Hindi Grammar - अपठित गद्यांश: 6 MCQs with Answers
Hindi Grammar- अपठित गद्यांश
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0%Q1. उपर्युक्त गद्यांश का समुचित शीर्षक चुनिए :
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उत्तर दीजिए — भारत के नैतिक और बौद्धिक विकास के कार्य में अँगरेज़ी को आवश्यकता से अधिक महत्त्व देना व्यर्थ है। उसका ज़रूरत से ज्यादा भरोसा करना भी अनावश्यक है। भारतीयों की शिक्षा के क्रम में अँगरेज़ी केवल विषय और विचार की संवाहिका मात्र हो सकती है, वह हमारी सांस्कृतिक शिक्षा का समुचित माध्यम नहीं बन सकती है। जिस भाषा के माध्यम से जनता को शिक्षित किया जा सकता है, वह भाषा जनता की मातृभाषा ही हो सकती है, अँगरेज़ी नहीं। संस्कृत को मैं उस महान् भांडार के रूप में देखता हूँ, जिससे आधुनिक भाषाएँ शक्ति और सौंदर्य ग्रहण कर पुष्पित-पल्लवित हो रही हैं।
Right Answer: मातृभाषा का वैशिष्ट्य
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Q2. किस भाषा से आधुनिक भाषाएँ शक्ति एवं सौंदर्य को ग्रहण करती हैं ?
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उत्तर दीजिए — भारत के नैतिक और बौद्धिक विकास के कार्य में अँगरेज़ी को आवश्यकता से अधिक महत्त्व देना व्यर्थ है। उसका ज़रूरत से ज्यादा भरोसा करना भी अनावश्यक है। भारतीयों की शिक्षा के क्रम में अँगरेज़ी केवल विषय और विचार की संवाहिका मात्र हो सकती है, वह हमारी सांस्कृतिक शिक्षा का समुचित माध्यम नहीं बन सकती है। जिस भाषा के माध्यम से जनता को शिक्षित किया जा सकता है, वह भाषा जनता की मातृभाषा ही हो सकती है, अँगरेज़ी नहीं। संस्कृत को मैं उस महान् भांडार के रूप में देखता हूँ, जिससे आधुनिक भाषाएँ शक्ति और सौंदर्य ग्रहण कर पुष्पित-पल्लवित हो रही हैं।
Right Answer: संस्कृत भाषा से
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Q3. गद्यांश में प्रयुक्त शब्दों की व्याकरणिक विवेचना के संदर्भ में असंगत कथन चुनिए :
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उत्तर दीजिए — भारत के नैतिक और बौद्धिक विकास के कार्य में अँगरेज़ी को आवश्यकता से अधिक महत्त्व देना व्यर्थ है। उसका ज़रूरत से ज्यादा भरोसा करना भी अनावश्यक है। भारतीयों की शिक्षा के क्रम में अँगरेज़ी केवल विषय और विचार की संवाहिका मात्र हो सकती है, वह हमारी सांस्कृतिक शिक्षा का समुचित माध्यम नहीं बन सकती है। जिस भाषा के माध्यम से जनता को शिक्षित किया जा सकता है, वह भाषा जनता की मातृभाषा ही हो सकती है, अँगरेज़ी नहीं। संस्कृत को मैं उस महान् भांडार के रूप में देखता हूँ, जिससे आधुनिक भाषाएँ शक्ति और सौंदर्य ग्रहण कर पुष्पित-पल्लवित हो रही हैं।
Right Answer: नैतिक, बौद्धिक – गुणवाचक विशेषण
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Q4. 'सम्पूर्ण विश्व को मंत्रमुग्ध कर देना' के लिए गद्यांश में किस शब्द/भाव का प्रयोग हुआ है?
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।
बालपन में स्वामी विवेकानन्द का नाम नरेन्द्रनाथ था। ज्ञान और तर्कशक्ति से सम्पन्न इस युवक ने रामकृष्ण परमहंस को अपना गुरु माना और शिकागो की सर्वधर्म सभा में दिए गए उद्बोधन से सम्पूर्ण विश्व को भारतीय वेदान्त दर्शन से परिचित कराया।
Right Answer: विश्व को दर्शन से परिचित कराना
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Q5. विवेकानन्द ने अपना उद्बोधन कहाँ दिया था?
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।
बालपन में स्वामी विवेकानन्द का नाम नरेन्द्रनाथ था। ज्ञान और तर्कशक्ति से सम्पन्न इस युवक ने रामकृष्ण परमहंस को अपना गुरु माना और शिकागो की सर्वधर्म सभा में दिए गए उद्बोधन से सम्पूर्ण विश्व को भारतीय वेदान्त दर्शन से परिचित कराया।
Right Answer: शिकागो की सर्वधर्म सभा में
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Q6. विवेकानन्द के गुरु कौन थे?
निर्देश: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्न का उत्तर दीजिए।
बालपन में स्वामी विवेकानन्द का नाम नरेन्द्रनाथ था। ज्ञान और तर्कशक्ति से सम्पन्न इस युवक ने रामकृष्ण परमहंस को अपना गुरु माना और शिकागो की सर्वधर्म सभा में दिए गए उद्बोधन से सम्पूर्ण विश्व को भारतीय वेदान्त दर्शन से परिचित कराया।
Right Answer: रामकृष्ण परमहंस
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