Hindi Grammar - हिन्दी भाषा शिक्षण: 8 MCQs with Answers
Hindi Grammar- हिन्दी भाषा शिक्षण
हिन्दी भाषा शिक्षण विषय भाषा शिक्षण की अवधारणाओं, उद्देश्यों, सिद्धांतों, शिक्षण विधियों, भाषा कौशलों (सुनना, बोलना, पढ़ना एवं लिखना), व्याकरण शिक्षण, मूल्यांकन, पाठ योजना तथा आधुनिक शिक्षण तकनीकों का विस्तृत अध्ययन कराता है। इस पेज पर आपको हिन्दी भाषा शिक्षण से संबंधित नोट्स, अध्ययन सामग्री, MCQs, प्रश्नोत्तर, PDF, प्रैक्टिस टेस्ट तथा HTET, CTET, REET, UPTET, DSSSB, KVS, NVS एवं अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के लिए उपयोगी सामग्री उपलब्ध होगी।
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0%Q1. निम्नलिखित में से मौन वाचन का उद्देश्य नहीं है :
Right Answer: उचित लय और गति प्रदान करना
Explanation:
'लय' (Rhythm), 'आरोह-अवरोह' (आवाज़ का उतार-चढ़ाव) और 'स्वर' का प्रयोग सस्वर वाचन (Reading Aloud) यानी बोल-बोल कर पढ़ने में किया जाता है। मौन वाचन में चूँकि आवाज़ नहीं निकाली जाती और होंठ भी नहीं हिलते, इसलिए इसमें 'लय' (Rhythm) का कोई काम नहीं होता। अतः यह मौन वाचन का उद्देश्य नहीं है।
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Q2. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
नया निश्चय ही एक मूल्य है। पर निरंतरता भी एक मूल्य है। साहित्य दोनों में से एक को चुनने की हिमाकत सौभाग्य से नहीं करता है, क्योंकि वह जानता है कि एक के बिना दूसरा संभव नहीं है। परंपरा अपने को पुनर्नवा किए बिना सजीव नहीं रह सकती। मनुष्य दोनों आयामों में रहता है इतिहास में और अनन्त में। वह बदलता है और फिर भी बना रहता है। दोनों आयाम मनुष्य के यहाँ अंतर्भुक्त हैं वे अलग-थलग या विविक्त नहीं होते। बहुत कुछ बदलता है: समाज, परिस्थितियाँ, आर्थिक व्यापार, मानव संबंध और उनके संगुंफन आदि पर प्रेम, ईर्ष्या, मोह-मत्सर, राग-विराग, हर्ष-विषाद आदि वही बने रहते हैं। नयी दृष्टि होती है, तो अपने लिए अनिवार्यतः नया शिल्प भी खोजती है। विश्लेषण के लिए भले हम कथ्य और शिल्प को अलग-थलग कर लेते हैं, पर रचना में वे अद्वैत हैं। नया अंततः निरंतरता में समाहित होकर अपनी वैधता पाता है, पर वह निरंतरता को कहीं न कहीं बदल भी देता है। निरंतरता नए के हस्तक्षेप और उसके समाहार के बाद वही नहीं रह जाती, जो पहले थी। हम यह भूल जाते हैं कि आज जो पुराना लगता है, वह कभी नया था। बिना समकालीनता के कालातीत नहीं हुआ जा सकता, लेकिन सिर्फ समकालीनता के बाड़े में बँधे रहकर भी कालातीत नहीं हुआ जा सकता। नया समय को सीधे और उसके बदले हुए ब्योरों में पकड़ने के साहस से उपजता है, पर अगर वह समय के पार न देख पाये, तो टिकाऊ नहीं हो सकता। जो कालातीत है, वही हर समय नया होता चलता है।
साहित्य का अभीष्ट है :
Right Answer: नएपन एवं निरंतरता दोनों को चुनना
Explanation:
गद्यांश की दूसरी ही पंक्ति में स्पष्ट रूप से लिखा गया है: "साहित्य दोनों में से एक को चुनने की हिमाकत सौभाग्य से नहीं करता है, क्योंकि वह जानता है कि एक के बिना दूसरा संभव नहीं है।"
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Q3. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
नया निश्चय ही एक मूल्य है। पर निरंतरता भी एक मूल्य है। साहित्य दोनों में से एक को चुनने की हिमाकत सौभाग्य से नहीं करता है, क्योंकि वह जानता है कि एक के बिना दूसरा संभव नहीं है। परंपरा अपने को पुनर्नवा किए बिना सजीव नहीं रह सकती। मनुष्य दोनों आयामों में रहता है इतिहास में और अनन्त में। वह बदलता है और फिर भी बना रहता है। दोनों आयाम मनुष्य के यहाँ अंतर्भुक्त हैं वे अलग-थलग या विविक्त नहीं होते। बहुत कुछ बदलता है: समाज, परिस्थितियाँ, आर्थिक व्यापार, मानव संबंध और उनके संगुंफन आदि पर प्रेम, ईर्ष्या, मोह-मत्सर, राग-विराग, हर्ष-विषाद आदि वही बने रहते हैं। नयी दृष्टि होती है, तो अपने लिए अनिवार्यतः नया शिल्प भी खोजती है। विश्लेषण के लिए भले हम कथ्य और शिल्प को अलग-थलग कर लेते हैं, पर रचना में वे अद्वैत हैं। नया अंततः निरंतरता में समाहित होकर अपनी वैधता पाता है, पर वह निरंतरता को कहीं न कहीं बदल भी देता है। निरंतरता नए के हस्तक्षेप और उसके समाहार के बाद वही नहीं रह जाती, जो पहले थी। हम यह भूल जाते हैं कि आज जो पुराना लगता है, वह कभी नया था। बिना समकालीनता के कालातीत नहीं हुआ जा सकता, लेकिन सिर्फ समकालीनता के बाड़े में बँधे रहकर भी कालातीत नहीं हुआ जा सकता। नया समय को सीधे और उसके बदले हुए ब्योरों में पकड़ने के साहस से उपजता है, पर अगर वह समय के पार न देख पाये, तो टिकाऊ नहीं हो सकता। जो कालातीत है, वही हर समय नया होता चलता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है ?
Right Answer: मनुष्य का समाज समय के साथ परिवर्तनशील है।
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Q4. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
नया निश्चय ही एक मूल्य है। पर निरंतरता भी एक मूल्य है। साहित्य दोनों में से एक को चुनने की हिमाकत सौभाग्य से नहीं करता है, क्योंकि वह जानता है कि एक के बिना दूसरा संभव नहीं है। परंपरा अपने को पुनर्नवा किए बिना सजीव नहीं रह सकती। मनुष्य दोनों आयामों में रहता है इतिहास में और अनन्त में। वह बदलता है और फिर भी बना रहता है। दोनों आयाम मनुष्य के यहाँ अंतर्भुक्त हैं वे अलग-थलग या विविक्त नहीं होते। बहुत कुछ बदलता है: समाज, परिस्थितियाँ, आर्थिक व्यापार, मानव संबंध और उनके संगुंफन आदि पर प्रेम, ईर्ष्या, मोह-मत्सर, राग-विराग, हर्ष-विषाद आदि वही बने रहते हैं। नयी दृष्टि होती है, तो अपने लिए अनिवार्यतः नया शिल्प भी खोजती है। विश्लेषण के लिए भले हम कथ्य और शिल्प को अलग-थलग कर लेते हैं, पर रचना में वे अद्वैत हैं। नया अंततः निरंतरता में समाहित होकर अपनी वैधता पाता है, पर वह निरंतरता को कहीं न कहीं बदल भी देता है। निरंतरता नए के हस्तक्षेप और उसके समाहार के बाद वही नहीं रह जाती, जो पहले थी। हम यह भूल जाते हैं कि आज जो पुराना लगता है, वह कभी नया था। बिना समकालीनता के कालातीत नहीं हुआ जा सकता, लेकिन सिर्फ समकालीनता के बाड़े में बँधे रहकर भी कालातीत नहीं हुआ जा सकता। नया समय को सीधे और उसके बदले हुए ब्योरों में पकड़ने के साहस से उपजता है, पर अगर वह समय के पार न देख पाये, तो टिकाऊ नहीं हो सकता। जो कालातीत है, वही हर समय नया होता चलता है।
कौन-सा कथन असत्य है ?
Right Answer: कथ्य और शिल्प दोनों एक-दूसरे से स्वायत्त होते हैं।
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Q5. निर्देश : (प्रश्न संख्या 33-36) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
नया निश्चय ही एक मूल्य है। पर निरंतरता भी एक मूल्य है। साहित्य दोनों में से एक को चुनने की हिमाकत सौभाग्य से नहीं करता है, क्योंकि वह जानता है कि एक के बिना दूसरा संभव नहीं है। परंपरा अपने को पुनर्नवा किए बिना सजीव नहीं रह सकती। मनुष्य दोनों आयामों में रहता है इतिहास में और अनन्त में। वह बदलता है और फिर भी बना रहता है। दोनों आयाम मनुष्य के यहाँ अंतर्भुक्त हैं वे अलग-थलग या विविक्त नहीं होते। बहुत कुछ बदलता है: समाज, परिस्थितियाँ, आर्थिक व्यापार, मानव संबंध और उनके संगुंफन आदि पर प्रेम, ईर्ष्या, मोह-मत्सर, राग-विराग, हर्ष-विषाद आदि वही बने रहते हैं। नयी दृष्टि होती है, तो अपने लिए अनिवार्यतः नया शिल्प भी खोजती है। विश्लेषण के लिए भले हम कथ्य और शिल्प को अलग-थलग कर लेते हैं, पर रचना में वे अद्वैत हैं। नया अंततः निरंतरता में समाहित होकर अपनी वैधता पाता है, पर वह निरंतरता को कहीं न कहीं बदल भी देता है। निरंतरता नए के हस्तक्षेप और उसके समाहार के बाद वही नहीं रह जाती, जो पहले थी। हम यह भूल जाते हैं कि आज जो पुराना लगता है, वह कभी नया था। बिना समकालीनता के कालातीत नहीं हुआ जा सकता, लेकिन सिर्फ समकालीनता के बाड़े में बँधे रहकर भी कालातीत नहीं हुआ जा सकता। नया समय को सीधे और उसके बदले हुए ब्योरों में पकड़ने के साहस से उपजता है, पर अगर वह समय के पार न देख पाये, तो टिकाऊ नहीं हो सकता। जो कालातीत है, वही हर समय नया होता चलता है।
नयापन टिकाऊ होता है :
Right Answer: जब वह समकालीन भी हो और कालातीत भी।
Explanation:
व्याख्या: गद्यांश की अंतिम पंक्तियों में स्पष्ट किया गया है: "बिना समकालीनता के कालातीत नहीं हुआ जा सकता... नया समय को सीधे और उसके बदले हुए ब्योरों में पकड़ने के साहस से उपजता है (यानी समकालीनता), पर अगर वह समय के पार न देख पाये (यानी कालातीत न हो), तो टिकाऊ नहीं हो सकता।"
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Q6. निम्नलिखित में से अशुद्ध शब्द समूह का चयन कीजिए :
Right Answer: सीधा साधा, अठोतर, उहापोह
Explanation:
व्याख्या:
- सीधा साधा: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'सीधा-सादा' होता है।
- अठोतर: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'अठोत्तर' (अठ् + उत्तर = आठ अधिक) होता है।
- उहापोह: यह अशुद्ध है। इसका शुद्ध रूप 'ऊहापोह' (असमंजस की स्थिति) होता है, जिसमें दीर्घ 'ऊ' का प्रयोग होता है।
अन्य विकल्प क्यों शुद्ध हैं:
- विकल्प (2): 'दाशरथि' (दशरथ + इ), 'स्थायित्व' और 'विद्यार्थिपरिषद्' (समास होने पर 'विद्यार्थी' की 'ई' की मात्रा ह्रस्व 'इ' हो जाती है, जैसे- मन्त्रिपरिषद्) सभी शुद्ध हैं।
- विकल्प (3): 'सुधीजन' (सुधी + जन), 'प्रेयसी' और 'निजीकरण' सभी वर्तनी की दृष्टि से पूर्णतः शुद्ध हैं।
- विकल्प (4): 'वेश्या', 'शशिभूषण' और 'शक्तीकरण' भी शुद्ध हैं (ध्यान दें: 'करण' प्रत्यय जुड़ने पर 'शक्ति' की ह्रस्व 'इ' की मात्रा दीर्घ 'ई' में बदल जाती है, जैसे- शुद्धीकरण, स्पष्टीकरण)।
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Q7. हिंदी अध्यापक की विशिष्ट विशेषताओं में सम्मिलित नहीं है :
Right Answer: शिक्षा तथा उपाधियाँ
Explanation:
व्याख्या: एक सफल और श्रेष्ठ हिंदी अध्यापक की 'विशिष्ट विशेषताओं' (Qualities/Characteristics) में उसके आंतरिक गुण, ज्ञान और कौशल आते हैं।
- (1) साहित्य का ज्ञान, (2) भाषा शिक्षण की विधियों का ज्ञान और (3) हिंदी भाषा पर विशिष्ट अधिकार — ये तीनों एक हिंदी शिक्षक की व्यावहारिक और विशिष्ट विशेषताएँ हैं, जो उसे कक्षा में प्रभावी रूप से पढ़ाने के योग्य बनाती हैं।
- (4) शिक्षा तथा उपाधियाँ (Degrees and Qualifications): ये शिक्षक बनने के लिए आवश्यक 'अनिवार्य योग्यताएँ' (Eligibility criteria) तो हैं, लेकिन ये उसकी "विशिष्ट विशेषताएँ" या शिक्षण कौशल नहीं हैं। मात्र डिग्री होने से कोई व्यक्ति एक अच्छा शिक्षक नहीं बन जाता; एक अच्छे शिक्षक की पहचान उसके विषय-ज्ञान और पढ़ाने की शैली (methods) से होती है।
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Q8. उपचारात्मक शिक्षण किया जाता है :
Right Answer: विकल्प (1) एवं (2) दोनों
Explanation:
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