Physical Education - Anatomy Physiology and Kinesiology: 12 MCQs with Answers
Physical Education- Anatomy Physiology and Kinesiology
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0%Q1. निम्नलिखित में से कौन-सी मांसपेशियाँ टिबिया का आन्तरिक घूर्णन करती हैं ?
Right Answer: सेमीमेम्ब्रेनोसस और सेमिटेन्डिनोसस
Explanation:
घुटने के मुड़े होने की अवस्था में टिबिया का आन्तरिक घूर्णन मुख्यतः सेमीमेम्ब्रेनोसस तथा सेमिटेन्डिनोसस पेशियाँ करती हैं, जो हैमस्ट्रिंग समूह की भीतरी अर्थात् मध्यवर्ती पेशियाँ हैं और टिबिया के मध्य भाग पर जुड़ती हैं। पॉपलिटियस पेशी भी इसमें सहायक होती है और घुटने को ‘अनलॉक’ करती है। इसके विपरीत बाइसेप्स फिमोरिस हैमस्ट्रिंग की बाह्य पेशी है और वह टिबिया का बाह्य घूर्णन करती है। रेक्टस फिमोरिस तथा वास्टस लेटेरलिस क्वाड्रिसेप्स समूह की पेशियाँ हैं जो घुटने का विस्तार करती हैं।
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Q2. तंत्रिका तंतुओं का एक गहरा पुल जो दो मस्तिष्क गोलार्द्धों को जोड़ता है, कहलाता है :
Right Answer: महासंयोजिका
Explanation:
महासंयोजिका अर्थात् कॉर्पस कैलोसम तंत्रिका तंतुओं का एक चौड़ा एवं गहरा पुल है, जो प्रमस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धों को जोड़ता है। इसमें लगभग बीस करोड़ श्वेत द्रव्य के तंतु होते हैं, जो दोनों ओर के संगत क्षेत्रों के बीच सूचना का आदान-प्रदान करते हैं और इसी से दोनों गोलार्द्धों का समन्वित कार्य सम्भव होता है। इसे शल्यक्रिया द्वारा काट देने पर ‘विभाजित मस्तिष्क’ की अवस्था उत्पन्न होती है। अनुदैर्ध्य विदर दोनों गोलार्द्धों को अलग करने वाली गहरी दरार है और पार्श्व खाँचा ललाट एवं शंख पालियों को पृथक करती है।
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Q3. धड़ से सिर की स्थिति क्या होती है ?
Right Answer: ऊर्ध्व
Explanation:
शारीरिक रचना विज्ञान में स्थिति बताने के लिए मानक शारीरिक स्थिति को आधार मानकर विशिष्ट पद प्रयुक्त होते हैं। ऊर्ध्व अर्थात् सुपीरियर का अर्थ है किसी अन्य भाग की तुलना में ऊपर की ओर, अतः धड़ के सन्दर्भ में सिर ऊर्ध्व स्थिति में होता है। इसके विपरीत अधः अर्थात् इन्फीरियर नीचे की ओर की स्थिति दर्शाता है। समीपस्थ तथा दूरस्थ पद केवल अंगों के लिए प्रयुक्त होते हैं और वे धड़ से जुड़ाव-बिन्दु के सापेक्ष दूरी बताते हैं, जैसे कोहनी कलाई की तुलना में समीपस्थ है। अग्र एवं पश्च क्रमशः आगे तथा पीछे की स्थिति बताते हैं।
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Q4. मनुष्य में कितने पर्णपाती दाँत होते हैं जिनके स्थान पर 32 स्थायी दाँत आते हैं ?
Right Answer: 20
Explanation:
मनुष्य द्विबारदन्ती होता है, अर्थात् उसके जीवन में दो बार दाँत आते हैं। पहली बार आने वाले दाँतों को पर्णपाती अथवा दूध के दाँत कहा जाता है और इनकी कुल संख्या बीस होती है — प्रत्येक जबड़े में चार कृन्तक, दो रदनक तथा चार चवर्णक। ये लगभग छह माह की आयु से निकलना आरम्भ होते हैं और ढाई से तीन वर्ष तक पूरे हो जाते हैं। लगभग छह वर्ष की आयु से ये गिरने लगते हैं और उनके स्थान पर बत्तीस स्थायी दाँत आते हैं, जिनमें अग्रचवर्णक तथा तीसरे चवर्णक अर्थात् अक्ल दाढ़ नए जुड़ते हैं। दूध के दाँतों में अग्रचवर्णक नहीं होते।
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Q5. कपालीय X तंत्रिका का क्या नाम होता है ?
Right Answer: वेगस तंत्रिका
Explanation:
मनुष्य में बारह जोड़ी कपालीय तंत्रिकाएँ होती हैं और उनमें दसवीं वेगस तंत्रिका है। यह सबसे लम्बी कपालीय तंत्रिका है, जो मेडुला से निकलकर गर्दन एवं वक्ष से होते हुए उदर तक फैलती है; ‘वेगस’ शब्द का अर्थ ही भटकने वाला है। यह मिश्रित तंत्रिका है और परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र का प्रमुख अंग है, जो हृदय गति धीमी करती है, श्वास नलिकाओं को संकुचित करती है तथा पाचन ग्रंथियों एवं आँतों की गति को उत्तेजित करती है। सातवीं आनन, दूसरी दृष्टि तथा ग्यारहवीं सहायक तंत्रिका है।
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Q6. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राथमिक श्वसन नियन्त्रण केन्द्र होता है ?
Right Answer: मेडुला ओब्लॉन्गेटा
Explanation:
श्वसन का प्राथमिक नियन्त्रण केन्द्र मेडुला ओब्लॉन्गेटा में स्थित होता है, जो मस्तिष्क स्तम्भ का सबसे निचला भाग है। इसमें पृष्ठीय एवं उदरीय श्वसन समूह होते हैं, जो श्वास लेने तथा छोड़ने की मूल लय उत्पन्न करते हैं। रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा एवं हाइड्रोजन आयन सान्द्रता बढ़ने पर यहाँ के केन्द्रीय रसायनग्राही उत्तेजित होकर श्वास की दर एवं गहराई बढ़ा देते हैं। पॉन्स में स्थित न्यूमोटैक्सिक तथा एप्न्यूस्टिक केन्द्र इस लय को परिष्कृत करते हैं। प्रमस्तिष्क ऐच्छिक नियंत्रण देता है और अनुमस्तिष्क संतुलन एवं समन्वय देखता है।
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Q7. नेत्रगोलक और ऊपरी पलक की गतिविधि को कौन-सी तंत्रिका नियन्त्रित करती है ?
Right Answer: नेत्रप्रेरक तंत्रिका
Explanation:
नेत्रगोलक तथा ऊपरी पलक की गति को मुख्यतः तीसरी कपालीय तंत्रिका अर्थात् नेत्रप्रेरक तंत्रिका नियन्त्रित करती है। यह नेत्रगोलक की छह में से चार पेशियों — श्रेष्ठ, अधर एवं मध्यवर्ती रेक्टस तथा अधर तिर्यक — को संचालित करती है और लिवेटर पैल्पेब्री पेशी द्वारा ऊपरी पलक को उठाती है। इसके परानुकम्पी तन्तु पुतली को संकुचित करते हैं तथा लेंस की समंजन क्षमता नियंत्रित करते हैं। इसके क्षतिग्रस्त होने पर पलक झुक जाती है, आँख बाहर-नीचे की ओर मुड़ जाती है और द्विदृष्टि हो जाती है। चौथी ट्रॉक्लियर तथा छठी एब्ड्यूसेन्स तंत्रिका शेष दो पेशियाँ सँभालती हैं।
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Q8. कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और सही विकल्प चुनिए :
कथन (i) : वह तल जिसमें शरीर का कोई भाग बायें से दायें दिशा में गति करता है, फ्रन्टल तल कहलाता है।
कथन (ii) : फ्रन्टल तल सामान्यतः अग्रपश्च तल कहलाता है।
Right Answer: केवल कथन (i) सही है।
Explanation:
मानव गति का अध्ययन तीन तलों में किया जाता है। फ्रन्टल तल शरीर को आगे तथा पीछे के भागों में बाँटता है और इसी तल में बायें-दायें अर्थात् पार्श्व दिशा की गतियाँ होती हैं, जैसे अपवर्तन एवं अभिवर्तन; अतः पहला कथन सही है। दूसरा कथन गलत है, क्योंकि फ्रन्टल तल को कोरोनल अथवा पार्श्व तल कहा जाता है, अग्रपश्च तल नहीं। ‘अग्रपश्च’ शब्द तो उस अक्ष के लिए प्रयुक्त होता है जिसके चारों ओर फ्रन्टल तल की गतियाँ घूमती हैं; तथा सैजिटल तल को अग्रपश्च तल कहा जाता है, क्योंकि उसमें गतियाँ आगे-पीछे होती हैं।
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Q9. एक संतुलित अथवा निरन्तर आन्तरिक अवस्था को बनाये रखने को कहा जाता है :
Right Answer: समस्थिति
Explanation:
समस्थिति अर्थात् होमियोस्टैसिस शरीर की वह क्षमता है जिससे वह बाह्य परिस्थितियों के बदलने पर भी अपने आन्तरिक वातावरण को एक संतुलित एवं अपेक्षाकृत स्थिर अवस्था में बनाए रखता है। इस पद का प्रयोग वाल्टर कैनन ने किया। शरीर का ताप, रक्त का पी-एच, रक्त शर्करा, जल एवं लवण संतुलन तथा रक्तचाप — सभी ऋणात्मक प्रतिपुष्टि तंत्र द्वारा निर्धारित सीमा में रखे जाते हैं। व्यायाम के दौरान ताप बढ़ने पर स्वेदन एवं त्वचीय रक्तवाहिनियों का विस्फारण इसी का उदाहरण है। समस्थिति भंग होना ही रोग की अवस्था है।
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Q10. हमारे 46 गुणसूत्रों में अरबों कार्बनिक आधार जोडे़ होते हैं, वह कितने जीन्स को कूटबद्ध करते हैं ?
Right Answer: 30,000 से अधिक
Explanation:
मनुष्य की प्रत्येक कायिक कोशिका में 23 जोड़े अर्थात् कुल 46 गुणसूत्र होते हैं, जिनमें डी-एन-ए के लगभग तीन अरब क्षार-युग्म निहित रहते हैं। परम्परागत रूप से यह माना जाता रहा है कि ये तीस हजार से अधिक जीन्स को कूटबद्ध करते हैं। मानव जीनोम परियोजना, जो 1990 में आरम्भ होकर 2003 में पूर्ण हुई, ने इस पूरे अनुक्रम का मानचित्रण किया। ध्यातव्य है कि जीनोम का बहुत छोटा भाग ही प्रोटीन-कूटलेखन करता है; शेष नियामक अनुक्रम तथा अकूटलेखी क्षेत्र हैं। जीन्स ही शारीरिक गठन, क्षमता एवं रोग-प्रवृत्ति निर्धारित करते हैं।
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