Environmental Studies - ईवीएस शिक्षाशास्त्र: 26 MCQs with Answers

ईवीएस शिक्षाशास्त्र - Environmental Studies
Environmental Studies - ईवीएस शिक्षाशास्त्र

Environmental Studies- ईवीएस शिक्षाशास्त्र

पर्यावरण अध्ययन शिक्षण एवं शिक्षाशास्त्र से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या सहित — HTET, CTET एवं अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं हेतु।

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Q21. EVS शिक्षण के सन्दर्भ में मापन का तात्पर्य क्या है ?

Right Answer: जैसे-जैसे छात्र कौशल और ज्ञान प्राप्त करते हैं, समर्थन धीरे-धीरे कम होता जाता है।


Explanation:

पाड़ अथवा स्कैफोल्डिंग वायगोट्स्की की समीपस्थ विकास क्षेत्र की संकल्पना से जुड़ी शिक्षण युक्ति है। इसमें आरंभ में शिक्षक बालक को पर्याप्त सहायता, संकेत तथा निर्देश देता है, किन्तु ज्यों-ज्यों बालक कौशल और ज्ञान अर्जित करता जाता है, यह सहायता धीरे-धीरे कम की जाती है, जब तक कि वह कार्य स्वतंत्र रूप से न कर सके। उद्देश्य आत्मनिर्भरता विकसित करना है। अतः अत्यधिक सहायता देना, पाठ्यक्रम का कठोर पालन करना अथवा छात्रों को साथियों से अलग करना पाड़ नहीं है। अतः दूसरा विकल्प सही है।
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Q22. NEP 2020, EVS शिक्षण में मूल्यांकन विधियों को कैसे प्रभावित करता है ?

Right Answer: यह पर्यावरणीय अवधारणाओं के बारे में छात्रों की समझ को मापने के लिए प्रामाणिक मूल्यांकन को बढ़ावा देता है।


Explanation:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हजार बीस मूल्यांकन को रटंत आधारित परीक्षा से हटाकर योग्यता आधारित बनाने पर बल देती है। पर्यावरण अध्ययन में यह प्रामाणिक मूल्यांकन को बढ़ावा देती है, जिसमें परियोजना कार्य, क्षेत्र भ्रमण की रिपोर्ट, अवलोकन तथा पोर्टफोलियो के माध्यम से यह देखा जाता है कि विद्यार्थी पर्यावरणीय अवधारणाओं को वास्तविक जीवन में कितना समझ और लागू कर पाता है। नीति स्वमूल्यांकन तथा सहपाठी मूल्यांकन को भी प्रोत्साहित करती है। अतः यह न तो मूल्यांकन को हतोत्साहित करती है और न स्मरण पर केन्द्रित है।
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Q23. EVS शिक्षण में क्षेत्र भ्रमण और व्यावहारिक गतिविधियों का क्या महत्व है ?

Right Answer: वे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और पर्यावरणीय अवधारणाओं की गहरी समझ प्रदान करते हैं।


Explanation:

पर्यावरण अध्ययन का विषय बालक के परिवेश से जुड़ा है, इसलिए इसे कक्षा की चारदीवारी में सीमित नहीं रखा जा सकता। क्षेत्र भ्रमण और व्यावहारिक गतिविधियों से विद्यार्थी पेड़, पक्षी, जल स्रोत, बाजार तथा कारखाने प्रत्यक्ष देखते हैं, प्रश्न पूछते हैं और आँकड़े एकत्र करते हैं। इससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव मिलता है और पर्यावरणीय अवधारणाओं की गहरी समझ बनती है। यह कहना गलत है कि ये केवल उन्नत शिक्षार्थियों के लिए हैं या इन्हें सैद्धान्तिक चर्चा तक सीमित रखा जाए। अतः दूसरा विकल्प सही है।
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Q24. शिक्षक EVS शिक्षण में स्वदेशी ज्ञान और दृष्टिकोण को समग्र रूप से कैसे एकीकृत कर सकते हैं ?

Right Answer: सीखने के अनुभव को समृद्ध करने के लिये स्वदेशी ज्ञान, सांस्कृतिक प्रथाओं और दृष्टिकोणों को सक्रिय रूप से खोजने और एकीकृत करने में।


Explanation:

स्वदेशी अथवा परंपरागत ज्ञान में जल संचयन, वर्षा का पूर्वानुमान, औषधीय पौधों का उपयोग तथा वनों के संरक्षण की सदियों पुरानी समझ निहित है। पर्यावरण अध्ययन के शिक्षण में इसे समग्र रूप से तभी जोड़ा जा सकता है जब शिक्षक स्थानीय समुदायों के ज्ञान, सांस्कृतिक प्रथाओं तथा दृष्टिकोणों को सक्रिय रूप से खोजे और पाठ्यक्रम में एकीकृत करे। इससे अधिगम का अनुभव समृद्ध होता है और बालक अपनी जड़ों से जुड़ता है। इसकी उपेक्षा करना अथवा केवल मुख्यधारा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता देना अनुचित है।
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Q25. EVS में रचनावादी शिक्षण का प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित में से कौन-सा है ?

Right Answer: समस्या समाधान और अन्वेषण में सक्रिय संलग्नता


Explanation:

रचनावाद के अनुसार ज्ञान बाहर से थोपा नहीं जाता, बल्कि शिक्षार्थी अपने पूर्व अनुभवों के आधार पर उसका निर्माण स्वयं करता है। पर्यावरण अध्ययन में इसका प्रमुख सिद्धान्त यह है कि विद्यार्थी समस्या समाधान और अन्वेषण में सक्रिय रूप से संलग्न हो, प्रश्न उठाए, परिकल्पना बनाए और जाँच करे। शिक्षक यहाँ सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाता है। इसके विपरीत शिक्षक केन्द्रित शिक्षण, छात्र की निष्क्रिय भूमिका तथा रटकर याद रखना रचनावाद के विरुद्ध हैं और इनसे स्थायी समझ नहीं बनती। अतः तीसरा विकल्प सही है।
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Q26. NEP 2020 के सन्दर्भ में EVS शिक्षण में अनुभवात्मक शिक्षा की क्या भूमिका है ?

Right Answer: अनुभवात्मक शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाता है और यह EVS शिक्षण का अभिन्न अंग है।


Explanation:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हजार बीस अनुभवात्मक शिक्षा को सभी स्तरों और विषयों में अपनाने पर बल देती है। पर्यावरण अध्ययन में तो यह और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बालक अपने परिवेश को देखकर, छूकर तथा उसमें भाग लेकर ही सर्वोत्तम ढंग से सीखता है। खेल आधारित अधिगम, कहानी, कला समेकित शिक्षा तथा परियोजना कार्य इसी के रूप हैं। अतः यह कहना गलत है कि अनुभवात्मक शिक्षा हतोत्साहित की जाती है, केवल विज्ञान तक सीमित है अथवा कक्षा की चर्चा तक बँधी है। यह इसका अभिन्न अंग है।
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Published: 27 July 2026 | Last Updated: 19 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

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