Sociology: 60 MCQs with Answers
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0%Q31. निम्नलिखित मतों (स्टेटमेण्ट्स) में से कौन-सा जाति एवं जनजाति के मुख्य (बेसिक) अन्तर को व्यक्त करता है ?
Right Answer: जाति संस्तरणमूलक है जबकि जनजाति स्वायत्तशासी है।
जाति एवं जनजाति के बीच मूल अन्तर संस्तरण का है। जाति व्यवस्था अनिवार्यतः संस्तरणमूलक है, जिसमें प्रत्येक जाति का स्थान ऊँच-नीच के क्रम में निश्चित रहता है और शुद्धता-अशुद्धता की धारणा उस क्रम को बनाए रखती है। इसके विपरीत जनजाति सामान्यतः स्वायत्तशासी एवं समतामूलक इकाई होती है, जिसका अपना भू-क्षेत्र, अपनी भाषा तथा अपनी पंचायत होती है और वह किसी बृहत्तर संस्तरण का अंग नहीं होती। शेष विकल्प भ्रामक हैं, क्योंकि जनजातीय सदस्यता भी जन्म से ही निर्धारित होती है और जनजातियों के अपने धार्मिक विश्वास भी होते हैं।
Q32. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से यह किसका मत है, ‘व्यवहार जो संस्थागत अपेक्षाओं, अर्थात्एक सामाजिक व्यवस्था के अन्तर्गत वैधानिक रूप में मान्य एवं साझेदार अपेक्षाओं, का उल्लंघन हो’, विचलन कहलाता है ?
Right Answer: टालकट पारसन्स
टालकट पारसन्स ने विचलन को उस व्यवहार के रूप में परिभाषित किया जो संस्थागत अपेक्षाओं का उल्लंघन करता है, अर्थात् उन अपेक्षाओं का जो किसी सामाजिक व्यवस्था के भीतर वैधानिक रूप से मान्य एवं सदस्यों द्वारा साझा की गई हों। उनके प्रकार्यवादी दृष्टिकोण में सामाजिक व्यवस्था तभी बनी रहती है जब व्यक्ति मूल्यों एवं मानकों को समाजीकरण द्वारा आत्मसात कर लें और भूमिका-अपेक्षाओं के अनुरूप आचरण करें। इस अनुरूपता में आई विफलता ही विचलन है, जिसे सामाजिक नियंत्रण के तंत्र नियंत्रित करते हैं। मर्टन ने इसे लक्ष्य एवं साधन के तनाव से समझाया।
Q33. निम्नलिखित में से किस समाजशास्त्री ने सामाजिक समूहों के वर्गीकरण हेतु पन्द्रह मानदण्डों (क्राइटेरिया) को प्रस्तावित किया है ?
Right Answer: जॉर्जेज गुरविच
फ्रांसीसी समाजशास्त्री जॉर्जेज गुरविच ने सामाजिक समूहों के वर्गीकरण के लिए पन्द्रह मानदण्ड प्रस्तावित किए, जो समाजशास्त्र में सर्वाधिक विस्तृत वर्गीकरण योजनाओं में गिने जाते हैं। इनमें समूह का आकार, अवधि, कार्य, प्रवेश की सुगमता, चेतना का स्तर, संगठन की मात्रा, संस्तरण, प्रभुत्व का स्वरूप तथा सामाजिक नियंत्रण की पद्धति जैसे आधार सम्मिलित हैं। गुरविच का उद्देश्य यह दिखाना था कि सामाजिक वास्तविकता बहुस्तरीय एवं गतिशील है, इसलिए उसे किसी एक कसौटी से नहीं समझा जा सकता। थियोडोर मिल्स एवं होमन्स ने लघु समूहों पर कार्य किया।
Q34. निम्नलिखित समाजशास्त्रियों में से किन्होंने ‘मिरर्स ऑफ वायलेन्स : कम्युनिटीज, रॉइट्स ऐण्ड सरवायवर्स इन साउथ एशिया’ का सम्पादन किया है ?
Right Answer: वीना दास
‘मिरर्स ऑफ वायलेन्स : कम्युनिटीज, रॉइट्स ऐण्ड सरवायवर्स इन साउथ एशिया’ का सम्पादन प्रसिद्ध भारतीय समाजशास्त्री एवं मानवशास्त्री वीना दास ने किया। 1990 में प्रकाशित यह संग्रह दक्षिण एशिया में साम्प्रदायिक दंगों, सामूहिक हिंसा तथा उससे बचे लोगों के अनुभवों पर केन्द्रित है। इसमें विशेष रूप से 1984 के सिख-विरोधी दंगों का अध्ययन सम्मिलित है। वीना दास ने दिखाया कि हिंसा केवल घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रक्रिया है जो पीड़ितों के दैनिक जीवन, स्मृति एवं सामुदायिक सम्बन्धों में लम्बे समय तक बनी रहती है।
Q35. निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता समाजशास्त्र के साथ सम्बद्ध है ?
Right Answer: समाजशास्त्र ‘सामाजिक व्यवस्थाओं’ का वैज्ञानिक अध्ययन है।
समाजशास्त्र की सर्वमान्य विशेषता यह है कि वह सामाजिक व्यवस्थाओं, सामाजिक सम्बन्धों एवं सामाजिक संस्थाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है। इसका अर्थ है कि वह व्यवस्थित प्रेक्षण, प्रमाण-संग्रह तथा तार्किक विश्लेषण के माध्यम से निष्कर्ष निकालता है। यह ‘समाज कैसा होना चाहिए’ का नैतिक विवेचन नहीं करता, क्योंकि वह मूल्य-निर्णय दर्शन एवं नीतिशास्त्र का क्षेत्र है। यह सामाजिक कार्य का व्यावसायिक प्रशिक्षण भी नहीं है, यद्यपि सामाजिक कार्य उसकी अन्तर्दृष्टियों का उपयोग करता है। और न ही यह मात्र आँकड़े जुटाने वाला सामाजिक अंकगणित है।
Q36. समाजशास्त्रियों के निम्नलिखित समुच्चयों में से किस समुच्चय ने जातीय गतिशीलता की संरचनात्मक प्रक्रिया के विश्लेषण में ‘संदर्भ समूह’ की अवधारणा प्रयुक्त की है ?
Right Answer: वाई० बी० दामले एवं ओ० एम० लिंच
संदर्भ समूह की अवधारणा मूलतः हरबर्ट हाइमन ने दी और रॉबर्ट मर्टन ने इसे विकसित किया। इसका आशय उस समूह से है जिसके मानकों एवं जीवन-शैली को व्यक्ति अपने मूल्यांकन तथा अनुकरण का आधार बनाता है। भारत में वाई० बी० दामले तथा ओ० एम० लिंच ने इसी अवधारणा का प्रयोग जातीय गतिशीलता की संरचनात्मक प्रक्रिया के विश्लेषण में किया। उन्होंने दिखाया कि निम्न जातियाँ उच्च जातियों को संदर्भ समूह मानकर उनकी रीतियाँ अपनाती हैं और सामाजिक प्रस्थिति ऊँची करने का प्रयास करती हैं। यह प्रक्रिया श्रीनिवास के संस्कृतीकरण से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है।
Q37. कार्ल मार्क्स के मत में निम्नलिखित में से कौन-सा वर्ग ‘संक्रमणकालीन’ वर्ग के रूप में भी जाना जाता है ?
Right Answer: पैटि बुर्जुआ
कार्ल मार्क्स ने पूँजीवादी समाज में दो मुख्य वर्ग बताए — उत्पादन के साधनों के स्वामी बुर्जुआ तथा केवल श्रमशक्ति बेचने वाले प्रोलिटेरिएट। इनके बीच पैटि बुर्जुआ अर्थात् लघु बुर्जुआ वर्ग आता है, जिसमें छोटे दुकानदार, कारीगर तथा स्वतंत्र किसान सम्मिलित हैं। यह वर्ग उत्पादन के साधनों का स्वामी भी है और स्वयं श्रम भी करता है, इसीलिए इसे संक्रमणकालीन वर्ग कहा गया। मार्क्स के अनुसार पूँजी के केन्द्रीयकरण एवं प्रतिस्पर्धा के दबाव में यह वर्ग क्रमशः विघटित होकर प्रोलिटेरिएट में मिल जाएगा। दास एवं सर्फ पूर्ववर्ती उत्पादन पद्धतियों के वर्ग हैं।
Q38. ए० वाल्कर एवं सी० वाल्कर के मतानुसार नागरिकता के नागरिकीय (सिविल), राजनीतिक एवं सामाजिक अधिकारों के नकार अथवा उनकी गैर-प्राप्ति (नॉन- रीयलाइजेशन) की स्थितियों से निर्मित अवधारणा कहलाती है :
Right Answer: सामाजिक बहिष्करण
ए० वाल्कर तथा सी० वाल्कर ने सामाजिक बहिष्करण को नागरिकता के नागरिकीय, राजनीतिक एवं सामाजिक अधिकारों के नकार अथवा उनकी गैर-प्राप्ति की स्थिति के रूप में परिभाषित किया। यह अवधारणा टी० एच० मार्शल की नागरिकता सम्बन्धी त्रिविध रूपरेखा पर आधारित है। सामाजिक बहिष्करण केवल आय की निर्धनता नहीं है, बल्कि एक बहुआयामी एवं प्रक्रियात्मक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति या समूह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास तथा निर्णय-प्रक्रिया में भागीदारी से व्यवस्थित रूप से वंचित रह जाते हैं। भारत में जाति, जनजाति एवं लिंग आधारित बहिष्करण इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
Q39. वर्ष 1947 में निम्नलिखित में से कौन-से विश्वविद्यालय में भारत में समाजशास्त्र विभाग पठन हेतु नहीं था ?
Right Answer: मद्रास
भारत में समाजशास्त्र के औपचारिक अध्यापन का आरम्भ बीसवीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों में हुआ। कलकत्ता विश्वविद्यालय में 1917 से समाजशास्त्र पढ़ाया जाने लगा, बम्बई विश्वविद्यालय में 1919 में पैट्रिक गिडीज के नेतृत्व में समाजशास्त्र विभाग की स्थापना हुई और लखनऊ विश्वविद्यालय में 1921 में राधाकमल मुखर्जी ने विभाग आरम्भ किया, जहाँ आगे चलकर डी० पी० मुकर्जी एवं डी० एन० मजूमदार भी रहे। मद्रास विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग बहुत बाद में 1959 में स्थापित हुआ, इसलिए 1947 में वहाँ यह विषय पठन हेतु उपलब्ध नहीं था।
Q40. रेमण्ड विलियम्स ने एक निबन्ध ‘कल्चर इज़ ऑर्डिनरी’ में उन दो पक्षों को प्रस्तुत किया है, जो एक संस्कृति के पास होते हैं। निम्नलिखित में से उन दो पक्षों को रेखांकित करें :
Right Answer: ज्ञात अर्थ एवं दिशायें
रेमण्ड विलियम्स सांस्कृतिक अध्ययन के संस्थापकों में गिने जाते हैं। अपने प्रसिद्ध निबन्ध ‘कल्चर इज़ ऑर्डिनरी’ में उन्होंने संस्कृति को अभिजात वर्ग की विशिष्ट सम्पत्ति मानने की परम्परा को अस्वीकार किया और कहा कि संस्कृति सामान्य जन के दैनिक जीवन में ही निहित है। उनके अनुसार प्रत्येक संस्कृति के दो पक्ष होते हैं — पहला, ज्ञात अर्थ एवं दिशाएँ, जिनमें उसके सदस्य प्रशिक्षित होते हैं और जो परम्परा से प्राप्त होते हैं; तथा दूसरा, नवीन प्रेक्षण एवं अर्थ, जो अनुभव से निरन्तर गढ़े जाते रहते हैं। इस प्रकार संस्कृति परम्परागत भी है और सृजनशील भी।