Hindi Grammar - काव्यशास्त्र: 13 MCQs with Answers
Hindi Grammar- काव्यशास्त्र
यहाँ अलंकार, रस, छंद, काव्य-गुण, काव्य-दोष, रीति एवं शब्द-शक्ति सहित काव्यशास्त्र से संबंधित महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) दिए गए हैं।
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0%Q1. आर्थी व्यंजना के संबंध में असंगत विवरण है—
Right Answer: इसमें श्लिष्ट शब्द की सहायता से व्यंग्य की प्रतीति होती है।
Explanation:
आर्थी व्यंजना में व्यंग्यार्थ किसी विशेष शब्द पर निर्भर न होकर अर्थ, प्रसंग, वक्ता, बोधव्य, काकु, देश, काल आदि की विशेषताओं से प्रकट होता है।
जब श्लिष्ट शब्द अर्थात् एक शब्द से अनेक अर्थों की सहायता से व्यंग्यार्थ उत्पन्न होता है, तो वह शाब्दी व्यंजना के अंतर्गत आता है, आर्थी व्यंजना के अंतर्गत नहीं। अतः विकल्प (2) असंगत है।
याद रखें:
श्लिष्ट शब्द → शाब्दी व्यंजनावक्ता, काकु, देश, काल आदि → आर्थी व्यंजना
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Q2. “पाय महावर देन को, नाइन बैठी आय।फिरि-फिरि जानि महावरी, ऍड़ी मीड़त जाय।।“ उक्त दोहे में कौन-सा अलंकार है?
Right Answer: भ्रांतिमान
Explanation:
इस दोहे में नाइन नायिका की स्वाभाविक रूप से लाल एड़ी को महावर लगा हुआ समझ लेती है। इसी भ्रम के कारण वह एड़ी को बार-बार मलती है।
जहाँ सादृश्य के कारण एक वस्तु में दूसरी वस्तु का निश्चित भ्रम उत्पन्न हो जाए, वहाँ भ्रांतिमान अलंकार होता है।
यहाँ:
वास्तविक वस्तु → नायिका की लाल एड़ी
भ्रमित वस्तु → महावर
भ्रम करने वाली → नाइन
अतः भ्रांतिमान अलंकार।
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Q3. आचार्य वामन के मतानुसार गुण विषयक गलत कथन है—
Right Answer: गुण रस का नहीं अपितु शब्दार्थ का धर्म होता है।
Explanation:
आचार्य वामन के अनुसार गुण रस के धर्म हैं, न कि केवल शब्द और अर्थ के।
वामन ने काव्य में गुण को अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना है। इसलिए यह कहना कि “गुण रस का नहीं बल्कि शब्दार्थ का धर्म है” गलत है।
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Q4. निम्न में से ‘कवित्त’ के विषय में असंगत विकल्प का चयन कीजिए—
Right Answer: कवित्त वार्णिक छंद है, जिसके प्रत्येक चरण में 23-23 वर्ण होते हैं।
Explanation:
कवित्त एक वर्णिक समवृत्त छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 31 वर्ण होते हैं तथा अंतिम वर्ण गुरु होता है। इसे मनहरण भी कहा जाता है।
अतः 23 वर्ण वाला कथन गलत है।
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Q5. “गुणविपर्यासात्मानो दोषाः” काव्य-दोष की उक्त परिभाषा प्रस्तुत करने वाले आचार्य हैं—
Right Answer: वामन
Explanation:
आचार्य वामन ने दोष को गुण के विपर्यास/विपरीत रूप के रूप में माना है। उनका प्रसिद्ध कथन है—
“गुणविपर्यासात्मानो दोषाः।”
अर्थात् गुणों के विपरीत धर्म ही दोष हैं।
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Q6. ‘काव्य-हेतु’ के संबंध में संगत कथनों का चयन कीजिए।
(i) प्रतिभा को काव्य सर्जना का प्रमुख हेतु स्वीकार करते हुए भी भामह ने शास्त्र और काव्य के अध्ययन द्वारा व्युत्पन्न शक्ति को भी काव्य हेतु स्वीकार किया है।(ii) दण्डी प्रतिभा, व्युत्पत्ति, शास्त्र-ज्ञान और अभ्यास को काव्य-हेतु मानते हैं।(iii) आचार्य आनन्दवर्द्धन ने प्रतिभा और व्युत्पत्ति दो काव्य-हेतु स्वीकारे हैं।(iv) रुद्रट ने प्रतिभा के कारयित्री एवं भावयित्री दो रूप माने हैं।
Right Answer: (i), (ii) व (iv)
Explanation:
भामह ने प्रतिभा को महत्त्व दिया तथा व्युत्पत्ति/शास्त्र-अध्ययन की भूमिका भी स्वीकार की। दंडी ने प्रतिभा, व्युत्पत्ति और अभ्यास को महत्त्वपूर्ण माना। रुद्रट ने प्रतिभा के कारयित्री और भावयित्री रूप स्वीकार किए।
अतः दिए गए विकल्पों में (1) संगत है।
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Q7. “इधर उर्मिला मुग्ध निरी।कहकर ‘हाय’ धड़ाम गिरी।।”उक्त काव्यांश में कौन-सा सात्विक अनुभाव है?
Right Answer: प्रलय
Explanation:
उर्मिला का “हाय” कहकर धड़ाम से गिर पड़ना मूर्च्छा/चेतना का लोप दर्शाता है। रसशास्त्र में इसे प्रलय सात्विक अनुभाव माना जाता है।
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Q8. “रीतिरात्माकाव्यस्य” उक्त मत किस आचार्य का है?
Right Answer: वामन
Explanation:
आचार्य वामन ने रीति को काव्य की आत्मा माना। उनका प्रसिद्ध सिद्धांत है—
“रीतिरात्मा काव्यस्य।”
अर्थात् रीति ही काव्य की आत्मा है।
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Q9. निम्नलिखित विकल्पों में सन्देह अलंकार का उदाहरण कौन-सा विकल्प है?
Right Answer: सोहत ओढ़े पीत पट स्याम सलोने गात, मनौ नीलमणि सैल पर आतपु परयो प्रभात
Explanation:
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Q10. 'बादल गरजते हैं मानो सिंह दहाड़ रहे हों' — इस पंक्ति में किस अलंकार का प्रयोग हुआ है?
Right Answer: उत्प्रेक्षा
Explanation:
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