Sociology: 60 MCQs with Answers
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0%Q41. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से किन्होंने ‘डिस्कवरिंग सोशियोलॉजी : स्टडीज इन सोशियोलॉजिकल थ्योरी ऐण्ड मेथड’ का लेखन किया है ?
Right Answer: जॉन रेक्स
‘डिस्कवरिंग सोशियोलॉजी : स्टडीज इन सोशियोलॉजिकल थ्योरी ऐण्ड मेथड’ के लेखक ब्रिटिश समाजशास्त्री जॉन रेक्स हैं। इस कृति में उन्होंने समाजशास्त्रीय सिद्धान्त एवं पद्धति के आधारभूत प्रश्नों की विवेचना की। रेक्स संघर्ष सिद्धान्त के प्रमुख प्रवक्ता माने जाते हैं और उन्होंने पारसन्स के प्रकार्यवादी सन्तुलन-प्रतिमान की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि समाज को समझने की कुंजी सहमति नहीं, बल्कि हितों का संघर्ष है। उन्होंने नस्लीय सम्बन्धों तथा नगरीय समाजशास्त्र पर भी महत्त्वपूर्ण कार्य किया, विशेषतः ‘रेस, कम्युनिटी ऐण्ड कॉन्फ्लिक्ट’ में।
Q42. यह किनका मत है, ‘अन्य किसी भी विज्ञान से अधिक, समाजशास्त्र, यह मेरा विश्वास है, ने दार्शनिक प्रश्नों के नवीनीकरण को प्रस्तुत करने में योगदान किया है’ ?
Right Answer: एमील दुर्खीम
यह कथन एमील दुर्खीम का है। उनका विश्वास था कि समाजशास्त्र ने दर्शन के अनेक चिरन्तन प्रश्नों को नए सिरे से उठाने और उन्हें अनुभवजन्य आधार देने में अन्य किसी विज्ञान से अधिक योगदान किया है। नैतिकता, धर्म, ज्ञान की श्रेणियाँ तथा व्यक्ति एवं समाज का सम्बन्ध — ये सभी पहले विशुद्ध दार्शनिक चिन्तन के विषय थे। दुर्खीम ने ‘द एलीमेंट्री फॉर्म्स ऑफ रिलीजियस लाइफ’ में दिखाया कि समय, स्थान एवं कारणता जैसी मूल श्रेणियाँ भी सामाजिक उद्गम रखती हैं। इस प्रकार उन्होंने दर्शन के प्रश्नों को समाजशास्त्रीय अनुसंधान का विषय बना दिया।
Q43. रॉबर्ट के० मर्टन के अनुसार ‘भूमिका सम्बन्धों का पूरक (कॉम्प्लीमेंट) जो व्यक्तियों के पास एक विशिष्ट प्रस्थिति की प्राप्ति के आधार के द्वारा पाया जाता है’, कहलाता है :
Right Answer: भूमिका-सेट (रोल - सेट)
रॉबर्ट के० मर्टन ने भूमिका-सेट की अवधारणा दी। इसका अर्थ है भूमिका सम्बन्धों का वह पूरक समुच्चय जो व्यक्ति को किसी एक विशिष्ट सामाजिक प्रस्थिति को धारण करने मात्र से प्राप्त हो जाता है। उदाहरणतः विद्यालय के अध्यापक की एक ही प्रस्थिति उसे विद्यार्थियों, सहकर्मियों, प्रधानाचार्य तथा अभिभावकों के साथ अलग-अलग भूमिका सम्बन्धों में बाँध देती है। इससे भिन्न प्रस्थिति-सेट का अर्थ है वे सभी प्रस्थितियाँ जो एक ही व्यक्ति एक समय में धारण करता है। भूमिका-सेट के भीतर की परस्पर विरोधी अपेक्षाएँ भूमिका-तनाव को जन्म देती हैं।
Q44. एक व्यापक स्तर के निदर्श के आधार पर जॉर्ज पीटर मर्डाक का दावा है कि परिवार एक सार्वभौमिक सामाजिक संस्था है। व्यापक स्तर का यह निदर्श निर्मित होता है :
Right Answer: दो सौ पचास समाजों से
जॉर्ज पीटर मर्डाक ने 1949 में प्रकाशित अपनी कृति ‘सोशल स्ट्रक्चर’ में विश्व के दो सौ पचास समाजों के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर दावा किया कि परिवार एक सार्वभौमिक सामाजिक संस्था है। उनके निदर्श में आखेटक-संग्राहक समुदायों से लेकर औद्योगिक समाजों तक की विविधता सम्मिलित थी। मर्डाक के अनुसार परिवार चार आधारभूत प्रकार्य पूरे करता है — लैंगिक, आर्थिक, पुनरुत्पादक तथा शैक्षिक। बाद के विद्वानों ने इजरायल के किबुत्ज तथा जमैका एवं नायर समाजों के उदाहरण देकर इस सार्वभौमिकता की आलोचना की, किन्तु मर्डाक का यह अध्ययन आज भी आधारभूत माना जाता है।
Q45. यह किनका मत है, ‘एक पारिभाषिक शब्द के रूप में सामाजिक संरचना को अन्तःसम्बन्धित संस्थाओं के विशिष्ट क्रम, अभिकरण एवं सामाजिक प्रतिरूप (पैटर्न) साथ ही प्रस्थिति एवं भूमिकाओं जिन्हें प्रत्येक व्यक्ति ने समूह में प्राप्त किया है, के ऊपर लागू किया जाता है’ ?
Right Answer: टालकट पारसन्स
यह परिभाषा टालकट पारसन्स की है, जिसमें सामाजिक संरचना को अन्तःसम्बन्धित संस्थाओं, अभिकरणों एवं सामाजिक प्रतिरूपों के विशिष्ट क्रम तथा समूह में प्रत्येक व्यक्ति द्वारा धारण की गई प्रस्थितियों और भूमिकाओं पर लागू किया गया है। पारसन्स के प्रकार्यवादी चिन्तन में समाज एक व्यवस्था है, जिसकी आधारभूत इकाई भूमिका है और जिसके भाग एक-दूसरे से जुड़कर सन्तुलन बनाए रखते हैं। इसके विपरीत रैडक्लिफ-ब्राउन सामाजिक संरचना को वास्तव में विद्यमान व्यक्तियों के सम्बन्धों का जाल मानते थे, जबकि मर्टन ने मध्यम स्तरीय सिद्धान्तों पर बल दिया।
Q46. निम्नलिखित सदस्यों में से किन्होंने संविधान सभा में जनजातीय लोगों के लिए ‘आदिवासी’ पारिभाषिक शब्द के प्रयोग पर बल दिया ?
Right Answer: जयपाल सिंह मुण्डा
जयपाल सिंह मुण्डा संविधान सभा में जनजातीय समुदायों के सर्वाधिक मुखर प्रतिनिधि थे। स्वयं मुण्डा समुदाय से आने वाले और ऑक्सफोर्ड से शिक्षित जयपाल सिंह 1928 के ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रहे। संविधान सभा में उन्होंने ‘जनजाति’ अथवा ‘आदिम जाति’ जैसे शब्दों के स्थान पर ‘आदिवासी’ शब्द के प्रयोग पर बल दिया, क्योंकि इसका अर्थ है मूल निवासी और यह इन समुदायों को गरिमा प्रदान करता है। उन्होंने स्वयं को ‘जंगली’ कहकर सभा को जनजातीय शोषण के इतिहास की याद दिलाई और उनके अधिकारों की पुरजोर वकालत की।
Q47. निम्नलिखित में से किस समाजशास्त्री का यह कथन है, ‘परिवार सामाजिक एवं सांस्कृतिक पूँजी का, अपने सदस्यों के समाजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा, संग्रह है ?
Right Answer: पियरे बोर्दियो
फ्रांसीसी समाजशास्त्री पियरे बोर्दियो ने पूँजी की अवधारणा को आर्थिक क्षेत्र से बाहर विस्तारित किया और सांस्कृतिक, सामाजिक तथा प्रतीकात्मक पूँजी की बात की। उनके अनुसार परिवार वह मुख्य स्थल है जहाँ समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा सामाजिक एवं सांस्कृतिक पूँजी का संचय एवं हस्तान्तरण होता है। बच्चे को भाषा, अभिरुचि, शिष्टाचार तथा सम्पर्कों का जो भण्डार परिवार से मिलता है, वही उसका ‘हैबिटस’ बनाता है और विद्यालय में उसकी सफलता निर्धारित करता है। इसी से बोर्दियो ने समझाया कि शिक्षा व्यवस्था अवसर की समानता देने के बजाय वर्गीय असमानता का पुनरुत्पादन करती है।
Q48. निम्नलिखित में से कौन ‘द ग्रेट ट्रान्सफॉर्मेशन : द पॉलिटिकल ऐण्ड इकोनॉमिक ओरिजिन ऑफ ऑवर टाइम’ शीर्षक की पुस्तक के लेखक हैं ?
Right Answer: कार्ल पोलानयी
‘द ग्रेट ट्रान्सफॉर्मेशन : द पॉलिटिकल ऐण्ड इकोनॉमिक ओरिजिन ऑफ आवर टाइम’ के लेखक हंगेरियन-अमेरिकी विचारक कार्ल पोलानयी हैं। 1944 में प्रकाशित इस कृति में उन्होंने दिखाया कि स्वनियमित बाजार कोई प्राकृतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि राज्य के सचेत हस्तक्षेप से गढ़ी गई संस्था है। उन्होंने भूमि, श्रम तथा मुद्रा को ‘काल्पनिक वस्तुएँ’ कहा, क्योंकि इनका उत्पादन बिक्री के लिए नहीं हुआ। पोलानयी का प्रसिद्ध सिद्धान्त ‘द्विगामी गति’ बताता है कि बाजार के विस्तार के विरुद्ध समाज स्वयं को बचाने हेतु प्रतिरोधात्मक आन्दोलन खड़ा करता है।
Q49. निम्नलिखित में से किस अनुशास्ति (सैंक्शन) को ऑगबर्न एवं निमकॉफ ने सामाजिक नियन्त्रण की प्रक्रिया के विवेचन में अभिव्यक्त नहीं किया है ?
Right Answer: राजनीतिक अनुशास्ति
ऑगबर्न एवं निमकॉफ ने सामाजिक नियन्त्रण की प्रक्रिया की विवेचना करते हुए अनुशास्तियों को तीन वर्गों में रखा। शारीरिक अथवा भौतिक अनुशास्ति में दण्ड, कारावास तथा बल-प्रयोग आते हैं। आर्थिक अनुशास्ति में जुर्माना, बहिष्कार, आजीविका से वंचित करना अथवा पुरस्कार एवं प्रोत्साहन सम्मिलित हैं। सामाजिक-मनोवैज्ञानिक अनुशास्ति में प्रशंसा, उपहास, निन्दा, सम्मान तथा सामाजिक बहिष्कार जैसे अनौपचारिक साधन आते हैं, जो प्रायः सर्वाधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं। राजनीतिक अनुशास्ति को उन्होंने पृथक श्रेणी के रूप में नहीं गिनाया, अतः यही उत्तर है।
Q50. निम्नलिखित महत्वपूर्ण पुस्तकों में से किस पुस्तक में हम प्रारम्भ के दो पाठ ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ऐन इण्डिविजुअल पास्टाइम’ एवं ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ए फॉर्म ऑफ कॉन्शियसनेस’ शीर्षक से पाते हैं ?
Right Answer: इनविटेशन टू सोशियोलॉजी - पीटर एल० बर्जर
‘इनविटेशन टू सोशियोलॉजी : ए ह्यूमनिस्टिक पर्सपेक्टिव’ के लेखक पीटर एल० बर्जर हैं और यह 1963 में प्रकाशित हुई। इसके आरम्भिक दो अध्याय क्रमशः ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ऐन इण्डिविजुअल पास्टाइम’ तथा ‘सोशियोलॉजी ऐज़ ए फॉर्म ऑफ कॉन्शियसनेस’ शीर्षक से हैं। बर्जर का प्रसिद्ध कथन है कि समाजशास्त्र का प्रथम ज्ञान यही है कि वस्तुएँ वैसी नहीं होतीं जैसी वे दिखाई देती हैं। उन्होंने समाजशास्त्रीय दृष्टि को एक ऐसी चेतना बताया जो प्रचलित मान्यताओं का पर्दाफाश करती है। थॉमस लकमैन के साथ लिखी उनकी कृति ‘द सोशल कंस्ट्रक्शन ऑफ रियलिटी’ भी अत्यन्त प्रसिद्ध है।