Music - Musicians and Gharanas: 15 MCQs with Answers
Music- Musicians and Gharanas
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0%Q1. पं० किशन महाराज को किस वर्ष ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया ?
Right Answer: 2002
Explanation:
पण्डित किशन महाराज बनारस घराने के विश्वविख्यात तबला वादक थे, जिनका जन्म 1923 में वाराणसी में हुआ और जिन्होंने अपने पिता हरि महाराज तथा चाचा कण्ठे महाराज से शिक्षा प्राप्त की। उन्हें 1973 में पद्मश्री और 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वे अपनी अद्भुत लयकारी, चक्रदार परनों तथा गायन एवं नृत्य दोनों के साथ संगत की असाधारण क्षमता के लिए प्रसिद्ध रहे। उन्होंने बनारस बाज की खुली एवं गूँजदार शैली को अन्तर्राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया। 2008 में उनका निधन हुआ।
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Q2. अन्नपूर्णा देवी शिष्य थीं :
Right Answer: अल्लाउद्दीन खाँ की
Explanation:
अन्नपूर्णा देवी बाबा अल्लाउद्दीन खाँ की पुत्री एवं शिष्या थीं और उन्होंने मैहर-सेनिया घराने की सम्पूर्ण परम्परा अपने पिता से ही प्राप्त की। वे सुरबहार की असाधारण वादिका थीं, जिनके वादन में ध्रुपद अंग की गम्भीरता एवं आलाप का विस्तृत विवेचन मिलता था। उनका विवाह पण्डित रविशंकर से हुआ था। उन्होंने बहुत पहले ही सार्वजनिक मंच से स्वयं को हटा लिया और शेष जीवन अध्यापन को समर्पित किया; हरिप्रसाद चौरसिया, निखिल बनर्जी तथा नित्यानन्द हल्दीपुर उनके प्रमुख शिष्य रहे।
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Q3. भिन्न को चुनिए :
Right Answer: सपाट
Explanation:
अचरक, कुरुला तथा सरोक — ये तीनों प्राचीन एवं मध्यकालीन ग्रन्थों में वर्णित गमक अर्थात् स्वर के कम्पनयुक्त अलंकरण के प्रकार हैं, जिन्हें गायन एवं वादन दोनों में स्वर को सुशोभित करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इसके विपरीत सपाट गमक नहीं, बल्कि तान का एक प्रकार है, जिसमें स्वर सीधे आरोह-अवरोह क्रम में बिना किसी वक्रता अथवा कम्पन के सपाट रूप में लिए जाते हैं। इसीलिए वर्ग की दृष्टि से सपाट ही भिन्न पड़ता है। तानों के अन्य प्रकारों में कूट, मिश्र, गिटकिरी तथा जबड़े की तान आते हैं।
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Q4. निम्नलिखित में से कौन - सा युग्म सुमेलित नहीं है ?
Right Answer: कासगंज, भेंडी बाजार – टप्पा
Explanation:
ध्रुपद की चार प्रमुख वाणियाँ गौड़हार, खंडार, नौहार तथा डागुर हैं, अतः खंडार एवं नौहार का ध्रुपद से सम्बन्ध सही है। ख्याल के प्रमुख घरानों में ग्वालियर, आगरा, किराना, जयपुर-अतरौली, पटियाला तथा भेंडी बाजार आते हैं, अतः किराना एवं आगरा का ख्याल से सम्बन्ध भी सही है। ठुमरी की दो प्रमुख शैलियाँ पूरब अंग तथा पंजाब अंग हैं। चौथा युग्म गलत है, क्योंकि भेंडी बाजार ख्याल गायकी का घराना है, टप्पा का नहीं; टप्पा की परम्परा पंजाब, ग्वालियर तथा बनारस से जुड़ी है और उसका विकास शोरी मियाँ ने किया।
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Q5. निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर तबला वादक को पहचानिए — (i) 1970 में पद्म भूषण से सम्मानित (ii) मुनीर खाँ के शिष्य
Right Answer: अहमद जान थिरकवा
Explanation:
उस्ताद अहमद जान थिरकवा बीसवीं शताब्दी के सर्वाधिक प्रभावशाली तबला वादक माने जाते हैं। उनका जन्म 1892 में मुरादाबाद में हुआ और उन्होंने लखनऊ घराने के उस्ताद मुनीर खाँ से दीर्घकाल तक तालीम प्राप्त की, यद्यपि उनके वादन में दिल्ली, अजराड़ा, फर्रुखाबाद तथा पंजाब — सभी बाजों का समावेश मिलता था। उन्हें 1954 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा 1970 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। ‘थिरकवा’ उपाधि उनकी उँगलियों की अद्भुत थिरकन के कारण मिली थी। 1976 में उनका निधन हुआ।
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Q6. ‘आफ़ताब - ए - सितार’ की उपाधि से सम्मानित संगीतज्ञ कौन हैं ?
Right Answer: विलायत खाँ
Explanation:
उस्ताद विलायत खाँ को ‘आफ़ताब-ए-सितार’ अर्थात् सितार का सूर्य की उपाधि से सम्मानित किया गया। इटावा अथवा इमदादखानी घराने से सम्बद्ध विलायत खाँ ने सितार पर गायकी अंग को चरम पर पहुँचाया, अर्थात् उन्होंने वाद्य से मानव कण्ठ जैसी मींड, गमक तथा बोल-अंग निकालने की शैली विकसित की। उन्होंने सितार की संरचना में भी परिवर्तन किए और ‘विलायतखानी सितार’ प्रचलित हुई। उन्होंने पद्मश्री तथा पद्म भूषण दोनों सम्मान लौटा दिए थे, यह कहते हुए कि चयन समिति उनके संगीत का मूल्यांकन करने में सक्षम नहीं है।
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Q7. मध्यकालीन भारतीय संगीत के प्रसिद्ध संगीतकारों का चयन कीजिए :
(i) रामामात्य
(ii) मतंग
(iii) स्वामी हरिदास
(iv) आचार्य बृहस्पति
Right Answer: (i), (iii)
Explanation:
रामामात्य सोलहवीं शताब्दी के विजयनगर दरबार से सम्बद्ध विद्वान थे, जिन्होंने 1550 में ‘स्वरमेलकलानिधि’ की रचना कर मेल पद्धति को व्यवस्थित रूप दिया। स्वामी हरिदास भी सोलहवीं शताब्दी के महान संत-संगीतज्ञ थे, जिन्हें तानसेन तथा बैजू बावरा का गुरु माना जाता है और जिन्होंने हवेली संगीत परम्परा को समृद्ध किया। ये दोनों मध्यकाल के हैं। इसके विपरीत मतंग प्राचीन काल के आचार्य थे, जिन्होंने ‘बृहद्देशी’ लिखकर सर्वप्रथम राग को परिभाषित किया, तथा आचार्य बृहस्पति बीसवीं शताब्दी के आधुनिक संगीत-विद्वान रहे।
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Q8. निम्नलिखित में कौन - सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
Right Answer: अजराड़ा – राम सहाय
Explanation:
तबले के छह प्रमुख घराने माने जाते हैं। दिल्ली घराने की स्थापना उस्ताद सिद्धार खाँ ने की, लखनऊ घराना मोदू खाँ तथा बख्शू खाँ से जुड़ा है, और फर्रुखाबाद घराने के प्रवर्तक हाजी विलायत अली खाँ थे। चौथा युग्म गलत है, क्योंकि राम सहाय बनारस घराने के संस्थापक थे, अजराड़ा के नहीं। अजराड़ा घराने की स्थापना दिल्ली घराने से निकले कल्लू खाँ तथा मीरू खाँ ने की थी और वह अपनी विशिष्ट लयकारी, आड़-कुआड़ तथा बायें के मधुर प्रयोग के लिए प्रसिद्ध है। छठा घराना पंजाब का है, जो पखावज अंग से प्रभावित रहा।
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Q9. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए (संगीतज्ञ – सृजित राग) :
संगीतज्ञ
A. रविशंकर
B. देबू चौधरी
C. ओंकार नाथ ठाकुर
D. तानसेन
सृजित राग
i. तिलक श्याम
ii. अनुरंजनी
iii. प्रणवरंजनी
iv. दरबारी कानड़ा
Right Answer: A-(i), B-(ii), C-(iii), D-(iv)
Explanation:
पण्डित रविशंकर ने अनेक नए रागों की रचना की, जिनमें तिलक श्याम, नट भैरव, परमेश्वरी, जोगेश्वरी तथा गंगेश्वरी प्रमुख हैं। सितार वादक एवं विद्वान पण्डित देबू चौधरी ने भी कई राग गढ़े, जिनमें अनुरंजनी उल्लेखनीय है। पण्डित ओंकारनाथ ठाकुर, जो गन्धर्व महाविद्यालय एवं बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से जुड़े रहे, प्रणवरंजनी के सृजनकर्ता माने जाते हैं। दरबारी कानड़ा की रचना अकबर के नवरत्न मियाँ तानसेन ने की और वह दरबार में रात्रि के अन्तिम प्रहर में गाया जाने वाला गम्भीर एवं भव्य राग है।
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Q10. निम्नलिखित में से किस संगीतज्ञ ने ‘ए० आर० कुरैशी’ नाम से फिल्मों में संगीत दिया ?
Right Answer: अल्लारक्खा खाँ
Explanation:
उस्ताद अल्लारक्खा खाँ ने हिन्दी फिल्मों में ‘ए० आर० कुरैशी’ के नाम से संगीत दिया, क्योंकि उनका पूरा नाम अल्लारक्खा कुरैशी था। उन्होंने ‘सबक’, ‘बेवफा’, ‘खानदान’ तथा ‘मां-बाप’ जैसी फिल्मों में संगीत निर्देशन किया। पंजाब घराने से सम्बद्ध यह महान तबला वादक मुख्यतः पण्डित रविशंकर के साथ अपनी अद्वितीय संगत तथा जुगलबन्दी के लिए विश्वविख्यात हुआ और उसी के माध्यम से तबले को अन्तर्राष्ट्रीय पहचान मिली। उन्हें पद्मश्री तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिले, और उस्ताद जाकिर हुसैन उनके पुत्र एवं शिष्य हैं।
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