Economy and Banking - Statistics for Economics: 13 MCQs with Answers
Economy and Banking- Statistics for Economics
केन्द्रीय प्रवृत्ति, अपकिरण, सहसंबंध, सूचकांक तथा आर्थिक आँकड़ों के विश्लेषण पर बहुविकल्पीय प्रश्न।Your Progress
0%Q1. ........... से लेने पर माध्य विचलन का मान न्यूनतम होता है।
Right Answer: माध्यिका
माध्य विचलन किसी केन्द्रीय मान से लिए गए विचलनों के निरपेक्ष मानों का औसत होता है। इसका एक महत्त्वपूर्ण गणितीय गुण यह है कि जब विचलन माध्यिका से लिए जाएँ तो उनका योग तथा औसत दोनों न्यूनतम होते हैं। इसका कारण यह है कि माध्यिका आँकड़ों को दो बराबर भागों में बाँटती है, इसलिए उससे दोनों ओर के विचलन सन्तुलित रहते हैं। इसी कारण सैद्धान्तिक दृष्टि से माध्यिका से लिया गया माध्य विचलन सर्वोत्तम माना जाता है, यद्यपि व्यवहार में गणना की सुविधा के कारण प्रायः समान्तर माध्य से ही माध्य विचलन निकाला जाता है।
Q2. सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिये गये कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए :
सूची-I
(a) गुणोत्तर माध्य
(b) हरात्मक माध्य
(c) बहुलक
(d) माध्यिका
सूची-II
(i) औसत गति
(ii) गुणात्मक समंक
(iii) वृद्धि की दर
(iv) सबसे अधिक बार आने वाला मूल्य
Right Answer: (a-iii) (b-i) (c-iv) (d-ii)
गुणोत्तर माध्य अनुपातों तथा प्रतिशतों का औसत निकालने के लिए उपयुक्त है, इसलिए जनसंख्या अथवा उत्पादन की वृद्धि दर ज्ञात करने में इसी का प्रयोग होता है। हरात्मक माध्य व्युत्क्रमों के समान्तर माध्य का व्युत्क्रम है, अतः जब समान दूरी भिन्न गतियों से तय की गई हो तो औसत गति निकालने के लिए यही उपयुक्त होता है। बहुलक वह मान है जो श्रेणी में सबसे अधिक बार आता है। माध्यिका स्थिति पर आधारित माप है और इसे गुणात्मक समंकों में भी प्रयोग किया जा सकता है, जहाँ मानों को केवल क्रम में रखा जा सकता है।
Q3. यदि सभी अवलोकन 10 से बढ़ा दिये जायें, तो :
Right Answer: प्रमाप विचलन, माध्य विचलन व चतुर्थक विचलन अपरिवर्तित रहेंगे
अपकिरण के माप यह बताते हैं कि आँकड़े अपने केन्द्रीय मान के चारों ओर कितने फैले हुए हैं। यदि प्रत्येक अवलोकन में एक ही अचर संख्या जोड़ दी जाए तो सम्पूर्ण वितरण अपना आकार बनाए रखते हुए संख्या-रेखा पर उतना ही खिसक जाता है। इससे प्रत्येक मान तथा उसके माध्य के बीच की दूरी अपरिवर्तित रहती है। परिणामस्वरूप प्रमाप विचलन, माध्य विचलन तथा चतुर्थक विचलन तीनों ज्यों के त्यों बने रहते हैं। हाँ, माध्य, माध्यिका तथा बहुलक जैसे केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप उसी अचर संख्या से बढ़ जाते हैं।
Q4. 2020 में किसी कर्मचारी की मासिक आय 8,000 रुपये थी। उस वर्ष उपभोक्ता कीमत सूचकांक 160 था, जो 2024 में बढ़कर 200 हो गया। कीमत वृद्धि की पूर्ण क्षतिपूर्ति हेतु उसे कितना अतिरिक्त महंगाई भत्ता दिया जाना चाहिए ?
Right Answer: 2,000 रु०
कीमत वृद्धि की पूर्ण क्षतिपूर्ति का अर्थ है कि कर्मचारी की वास्तविक क्रय-शक्ति पहले जैसी बनी रहे। इसके लिए नई मौद्रिक आय को पुरानी आय तथा सूचकांकों के अनुपात के गुणनफल के बराबर होना चाहिए। यहाँ पुरानी आय 8,000 रुपये, आधार वर्ष का सूचकांक 160 तथा चालू वर्ष का सूचकांक 200 है। अतः आवश्यक नई आय 8,000 गुणा 200 बटा 160 अर्थात् 10,000 रुपये होगी। इसमें से मूल आय 8,000 रुपये घटाने पर अतिरिक्त महंगाई भत्ता 2,000 रुपये प्राप्त होता है, जो मूल वेतन का 25 प्रतिशत है।
Q5. यदि सभी पदों के मूल्य समान न हों, तो माध्य, गुणोत्तर माध्य तथा हरात्मक माध्य के बीच संबंध को दर्शाया जा सकता है :
Right Answer: X > GM > HM
किसी धनात्मक श्रेणी के तीन प्रमुख माध्यों के बीच एक निश्चित असमिका सदैव लागू होती है — समान्तर माध्य गुणोत्तर माध्य से और गुणोत्तर माध्य हरात्मक माध्य से बड़ा या बराबर होता है। तीनों तभी ठीक बराबर होते हैं जब श्रेणी के सभी पदों के मूल्य आपस में समान हों। प्रश्न में स्पष्ट कहा गया है कि सभी पदों के मूल्य समान नहीं हैं, अतः समता की स्थिति समाप्त हो जाती है और सम्बन्ध कठोर असमिका के रूप में लिखा जाएगा, अर्थात् समान्तर माध्य गुणोत्तर माध्य से तथा गुणोत्तर माध्य हरात्मक माध्य से निश्चित रूप से बड़ा होगा।
Q6. दो गुणों में सहसंबंध ज्ञात करने के लिए प्रयुक्त होता है :
Right Answer: स्पियरमैन का कोटि सहसंबंध गुणांक
जब दो विशेषताएँ गुणात्मक हों, जैसे सौन्दर्य, ईमानदारी अथवा बुद्धिमत्ता, तब उन्हें संख्या में मापा नहीं जा सकता, केवल क्रम अथवा कोटि दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में सहसंबंध ज्ञात करने के लिए स्पियरमैन का कोटि सहसंबंध गुणांक प्रयुक्त होता है, जो मूल मानों के स्थान पर कोटियों के अन्तर पर आधारित होता है। कार्ल पियर्सन का गुणांक तभी लागू होता है जब आँकड़े संख्यात्मक रूप में उपलब्ध हों। स्पियरमैन विधि चरम मानों से भी प्रभावित नहीं होती। इसके गुणांक का मान भी सदैव धन एक तथा ऋण एक के बीच रहता है।
Q7. यदि थोड़े से असममित बंटन में माध्य 20 तथा बहुलक 18 हो, तो माध्यिका होगी :
Right Answer: 19.33
थोड़े से असममित अर्थात् मध्यम रूप से विषम बंटन में तीनों केन्द्रीय प्रवृत्तियों के बीच कार्ल पियर्सन का आनुभविक सम्बन्ध लागू होता है, जिसके अनुसार बहुलक तीन गुणा माध्यिका में से दो गुणा माध्य घटाने पर प्राप्त होता है। इसी को माध्यिका के लिए हल करने पर माध्यिका बराबर दो गुणा माध्य जोड़ बहुलक को तीन से भाग देने पर मिलती है। यहाँ माध्य 20 तथा बहुलक 18 है, अतः दो गुणा 20 अर्थात् 40 में 18 जोड़ने पर 58 आता है और उसे तीन से भाग देने पर 19.33 प्राप्त होता है। इस प्रकार माध्यिका सदैव माध्य तथा बहुलक के बीच स्थित रहती है।
Q8. निम्न में से कौन - सा कथन r 2 के बारे में सही नहीं है ?
Right Answer: r 2 का मान +1 व − 1 के बीच रहता है।
सहसंबंध गुणांक के वर्ग को निश्चय गुणांक कहा जाता है और यह बताता है कि आश्रित चर के कुल विचरण का कितना भाग स्वतंत्र चर द्वारा समझाया जा सकता है, अर्थात् यह व्याख्येय विचरण तथा कुल विचरण का अनुपात है। इसमें से एक घटाने पर अनिश्चय गुणांक प्राप्त होता है, जो अस्पष्ट रह गए विचरण का भाग दर्शाता है। चौथा कथन गलत है, क्योंकि किसी संख्या का वर्ग कभी ऋणात्मक नहीं होता; अतः निश्चय गुणांक का मान सदैव शून्य तथा एक के बीच रहता है। धन एक और ऋण एक के बीच तो स्वयं सहसंबंध गुणांक का मान रहता है।
Q9. ‘से कम’ तथा ‘से अधिक’ ओजाइव वक्रों के कटान बिंदु से ............ का मूल्य प्राप्त होता है।
Right Answer: मध्यकता
संचयी बारम्बारता वक्र को ओजाइव कहा जाता है और इसे दो प्रकार से खींचा जाता है। ‘से कम’ ओजाइव में प्रत्येक वर्ग की ऊपरी सीमा के सामने उससे कम की संचयी बारम्बारता ली जाती है और वक्र ऊपर की ओर चढ़ता है। ‘से अधिक’ ओजाइव में निम्न सीमा के सामने उससे अधिक की संचयी बारम्बारता ली जाती है और वक्र नीचे की ओर उतरता है। जिस बिन्दु पर ये दोनों वक्र एक-दूसरे को काटते हैं, वहाँ से X-अक्ष पर डाला गया लम्ब मध्यका अर्थात् माध्यिका का मान देता है, क्योंकि उसी बिन्दु पर आधे प्रेक्षण नीचे और आधे ऊपर होते हैं।
Q10. कौन - सा कीमत सूचकांक समय उत्क्राम्यता व तत्व उत्क्राम्यता दोनों को संतुष्ट करता है ?
Right Answer: फिशर का सूचकांक
फिशर का सूचकांक लास्पेयर्स तथा पाशे सूचकांकों का गुणोत्तर माध्य होता है और इसी कारण यह दोनों की पक्षपात-प्रवृत्तियों को सन्तुलित कर देता है। लास्पेयर्स सूचकांक आधार वर्ष की मात्राओं को भार मानता है और मूल्यवृद्धि को अधिक आँकता है, जबकि पाशे सूचकांक चालू वर्ष की मात्राओं का उपयोग करता है और उसे कम आँकता है। केवल फिशर का सूचकांक ही समय उत्क्राम्यता तथा तत्व उत्क्राम्यता दोनों कसौटियों को संतुष्ट करता है, इसीलिए इसे आदर्श सूचकांक कहा जाता है। यह वृत्तीय कसौटी को अवश्य संतुष्ट नहीं करता।