Biology: 60 MCQs with Answers
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0%Q41. ओस्टिक्थीज़ के संदर्भ में सही कथन अथवा कथनों का चयन कीजिए :
(a) इनमें वायु कोष उपस्थित होता है।
(b) इनमें चार जोड़ी क्लोम छिद्र दोनों ओर प्रच्छद से ढके होते हैं।
(c) त्वचा प्लेकोइड शल्कों से ढकी होती है।
Right Answer: (a) व (b)
ओस्टिक्थीज अर्थात् अस्थिल मछलियों का अन्तःकंकाल अस्थिमय होता है। इनमें प्रायः वायु कोष अथवा वाताशय पाया जाता है, जो उत्प्लावन नियंत्रित कर मछली को बिना निरन्तर तैरे जल में स्थिर रहने देता है। इनके शरीर के दोनों ओर चार जोड़ी क्लोम छिद्र होते हैं, जो हड्डीदार प्रच्छद अर्थात् ऑपरकुलम से ढके रहते हैं। तीसरा कथन गलत है, क्योंकि प्लेकोइड शल्क उपास्थिल मछलियों अर्थात् कॉन्ड्रिक्थीज की विशेषता हैं; अस्थिल मछलियों की त्वचा साइक्लॉइड अथवा टीनॉइड शल्कों से ढकी होती है। रोहू, कतला तथा हिप्पोकैम्पस इसी वर्ग के हैं।
Q42. मधुमक्खी पालन में उपयोग किये जाने वाले कृत्रिम छत्ते के भागों को नीचे से ऊपर की ओर क्रम में व्यवस्थित कीजिए :
(a) ऊपरी कक्ष
(b) मधु प्रकोष्ठ
(c) अध्यासन कक्ष
(d) रानी पृथक्कारक
Right Answer: (c), (d), (b), (a)
आधुनिक मधुमक्खी पालन में न्यूटन अथवा लैंगस्ट्रॉथ प्रकार का चल-फ्रेम छत्ता प्रयुक्त होता है, जिसमें भाग नीचे से ऊपर की ओर एक निश्चित क्रम में रखे जाते हैं। सबसे नीचे तलपट के ऊपर अध्यासन कक्ष होता है, जहाँ रानी अण्डे देती है और शिशु मधुमक्खियाँ पलती हैं। उसके ऊपर रानी पृथक्कारक की जाली लगाई जाती है, जिसके छिद्रों से श्रमिक तो निकल जाते हैं किन्तु बड़े आकार की रानी ऊपर नहीं जा पाती। उसके ऊपर मधु प्रकोष्ठ रखा जाता है, जहाँ शुद्ध शहद संचित होता है, और सबसे ऊपर ऊपरी कक्ष अर्थात् आवरण रहता है।
Q43. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :
कॉलम-I
(a) ज्वारीय आयतन
(b) अंतःश्वसन सुरक्षित आयतन
(c) निःश्वसन सुरक्षित आयतन
(d) अवशिष्ट आयतन
कॉलम-II
(i) 2500-3000 मिली वायु
(ii) 1000-1100 मिली वायु
(iii) 500 मिली वायु
(iv) 1100-1200 मिली वायु
Right Answer: (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iv)
ज्वारीय आयतन वह वायु है जो सामान्य श्वसन में एक बार अन्दर ली या बाहर छोड़ी जाती है और यह लगभग 500 मिलीलीटर होती है। अंतःश्वसन सुरक्षित आयतन वह अतिरिक्त वायु है जिसे सामान्य अन्तःश्वसन के बाद बलपूर्वक और भीतर खींचा जा सके, जो लगभग 2500 से 3000 मिलीलीटर होती है। निःश्वसन सुरक्षित आयतन सामान्य निःश्वसन के बाद बलपूर्वक बाहर निकाली जा सकने वाली वायु है, लगभग 1000 से 1100 मिलीलीटर। अवशिष्ट आयतन वह वायु है जो अधिकतम निःश्वसन के बाद भी फेफड़ों में शेष रह जाती है, लगभग 1100 से 1200 मिलीलीटर।
Q44. निम्नलिखित में से सही कथन का चयन कीजिए :
Right Answer: ट्राइकोडर्मा पॉलीस्पोरम द्वारा साइक्लोस्पोरिन A का उत्पादन होता है।
साइक्लोस्पोरिन A का उत्पादन ट्राइकोडर्मा पॉलीस्पोरम नामक कवक से किया जाता है और यह प्रतिरक्षा-निरोधक औषधि के रूप में अंग-प्रत्यारोपण के रोगियों में प्रयुक्त होती है, जिससे प्रतिरोपित अंग अस्वीकृत न हो। शेष तीनों कथन गलत हैं। एस्पर्जिलस नाइजर से एसीटिक अम्ल नहीं, बल्कि सिट्रिक अम्ल प्राप्त होता है; एसीटिक अम्ल एसीटोबैक्टर एसिटी से बनता है। स्टैटिन्स का उत्पादन मोनैस्कस पर्पुरियस नामक यीस्ट से होता है और वे रक्त कोलेस्टेरॉल घटाती हैं। लैक्टिक अम्ल के व्यावसायिक उत्पादन में लैक्टोबैसिलस जीवाणु का उपयोग होता है।
Q45. निम्नलिखित में से गलत जोड़ा चुनिए : सामान्य जुकाम हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी
Right Answer: सामान्य जुकाम – हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी
सामान्य जुकाम किसी जीवाणु से नहीं, बल्कि राइनोवाइरस नामक विषाणु से होता है, जिसकी दो सौ से अधिक किस्में ज्ञात हैं; अतः उसे हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी से जोड़ना गलत है। हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी तो न्यूमोनिया एवं मस्तिष्कावरण शोथ से सम्बद्ध जीवाणु है। शेष तीनों जोड़े सही हैं — मलेरिया प्लैज़्मोडियम नामक प्रोटोजोआ से होता है और मादा एनोफिलीज मच्छर द्वारा फैलता है, दाद माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटन तथा एपिडर्मोफाइटन नामक कवकों से होता है, और हस्तिपाद वुचेरेरिया बैंक्रोफ्टाई नामक फाइलेरिया कृमि से होता है।
Q46. गुणसूत्रों का एक एकल सेट जिसमें एक प्रजाति के प्रत्येक प्रकार के गुणसूत्र की एक प्रति होती है, कहलाता है :
Right Answer: एकगुणित सेट
गुणसूत्रों का वह एकल समुच्चय जिसमें किसी प्रजाति के प्रत्येक प्रकार के गुणसूत्र की केवल एक प्रति उपस्थित हो, एकगुणित अर्थात् मोनोप्लॉइड सेट कहलाता है और इसे x से निरूपित किया जाता है। यह उस प्रजाति का आधारभूत गुणसूत्र समुच्चय होता है। इसके विपरीत अगुणित अर्थात् हैप्लॉइड संख्या n युग्मक में उपस्थित गुणसूत्रों की वास्तविक संख्या है। द्विगुणित प्रजातियों में x तथा n बराबर होते हैं, किन्तु बहुगुणित प्रजातियों में नहीं; जैसे षड्गुणित गेहूँ में x छह होता है परन्तु n इक्कीस, क्योंकि उसमें तीन जीनोम सम्मिलित हैं।
Q47. यकृत निवाहिका तंत्र प्रारंभ होता है :
Right Answer: पाचन तंत्र से यकृत
यकृत निवाहिका तंत्र एक विशिष्ट शिरा-तंत्र है, जो पाचन तंत्र से आरम्भ होकर यकृत में समाप्त होता है। आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत, अग्न्याशय तथा प्लीहा से आने वाली शिराएँ मिलकर यकृत निवाहिका शिरा बनाती हैं, जो अवशोषित पोषक तत्वों से भरा रक्त सीधे हृदय भेजने के बजाय पहले यकृत में ले जाती है। यहाँ यकृत ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में संचित करता है, अमीनो अम्लों का विऐमीनीकरण करता है तथा विषैले पदार्थों एवं औषधियों को निष्प्रभावी बनाता है। यह निवाहिका तंत्र इसलिए कहलाता है क्योंकि इसके दोनों सिरों पर केशिका जाल होता है।
Q48. निम्नलिखित में से कौन - सा लक्षण सभी साइनोबैक्टीरिया के लिए सत्य नहीं है ?
Right Answer: उनमें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करने की क्षमता होती है।
साइनोबैक्टीरिया अर्थात् नील-हरित शैवाल प्रोकैरियोटिक जीव हैं, अतः उनमें झिल्लीबद्ध केन्द्रक तथा अन्य झिल्लीबद्ध कोशिकांग नहीं होते। उनमें क्लोरोफिल-a पाया जाता है, जिससे वे ऑक्सीजन मुक्त करने वाला प्रकाश संश्लेषण करते हैं, और उनकी कोशिका भित्ति सेलुलोज की नहीं बल्कि पेप्टिडोग्लाइकन की बनी होती है। पहला कथन सभी के लिए सत्य नहीं है, क्योंकि नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्षमता केवल उन्हीं जातियों में होती है जिनमें हेटरोसिस्ट नामक विशिष्ट मोटी भित्ति वाली कोशिकाएँ बनती हैं, जैसे एनाबीना एवं नॉस्टॉक; अनेक अन्य साइनोबैक्टीरिया यह कार्य नहीं करते।
Q49. निम्नलिखित में से कौन - सा लाख का सर्वाधिक शुद्ध रूप है ?
Right Answer: शैल लाख
लाख लैसिफर लैका नामक कीट के स्राव से प्राप्त होने वाला प्राकृतिक रेजिन है, जिसे कुसुम, पलाश तथा बेर जैसे पोषक वृक्षों की टहनियों से खुरचकर एकत्र किया जाता है। इसका कच्चा रूप छड़ी लाख कहलाता है, जिसे कूटकर एवं धोकर दानेदार बीज लाख प्राप्त होता है। बीज लाख को गरम कर छानने तथा पतली चादर के रूप में फैलाकर सुखाने पर शैल लाख बनता है, जो लाख का सर्वाधिक शुद्ध एवं परिष्कृत रूप है। शैल लाख का उपयोग वार्निश, पॉलिश, विद्युत रोधक, सीलिंग वैक्स तथा खाद्य पदार्थों की परत चढ़ाने में होता है।
Q50. विदलन के रेखांशिक तल में, विदलन खाँच का निर्माण होता है :
Right Answer: जन्तु ध्रुव व पीतक ध्रुव के मध्य से गुजरती हुई
विदलन के तल के आधार पर उसे रेखांशिक तथा अक्षांशिक वर्गों में बाँटा जाता है। रेखांशिक अथवा मध्याह्नीय विदलन में विदलन खाँच अण्डे के जन्तु ध्रुव से आरम्भ होकर उसके केन्द्र से गुजरती हुई पीतक ध्रुव तक पहुँचती है, ठीक उसी प्रकार जैसे पृथ्वी पर देशान्तर रेखाएँ दोनों ध्रुवों को जोड़ती हैं। इससे बनने वाली दोनों कोशिकाएँ प्रायः समान आकार की होती हैं और दोनों में पीतक का वितरण भी समान रहता है। इसके विपरीत अक्षांशिक विदलन की खाँच विषुवतीय तल के समानान्तर चलती है और मेढक में यह विषुवतीय तल के कुछ ऊपर पड़ती है।