ है। यह मानक उन देशों की इकाइयों पर लागू होता है जहाँ मुद्रा की क्रयशक्ति इतनी तेजी से घटती है कि ऐतिहासिक लागत पर आधारित विवरण भ्रामक हो जाते हैं। इसके अनुसार वित्तीय विवरणों को तुलन-पत्र की तिथि पर प्रचलित मापन इकाई के अनुसार पुनर्व्यक्त करना आवश्यक है, जिसके लिए सामान्य मूल्य सूचकांक का उपयोग होता है। तीन वर्षों में संचयी मुद्रास्फीति सौ प्रतिशत के निकट होना इसका प्रमुख संकेतक माना जाता है।
Q30. कौन-सा अनुपात व्यवसाय में निवेश किए गए कुल निधि (फंड) में मालिकों के निधि (फंड) के अनुपात को दर्शाता है ?
Right Answer: इक्विटी अनुपात
इक्विटी अनुपात, जिसे स्वामित्व अनुपात अथवा प्रोप्राइटरी अनुपात भी कहा जाता है, यह दर्शाता है कि व्यवसाय में निवेश किए गए कुल निधि में स्वामियों के निधि का अनुपात कितना है। इसे स्वामियों के कोष को कुल सम्पत्तियों अथवा कुल निधि से भाग देकर निकाला जाता है। इसका ऊँचा मान यह बताता है कि व्यवसाय बाह्य ऋणों पर कम निर्भर है, अतः उसकी दीर्घकालीन वित्तीय स्थिति सुदृढ़ एवं लेनदारों के लिए सुरक्षित है। इसके विपरीत ऋण-इक्विटी अनुपात बाह्य ऋण तथा स्वामियों के कोष का सम्बन्ध बताता है और उत्तोलन की मात्रा दर्शाता है।