Indian Polity - Constitution and Its Framing: 8 MCQs with Answers

Constitution and Its Framing - Indian Polity
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Indian Polity- Constitution and Its Framing

भारतीय संविधान के निर्माण से संबंधित प्रश्न — संविधान सभा, प्रारूप समिति एवं अन्य देशों से लिए गए स्रोत।

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Q1. भारत के संविधान निर्माण के दौरान संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?

Right Answer: डॉ. भीमराव अंबेडकर


Explanation:

भारतीय संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। इस समिति का गठन 29 अगस्त 1947 को हुआ था और इसमें कुल सात सदस्य थे, जिनमें अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर, एन. गोपालस्वामी आयंगर, के. एम. मुंशी, सैयद मोहम्मद सादुल्ला, एन. माधव राव तथा टी. टी. कृष्णमाचारी सम्मिलित थे। इसी समिति ने संविधान का मसौदा तैयार किया, इसीलिए डॉ. अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक कहा जाता है। संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे तथा संवैधानिक सलाहकार बी. एन. राव थे।

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Q2. भारतीय संविधान के निर्माण में कितना समय लगा था?

Right Answer: 2 वर्ष 11 माह 18 दिन


Explanation:

भारतीय संविधान के निर्माण में कुल 2 वर्ष 11 माह तथा 18 दिन का समय लगा था। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी और संविधान 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया। इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, क्योंकि 1930 में इसी दिन पूर्ण स्वराज्य दिवस मनाया गया था। संविधान सभा की कुल ग्यारह बैठकें हुईं और इसमें लगभग 165 दिनों तक कार्य चला। संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के अंतर्गत हुआ था और इसके अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा थे।

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Q3. भारतीय संविधान ने किस देश के संविधान से राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत ग्रहण किए हैं?

Right Answer: आयरलैंड


Explanation:

भारतीय संविधान ने राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत आयरलैंड के संविधान से ग्रहण किए हैं। इनका उल्लेख संविधान के भाग चार में अनुच्छेद 36 से 51 तक किया गया है। ये सिद्धांत न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, फिर भी देश के शासन में मौलिक माने जाते हैं और इनका उद्देश्य एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है। आयरलैंड से ही राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति तथा राज्यसभा में सदस्यों के नामांकन की व्यवस्था भी ली गई है। डॉ. अंबेडकर ने इन्हें भारतीय संविधान की अनूठी विशेषता बताया था।

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Q4. भारत में एकल नागरिकता की अवधारणा किस देश के संविधान से अपनाई गई है?

Right Answer: इंग्लैंड


Explanation:

भारत में एकल नागरिकता की अवधारणा इंग्लैंड अर्थात ब्रिटेन के संविधान से अपनाई गई है। इसका आशय यह है कि भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को केवल भारत की नागरिकता प्राप्त होती है, किसी राज्य की अलग नागरिकता नहीं मिलती। इससे राष्ट्रीय एकता एवं बंधुत्व की भावना सुदृढ़ होती है। इसके विपरीत संयुक्त राज्य अमेरिका में दोहरी नागरिकता की व्यवस्था है, जहाँ नागरिक संघ तथा राज्य दोनों का नागरिक होता है। ब्रिटेन से ही संसदीय शासन प्रणाली, विधि का शासन, विधायी प्रक्रिया तथा एकल कार्यपालिका की व्यवस्था भी ली गई है।

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Q5. संविधान सभा द्वारा भारत के राष्ट्रीय ध्वज का डिजाइन कब अपनाया गया था?

Right Answer: 22 जुलाई 1947


Explanation:

भारत के राष्ट्रीय ध्वज का वर्तमान स्वरूप संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को अपनाया था। इसकी अभिकल्पना पिंगली वेंकैया ने की थी। तिरंगे में सबसे ऊपर केसरिया रंग साहस एवं बलिदान का, मध्य में सफेद रंग शांति एवं सत्य का तथा नीचे हरा रंग समृद्धि एवं हरियाली का प्रतीक है। बीच में गहरे नीले रंग का चौबीस तीलियों वाला अशोक चक्र है, जो सारनाथ के अशोक स्तंभ से लिया गया है और निरंतर गतिशीलता का द्योतक है। ध्वज की लंबाई एवं चौड़ाई का अनुपात तीन और दो होता है।

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Q6. भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है, इसका उल्लेख किसमें किया गया है?

Right Answer: संविधान की प्रस्तावना


Explanation:

भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है, इसका उल्लेख संविधान की प्रस्तावना में किया गया है। पंथनिरपेक्ष शब्द को सन 1976 के बयालीसवें संविधान संशोधन द्वारा समाजवादी तथा अखंडता शब्दों के साथ प्रस्तावना में जोड़ा गया था। इसका आशय यह है कि राज्य का कोई अपना राजकीय धर्म नहीं है और वह सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टि रखता है। प्रस्तावना को संविधान की आत्मा तथा कुंजी कहा जाता है और यह भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य घोषित करती है। केशवानंद भारती वाद में इसे संविधान का भाग माना गया।

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Q7. भारतीय संविधान के अंतर्गत विधायी संप्रभुता किसके पास होती है?

Right Answer: संसद


Explanation:

भारतीय संविधान के अंतर्गत विधायी संप्रभुता संसद के पास होती है, जो राष्ट्रपति, लोकसभा तथा राज्यसभा से मिलकर बनती है। संसद संविधान के प्रावधानों के अधीन रहते हुए विधि निर्माण तथा संविधान संशोधन की शक्ति रखती है। यद्यपि ब्रिटेन की भाँति यह पूर्ण संप्रभु नहीं है, क्योंकि यहाँ लिखित संविधान, संघीय ढाँचा, मौलिक अधिकार तथा न्यायिक पुनरावलोकन की व्यवस्था इस पर अंकुश लगाती है। केशवानंद भारती वाद के अनुसार संसद संविधान के आधारभूत ढाँचे को नहीं बदल सकती। अंतिम संप्रभुता वस्तुतः भारत की जनता में निहित है, जैसा प्रस्तावना में कहा गया है।

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Q8. विभाजन-पूर्व भारत की संविधान सभा के कुल सदस्यों की मूल संख्या कितनी निर्धारित की गई थी?

Right Answer: 389


Explanation:

कैबिनेट मिशन योजना के अन्तर्गत संविधान सभा के कुल सदस्यों की मूल संख्या 389 निर्धारित की गई थी, जो विभाजन के पश्चात् घटकर 299 रह गई थी।
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Published: 28 July 2026 | Last Updated: 31 August 2026 |


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Deepak - Educational Content Creator

Written by Deepak

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I am an educational content creator dedicated to making learning simple, engaging, and accessible for students preparing for competitive exams. He specializes in creating high-quality study materials, including notes, multiple-choice questions (MCQs), previous year question papers, practice tests, and exam-oriented resources.

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