Biology - Human Physiology and Health: 13 MCQs with Answers
Biology- Human Physiology and Health
पाचन, श्वसन, परिसंचरण, उत्सर्जन, तंत्रिका तंत्र, अंतःस्रावी तंत्र, जनन तथा रोगों पर बहुविकल्पीय प्रश्न।Your Progress
0%Q1. मानव नेत्र में निम्नलिखित में से कौन - सा अपवर्तक माध्यम का प्रतिनिधित्व नहीं करता है ?
Right Answer: परितारिका (आइरिस)
मानव नेत्र में प्रकाश के अपवर्तन का कार्य चार पारदर्शी माध्यम करते हैं — कॉर्निया, जलीय द्रव्य, लेंस तथा काचाभ द्रव्य। सबसे अधिक अपवर्तन कॉर्निया पर होता है, जबकि लेंस समंजन द्वारा फोकस को सूक्ष्मता से समायोजित करता है। परितारिका अर्थात् आइरिस अपवर्तक माध्यम नहीं है, क्योंकि वह अपारदर्शी पेशीय पर्दा है और उसका कार्य पुतली के व्यास को घटा-बढ़ाकर नेत्र में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करना है। यही परितारिका नेत्र को उसका विशिष्ट रंग भी प्रदान करती है।
Q2. निम्नलिखित ग्रंथियों में से कौन-सी एपीक्राइन ग्रंथि का उदाहरण नहीं है ?
(a) स्वेद ग्रंथियाँ
(b) लार ग्रंथियाँ
(c) स्तन ग्रंथियाँ
(d) वसामय ग्रंथियाँ
Right Answer: (b) व (d)
बहिःस्रावी ग्रंथियों को स्राव की विधि के आधार पर तीन वर्गों में बाँटा जाता है। मीरोक्राइन ग्रंथियों में स्राव बहिःकोशिकता द्वारा निकलता है और कोशिका को कोई क्षति नहीं होती; लार ग्रंथियाँ इसी वर्ग में आती हैं। एपीक्राइन ग्रंथियों में कोशिका का शीर्ष भाग स्राव के साथ टूटकर निकल जाता है; कुछ स्वेद ग्रंथियाँ तथा स्तन ग्रंथियाँ इसके उदाहरण हैं। होलोक्राइन ग्रंथियों में सम्पूर्ण कोशिका फटकर स्राव में परिवर्तित हो जाती है, जिसका उदाहरण वसामय ग्रंथि है। अतः लार तथा वसामय ग्रंथियाँ एपीक्राइन नहीं हैं।
Q3. जब दोनों गर्भाशय आंशिक रूप से संयुक्त होकर दो शृंग तथा अन्दर दो पृथक्अवकाशिकाएँ बनाते हैं, तो उसे कहते हैं :
Right Answer: द्विशृंगी गर्भाशय
स्तनधारियों में गर्भाशय की संरचना भ्रूणीय म्यूलरी वाहिनियों के संलयन की मात्रा पर निर्भर करती है। जब दोनों वाहिनियाँ बिल्कुल नहीं जुड़तीं तो द्विक् गर्भाशय बनता है, जिसमें दो पूर्णतः पृथक गर्भाशय एवं दो ग्रीवाएँ होती हैं, जैसा खरगोश में मिलता है। जब वे आंशिक रूप से संयुक्त होकर नीचे एक साझा भाग तथा ऊपर दो शृंग बनाती हैं और भीतर दो पृथक अवकाशिकाएँ बनी रहती हैं, तो उसे द्विशृंगी गर्भाशय कहते हैं, जो गाय, सूअर तथा कुतिया में पाया जाता है। पूर्ण संलयन से सरल गर्भाशय बनता है, जो मनुष्य एवं अन्य नरवानरों की विशेषता है।
Q4. मनुष्य में उपापचय के पश्चात् बनने वाली अमोनिया का यूरिया में परिवर्तन (a) …… में (b) …… प्रक्रिया द्वारा होता है तथा (c) …… द्वारा उत्सर्जित कर दिया जाता है। रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :
Right Answer: (a) यकृत, (b) क्रेब्स-हेन्सेलिट चक्र, (c) वृक्क
मनुष्य यूरिया उत्सर्जी प्राणी है। प्रोटीन के विऐमीनीकरण से बनी अमोनिया अत्यन्त विषैली होती है, अतः उसे शीघ्र ही यकृत में यूरिया में बदल दिया जाता है। यह रूपान्तरण जिस चक्रीय अभिक्रिया-शृंखला द्वारा होता है उसे ऑर्निथिन चक्र अथवा क्रेब्स-हेन्सेलिट चक्र कहा जाता है, जिसमें अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड तथा एस्पार्टेट भाग लेते हैं और ऑर्निथिन, सिट्रुलीन एवं आर्जिनीन क्रमशः बनते हैं। बना हुआ यूरिया रक्त के माध्यम से वृक्क तक पहुँचता है, जहाँ छनन द्वारा वह मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
Q5. नीचे दी गई सारणी में से गलत संयोजन चुनिए :
(a) टेस्टोस्टेरॉन – वृषण की लेडिग कोशिकाएँ – स्टेरॉयड
(b) एस्ट्रोजन – अण्डाशय की पुटिकीय कोशिकाएँ – स्टेरॉयड
(c) प्रोजेस्टेरॉन – अण्डाशय का कॉर्पस ल्युटियम – स्टेरॉयड
(d) ह्युमन कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन – अपरा – ग्लाइकोप्रोटीन
Right Answer: सभी संयोजन सही हैं
चारों संयोजन सही हैं। टेस्टोस्टेरॉन वृषण की अन्तराली अर्थात् लेडिग कोशिकाओं से स्रावित स्टेरॉयड हार्मोन है, जो शुक्राणुजनन तथा गौण लैंगिक लक्षणों के विकास को नियंत्रित करता है। एस्ट्रोजन अण्डाशय की वर्धमान पुटिका की कोशिकाओं से निकलने वाला स्टेरॉयड है। प्रोजेस्टेरॉन अण्डोत्सर्ग के बाद बने कॉर्पस ल्युटियम से स्रावित स्टेरॉयड है, जो गर्भाशय को रोपण हेतु तैयार करता है। ह्युमन कोरिओनिक गोनैडोट्रोपिन अपरा से स्रावित ग्लाइकोप्रोटीन है, जो कॉर्पस ल्युटियम को बनाए रखता है और गर्भ-परीक्षण का आधार है।
Q6. वाणी के लिए ब्रोका क्षेत्र उपस्थित होता है :
Right Answer: अग्रललाट पालि में
ब्रोका क्षेत्र प्रमस्तिष्क के बाएँ गोलार्द्ध की ललाट पालि के पश्च-अधर भाग में स्थित होता है, जिसे अग्रललाट क्षेत्र से सटा हुआ माना जाता है। इसकी खोज फ्रांसीसी चिकित्सक पॉल ब्रोका ने की। यह क्षेत्र वाणी के उत्पादन को नियंत्रित करता है, अर्थात् यह विचारों को व्याकरणसम्मत शब्दों में ढालकर स्वरयंत्र, जिह्वा तथा ओष्ठ की पेशियों को आवश्यक निर्देश भेजता है। इसकी क्षति से ब्रोका वाचाघात होता है, जिसमें रोगी दूसरों की बात समझ तो लेता है, किन्तु स्वयं रुक-रुककर टूटे-फूटे शब्द ही बोल पाता है।
Q7. कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :
कॉलम-I
(a) ज्वारीय आयतन
(b) अंतःश्वसन सुरक्षित आयतन
(c) निःश्वसन सुरक्षित आयतन
(d) अवशिष्ट आयतन
कॉलम-II
(i) 2500-3000 मिली वायु
(ii) 1000-1100 मिली वायु
(iii) 500 मिली वायु
(iv) 1100-1200 मिली वायु
Right Answer: (a)-(iii), (b)-(i), (c)-(ii), (d)-(iv)
ज्वारीय आयतन वह वायु है जो सामान्य श्वसन में एक बार अन्दर ली या बाहर छोड़ी जाती है और यह लगभग 500 मिलीलीटर होती है। अंतःश्वसन सुरक्षित आयतन वह अतिरिक्त वायु है जिसे सामान्य अन्तःश्वसन के बाद बलपूर्वक और भीतर खींचा जा सके, जो लगभग 2500 से 3000 मिलीलीटर होती है। निःश्वसन सुरक्षित आयतन सामान्य निःश्वसन के बाद बलपूर्वक बाहर निकाली जा सकने वाली वायु है, लगभग 1000 से 1100 मिलीलीटर। अवशिष्ट आयतन वह वायु है जो अधिकतम निःश्वसन के बाद भी फेफड़ों में शेष रह जाती है, लगभग 1100 से 1200 मिलीलीटर।
Q8. निम्नलिखित में से गलत जोड़ा चुनिए : सामान्य जुकाम हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी
Right Answer: सामान्य जुकाम – हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी
सामान्य जुकाम किसी जीवाणु से नहीं, बल्कि राइनोवाइरस नामक विषाणु से होता है, जिसकी दो सौ से अधिक किस्में ज्ञात हैं; अतः उसे हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी से जोड़ना गलत है। हीमोफिलस इन्फ्लुएंजी तो न्यूमोनिया एवं मस्तिष्कावरण शोथ से सम्बद्ध जीवाणु है। शेष तीनों जोड़े सही हैं — मलेरिया प्लैज़्मोडियम नामक प्रोटोजोआ से होता है और मादा एनोफिलीज मच्छर द्वारा फैलता है, दाद माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटन तथा एपिडर्मोफाइटन नामक कवकों से होता है, और हस्तिपाद वुचेरेरिया बैंक्रोफ्टाई नामक फाइलेरिया कृमि से होता है।
Q9. यकृत निवाहिका तंत्र प्रारंभ होता है :
Right Answer: पाचन तंत्र से यकृत
यकृत निवाहिका तंत्र एक विशिष्ट शिरा-तंत्र है, जो पाचन तंत्र से आरम्भ होकर यकृत में समाप्त होता है। आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत, अग्न्याशय तथा प्लीहा से आने वाली शिराएँ मिलकर यकृत निवाहिका शिरा बनाती हैं, जो अवशोषित पोषक तत्वों से भरा रक्त सीधे हृदय भेजने के बजाय पहले यकृत में ले जाती है। यहाँ यकृत ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में संचित करता है, अमीनो अम्लों का विऐमीनीकरण करता है तथा विषैले पदार्थों एवं औषधियों को निष्प्रभावी बनाता है। यह निवाहिका तंत्र इसलिए कहलाता है क्योंकि इसके दोनों सिरों पर केशिका जाल होता है।
Q10. प्रोस्टेग्लैंडिन व्युत्पन्न हैं :
Right Answer: वसा अम्ल के
प्रोस्टेग्लैंडिन वसा अम्ल से व्युत्पन्न होने वाले जैव-सक्रिय यौगिक हैं, जो बीस कार्बन वाले एरेकिडोनिक अम्ल से साइक्लो-ऑक्सीजिनेज एन्जाइम की क्रिया द्वारा बनते हैं। ये ईकोसैनॉइड वर्ग में आते हैं और इन्हें स्थानीय हार्मोन कहा जाता है, क्योंकि ये किसी विशिष्ट ग्रंथि में नहीं बनते तथा रक्त द्वारा दूर तक न जाकर अपने उत्पत्ति-स्थल के आसपास ही कार्य करते हैं। ये शोथ, ज्वर, पीड़ा-संवेदन, रक्त वाहिनियों के संकुचन-प्रसार, प्लेटलेट एकत्रीकरण तथा गर्भाशय संकुचन में भूमिका निभाते हैं। एस्पिरिन इन्हीं के संश्लेषण को अवरुद्ध कर पीड़ा एवं ज्वर घटाती है।