Hindi Literature: 48 MCQs with Answers
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0%यहाँ हिंदी साहित्य (Hindi Literature) से संबंधित महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) दिए गए हैं, जिनमें गद्य, पद्य, कवि-लेखक परिचय, रचनाएँ, अलंकार, रस, छंद तथा आलोचना से जुड़े प्रश्न शामिल हैं। ये प्रश्न HTET PGT हिंदी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी हैं।
Q11. मीरा के काव्य के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?
Right Answer: मीरा के पदों में गुजराती भाषा का विशेष पुट है।
Explanation:
मीरा के काव्य की प्रमुख भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा मानी जाती है। उनके पदों में गुजराती का विशेष पुट होना उनका प्रमुख भाषागत लक्षण नहीं है।
उनके काव्य में विरह, प्रेम और कृष्ण-भक्ति प्रमुख हैं।
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Q12. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने परिमार्जित गद्य (खड़ी बोली) की प्रथम पुस्तक किसे माना है?
Right Answer: भाषा योगवासिष्ठ — रामप्रसाद ‘निरंजनी’
Explanation:
आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार रामप्रसाद ‘निरंजनी’ की ‘भाषा योगवासिष्ठ’ खड़ी बोली के परिमार्जित गद्य की प्रारंभिक महत्वपूर्ण पुस्तक मानी जाती है।
यह हिंदी गद्य के विकास के इतिहास में विशेष महत्त्व रखती है।
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Q13. सियारामशरण गुप्त के संबंध में असंगत विकल्प को चुनिए—
Right Answer: ‘उन्मुक्त’ काव्य में पाँच द्वीपों का वर्णन है।
Explanation:
सियारामशरण गुप्त की ‘मौर्य विजय’ और ‘उन्मुक्त’ उल्लेखनीय काव्य हैं। ‘उन्मुक्त’ में युद्ध और विनाश की पृष्ठभूमि दिखाई देती है। लेकिन पाँच द्वीपों का वर्णन ‘उन्मुक्त’ की विशेषता नहीं है। अतः (4) असंगत है।
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Q14. कबीर को ‘वाणी का डिक्टेटर’ किसने कहा है?
Right Answer: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
Explanation:
कबीर की निर्भीक, अक्खड़, प्रभावशाली और अधिकारपूर्ण वाणी को देखते हुए हजारी प्रसाद द्विवेदी ने उन्हें ‘वाणी का डिक्टेटर’ कहा है।
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Q15. “सघन कुंज छाया सुखद, शीतल सुरभि समीर।मन है जात अजौ वहै, वा जमुना के तीर।।”‘यमुना’ नदी को लक्ष्य करके कही गई उक्त पंक्तियाँ किस कवि की हैं?
Right Answer: बिहारी
Explanation:
ये पंक्तियाँ बिहारीलाल की हैं। बिहारी ने अपने दोहों में ब्रजभूमि, यमुना, प्रकृति तथा श्रृंगार के अत्यंत प्रभावशाली चित्र प्रस्तुत किए हैं।
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Q16. काव्य-पंक्तियों (सूची-I) को रीतिकालीन कवियों (सूची-II) के साथ सुमेलित कीजिए तथा उसके नीचे दिये गये कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए –
सूची-I :
(a) भाषा ब्रज-भाषा रुचिर, कहें सुमति सब कोइ। मिलें संस्कृत-फारिसिहुँ, सो अति प्रघट जु होइ।।
(b) ज्यों-ज्यों निहारिए नेरे है नैननि, त्यों-त्यों खरी निकरै सी निकाई।।
(c) सूनो कै परम पद, ऊनो कै अनंत मद, नूनो कै नदीस नद, इंदिरा झुरैपरी।
(d) जो या कंठाभरण को, कंठ करै चितलाय, सभा मध्य सोभा लहै, अलंकृती ठहराय।
सूची-II :
(i) देव
(ii) भिखारीदास
(iii) दूलह
(iv) मतिराम
कूट :
Right Answer: (a)-(ii), (b)-(iv), (c)-(i), (d)-(iii)
Explanation:
इन काव्य-पंक्तियों की शैली, शब्दावली और काव्यगत विशेषताओं के आधार पर क्रमशः भिखारीदास, मतिराम, देव और दूलह का मिलान होता है।
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Q17. “भाखा बोलि न जानहीं, जिनके कुल के दास।” उक्त पंक्ति के अनुसार रीतिकाल के कौन-से कवि ‘भाखा’ में रचना के कारण लज्जित और कुंठित थे?
Right Answer: केशव
Explanation:
रीतिकालीन कवि केशवदास संस्कृत की विद्वत् परंपरा से प्रभावित थे। ब्रजभाषा में रचना करने के कारण उनमें अपनी ‘भाखा’ के प्रति एक प्रकार की हीनभावना दिखाई देती है।
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Q18. “समय ही वह रंग है जो अनेक-अनेक रंगों में विभाजित होता है और पठन-पाठन प्रक्रिया द्वारा फिर एक हो जाता है।” उक्त पंक्तियों के रचयिता हैं—
Right Answer: कृष्णा सोबती
Explanation:
उक्त विचार कृष्णा सोबती की रचनात्मक दृष्टि और साहित्य संबंधी विचारों से संबंधित है। इसमें समय और साहित्य के संबंध को स्पष्ट किया गया है।
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Q19. भक्ति काव्य में किन कवियों ने अपने पदों की भाषा को ‘तमिल’ बताया है?
Right Answer: आलवार
Explanation:
आलवार दक्षिण भारत के वैष्णव भक्त कवि थे। उनकी रचनाओं की भाषा तमिल थी। उन्होंने विष्णु/कृष्ण की भक्ति में पदों की रचना की।
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Q20. “अपनी सर्वतोमुखी प्रतिभा के बल से एक ओर तो वे पद्याकर, द्विजदेव की परंपरा में दिखाई पड़ते थे, दूसरी ओर बंग देश के माइकेल और हेमचंद्र की श्रेणी में।” भारतेन्दु के संबंध में उक्त कथन किस आलोचक का है?
Right Answer: आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
Explanation:
भारतेन्दु हरिश्चंद्र की सर्वतोमुखी प्रतिभा और उनके साहित्यिक योगदान का मूल्यांकन करते हुए यह कथन आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने किया है।
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