Chemistry - Physical Chemistry: 20 MCQs with Answers
Chemistry- Physical Chemistry
ऊष्मागतिकी, रासायनिक बलगतिकी, विलयन, आयनिक साम्य तथा विद्युत रसायन पर बहुविकल्पीय प्रश्न।Your Progress
0%Q11. शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा सही नहीं है ?
Right Answer: [R] = [R]₀ e⁻ᵏᵗ
शून्य कोटि की अभिक्रिया में वेग अभिकारक की सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता, अतः वेग समीकरण ऋण d[R] बटा dt बराबर k होता है। इसका समाकलित रूप [R] बराबर [R]₀ घटा kt है, जिससे [R] तथा समय के बीच का ग्राफ ऋणात्मक ढाल वाली सरल रेखा बनता है और उसकी ढाल k के बराबर होती है। इसी समीकरण से अर्धआयु [R]₀ बटा 2k प्राप्त होती है, जो प्रारम्भिक सान्द्रता के समानुपाती होती है। दूसरा विकल्प गलत है, क्योंकि चरघातांकी क्षय का समीकरण प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए होता है, शून्य कोटि के लिए नहीं।
Q12. मिथेन, ग्रेफाइट एवं डाइहाइड्रोजन की 298 K पर दहन एंथैल्पियाँ क्रमशः −890.3, −393.5 एवं −285.8 kJ mol⁻¹ हैं। CH₄ की विरचन एंथैल्पी क्या होगी ?
Right Answer: −74.8 kJ mol⁻¹
हेस के नियम के अनुसार मेथेन की विरचन एंथैल्पी निकालने के लिए ग्रेफाइट तथा हाइड्रोजन की दहन एंथैल्पियों का योग लेकर उसमें से मेथेन की दहन एंथैल्पी घटाई जाती है। यहाँ ग्रेफाइट के एक मोल की दहन एंथैल्पी ऋण 393.5 तथा दो मोल हाइड्रोजन की दो गुणा ऋण 285.8 अर्थात् ऋण 571.6 किलोजूल है, जिनका योग ऋण 965.1 किलोजूल होता है। इसमें से मेथेन की दहन एंथैल्पी ऋण 890.3 घटाने पर ऋण 965.1 जोड़ 890.3 अर्थात् ऋण 74.8 किलोजूल प्रति मोल प्राप्त होता है। यही मेथेन की मानक विरचन एंथैल्पी है।
Q13. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सही विकल्प चुनें :
सूची-I
I. आदर्श विलयन
II. अनादर्श विलयन (धनात्मक विचलन)
III. अनादर्श विलयन (ऋणात्मक विचलन)
सूची-II
(a) ऐसीटोन और एथेनॉल
(b) ऐसीटोन और क्लोरोफॉर्म
(c) बेन्जीन और टॉलुईन
Right Answer: I-c, II-a, III-b
बेन्जीन तथा टॉलुईन का मिश्रण आदर्श विलयन है, क्योंकि दोनों की संरचना एवं अन्तराआण्विक बल लगभग समान हैं, अतः मिश्रण पर न ऊष्मा निकलती है और न आयतन बदलता है तथा राउल्ट का नियम पूर्णतः लागू होता है। ऐसीटोन एवं एथेनॉल का मिश्रण धनात्मक विचलन दिखाता है, क्योंकि ऐसीटोन एथेनॉल के हाइड्रोजन आबंधों को तोड़ देता है, जिससे वाष्प दाब बढ़ जाता है। ऐसीटोन एवं क्लोरोफॉर्म का मिश्रण ऋणात्मक विचलन दिखाता है, क्योंकि इनके बीच नया हाइड्रोजन आबंध बनने से आकर्षण बढ़ जाता है और वाष्प दाब घट जाता है।
Q14. ऐसीटिक अम्ल का pK𝒂 तथा अमोनियम हाइड्रॉक्साइड का pK𝒃 क्रमशः 4.76 और 4.75 है। अमोनियम ऐसीटेट विलयन का pH क्या होगा ?
Right Answer: 7.005
अमोनियम ऐसीटेट दुर्बल अम्ल तथा दुर्बल क्षार से बना लवण है, अतः उसके विलयन का pH इस सूत्र से निकाला जाता है — pH बराबर 7 जोड़ आधा pKa घटा आधा pKb। यहाँ ऐसीटिक अम्ल का pKa 4.76 तथा अमोनियम हाइड्रॉक्साइड का pKb 4.75 है। दोनों का अन्तर 0.01 है, जिसका आधा 0.005 होता है। इसे सात में जोड़ने पर pH 7.005 प्राप्त होता है, जो लगभग उदासीन किन्तु अत्यन्त हल्का अम्लीय-विहीन है। ध्यातव्य है कि ऐसे लवणों का pH सान्द्रता पर निर्भर नहीं करता, केवल अम्ल एवं क्षार की सापेक्ष प्रबलता पर।
Q15. अभिक्रिया 2N₂O₅(g) → 4NO₂(g) + O₂(g) की औसत दर 6.79 × 10⁻⁴ mol L⁻¹ min⁻¹ है, तो NO₂ के उत्पादन की दर है :
Right Answer: 2.72 × 10⁻³ mol L⁻¹ min⁻¹
किसी अभिक्रिया की एकसमान दर परिभाषित करने के लिए प्रत्येक स्पीशीज की सान्द्रता परिवर्तन दर को उसके रससमीकरणमितीय गुणांक से भाग दिया जाता है। दिए गए समीकरण में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का गुणांक चार है, अतः अभिक्रिया की दर बराबर एक बटा चार गुणा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के बनने की दर। यहाँ अभिक्रिया की औसत दर 6.79 × 10⁻⁴ मोल प्रति लीटर प्रति मिनट दी गई है, इसलिए नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के उत्पादन की दर उसका चार गुना अर्थात् लगभग 2.72 × 10⁻³ मोल प्रति लीटर प्रति मिनट होगी।
Q16. एक प्रक्रम में निकाय द्वारा 701 J ऊष्मा अवशोषित की जाती है तथा निकाय द्वारा 394 J कार्य किया जाता है। इस प्रक्रम के लिए आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन क्या है ?
Right Answer: +307 J
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम कहता है कि किसी निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन उसके द्वारा अवशोषित ऊष्मा तथा उसके द्वारा किए गए कार्य के अन्तर के बराबर होता है, अर्थात् ΔU बराबर q घटा w। यहाँ निकाय द्वारा 701 जूल ऊष्मा अवशोषित की गई है, अतः q धनात्मक है, तथा निकाय द्वारा 394 जूल कार्य किया गया है, अतः वह ऊर्जा निकाय से बाहर गई। इस प्रकार ΔU बराबर 701 घटा 394 अर्थात् धन 307 जूल प्राप्त होता है। धनात्मक चिह्न दर्शाता है कि निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में शुद्ध वृद्धि हुई है।
Q17. निम्नलिखित में से किस जलीय विलयन का हिमांक न्यूनतम होगा ?
Right Answer: 0.1 m BaCl₂
हिमांक में अवनमन एक अनुसंधापक गुणधर्म है और उसका मान विलयन में उपस्थित कणों की कुल संख्या पर निर्भर करता है, जिसे वान्ट हॉफ गुणक से व्यक्त किया जाता है। सुक्रोज तथा ग्लूकोज अवियोजी हैं, अतः उनका गुणक एक है। सोडियम क्लोराइड दो आयनों में वियोजित होता है, अतः गुणक दो है। बेरियम क्लोराइड एक बेरियम तथा दो क्लोराइड आयन देकर कुल तीन कण उत्पन्न करता है, अतः उसका गुणक तीन है और वही सर्वाधिक अवनमन उत्पन्न करेगा। इसलिए समान मोललता पर बेरियम क्लोराइड के विलयन का हिमांक सबसे कम होगा।
Q18. O₂ के लिए ताप बढ़ने पर हेनरी स्थिरांक K𝐇 का मान बढ़ता है। तब ताप घटाने पर उसकी विलेयता :
Right Answer: बढ़ेगी
हेनरी का नियम कहता है कि गैस की विलेयता उसके आंशिक दाब के समानुपाती होती है और हेनरी स्थिरांक जितना अधिक होगा, विलेयता उतनी ही कम होगी। ऑक्सीजन के लिए हेनरी स्थिरांक का मान ताप बढ़ने के साथ बढ़ता है, अर्थात् गरम करने पर उसकी विलेयता घटती जाती है। इसका कारण यह है कि गैसों का विलयन बनना ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है, अतः ला-शातेलिए के सिद्धांत के अनुसार ताप बढ़ाने पर साम्य गैस निकलने की दिशा में खिसक जाता है। इसलिए ताप घटाने पर ऑक्सीजन की विलेयता बढ़ेगी; यही कारण है कि ठण्डे जल में जलीय जीवों के लिए अधिक घुलित ऑक्सीजन उपलब्ध रहती है।
Q19. तापमान के बढ़ने के साथ धातुओं की चालकता :
Right Answer: घटती है
धातुओं में विद्युत चालन मुक्त इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह से होता है, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक चालक कहा जाता है। ताप बढ़ाने पर धातु के धनायन अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर अधिक तीव्रता से कम्पन करने लगते हैं, जिससे प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों का इन कम्पित आयनों से टकराव बढ़ जाता है और उनका औसत मुक्त पथ घट जाता है। परिणामस्वरूप प्रतिरोध बढ़ता है और चालकता घट जाती है। इसके विपरीत विद्युत अपघट्य विलयनों में ताप बढ़ाने पर श्यानता घटती तथा आयनों की गतिशीलता बढ़ती है, अतः वहाँ चालकता बढ़ जाती है। अर्धचालकों में भी ताप के साथ चालकता बढ़ती है।
Q20. यदि 5.85 g NaCl को 90 g जल में विलयित किया जाए, तो NaCl का मोल भिन्न होगा :
Right Answer: 0.0196
मोल प्रभाज निकालने के लिए पहले दोनों घटकों के मोल ज्ञात किए जाते हैं। सोडियम क्लोराइड का मोलर द्रव्यमान 58.5 ग्राम प्रति मोल है, अतः 5.85 ग्राम में 0.1 मोल होंगे। जल का मोलर द्रव्यमान 18 ग्राम प्रति मोल है, अतः 90 ग्राम जल में ठीक 5 मोल होंगे। कुल मोल 0.1 जोड़ 5 अर्थात् 5.1 हुए। सोडियम क्लोराइड का मोल प्रभाज उसके मोल को कुल मोल से भाग देने पर मिलता है, अर्थात् 0.1 बटा 5.1 जो लगभग 0.0196 आता है। यहाँ लवण के आयनन को गणना में नहीं लिया गया है।