Music - Musical Instruments and Techniques: 15 MCQs with Answers
Music- Musical Instruments and Techniques
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0%Q11. सितार वादन में मींड, घसीट, तोड़ा एवं झाला वादन का आरंभ किसने किया ?
Right Answer: इमदाद खाँ
Explanation:
उस्ताद इमदाद खाँ इटावा अथवा इमदादखानी घराने के प्रवर्तक थे और उन्हीं ने सितार तथा सुरबहार पर मींड, घसीट, तोड़ा एवं झाला के व्यवस्थित वादन का आरम्भ किया। मींड में एक स्वर से दूसरे स्वर तक तार खींचकर अविच्छिन्न सरकाव लाया जाता है, घसीट में उँगली को परदों पर सरकाकर स्वर जोड़े जाते हैं, तोड़ा द्रुत स्वर-समूहों की रचना है और झाला चिकारी के आघातों से बनने वाला अन्तिम तीव्र भाग। इन्हीं प्रयोगों से सितार पर गायकी अंग का मार्ग खुला, जिसे आगे उनके पुत्र इनायत खाँ तथा पौत्र विलायत खाँ ने चरम पर पहुँचाया।
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Q12. जिन वाद्यों के परदे खिसकाये नहीं जा सकते, वे क्या कहलाते हैं ?
Right Answer: अचल थाट
Explanation:
तंत्री वाद्यों को परदों की गतिशीलता के आधार पर दो वर्गों में बाँटा जाता है। जिन वाद्यों के परदे स्थिर रहते हैं और उन्हें खिसकाकर स्वर बदला नहीं जा सकता, वे अचल थाट वाले कहलाते हैं; इनमें राग बदलने पर परदों की स्थिति वैसी ही रहती है और वादक को अलग तकनीक से स्वर निकालना पड़ता है। तानपूरा, सरोद तथा सारंगी जैसे वाद्य इससे भिन्न हैं। इसके विपरीत सितार, वीणा तथा सुरबहार जैसे वाद्यों के परदे तार से बँधे होकर खिसकाए जा सकते हैं, अतः वे चल थाट वाले वाद्य कहलाते हैं और उन्हें राग के अनुसार समायोजित किया जाता है।
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Q13. मसीतखानी गतों की विशेषताओं में कौन - सा विकल्प असत्य है ?
Right Answer: मध्य तथा द्रुत लय प्रधान
Explanation:
मसीतखानी गत सितार वादन की विलम्बित गत है, जिसका विकास अठारहवीं शताब्दी में मसीत खाँ ने किया। इसकी रचना ध्रुपद अंग की गम्भीरता पर आधारित है, इसमें मींड एवं गमक के प्रचुर प्रयोग से श्रुतिमधुरता आती है, और यह दिल्ली बाज तथा पश्चिमी बाज दोनों से जुड़ी रही है। इसका मिजराब-बोल ‘दा रा दा रा, दिर दा रा’ के क्रम में चलता है और सम प्रायः बारहवीं मात्रा पर पड़ता है। चौथा कथन असत्य है, क्योंकि मसीतखानी गत विलम्बित लय की गत है; मध्य तथा द्रुत लय की प्रधानता तो रजाखानी गत की विशेषता है।
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Q14. संगीत रत्नाकर में ‘महुवरि’, ‘काहला’ वाद्यों का उल्लेख किस वाद्य वर्ग में उल्लेखित है ?
Right Answer: सुषिर
Explanation:
संगीत रत्नाकर के वाद्याध्याय में वाद्यों को चार वर्गों में बाँटा गया है — तत, जिनमें तार से नाद उत्पन्न होता है; अवनद्ध, जिन पर चर्म मढ़ा रहता है; घन, जो ठोस पदार्थ के आघात से बजते हैं; तथा सुषिर, जिनमें वायु के प्रवाह से नाद उत्पन्न होता है। महुवरि तथा काहला दोनों इसी सुषिर वर्ग में गिनाए गए हैं। महुवरि वही वाद्य है जिसे आज पुंगी अथवा बीन कहा जाता है और जो सपेरों से जुड़ा है, तथा काहला एक लम्बी तुरही जैसी वाद्य थी जो राजकीय एवं युद्ध-सम्बन्धी अवसरों पर बजाई जाती थी।
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Q15. निम्नलिखित में कौन - सा विकल्प सुमेलित नहीं है ?
Right Answer: पपीहा का तार – मंद्र षड्ज
Explanation:
सितार में सामान्यतः सात मुख्य तार होते हैं, जिनका स्वर-मेल निश्चित रहता है। चिकारी के दोनों तार तार सप्तक के षड्ज तथा मध्य पंचम में मिलाए जाते हैं, बाज का मुख्य तार मन्द्र अथवा मध्य मध्यम में, और जोड़ी का तार मन्द्र षड्ज में। पपीहा अथवा पंचम के नाम से जाना जाने वाला तार मन्द्र पंचम में मिलाया जाता है, षड्ज में नहीं; इसीलिए उसे मन्द्र षड्ज से जोड़ना असुमेलित है। इनके अतिरिक्त खरज का तार अति मन्द्र षड्ज में मिलाया जाता है और लगभग ग्यारह से तेरह तरब के तार राग के स्वरों के अनुसार समायोजित किए जाते हैं।
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